Khana Khane Ka Tarika: सुन्नत तरीका और दुआएं (हिंदी में)
Khana Khane Ka Tarika: सुन्नत तरीके से खाना खाने के फायदे, आदाब और मसनून दुआएं हिंदी तर्जुमे के साथ पढ़िए।

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खाना (Food) अल्लाह की बहुत बड़ी नेमत है। इस्लाम ने हमें ज़िन्दगी गुज़ारने का जो तरीका सिखाया है, उसमें खाना खाने के आदाब (Etiquettes) भी शामिल हैं।
अगर हम Khana Khane Ka Tarika सुन्नत के मुताबिक अपना लें, तो हमारा पेट भी भरेगा और सवाब भी मिलेगा। साथ ही, सुन्नत तरीके से खाने में सेहत के भी बेशुमार फायदे हैं।
इस आर्टिकल में हम खाना खाने का सुन्नत तरीका, दुआएं और ज़रूरी आदाब जानेंगे।
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खाना खाने की सुन्नतें (Sunnahs of Eating)
खाना खाने से पहले और दौरान इन सुन्नतों का ख्याल रखना चाहिए:
- दस्तरख्वान बिछाना: खाना ज़मीन पर दस्तरख्वान बिछाकर खाना सुन्नत है। इससे आजिज़ी (Humility) पैदा होती है।
- दोनों हाथ धोना: खाने से पहले दोनों हाथों को गट्टों (Wrists) तक धोना चाहिए और पोंछना नहीं चाहिए।
- बैठने का तरीका: सुन्नत तरीका यह है कि या तो उकड़ूँ बैठें (दोनों घुटने खड़े करके) या एक घुटना खड़ा रखें और दूसरे पर बैठें। टेक लगाकर खाना मकरूह है।
- दुआ पढ़ना: खाना शुरू करने से पहले दुआ पढ़ना।
- दाहिने हाथ से खाना: हमेशा दाहिने (Right) हाथ से खाएं। बाएं (Left) हाथ से खाना शैतान का तरीका है।
- तीन उंगलियों से खाना: अंगूठा और उसके पास की दो उंगलियों से खाना सुन्नत है।
- अपने सामने से खाना: बर्तन में अपनी तरफ से खाना चाहिए, बीच में से नहीं।
- बर्तन साफ़ करना: खाने के बाद बर्तन को उंगली से चाटकर साफ़ करना सुन्नत है।
- उंगलियां चाटना: खाने के बाद उंगलियों को चाटना चाहिए, इसमें बरकत होती है।
खाना खाने की दुआएं (Duas for Eating)
1. खाने से पहले की दुआ
खाना शुरू करते वक़्त यह पढ़ें:
बिस्मिल्लाह (अल्लाह के नाम से।)
2. अगर बिस्मिल्लाह भूल जाएं
अगर शुरू में दुआ पढ़ना भूल जाएं और बीच में याद आए तो यह पढ़ें:
बिस्मिल्लाहि अव्वलहू व आखिरहू (अल्लाह के नाम से, इसके शुरू में भी और आखिर में भी।)
3. खाने के बाद की दुआ
खाना खाने के बाद अल्लाह का शुक्र अदा करें:
अल्हम्दु लिल्लाहिल लज़ी अत-अमना व सकाना व जा-अलना मुस्लिमीन (सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें खिलाया, पिलाया और मुसलमान बनाया।)
खाना खाने के आदाब (Etiquettes of Eating)
- खाने में ऐब न निकालें: अगर खाना पसंद आए तो खा लें, वरना छोड़ दें। खाने की बुराई न करें।
- गर्म खाना न खाएं: बहुत ज़्यादा गर्म खाना न खाएं, इससे बरकत जाती रहती है।
- जूता उतार कर खाएं: इससे बदन को आराम मिलता है।
- खामोश न रहें: बिल्कुल खामोश होकर खाना (गैर- मुस्लिमों की तरह) मकरूह है। नेक बातें करना चाहिए।
- गिर जाए तो उठा लें: अगर निवाला गिर जाए तो उसे साफ़ करके खा लेना चाहिए, शैतान के लिए नहीं छोड़ना चाहिए।
सेहत और सुन्नत (Health Benefits)
सुन्नत तरीके से खाने के वैज्ञानिक फायदे भी हैं:
- ज़मीन पर बैठना: इससे पेट और पैरों की कसरत होती है और पाचन (Digestion) अच्छा होता है।
- हाथ से खाना: हाथ के स्पर्श से दिमाग को संकेत मिलता है जिससे पाचक रस (Digestive juices) निकलते हैं।
