Masnoon Duain in Hindi - रोज़मर्रा की ज़रूरी दुआएं (हिंदी और अरबी)
Masnoon Duain in Hindi: पढ़िए और याद कीजिये रोज़मर्रा की मसनून दुआएं। सफर की दुआ, सोने-जागने की दुआ, मस्जिद की दुआ और नमाज़ की दुआएं हिंदी तर्जुमे के साथ।

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मसनून दुआएं (Masnoon Duain) वो दुआएं हैं जो प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (ﷺ) ने अपनी उम्मत को सिखाई हैं और जो आप (ﷺ) रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में पढ़ा करते थे।
सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक, घर से निकलने से लेकर सफर तक, हर काम के लिए इस्लाम में दुआ मौजूद है। अगर हम इन दुआओं को अपनी आदत बना लें, तो हमारा हर काम इबादत बन जाएगा और अल्लाह की हिफाज़त में रहेगा।
इस आर्टिकल में हम रोज़मर्रा की कुछ अहम Masnoon Duain in Hindi तर्जुमे और वीडियो के साथ जानेंगे।
1. सफर की दुआ (Safar Ki Dua)
सफर पर जाने से पहले दुआ पढ़ना सुन्नत है। इससे सफर में अल्लाह की हिफाज़त रहती है। सफर की दुआ हिंदी, अरबी और तर्जुमे के साथ पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
Safar Ki Dua in Hindi | सफर की दुआ
2. दरूद शरीफ (Durood Sharif)
नमाज़ में पढ़ा जाने वाला दरूद-ए-इब्राहीमी सबसे अफ़ज़ल दरूद है। दरूद शरीफ हिंदी, अरबी और तर्जुमे के साथ पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
Darood Sharif in Hindi | दरूद शरीफ
3. आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi)
हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद और रात को सोते वक़्त आयतुल कुर्सी पढ़ने की बहुत फजीलत है। यह कुरान की सबसे अज़ीम आयत है।
Ayatul Kursi in Hindi | आयतुल कुर्सी तर्जुमा और फजीलत
4. 40 रब्बना दुआएं (40 Rabbana Duas)
कुरान की 40 मशहूर “रब्बना” दुआएं जो ‘ऐ हमारे रब’ से शुरू होती हैं। हर दुआ अरबी, हिंदी उच्चारण और तर्जुमे के साथ।
40 Rabbana Duas from Quran in Hindi
4. अत्तहिय्यात (Attahiyat)
नमाज़ के कायदे (बैठक) में अत्तहिय्यात पढ़ना वाजिब है। अत्तहिय्यात हिंदी, अरबी और तर्जुमे के साथ पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
Attahiyat in Hindi | अत्तहिय्यात
5. दुआ-ए-कुनूत (Dua e Qunoot)
ईशा की नमाज़ में वित्र की तीसरी रकअत में दुआ-ए-कुनूत पढ़ी जाती है। दुआ-ए-कुनूत हिंदी, अरबी और तर्जुमे के साथ पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
Dua e Qunoot in Hindi | दुआ-ए-कुनूत
6. अज़ान के बाद की दुआ (Azan Ke Baad Ki Dua)
अज़ान सुनने के बाद दुआ पढ़ने वाले के लिए नबी (ﷺ) की शफाअत वाजिब हो जाती है। अज़ान के बाद की दुआ पढ़ने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
Azan Ke Baad Ki Dua in Hindi | अज़ान के बाद की दुआ
7. खाना खाने की दुआ (Khana Khane Ki Dua)
