इस्लाम में कबीरा गुनाह और सग़ीरा गुनाह क्या है?

Sagira aur Kabira Gunah

इस्लाम में कबीरा गुनाह और सग़ीरा गुनाह क्या होता है आज के आर्टिकल में जानेंगे की कबीरा गुनाह और सग़ीरा गुनाह क्या है? हर गुनाह की दो किस्म है और दोनो किस्म के गुनाहों से तौबा करना लाजिम है। सग़ीरा गुनाह छोटे-छोटे गुनाह होते हैं जबकि कबीरा गुनाह बड़े-बड़े गुनाह होते हैं। तो इस आर्टिकल को पूरा आखिर तक पढ़े और समझने की कोशिश करें सग़ीरा गुनाह और कबीरा गुनाह क्या होते हैं।

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गुनाहे कबीरा के मुताल्लिक हदीस

” हज़रत अनस (रज़ी०)  से रिवायत है की रसूल-अल्लाह (स०अ०) से बड़े (कबीरा) गुनाहों के बारे में पूछा गया तो आप (स०अ०) ने फरमाया –अल्लाह के साथ किसी को शरीक करना, वालदेन (माँ बाप) की नाफ़रमानी करना, किसी की (नाहक़) जान लेना ,और झूठी गवाही देना ”

हज़रत अनस (रज़ी०)  से रिवायत है की रसूल-अल्लाह (स०अ०) से बड़े (कबीरा) गुनाहों के बारे में पूछा गया तो आप (स०अ०) ने फरमाया यक़ीनन कबीरा गुनाहों में से ये भी है की कोई अपने वालदेन (माँ बाप) पर लानत भेजे (लोगो ने पूछा) की या रसूल अल्लाह (स०अ०) कोई शख़्श अपने ही वालदेन (माँ बाप) पर लानत कैसे भेजेगा तो आप (स०अ०) ने फरमाया जब कोई शख्स दूसरो के वालिद को बुरा कहेगा तो दूसरा भी उसके वालिद और माँ को बुरा कहेगा (और इस तरह वो कबीरा गुनाह कर देगा)

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कबीरा गुनाह क्या है

इस्लाम में गुनाह कबीरा हर उस गुनाह को कहते है जिन की सज़ा जहन्नम है, यानि खुदा की तरफ से सजा तय हैं। जिनमें सबसे बड़ा गुनाह शिर्क है और इसके बाद के बड़े गुनाह में जादू करना, बिना वज़ह किसी का ख़ून करना, सूद (ब्याज) खाना, किसी यतीम (ओर्फन) का माल खा जाना।

चोरी, शराब, झूठी गवाही देना, झूठ बोलना, माँ-बाप को तकलीफ देना, किसी पर जुल्म करना, जुआ खेलना, अल्लाह की रहमत से मायुस होना, अल्लाह के अजाब से बेखौफ हो जाना, नाच देखना, औरतों को बेपर्दा घुमना, नाप-तौल में कमी करना, चुगली खाना, किसी की पीठ पीछे बुराई करना, मुसलमानों को आपस में लड़ाना, किसी की अमानत में ख़यानत करना, नमाज़, रोज़ा, हज व ज़कात आदि छोड़ देना, जीना करना ऐसे सैंकड़ों काम गुनाहे कबीरा में आते हैं जिनसे बचना हर मुसलमान औरत और मर्द पर फर्ज है।

आप सल्लल्लाहु अलैहे वसल्लम ने इरशाद फरमाया। जिन बातों से अल्लाह ने मन फरमाया दार असल वो सारे ही कबीरा गुनाह है” कबीरा गुनाहों की माफ़ी बग़ैर तौबा के नहीं है यानि अगर किसी ने जाने या अंजाने में कोई कबीरा गुनाह कर लिया है तो तौबा जरूर करनी चाहिए बिना तौबा के कबीरा गुनाहों की माफ़ी नहीं होती।

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कबीरा गुनाह ऐसे हैं जिन्का तल्लुक ज़बान से है

