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Surah Al Qadr in Hindi: सूरह क़द्र तर्जुमा और फ़ज़ीलत

Surah Al Qadr in Hindi (सूरह क़द्र): पढ़िए सूरह क़द्र का अरबी मतन, साफ़ हिंदी उच्चारण, तर्जुमा और शब-ए-क़द्र की अज़ीम फ़ज़ीलत। जानिए यह रात 1000 महीनों से बेहतर क्यों है।

Surah Al Qadr in Hindi: सूरह क़द्र तर्जुमा और फ़ज़ीलत

Table of Contents

सूरह क़द्र (Surah Al-Qadr) क़ुरान मजीद के 30वें पारे की 97वीं सूरह है। इसमें कुल 5 आयतें और 30 कलिमात हैं। इस मुबारक़ सूरह में अल्लाह तआला ने पूरी इंसानियत के लिए सबसे बड़ी रहमत यानी क़ुरान-ए-पाक के नाज़िल होने और साल की सबसे अफ़ज़ल रात “शब-ए-क़द्र” (लैलतुल क़द्र) की अज़ीम फ़ज़ीलत का ज़िक्र फ़रमाया है।

इस रात में की गई इबादत का सवाब 1000 महीनों (लगभग 83 साल 4 महीने) की मुसलसल इबादत से भी ज़्यादा होता है।

इस आर्टिकल में हम Surah Qadr in Hindi का अरबी मतन, आसान हिंदी उच्चारण (Transliteration), बा-मुहावरा तर्जुमा, तफ़सीर और शब-ए-क़द्र की दुआ तफ़सील से जानेंगे।

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1. Surah Qadr in Hindi (सूरह क़द्र हिंदी में पढ़ने का महत्व)

क़ुरान मजीद की 97वीं सूरह ‘सूरह अल-क़द्र’ हर मुसलमान के दिल में एक ख़ास मक़ाम रखती है। अक्सर लोग जो अरबी लिपि नहीं पढ़ पाते, वे Surah Qadr in Hindi में इसकी तिलावत, सही तलफ़्फ़ुज़ और इसका तर्जुमा तलाश करते हैं ताकि नमाज़ों और रमज़ान की मुबारक़ रातों में इसे समझकर पढ़ सकें।

इस सूरह को हिंदी में पढ़ने और याद करने का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि नमाज़ी को यह अहसास रहता है कि वह अपने रब के सामने किस अज़ीम रात और क़ुरान के नाज़िल होने की गवाही दे रहा है। जब बंदा समझकर पढ़ता है कि यह एक रात हज़ार महीनों से बेहतर है, तो उसकी नमाज़ में आजिज़ाना कैफियत और दिल का सुकून कई गुना बढ़ जाता है।

इस्लामी रिवायतों के मुताबिक़ नबी करीम (ﷺ) नमाज़-ए-वित्र और नफ़्ल नमाज़ों में सूरह क़द्र की तिलावत फ़रमाया करते थे। इसे रोज़ाना याद करके पढ़ना ईमान को ताज़ा रखने का बेहतरीन ज़रिया है।


2. सूरह क़द्र अरबी मतन (Arabic Text)

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

  1. إِنَّآ أَنزَلْنَـٰهُ فِى لَيْلَةِ ٱلْقَدْرِ
  2. وَمَآ أَدْرَىٰكَ مَا لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ
  3. لَيْلَةُ ٱلْقَدْرِ خَيْرٌۭ مِّنْ أَلْفِ شَهْرٍۢ
  4. تَنَزَّلُ ٱلْمَلَـٰٓئِكَةُ وَٱلرُّوحُ فِيهَا بِإِذْنِ رَبِّهِم مِّن كُلِّ أَمْرٍۢ
  5. سَلَـٰمٌ هِىَ حَتَّىٰ مَطْلَعِ ٱلْفَجْرِ

3. सूरह क़द्र हिंदी उच्चारण और तर्जुमा (Hindi Translation)

बिस्मिल्लाह हिर्रहमान निर्रहीम
(शुरू करता हूँ अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान और निहायत रहम वाला है)

1. इन्ना अनज़लनाहु फ़ी लैलतिल क़द्र
बेशक हमने इस (क़ुरान-ए-मजीद) को शब-ए-क़द्र (क़द्र वाली मुबारक़ रात) में नाज़िल फ़रमाया।

2. व मा अदराका मा लैलतुल क़द्र
और आपको क्या मालूम कि शब-ए-क़द्र क्या चीज़ है? (यानी इसकी बुज़ुर्गी और शान का क्या मक़ाम है?)