खाना खाने से पहले और बाद की दुआएं और उनके आदाब जानने के लिए नीचे दिए गए लिंक पर क्लिक करें।
Khana Khane Ki Dua in Hindi | खाने की दुआ
8. सोने से पहले की दुआ (Sone Se Pahle Ki Dua)
रात को सोने से पहले यह दुआ पढ़ना सुन्नत है।
अल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु व अह्या
(ऐ अल्लाह! तेरे ही नाम से मैं मरता हूँ और जीता हूँ।)
9. सो कर उठने की दुआ (So Kar Uthne Ki Dua)
सुबह सो कर उठने के बाद यह दुआ पढ़ें:
अल्हम्दु लिल्लाहिल लज़ी अह्-याना बअ्दा मा अमातना व इलैहिन नुशूर
(सब तारीफें अल्लाह के लिए हैं जिसने हमें मारने (सुलाने) के बाद ज़िंदा किया (जगाया) और उसी की तरफ लौट कर जाना है।)
10. मस्जिद में दाखिल होने की दुआ (Masjid Me Dakhil Hone Ki Dua)
मस्जिद में दाखिल होते वक़्त दाहिना (Right) पैर पहले रखें और यह दुआ पढ़ें:
अल्लाहुम्माफ्-तह ली अब्वाबा रहमतिक
(ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी रहमत के दरवाज़े खोल दे।)
11. मस्जिद से निकलने की दुआ (Masjid Se Nikalne Ki Dua)
मस्जिद से निकलते वक़्त बायां (Left) पैर पहले निकालें और यह दुआ पढ़ें:
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्-अलुका मिन फज़लिक
(ऐ अल्लाह! मैं तुझसे तेरे फज़ल का सवाल करता हूँ।)
12. शीशा देखने की दुआ (Shisha Dekhne Ki Dua)
शीशा देखते वक़्त यह दुआ पढ़नी चाहिए:
अल्लाहुम्मा अन-त हस्सन-त खल्क़ी फ-हस्सिन खुलुक़ी
(ऐ अल्लाह! तूने मेरी सूरत अच्छी बनाई है, तो मेरी सीरत (अखलाक) भी अच्छी कर दे।)
13. किसी के एहसान का बदला देने की दुआ (Dua for a Favor)
जब कोई आपके साथ कोई नेकी, एहसान या भलाई करे, तो उसे शुक्रिया के तौर पर यह दुआ दें। हदीस में आता है कि जिसने यह दुआ दी, उसने बेहतरीन तरीके से शुक्रिया अदा किया।
जज़ाकल्लाहु खैरा
(अल्लाह आपको इसका बेहतरीन बदला दे।)
(जामिअत-तिर्मिज़ी: 2035)
14. नई चीज़ (गाड़ी, मोबाइल, कपड़े) की दुआ (New Car/Mobile/Clothes Dua)
जब कोई नई चीज़ (जैसे नई कार, बाइक, मोबाइल या कपड़े) खरीदें या पहनें तो यह दुआ पढ़ें:
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्-अलुका खैराहा व खैरा मा जुबिलत अलैहि, व अऊज़ु बिका मिन शर्रिहा व शर्रि मा जुबिलत अलैहि
(ऐ अल्लाह! मैं तुझसे इसकी भलाई मांगता हूँ और उस फितरत की भलाई जिस पर यह बनाई गई है। और मैं तेरी पनाह मांगता हूँ इसकी बुराई से और उस फितरत की बुराई से जिस पर यह बनाई गई है।)
15. घर से निकलने की दुआ (Ghar Se Nikalne Ki Dua)
घर से निकलते वक़्त यह दुआ पढ़ें, शैतान से हिफाज़त रहेगी और हर काम में आसानी होगी:
बिस्मिल्लाहि तवक्कलतु अलल्लाहि ला हौल व ला कुव्वत इल्ला बिल्लाह
(अल्लाह के नाम से, मैंने अल्लाह पर भरोसा किया, अल्लाह की मदद के बिना न गुनाहों से बचने की ताकत है और न नेकी करने की हिम्मत।)
एक और दुआ जो पढ़ सकते हैं:
