Ayatul Kursi in Hindi (2022)

Ayatul Kursi in Hindi

आयतुल कुर्सी क़ुरआन -पाक की बहुत ही अजीमोशान आयत-ए- मुबारिका है जिसमे अल्लाह तआला का मौजूद होना ,ज़िंदा होना ,सुनना और देखने वाला होना ,वा हमेशा बाकी रहने को बयान किया गया हैं |आज के आर्टिकल में हमलोग पढ़ेंगे Ayatul kursi in hindi

अल्लाह सुब्हानहु व ताअला ने हमको ये तौफीक दी हैं कि आयतुल कुर्सी हिंदी में और इसकी फज़ीलत के बारे में आप लोगो को बताये।

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आयतुल कुर्सी जिसको की एक चैथाई कुरान कहा जाता है और इसी के साथ कहा जाता है की जो इंसान फजर की नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता है, उसके लिए जन्नत के दरवाजे खोल दिए जाते हैं|

आयतुल कुर्सी हिंदी में

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आयतुल कुर्सी हिंदी में

Ayatul Kursi in Hindi

बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम

  1. अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहू
  2. अल हय्युल क़य्यूम
  3. ला तअ’खुज़ुहू सिनतुव वला नौम
  4. लहू मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़
  5. मन ज़ल लज़ी यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इजनिह
  6. यअलमु मा बैना अयदी हिम वमा खल्फहुम
  7. वला युहीतूना बिशय इम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा..अ
  8. वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़
  9. वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा
  10. वहुवल अलिय्युल अज़ीम

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आयतुल कुर्सी हिंदी में तर्जुमा के साथ

आयतल कुर्सी ( Ayatul Kursi ) सूरह बक़रह की 255 की आयत है | आयतल कुर्सी की फ़ज़ीलत बहुत ही ज्यादा है उनमे से कुछ यहाँ बयान की गयी है,

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आयतुल कुर्सी हिंदी में तर्जुमा

इस आयत में अल्लाह तआला की तौहीद और कुछ अहम शिफात का जि़क्र है।

Ayatul kursi in hindi इस आयत में अल्लाह तआला की कुर्सी का भी जि़क्र आया है, जिसकी वजह से इस आयत को आयतुल कुर्सी कहा जाता है। आयतुल कुर्सी की फजीलत को बहुत सी हदीसो , और हदीस की किताबों मेंबयान किया गया हैं।

Ayatyk kursi in hindi tarmuja
आयतुल कुर्सी हिंदी में तर्जुमा के साथ

Ayatul kursi in hindi tarjuma ke sath

बिसमिल्ला हिर रहमानिर रहीम

  1. अल्लाह जिसके सिवा कोई माबूद नहीं
  2. वही हमेशा जिंदा और बाकी रहने वाला है
  3. न उसको ऊंघ आती है न नींद
  4. जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है
  5. कौन है जो बगैर उसकी इजाज़त के उसकी सिफारिश कर सके
  6. वो उसे भी जनता है जो मख्लूकात के सामने है और उसे भी जो उन से ओझल है
  7. बन्दे उसके इल्म का ज़रा भी इहाता नहीं कर सकते सिवाए उन बातों के इल्म के जो खुद अल्लाह देना चाहे
  8. उसकी ( हुकूमत ) की कुर्सी ज़मीन और असमान को घेरे हुए है
  9. ज़मीनों आसमान की हिफाज़त उसपर दुशवार नहीं
  10. वह बहुत बलंद और अज़ीम ज़ात है

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अयातुल कुर्सी की फजीलत के बारे में कुरान और हदीस की रोशनी में

आयतल कुर्सी की फज़ीलत सब से ज्यादा अज़मत वाली आयत

आयतुल कुर्सी की सब से बड़ी फ़ज़ीलत ये है की ये सब से अज़मत वाली आयत है इसकी अज़मत को बहुत ही ज्यादा बताया गया है

जो शख्स सुबह के वक्त आयतुल कुर्सी पढता है, तो उसने अपना दिन अल्लाह की दि हुई नेमतों का शुक्र अदा करके शुरू किया है. अगर यह आयत वह शाम को पढ़े तो उसने रात की दी हुई खुदा की नेमतों का शुक्र अदा कर दिया है।