3. लैलतुल क़द्रि ख़ैरूम-मिन अल्फ़ि शहर
शब-ए-क़द्र (की इबादत और भलाई) हज़ार महीनों से भी बेहतर है।

4. तनज़्ज़लुल मलाइकतु वर-रूहू फ़ीहा बि-इज़्नि रब्बिहिम मिन कुल्लि अम्र
इस रात में फ़रिश्ते और रूह (हज़रत जिब्रील अलै.) अपने रब के हुक्म से हर अहम काम के फ़ैसले लेकर ज़मीन पर उतरते हैं।

5. सलामुन हिया हत्ता मतलइल फ़ज्र
यह रात सरापा सलामती और अमन है, फ़ज्र के तुलू होने (सुबह के उजाले) तक।
— (सूरह अल-क़द्र: 1-5)


4. सूरह क़द्र रोमन इंग्लिश में (Roman English)

जो लोग अरबी या देवनागरी लिपि नहीं पढ़ सकते, उनके लिए सूरह क़द्र का रोमन इंग्लिश उच्चारण:

  1. Innaa anzalnaahu fee lailatil qadr.
  2. Wa maa adraaka maa lailatul qadr.
  3. Lailatul qadri khairum min alfee shahr.
  4. Tanazzalul malaaa’ikatu war-roohu feehaa bi-izni rabbihim min kulli amr.
  5. Salaamun hiya hattaa matla’il fajr.

क़ुरान की तिलावत के हिसाब-किताब के लिए आप हमारे कुरान तिलावत ट्रैकर का भी इस्तेमाल कर सकते हैं।


5. शब-ए-क़द्र की अज़ीम फ़ज़ीलत और तफ़सीर

सूरह क़द्र की हर आयत अपने अंदर रूहानी पैग़ाम और हिकमत समेटे हुए है:

1. क़ुरान का नुज़ूल

अल्लाह तआला ने फ़रमाया कि क़ुरान शब-ए-क़द्र में उतारा गया। मुफ़स्सिरीन के मुताबिक़ इसका मतलब यह है कि लोह-ए-महफ़ूज़ से दुनिया वाले आसमान (बैतुल इज़्ज़त) पर पूरा क़ुरान इसी रात एक साथ उतारा गया। फिर उसके बाद 23 साल के अरसे में नबी करीम (ﷺ) पर ज़रूरत के मुताबिक़ थोड़ा-थोड़ा नाज़िल होता रहा।

2. एक रात की इबादत 83 साल से अफ़ज़ल

हज़ार महीनों का मतलब 83 साल और 4 महीने होते हैं। आम तौर पर एक इंसान की पूरी उम्र भी इतनी नहीं होती। अगर कोई खुश-नसीब इस रात में दो रकात नफ़्ल नमाज़ पढ़ता है, क़ुरान की तिलावत करता है या सदक़ा देता है, तो उसे 83 साल तक मुसलसल रोज़ाना वही अमल करने से भी ज़्यादा सवाब मिलता है।

3. फ़रिश्तों का ज़मीन पर हुजूम

इस रात हज़रत जिब्रील (अलै.) और बेशुमार फ़रिश्ते ज़मीन पर उतर आते हैं। वे हर उस बंदे को सलाम करते हैं और उसके लिए मग़फ़िरत की दुआ करते हैं जो अपने रब की याद, नमाज़ या तिलावत में मशग़ूल होता है।

4. तक़दीर के फ़ैसले

‘क़द्र’ का एक मतलब ‘तक़दीर और फ़ैसले’ का भी है। साल भर में आने वाले रिज़्क़, ज़िंदगी, मौत और आफ़तों के फ़ैसले फ़रिश्तों के सुपुर्द इसी रात किए जाते हैं।