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ुबिका अन अदिल्-ल अव उदल्-ल, अव अज़िल्-ल अव उज़ल्-ल, अव अज़लि-म अव उज़ल-म, अव अज-ह-ल अव युज-ह-ल अलैया
(ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ इस बात से कि मैं गुमराह होऊं या गुमराह किया जाऊं, मैं फिसल जाऊं या मुझे कोई फिसला दे, मैं ज़ुल्म करूं या मुझ पर ज़ुल्म किया जाए, मैं जहालत करूं या मेरे साथ जहालत का बर्ताव किया जाए।)
(अबू दाऊद, तिर्मिज़ी)
16. घर में दाखिल होने की दुआ (Ghar Me Dakhil Hone Ki Dua)
घर में दाखिल होते वक़्त सलाम करें और यह दुआ पढ़ें:
अल्लाहुम्मा इन्नी अस्-अलुका खैरल मौलजि व खैरल मखरजि
(ऐ अल्लाह! मैं तुझसे घर में दाखिल होने और निकलने की भलाई मांगता हूँ।)
17. छींक आने पर दुआ (Cheenk Ki Dua)
छींक आने वाला कहे: अल्हम्दुलिल्लाह (सब तारीफ अल्लाह के लिए है)।
सुनने वाला कहे: यर-हमुकल्लाह (अल्लाह तुम पर रहम करे)।
18. हदीस पढ़ने के बाद की दुआ (Hadith Padhne Ke Baad Ki Dua)
हदीस शरीफ पढ़ने या सुनने के बाद यह कहना चाहिए:
सदक़ा रसूलुल्लाहि सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम
(अल्लाह के रसूल (ﷺ) ने सच फरमाया।)
19. मजलिस के खात्मे की दुआ (Majlis Ke Khatme Ki Dua)
जब कोई मजलिस या सभा (Meeting/Gathering) खत्म हो, तो यह दुआ पढ़नी चाहिए। इसे कफ्फारा-ए-मजलिस भी कहते हैं:
सुब्हानकल्लाहुम्मा व बिहम्दिका, अश-हदु अल्ला इलाहा इल्ला अंता, अस्तग़फिरुका व अतूबु इलैक
(ऐ अल्लाह! तू पाक है और सब तारीफ तेरे ही लिए है। मैं गवाही देता हूँ कि तेरे सिवा कोई माबूद नहीं। मैं तुझसे माफी मांगता हूँ और तेरी तरफ तौबा करता हूँ।)
20. बाज़ार में दाखिल होने की दुआ (Bazaar Jane Ki Dua)
जब बाज़ार या मार्केट में दाखिल हों तो यह दुआ पढ़ें। हदीस में आता है कि जो यह दुआ पढ़ेगा, अल्लाह उसके लिए दस लाख नेकियाँ लिखेगा, उसके दस लाख गुनाह मिटा देगा, और उसके दस लाख दर्जे बुलंद करेगा।
ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्-दहू ला शरी-क लहू, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु, युहयी व युमीतु, व हु-व हय्युन ला यमूतु, बियदिहिल-खैरु, व हु-व अला कुल्लि शैइन क़दीर
(अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वह अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी की बादशाहत है और उसी के लिए सब तारीफ है। वही ज़िंदा करता है और वही मारता है। वह हमेशा ज़िंदा रहने वाला है, उसे कभी मौत नहीं आएगी। उसी के हाथ में सारी भलाई है और वह हर चीज़ पर क़ादिर है।)
21. बारिश के वक़्त की दुआ (Barish Ke Waqt Ki Dua)
जब बारिश हो रही हो, तो यह दुआ पढ़ना सुन्नत है:
अल्लाहुम्मा सय्यिबन नाफ़िअ
(ऐ अल्लाह! इसे नफा देने वाली बारिश बना।)
22. इफ्तार की दुआ (Iftar Ki Dua)
रोज़ा खोलते वक़्त यह दुआ पढ़नी चाहिए:
अल्लाहुम्मा इन्नी लका सुम्तु व बिका आमन्तु व अलैक तवक्कलतु व अला रिज़्क़िका अफ्तरतु