(1) शिर्क :- अल्लाह रब्बुल इज्ज़त के साथ किसी और को शरीक करना  (मसलन -अल्लाह के अलावा किसी को इबादत के लायक समझना),ये बहुत बड़ा गुनाह है,अगर कोई शख्स शिर्क पर मर गया तो वो कभी जन्नत में न जा सकेगा।

(2) झूठी गवाह देना: – कबीरा गुनाहों में से एक बड़ा गुनाह ये भी है कि किसी के माल या जमीन के लिए या किसी मुक़दमे में किसी ज़ालिम, न हक आदमी की तरह से सच पर परदा डालने के लिए जो गवाह है ये बहुत ही बड़ा गुनाह है और बिना तौबा वा अस्तगफार के अल्लाह के यहां इसकी माफ़ी नहीं है।

(3) नेक औरत के ख़िलाफ़ इलज़ाम लगाना :- किसी नेक औरत के ख़िलाफ़ झूठा ज़िना का इलज़ाम लगाना है गुनाह की बहुत ही सख़्त मज़म्मत की गई है और गुनाह की भी बिना तौबा के माफ़ी नहीं है।

(4) अमानत में ख़यानत करना – किसी ने  कोई चीज़ किसी शख्स के पास रखवाई हो और वो वापस न करे या इस्तमाल कर ले। 

(3) झूठी कसम खाना (यानी झूठ को सच बनने में या किसी के माल को बेइमानी के साथ हासिल करने के लिए कसम खाना।

(5) तकब्बुर करना यानी घमंड करना, एक हदीस का मफुम है के नबी करीम (स०अ०) ने इरशाद फरमाया – ज़र्रा बराबर भी तकब्बुर करने वाला जन्नत में न जा सकेगा।

(6) जादू टोना करना:- इस्लाम में जादू करना कबीरा गुनाह माना जाता हैं इस तरह का सिफली अमल कर के नुमाइश करना हराम है और कबीरा गुना है। कुछ लोग सिरफ एंटरटेनमेंट के लिए जादू सिखते है और देखते हैं इसका सीखना और इसे देख कर हैरानी होना , तजुब करना भी कबीरा गुनाह है। अगर ज़िंदगी में ये गुनाह हो चुके हैं तो अल्लाह के सामने तौबा करे और अपने गुनाहों की माफ़ी अपने रब से मांगे।

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कबीरा गुना ऐसे जो प्राइवेट पार्ट से रिलेटेड है


(1) जिना करना:- यानी किसी भी मर्द या औरत से नाजायज संबंध बनाना

कबीरा गुना ऐसे जो हाथों से रिलेटेड है


(1) बिना किसी वजह से किसी का कताल (हत्या) कर देना

(2) चोरी करना :- किसी का सामना उसकी इज्ज़त के बिना उठा लेना या चोरी कर लेना

(3) शराब पीना – नशा खोरी 

(4) जुवा खेलना – सट्टे लगाना 

कबीरा गुनाह ऐसा जिस्का तल्लुक़ जोड़ी (पैर) से है

कोई आदमी किसी जंग से ऐसी हलत में लौट आया की मुसलमान 2 काफिरों के मुकबले से, 10 मुसलमान 20 काफिरों के मुकबले से, 100 आदमियों से भाग कर लौट आए।

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गुना ऐसा जिस का तल्लुक़ जिस्म से है


मां बाप की नफरमणि करना तमं बड़े गुनाहों में से बड़ा गुनाह है अगर मां बाप खाने को मांगे जो उनको खाने को ना दें, उनके साथ मार पीट करे, उनको परशान करना ये सब के गुनाह काम में कबीरा है अल्लाह के यहाँ की माफ़ी नहीं है।

मां बाप की नाफरमानी करना बड़े गुनाह में से एक गुनाह है अगर मां-बाप खाने को मांगे और उनको खाने को ना दिया जाए या उनके साथ मारपीट करें या उनको परेशान करें यह सब कबीरा गुनाह होते हैं अल्लाह ताला या गुनाह माफ नहीं करेंगे जब तक आप अल्लाह ताला से तौबा वा अस्तगफार से माफ़ी ना मांगे।

एक रिवायत है के माँ – बाप को उफ़ भी न कहा करो,अगर माँ – बाप नाराज़ हों तो अल्लाह तआला भी नाराज़ होते हैं, इसीलिए इसकी फ़िक्र करना ज़रूरी है और अगर इस गुनाह में मुलौविस हैं तो उनकी खिदमत करके उनको रजी करें।

गुनाह सगीरा किसे कहते है ?