आयतुल कुर्सी कुरान की अज़ीम आयत

आयतुल कुर्सी के बारे में हदीस में रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया और इस आयात को तमाम आयातो से अफजल फ़रमाया है।

हज़रत अबू हुरैरा र.अ. फरमाते हैं कि रसूल सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया : सूरह बकरा में एक आयत है जो तमाम कुरान की आयातों की सरदार है, जिस घर में पढ़ी जाती है शैतान वहां से निकल जाता है।

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जन्नत में दाखिल होने का तरीका

हज़रत अबु ओमामा अलबाहेली (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया, जो आदमी हर फजऱ् नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ ले, उसे जन्नत में जाने से कोई चीज़ नहीं रोकेगी, सिवाए मौत के।

Ayatul Kursi Arbic Image

Ayatul kursi Arbic
आयतुल कुर्सी अरबिक में

आयतुल कुर्सी अरबिक में

بِسۡمِ ٱللهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌ لَهُ

مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِي

يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا

خَلْفَهُمْ وَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاءَ

وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاو ;َاتِ وَالأَرْضَ وَلاَ يَئُودُهُ

حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

आयतुल कुर्सी चैथाई कुरान

हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने आयतुल कुर्सी को चैथाई कुरान कहा है। 

(मसनद अहमद 3/221)

शौतान व जिन्नात से हिफाज़त

हज़रत अबु हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि मैं रमज़ान में वसूल की गई ज़कात के माल पर पहरा दे रहा था, एक आने वाला आया और समेट समेट कर अपनी चादर में जमा करने लगा।

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हज़रत अबु हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने उसको एसा करने से बार बार मना फरमाया।

उस आने वाले ने कहा कि मुझे यह करने दो, मैं तुझे एसे कलेमात सिखाऊंगा कि रात को बिस्तर में जा कर उन को पढ़ लेगा तो अल्लाह की तरफ से तुझ पर हाफिज़ मुकरर्र कर दिया जायेगा और सुबह तक शैतान तेरे करीब भी न आ सकेगा और वह आयतुल कुर्सी है।

जो आदमी शाम को आयतुल कुर्सी पढ़ले वह सुबह तक और जो सुबह को पढ़़ले वह शाम तक महफूज़ हो जाता है। सुबह होने पर हज़रत अबु हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) ने नबी अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से इस वाकिये का जि़क्र किया

तो आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि खबीस ने यह बात बिल्कुल सच्ची कही है खुद झुठा है और शैतान है। (सही बुखारी)

ऐसे ही एक वाकिये का जिक्र हज़रत अबु अयूब अंसारी (रज़ियल्लाहु अन्हु) की हदीस की किताब में किया गया है।

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कहने का मक़सद ये है कि आयतल कुर्सी के जरिया जिन्नात व शैतान से हिफाज़त के बहुत से वाक़यात सहाबा के दरमियान पेश आए हैं।

(तफसीर इबने कसीर)

हज़रत अबु हुरैरा (रज़ियल्लाहु अन्हु) से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने इरशाद फरमाया जो आदमी सूरह अल मोमेनून को हामीम से एलैहिल मसीर तक और

आयतल कुर्सी को सुबह के वक्त पढ़ लेगा वह शाम तक अल्लाह तआला की हिफाज़त में रहेगा और जो शाम को पढ़ेगा उसकी सुबह तक हिफाज़त होगी।(तिर्मीज़ी)

Ayatul Kursi in Arabic and Hindi

Ayatul Kursi in Arabic and hindi
आयतुल कुर्सी अरबिक और हिंदी में

आयतुल कुर्सी अरबिक और हिंदी मे

بِسۡمِ ٱللهِ ٱلرَّحۡمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

बिस मिल्ला हिर रहमानिर रहीम

اللَّهُ لاَ إِلَهَ إِلاَّ هُوَ الْحَيُّ الْقَيُّومُ لاَ تَأْخُذُهُ سِنَةٌ وَلاَ نَوْمٌ لَهُ