- आराम से खाना: चबा-चबा कर खाने से वजन नहीं बढ़ता और पेट की बीमारियां नहीं होतीं।
- कम खाना: हदीस में है कि पेट के तीन हिस्से करो - एक खाने के लिए, एक पानी के लिए और एक हवा के लिए।
खाना खाने का सही वक़्त (Best Time to Eat)
सेहतमंद रहने के लिए सिर्फ सही खाना ही नहीं, बल्कि सही वक़्त पर खाना भी ज़रूरी है।
- नाश्ता (Breakfast): सुबह का नाश्ता सबसे अहम है। इसे सुबह 7 से 8 बजे के बीच कर लेना चाहिए।
- दोपहर का खाना (Lunch): नाश्ते के 4-5 घंटे बाद, यानी 12 से 1 बजे के बीच दोपहर का खाना खाएं।
- रात का खाना (Dinner): सोने से कम से कम 2-3 घंटे पहले, यानी शाम 7 से 8 बजे तक रात का खाना खा लेना चाहिए। इससे खाना हज़म होने में आसानी होती है और पेट की बीमारियां नहीं होतीं।
पानी पीने की सुन्नतें (Sunnahs of Drinking Water)
खाने के साथ पानी पीने का भी तरीका है:
- दाहिने (Right) हाथ से पीना।
- बैठकर पीना।
- देखकर पीना।
- पीने से पहले ‘बिस्मिल्लाह’ और बाद में ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ कहना।
- तीन सांस में पीना।
पानी पीने के बाद की खास दुआ
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِیْ سَقَانَا عَذْبًا فُرَاتًا بِرَحْمَتِهٖ وَلَمْ یَجْعَلْهُ مِلْحًا اُجَاجًا بِذُنُوْبِنَا
हिंदी: अल्हम्दु लिल्लाहिल लज़ी सकाना अज़बन फुरातम बि-रह-मतिही व लम यज-अल्हु मिल्हन उजाजम बि-ज़ुनूबिना
तर्जुमा: सब तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने अपनी रहमत से हमें मीठा और प्यास बुझाने वाला पानी पिलाया और हमारे गुनाहों की वजह से उसे खारा और कड़वा नहीं बनाया।
दूध पीने की दुआ (Dua for Drinking Milk)
दूध पीने के बाद यह दुआ पढ़नी चाहिए:
اللَّهُمَّ بَارِكْ لَنَا فِيهِ وَزِدْنَا مِنْهُ
हिंदी: अल्लाहुम्मा बारिक लना फीहि व ज़िदना मिन्हु
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! हमारे लिए इसमें बरकत दे और हमें इससे ज़्यादा अता फरमा।
इफ्तार की दुआ (Iftar Dua)
रोज़ा खोलते वक़्त यह दुआ पढ़नी चाहिए:
اللَّهُمَّ إِنِّي لَكَ صُمْتُ وَبِكَ آمَنْتُ وَعَلَى رِزْقِكَ أَفْطَرْتُ
हिंदी: अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु व बिका आमन्तु व अला रिज़्क़िका अफ्तरतु
तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, तुझ पर ईमान लाया और तेरे दिए हुए रिज़्क़ से इफ्तार किया।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या कुर्सी-मेज़ पर बैठकर खाना जायज़ है?
जी हाँ, जायज़ है। लेकिन ज़मीन पर दस्तरख्वान बिछाकर खाना सुन्नत है और इसमें ज़्यादा आजिज़ी है। अगर कोई उज़्र (तकलीफ) हो तो कुर्सी पर खाने में कोई हर्ज नहीं।
Q. क्या बाएं हाथ (Left Hand) से खा सकते हैं?
नहीं, इस्लाम में बाएं हाथ से खाना-पीना मना है क्योंकि यह शैतान का तरीका है। सिवाय इसके कि दाहिने हाथ में कोई तकलीफ हो।
Q. खाने के बाद हाथ धोना ज़रूरी है?
जी हाँ, खाने के बाद हाथ धोना और कुल्ली करना सुन्नत है ताकि मुँह और हाथ साफ़ हो जाएं।
अल्लाह हमें सुन्नत तरीके से खाने-पीने और अपनी नेमतों का शुक्र अदा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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