6. शब-ए-क़द्र कब तलाश करें और इसकी मसनून दुआ

सहीह बुख़ारी की हदीस के मुताबिक़ नबी करीम (ﷺ) ने फ़रमाया:

“शब-ए-क़द्र को रमज़ान के आख़िरी अशरे (आख़िरी 10 दिनों) की ताक़ रातों (21वीं, 23वीं, 25वीं, 27वीं और 29वीं रात) में तलाश करो।”
— (सहीह बुख़ारी: 2017)

हज़रत आयशा सिद्दीक़ा (रज़ि.) ने रसूलुल्लाह (ﷺ) से पूछा: “या रसूलुल्लाह! अगर मुझे मालूम हो जाए कि कौन सी रात शब-ए-क़द्र है, तो मैं क्या दुआ माँगूँ?”

आप (ﷺ) ने फ़रमाया, यह दुआ मांगो:

اللَّهُمَّ إِنَّكَ عَفُوٌّ تُحِبُّ الْعَفْوَ فَاعْفُ عَنِّي

हिन्दी उच्चारण: “अल्लाहुम्मा इन्नका अफ़ुव्वुन तुहिब्बुल अफ़्वा फ़अफ़ु अन्नी”

हिन्दी तर्जुमा: “ऐ अल्लाह! तू बहुत माफ़ फ़रमाने वाला है, माफ़ करने को पसंद करता है, पस मुझे माफ़ फ़रमा दे।”
— (तिर्मिज़ी: 3513)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह क़द्र क़ुरान के किस पारे में है?
A.

सूरह क़द्र क़ुरान मजीद के 30वें पारे (अम्मा पारा) में है और यह क़ुरान की 97वीं सूरह है।

Q. सूरह क़द्र मक्की है या मदनी?
A.

जमहूर मुफ़स्सिरीन और मुहद्दिसीन के नज़दीक सूरह अल-क़द्र मक्का मुकर्रमा में नाज़िल हुई, यानी यह एक मक्की सूरह है।

Q. क्या शब-ए-क़द्र सिर्फ 27वीं रात को ही होती है?
A.

27वीं रात को अक्सर उलेमा बड़ी उम्मीद वाली रात मानते हैं, लेकिन हदीस के मुताबिक़ यह रमज़ान के आख़िरी अशरे की किसी भी ताक़ रात (21, 23, 25, 27 या 29) में हो सकती है। इसलिए पूरी 5 ताक़ रातों में इबादत करनी चाहिए।

Q. शब-ए-क़द्र में कौन-कौन से आमाल करने चाहिए?
A.

क़ज़ा नमाज़ें या नफ़्ल सलातुल तस्बीह पढ़ें, क़ुरान मजीद की तिलावत करें, कसरत से इस्तिग़फ़ार और शब-ए-क़द्र की मसनून दुआ पढ़ें, और अपने गुनाहों की रो-रोकर माफ़ी मांगें।

Q. सूरह क़द्र रोज़ाना पढ़ने की क्या फ़ज़ीलत है?
A.

सूरह क़द्र पढ़ने से दिल में क़ुरान और शब-ए-क़द्र की अज़मत पैदा होती है। नमाज़ों में इसे पढ़ना सुन्नत से साबित है और यह ईमान को ताज़ा करती है।

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नतीजा (Conclusion)

सूरह क़द्र हमें इस बात का अहसास दिलाती है कि अल्लाह तआला ने अपनी रहमत से हमारी मुफ़्तसर ज़िंदगी में भी बेशुमार सवाब कमाने का कितना बड़ा ज़रिया अता फ़रमाया है। रमज़ान के आख़िरी अशरे की रातों को सिर्फ सोने या बाज़ार में गुज़ारने के बजाय इबादत में लगाएं।

अल्लाह तआला हमें शब-ए-क़द्र की क़द्र करने और उसकी अज़ीम बरकतों को हासिल करने की तौफ़ीक़ अता फ़रमाए। आमीन।

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