अल्लाहु ला इलाहा इल्लाहू अल हय्युल क़य्यूम ला तअ’खुज़ुहू

सिनतुव वला नौम लहू

مَا فِي السَّمَاوَاتِ وَمَا فِي الأَرْضِ مَنْ ذَا الَّذِي

मा फिस सामावाति वमा फ़िल अर्ज़ मन ज़ल लज़ी

يَشْفَعُ عِنْدَهُ إِلاَّ بِإِذْنِهِ يَعْلَمُ مَا بَيْنَ أَيْدِيهِمْ وَمَا

यश फ़ऊ इन्दहू इल्ला बि इजनिह यअलमु मा बैना अयदी हिम वमा

خَلْفَهُمْ وَلاَ يُحِيطُونَ بِشَيْءٍ مِنْ عِلْمِهِ إِلاَّ بِمَا شَاءَ

खल्फहुम वला युहीतूना बिशय इम मिन इल्मिही इल्ला बिमा शा..अ

وَسِعَ كُرْسِيُّهُ السَّمَاو ;َاتِ وَالأَرْضَ وَلاَ يَئُودُهُ

वसिअ कुरसिय्यु हुस समावति वल अर्ज़ वला यऊ दुहू हिफ्ज़ुहुमा

حِفْظُهُمَا وَهُوَ الْعَلِيُّ الْعَظِيمُ

वहुवल अलिय्युल अज़ीम

Ayatul Kursi Hindi Tarjuma aur Tafseer

यहाँ पर हमने आयतुल कुर्सी का तफ़्सीर से तर्जुमा किया है

अल्लाह के सिवाए कोई माबूद नहीं है

आयतल कुर्सी के बारे में ‘अल्लाह, नहीं है कोई माबूद सिवाए अल्लाह के “ यही वह पैगाम है जिसकी दावत तमाम अम्बिया और रसूल ने दी, कि माबूदे हकीकी सिर्फ अल्लाह तबारक व तआला है, वही पैदा करने वाला, वही रिज़्क देने वाला और

वही अकेला इस पूरी दुनिया के निज़ाम को चलाने वाला है,उसका कोई शरीक नहीं है, हम सब उसके बन्दे हैं और हमें सिर्फ उसी की इबादत करनी चाहिए, वही मुश्किल कुशा, हाजत रवा और जरूरतों को पूरा करने वाला है। उसने इंसानों की हिदायत व रहनुमाई के लिए अम्बिया व रसूल भेजे।

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आखिर में तमाम नबियों के सरदार हज़रत मोहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम को क़यामत तक आने वाले तमाम इंसानों के लिए रहमतुल आलमीन बना कर भेजा।

वही हमेशा जिंदा और बाकी रहने वाला है

‘‘वह ज़िन्दा है, कायम है‘‘ ज़िन्दा यानी अल्लाह तबारक व तआला हमेशा ज़िन्दा रहने वाला है और मौत से बालातर है। ‘‘अल्लाह तआला के सिवा हर चीज हलाक और फना हो जाने वाली है।‘‘ ‘‘ कय्यूम ‘‘ मुबालगा का सेगा है जिसके मानी हैं वह ज़ात जो खुद अपने बल पर क़ायम और दूसरों के कियाम व बका का वास्ता और ज़रिया हो।

नोट– कय्यूम अल्लाह तआला की खास सिफा त है, जिसमें कोई मखलूक़ शरीक नहीं हो सकता क्योंकि जो चीजें खुद अपने वजूद व बका में किसी दूसरे की मोहताज हों वह किसी दूसरी चीज को क्या संभाल सकती हैं

इसलिए किसी इंसान को कय्यूम कहना जायज़ नहीं है। इसलिए अबदुल कय्यूम नामी आदमी को सिर्फ कय्यूम कह कर बुलाना गलत है।उसे पूरा यानि अब्दुल कय्यूम कहना चाहिए।

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जो कुछ आसमानों में है और जो कुछ ज़मीन में है सब उसी का है |

‘‘तमाम चीजें जो आसमानों या ज़मीनों में हैं वह सब अल्लाह तआला की ममलुक हैं‘‘ वह मुख्तार है जिसका मतलब है तमाम चीज़ें जो ज़मीन और आसमान में हैं सब अल्लाह की ही मिलकियत में हैं