(ऐ अल्लाह! मैंने तेरे लिए रोज़ा रखा, और तुझ पर ईमान लाया, और तुझ पर भरोसा किया, और तेरे दिए हुए रिज़्क़ से इफ्तार किया।)
एक और दुआ जो हदीस से साबित है:
ज़हबज़-ज़मउ वब्तल्लतिल उरूक़ु व सबतल अजरु इन्शाअल्लाह
(प्यास बुझ गई, रगें तर हो गईं और अल्लाह ने चाहा तो सवाब पक्का हो गया।)
23. इंसाफ और मज़लूम की दुआ (Insaf Aur Mazloom Ki Dua)
जब किसी पर ज़ुल्म हो या वह इंसाफ का तलबगार हो, तो यह दुआ पढ़नी चाहिए। यह हज़रत नूह (अ.स.) की दुआ है जो उन्होंने अपनी कौम के खिलाफ अल्लाह से की थी:
रब्बि इन्न क़ौमी कज़्ज़बून, फफ्ताह बैनि व बैनहुम फत्-हंव-व नज्जिनी व मं-म’इ-य मिनल मु’मिनीन
(ऐ मेरे रब! बेशक मेरी कौम ने मुझे झुठला दिया है। पस तू मेरे और उनके दर्मियान एक वाजेह फैसला फरमा दे, और मुझे और मेरे साथ जो मोमिन हैं, उन्हें निजात दे।)
(सूरह अश-शुआरा: 117-118)
24. इल्म में इज़ाफ़े की दुआ (Ilm Me Izafe Ki Dua)
इल्म (Knowledge) हासिल करने और उसमें बढ़ोतरी के लिए यह कुरान की सबसे बेहतरीन दुआ है:
रब्बी ज़िदनी इल्मा
(ऐ मेरे रब! मेरे इल्म में इज़ाफ़ा फरमा।)
(सूरह ता-हा: 114)
25. दज्जाल के फितने से हिफाज़त की दुआ (Dajjal Se Hifazat Ki Dua)
दज्जाल का फितना दुनिया का सबसे बड़ा फितना होगा। इससे बचने के लिए नबी (ﷺ) ने दो तरीके बताए हैं:
- सूरह कहफ़ की पहली 10 आयतें याद करना: जो शख्स जुमा के दिन सूरह कहफ़ की पहली दस आयतें पढ़ेगा, वह दज्जाल के फितने से महफूज़ रहेगा।
- नमाज़ में दुआ पढ़ना: हर नमाज़ के आखिर में (अत्तहिय्यात और दरूद के बाद) सलाम फेरने से पहले यह दुआ पढ़ें:
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ुबिका मिन अज़ाबिल क़ब्र, व मिन अज़ाबि जहन्नम, व मिन फितनतिल मह्या वल ममात, व मिन शर्रि फितनतिल मसीहिद-दज्जाल
(ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ कब्र के अज़ाब से, और जहन्नम के अज़ाब से, और ज़िन्दगी और मौत के फितनों से, और मसीह दज्जाल के फितने के शर से।)
(सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम)
26. वालिदैन (माँ-बाप) के लिए मगफिरत की दुआ (Dua for Parents)
अपने वालिदैन (Parents) के लिए, चाहे वो हयात (ज़िंदा) हों या वफात पा चुके हों, यह कुरानी दुआ पढ़नी चाहिए:
रब्बिर हमहुमा कमा रब्बयानी सगीरा
(ऐ मेरे रब! इन दोनों (मेरे माँ-बाप) पर रहम फरमा, जैसा कि इन्होंने मुझे बचपन में (रहमत और शफकत के साथ) पाला था।)
(सूरह अल-इसरा: 24)
27. हर तरह की बुराई से हिफाज़त की दुआ (Protection From All Evil)
जो शख्स यह दुआ सुबह 3 मर्तबा और शाम को 3 मर्तबा पढ़ेगा, उसे कोई चीज़ नुकसान नहीं पहुँचाएगी और वह अचानक आने वाली मुसीबत से महफूज़ रहेगा।
बिस्मिल्लाहिल-लज़ी ला यदुर्रु म’अस्मिही शैउन फिल-अर्दि वला फिस-समा, व हुवस-समीउल-अलीम
