Surah Lahab in Hindi (2022)

Surah Lahab in Hindi

सूरह लहब की पहली आयत में (तब्बत )लफ्ज़ आने की वजह से इसका नाम सूरह तब्बत रखा गया जिसका मतलब है तबाह होना ,हम आपको बताएँगे Surah Lahab in Hindi

इसकी दूसरी और तीसरी आयत में अबू लहब के बुरे हश्र के नतीजे को बताया गया है और चौथी और पांचवी आयत में अबू लहब की बीवी के इबरतनाक हसर को बताया गया है जो सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम से बैर में अपने शौहर का साथ देती थी।

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Surah Lahab in Hindi

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सुरह लहब हिंदी में सीखें

यहाँ पर हमने Surah Lahab in Hindi में बताई है। साथ हम ने ये कब नाज़िल हुई ये भी बताया है।

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम

1. तब्बत यदा अबी लहबिव वतब्ब

2. मा अगना अन्हु मलुहू वमा कसब

3. सयसला नारन ज़ात लहब

4. वम रअतुहू हम्मा लतल हतब

5. फिजीदिहा हब्लुम मिम मसद

Surah Lahab in Hindi tarjuma

शुरू अल्लाह के नाम से जो बहुत बड़ा मेहरबान व निहायत रहम वाला है।

1. अबू लहब के दोनों हाथ टूट जाएँ और वो हलाक हो जाये

2. न तो उसका माल उसके काम आया न तो उसकी कमाई

3. अब वो भड़कती आग में दाखिल होगा

4. और उसकी बीवी भी जो सर पर लकड़ियाँ लाद कर लती है

5. उसके गले में एक खूब बटी हुई रस्सी होगी

Surah Lahab in English

Surah Lahab in English
  1. Tab bat yadaa abee Lahabinw-wa tabb
  2. Maa aghna ‘anhu maaluhu wa ma kasab
  3. Sa yas laa naran zaata lahab
  4. Wam ra-atuhu hamma latal-hatab
  5. Fee jeediha hab lum mim-masad
  1. May the hands of Abu Lahab be ruined, and ruined, is he?
  2. His wealth will not avail him or that which he gained.
  3. He will [enter to] burn in a Fire of [blazing] flame
  4. And his wife [as well] – the carrier of firewood.
  5. Around her neck is a rope of [twisted] fiber.

Surah Lahab in Arabic

Surah Lahab in Arabic

Surah Lahab in Urdu

यहाँ पर हमने Tabatiyada Surah in Urdu में बताई है और साथ ही उर्दू में ही उसका तर्जुमा भी बताया है जिससे आप आसानी से समझ सके।

Surah Lahab in Urdu

Surah Lahab kab Naazil Hui

इस के मक्की होने में तो मुफ़स्सिरीन के दरमयान कोई इख़तिलाफ़ नहीं है, लेकिन ठीक ठीक ये बता पाना मुश्किल है कि ये मक्की दौर के किस ज़माने में ये नाज़िल हुई थी।

अलबत्ता अब्बू लहब का जो किरदार रसूल अल्लाह सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम और उनकी दावत-ए-हक़ के ख़िलाफ़ था इस को देखते हुए ये अंदाज़ा किया जा सकता है कि इस सूरा का नुज़ूल उस ज़माने में हुआ होगा

जब वो रसूल अल्लाह सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम की अदावत में हद से गुज़र गया था और इस का रवी्या इस्लाम की राह में एक बड़ी रुकावट बन रहा था।

बईद नहीं कि इस का नुज़ूल उस ज़माने में हुआ हो जब रसूल अल्लाह सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम और आपके के ख़ानदान वालों का मुक़ातआ कर के क़ुरैश के लोगों ने इन को शाब-ए-अबी तालिब में महसूर कर दिया था

और तन्हा अब्बू लहब ही ऐसा शख़्स था जिसने अपने ख़ानदान वालों को छोड़कर दुश्मनों का साथ दिया था। हमारे इस क़ियास की बिना ये है कि अब्बू लहब रसूल अल्लाह सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम का चचा था,