मतलब सब चीज़ो पर अल्लाह का अख्तियार है तो वो जिस तरह चाहे उनमें तसर्रुफ़ करे।

कौन है जो बगैर उसकी इजाज़त के उसकी सिफारिश कर सके|

‘‘कौन है जो उसकी इज़ाजत के बेगैर सिफारिश करे‘‘ जब यह बात मालूम है कि अल्लाह तआला ही कायनात के मालिक है, कोई उनसे बड़ा और उनके ऊपर हाकिम नहीं है तो कोई उससे किसी काम के बारे में सवाल व जवाब करने का भी हकदार नहीं है|

वह जो हुकुम जारी फरमाएंगे उसमें किसी को किसी तरह की चू तक करने की गुंजाइश नहीं है। हां! यह हो सकता है कि कोई आदमी अल्लाह तबारक व तआला से किसी के लिए सिफारिश या शिफाअत कर सकता है

अल्लाह तआला लोगों के आगे व पीछे के तमाम हालात और वाकेआत को जानता है

‘‘अल्लाह तआला लोगों के आगे पीछे के तमाम हालात और वाकेआत को जानता है।‘ आगे और पीछे का यह मतलब हो सकता है कि उनके पैदा होने से पहले और पैदा होने के बाद के तमाम हालात और वाकेआत अल्लाह तआला के इल्म में हैं।वो सब के बारे में सब कुछ जानता है।

और इसका यह भी मतलब हो सकता है कि आगे से मुराद वह हालात हैं जो इंसान के लिए खुले हुए हैं और पीछे से मुराद उससे पोशिदा वाकेआत और हालात हों तो इसके माने यह होंगे की इंसान का इल्म तो बाज़ चीजों पर ही है.

और बाज चीज़ो पर पर नहीं है, कुछ चीज़ें उसके सामने खुली हुई हैं उनके बारे मैं उसे इल्म है और कुछ छुपी हुई, उनके बारे मैं उसे इल्म नहीं है , मगर अल्लाह तआला के सामने यह सब चीज़ें बराबर हैं, इसका इल्म उन सब चीज़ों पर बराबर है।

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अल्लाह तआला उन लोगों के आगे पीछे के तमाम हालात जानता है जो कोई और नहीं जान सकता।

बन्दे उसके इल्म का ज़रा भी इहाता नहीं कर सकते सिवाए उन बातों के इल्म के जो खुद अल्लाह देना चाहे)

‘‘इंसान और तमाम मखलूकात अल्लाह तआला के इल्म के किसी हिस्सा का इहाता नहीं कर सकते, मगर अल्लाह तआला ही खुद जिसको जितना हिस्सा इल्म इहाता करना चाहें सिर्फ इतना ही उसको इल्म हो सकता है।

‘‘ इस आयत में यह कहा गया है कि तमाम कायनात के ज़र्रे ज़र्रे का इल्म मुहीत सिर्फ अल्लाह तआला की खुसूसी सिफत है, इंसान या कोई मखलूक इसमें शरीक नहीं हो सकती”।

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उसकी ( हुकूमत ) की कुर्सी ज़मीन और असमान को घेरे हुए है |

‘‘उसकी कुर्सी इतनी बड़ी है कि जिसकी वुसअत के अंदर सातों आसमान और ज़मीन समाए हुए है।‘‘ अल्लाह तआला उठने बैठने और जगह या मकान से बालातर है, इस क़िस्म की आयत को अपने मामलात पर कयास न किया जाए, उसकी कैफियत व हकीकत का इदराक इंसानी अकल से बालातर है। अल्लामा इबने कसीर ने बरिवायत हज़रत अबुज़र गिफारी (रज़ियल्लाहु अन्हु) से नकल किया है कि उनहोंने हुजूर अकरम सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से दरयाफ्त किया कि कुर्सी कैसी है?