(अल्लाह के नाम से, जिसके नाम के साथ ज़मीन और आसमान की कोई चीज़ नुकसान नहीं पहुँचा सकती, और वह सब कुछ सुनने वाला, सब कुछ जानने वाला है।)
(जामिअत-तिर्मिज़ी: 3388)
28. नया कपड़ा पहनने की दुआ (Naya Kapda Pahanne Ki Dua)
जब कोई नया कपड़ा पहनें तो यह दुआ पढ़ें। हदीस में है कि जो यह दुआ पढ़ेगा, उसके अगले-पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाएंगे।
अल्हम्दु लिल्लाहिल-लज़ी कसानी हाज़ा (अस्-सौब) व र-ज़-क़नीहि मिन गैरि हौलिन मिन्नी वला क़ुव्वह
(तमाम तारीफें उस अल्लाह के लिए हैं जिसने मुझे यह (कपड़ा) पहनाया और बगैर मेरी किसी ताकत और कोशिश के मुझे यह अता फरमाया।)
(अबू दाऊद: 4023)
29. क़र्ज़ से निजात की दुआ (Dua for Debt)
अगर किसी पर पहाड़ जितना भी क़र्ज़ हो, तो यह दुआ पढ़ने से अल्लाह उसके क़र्ज़ की अदायगी का इंतेज़ाम फरमा देता है।
अल्लाहुम्मक-फिनी बिहलालिक अन हरामिका, व अग्निनी बिफज़लिका अम्मन सिवाक
(ऐ अल्लाह! मेरे लिए अपनी हलाल चीज़ों को काफी कर दे और हराम से बचा, और अपने फज़ल से मुझे अपने सिवा सबसे बेनियाज़ (Independent) कर दे।)
(जामिअत-तिर्मिज़ी: 3563)
30. फ़िक्र और गम से निजात की दुआ (Dua for Anxiety & Sorrow)
नबी (ﷺ) अक्सर यह दुआ पढ़ा करते थे ताकि हर तरह की परेशानी, फ़िक्र, गम, सुस्ती और क़र्ज़ से महफूज़ रहें।
अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ुबिका मिनल-हम्मि वल-ह-ज़न, वल-अज्ज़ि वल-कसल, वल-बुख्लि वल-जुब्न, व द-लइद्-दैनि व ग-लबतिर-रिजाल
(ऐ अल्लाह! मैं तेरी पनाह मांगता हूँ फ़िक्र और गम से, बेबसी और सुस्ती से, कंजूसी और बुज़दिली से, और क़र्ज़ के बोझ और लोगों के गलबे (दबाव) से।)
(सहीह बुखारी: 2893)
31. गुस्से के वक़्त की दुआ (Gusse Ke Waqt Ki Dua)
जब गुस्सा आए तो उसे काबू करने के लिए यह दुआ पढ़नी चाहिए। हदीस में है कि गुस्सा शैतान की तरफ से होता है, और यह दुआ शैतान से अल्लाह की पनाह मांगने के लिए है।
अऊज़ु बिल्लाहि मिनश-शैतानिर-रजीम
(मैं अल्लाह की पनाह मांगता हूँ शैतान मरदूद से।)
(सहीह बुखारी, सहीह मुस्लिम)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. मसनून दुआएं किसे कहते हैं?
मसनून दुआएं वो दुआएं हैं जो कुरान और हदीस से साबित हैं और जिन्हें नबी करीम (ﷺ) अलग-अलग मौकों पर पढ़ा करते थे।
Q. क्या दुआ सिर्फ अरबी में पढ़ना ज़रूरी है?
नमाज़ के अंदर की दुआएं (जैसे अत्तहिय्यात, दरूद) अरबी में ही पढ़नी चाहिए। लेकिन नमाज़ के बाहर आप अपनी जुबान में भी दुआ मांग सकते हैं, हालांकि मसनून दुआओं को अरबी में पढ़ना अफ़ज़ल (बेहतर) है।
Q. सफर की दुआ कब पढ़नी चाहिए?
जब आप घर से निकलें और सवारी (गाड़ी, बस, ट्रेन, प्लेन) पर बैठ जाएं, तो सफर की दुआ पढ़नी चाहिए।
अल्लाह हमें इन मसनून दुआओं को याद करने और अपनी ज़िन्दगी में शामिल करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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