और भतीजे की ज़बान से चचा की खुल्लम खुल्ला मज़म्मत कराना उस वक़्त तक मुनासिब ना हो सकता था जब तक चचा की हद से गुज़री हुई ज़्यादतियां अलानिया सब के सामने ना आगई हो ।

इस से पहले अगर इब्तिदा में ही में ये सूरत नाज़िल कर दी गई होती तो लोग इस को अख़लाक़ी हैसियत से मायूब समझते कि भतीजा अपने चचा की इस तरह मज़म्मत करे.

Source : quran.com

अबू लहब कौन था

अबू लहब जिसका असल नाम “अब्दुल उज्ज़ा” था उसकी खूबसूरती की ही वजह से वो अबू लहब कहा जाता था मतलब एक ऐसा शख्स जिसका चेहरा आग के शोले की तरह दमकता है , अबू लहब की बीवी का नाम उम्मे जमीला था |

रसूल अल्लाह सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम के नबी बनाये जाने के बाद जब तक ये दोनों मियां बीवी जिंदा रहे नबी सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम को तकलीफ पहुँचाने में कोई कसर नहीं छोड़ी |

सूरह लहब किस वक़्त नाज़िल हुई

जब हुज़ूर सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम को अल्लाह तआला का हुक्म हुआ और उन्होंने पहली बार सफा पहाड़ी पर चढ़ कर मक्का वालों को जमा किया और उन के सामने इस्लाम की दावत को पेश कि तो

अबू लहब जो की उनके चचा थे ने कहा “ तुम हालाक हो जाओ क्या तुमने इसीलिए हम सबको जमा किया था ” उसी मौके पर सूरह लहब नाजिल हुई

अबू लहब की बीवी उम्मे जमीला भी सलाल्लाहो अलैहि वसल्लम को तकलीफ पहुँचाने में कभी पीछे नहीं रहती थी अबू लहब जो की मक्का के दौलत मंद लोगों में था

लेकिन उसकी कंजूसी का ये हाल था कि उसकी बीवी जमीला पीठ पर लकड़ियों का ढेर उठा कर लाती थी और बुनी हुई रस्सी से अपनी पीठ पर रख कर गर्दन से बाँध लिया करती थी

अबू लहब का अंजाम

अबू लहब का ये अंजाम हुआ कि बदर में हुई लड़ाई के एक हफ्ता बाद ही उसको एक ऐसी बीमारी लग गयी जो की फैलती थी जिस की वजह से वो मर गया और मरने के बाद उसकी लाश तीन दिन तक ऐसे ही पड़ी रही लोग इस डर से उसकी लाश को हाथ नहीं लगाते की कहीं ये बीमारी उन को न लग जाये।

जब तीन दिन गुज़र गए और बदबू बहुत ज्यादा ही बढ़ गयी तो किसी तरह उसके बेटो ने उस पर दूर से पानी बहा दिया और उसकी लाश को मक्का के ऊपरी हिस्से पर एक दीवार से लगा कर ऊपर से पत्थर से ढाक दिया

इसी वजह से अल्लाह ताला ने फ़रमाया कि “ उसका माल और उसकी कमाई कुछ काम न आयेगा ” ये तो अबू लहब का दुनिया का हाल है और आखिरत में जो होगा वो तो उससे कहीं ज्यादा दर्दनाक है |

अबू लहब की बीवी उम्मे जमीला का अंजाम क्या हुआ ?

अबू लहब की बीवी उम्मे जमीला का ये हाल हुआ कि वो अपनी पीठ पर लकड़ी उठा कर लाया करती थी उसी की रस्सी उसी की गर्दन का फंदा बन गयी और वो मर गयी सूरह लहब की आयत नंबर 4 और 5 ( हम्मा लतल हतब ) में इसी तरफ इशारा किया गया है।

व अखिरू दावाना अलाह्म्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन

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