आप सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम ने फरमाया कसम है उस ज़ात की जिसके कब्ज़ा में मेरी जान है कि सातों आसमानों और ज़मीनों की मिसाल कुर्सी के मुकाबले में ऐसी है जैसे एक बड़े मैदान में अंगुश्तरी का हल्का (छल्ला)डाल दिया जाए।

बाज़ हादीस में भी है कि अर्श के सामने कुर्सी की मिसाल भी ऐसी है कि जैसे एक बड़े मैदान में अंगुशतरी का हलका(छल्ला).

हज़रत अबदुल्लाह बिन अब्बास (रज़ियल्लाहु अन्हु) फरमाते हैं कि सातों ज़मीनें और सातों आसमान अगर फैला दिया जाए तो भी कुर्सी के मुकाबले में एसे होंगे जैसे एक हलका (छल्ला) किसी चटियल मैदान में।

इबने जरीर की एक मरफू हदीस में है कि सातों आसमान कुर्सी में एसे ही हैं जैसे सात दिरहम ढ़ाल में (तफसीर इबने कसीर) बाज़ मुफस्सिरीन ने लिखा है|

उसकी कुर्सी इतनी बड़ी है कि उस में सातों ज़मीन और सातों आसमान समाये हुए हैं इस किस्म की आयत को इंसान अपने ऊपर कयास न करे क्यूंकि अल्लाह की कुदरत को समझ पाना इंसान की समझ से बाहर है |

ज़मीनों आसमान की हिफाज़त उसपर भारी नहीं |

अल्लाह तआला को इन दोनों अज़ीम मखलूकात यानी आसमान व ज़मीन की हिफाज़त कुछ भारी नहीं मालूम होती, क्योंकि इस कादिरे मुतलक की कुदरते कामला के सामने यह सब चीज़ें निहायत आसान हैं।

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वह बहुत बलंद और अज़ीम ज़ात है|

यानि वो आलीशान और अजीमो -शान है गुज़शता नौ जुमलों में अल्लाह तआला की ज़ात व सिफात के कालामात बयान किए गए हैं।

इनको समझने के बाद हर अकलमंद आदमी यही कहने पर मजबूर है कि हर इज्ज़त व अज़मत और बुलंदी व बरतरी का मुसतहिक वही पाक ज़ात है।

इन दस जुमलों में अल्लाह तआला की सिफाते कमाल और उसकी तौहीद का मज़मून वज़ाहत और तफसील के साथ आ गया।

हज़रते सय्यिदुना उबय्य बिन का’ब रदियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने फ़रमाया : ऐ अबू मुन्जिर -क्या

तुम्हें मालूम है कि कुरआने पाक की जो आयतें तुम्हें याद हैं उन मेँ कोनसी आयत अजीम है ?

मैंने अर्ज़ किया  – अल्लाहु ला इला-ह इल्लल्लाहु-वल हय्युल क़य्यूमु

फिर रसूलुल्लाह सल्लल्लाहो अलैहि व सल्लम ने मेरे सीने पर हाथ मारा और फ़रमाया -ऐ अबू मुन्सिर तुम्हें इल्म मुबारक हो ।

अल्लाह तआला हम सबको कुरान करीम समझ कर पढ़ने वाला और उसपर अमल करने वाला बनाए। अल्लाह तआला हम सबको शिर्क की तमाम शकलों से महफूज़ फरमाए अमीन ।

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जज़्ज़ाकल्लाह हो खैर

Ayatul Kursi in English

Ayatul Kursi in English
आयतुल कुर्सी इन इंग्लिश मै

Ayatul Kursi in English Text

BisMilla Hir Rahmanir Raheem

  1. Allahu La Ilaha Illa Hu
  2. Al Hayyul Qayyoom
  3. La Ta Khuzuhu Sinatuw Wala Naum
  4. Lahu Ma Fis Samawati Wama Fil Arz
  5. Man Zal Lazi Yashfau Indahu Illa Bi Iznih
  6. Ya Alamu Ma Baina Aideehim Wama Khalfahum
  7. Wala Yuheetoona Bishay’im Min Ilmihi Illa Bima Shaa…A
  8. Wasia Kursiy yuhus Samawati Wal Arz
  9. Wala ya ooduhu hifzuhuma
  10. Wahuwal aliyyul azeem

व अखिरू दावाना अलाह्म्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन

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