सगीरा गुनाह यानि छोटे गुनाह ये अल्लाह की रहमत है कि छोटे-छोटे गुनाह अच्छे आमाल, और इबादतों की बरक़त से माफ हो जाते हैं। यहां पर मैं कुछ गुनाहों के बारे में बताने जा रहा हूं।

  • किसी को गली देना
  • किसी को न हक परेशान करना
  • अपने से बड़े लोगो की इज्जत ना करना
  • किसी की बुरी बयान करना
  • किसी के दिल को दुखाना
  • मस्जिद में बात करना
  • पडोसियों को परेशान करना
  • मुंह से बुरी बात निकलना

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और बहुत से शूमार गुनाह है जिन से सब को बचने की कोशिश करनी चाहिए। जिन गुनाहों को आदमी बहुत ही छोटा समझौता है लेकिन अल्लाह के सामने वो बहुत ही बड़ा होता है। अल्लाह के रसूल ने फरमाया

मोमिन अपने गुनाहों को पहाड़ (पहाड़) की तरह समझौता है जो उसके सर ऊपर हो। और मुनाफिक अपने गुनाहों को बहुत कम समझता है मक्खी के बराबर जो फु देने से उठ जाएगा।

किसी भी गुनाह को छोटा नन्ही समझौता चाहिए बाल्की हर समय अपने अल्लाह का खुद अपने दिल में रखना चाहिए। तकि हर वो बात जो अल्लाह और उसके रसूल के खिलाफ हो उसे गुनाह मलूम हो।

अपने नफ्स को दो तरह के गुनाहों से पाक करने की कोशिश करनी चाहिए। कबीरा गुनाह से तौबा करने से सगीरा गुनाह भी माफ दिए जाते हैं। जैसा कि अल्लाह का इरशाद है – “जिन कबीरा गुनाहों से मना किया गया है तुम उन से तौबा करो तो हम तुम्हारे सारे गुना माफ कर देंगे”

गुनाहों की वज़ह से दुनिया में भी नुकसान

गुनाहों की वज़ह से आखिरत में सजा तो मिलते ही है पर दुनिया में भी नुकसान पहुंचते रहते हैं। रोज़ी कम हो जाना, उम्र घट जाना, शारीरिक कमजोरी आना, सेहत खराब रहना, इबादतों से महरुम हो जाना, लोगो की नजर में बेईज्ज़त होना, नेमतों का छिन जाना, लाइलाज बीमारियाँ होना, चेहरे से ईमान का नूर निकल जाने से चेहरा बेरौनक हो जाना। हर तरफ जिल्लत, रुसवाईयों का मिलना, मरते वक्त मुंह से कलमा न निकलना। ऐसे गुनाहो से बड़े – बड़े नुकसान हुआ करते है।

इबादतों से दुनियावी फायदे

इबादतों से आखिरत के फायदे तो हर शख्स जानता है। इसके साथ ही इबादतों की बरक़त से बहुत से दुनियावी फायदे भी हासिल होते है, जैसे रोज़ी बढना, माल, सामान, औलाद हर चीज़ में बरक़त होना, दुनियावी तक़लिफों और परेशानियों का दूर होना, बलाओं का टल जाना, दूसरों के दिलों में मोहब्बत पैदा होना, नूर ए ईमान से चेहरे का बारौनक हो जाना, बारिश होना, हर जगह इज्जत मिलना, फाक़ा से बचा रहना, तरक्की करना, बीमारियों से शिफा पाना, खुशियों और मसर्रतों के साथ जिन्दगी बसर करना।

अल्लाह से दुआ है कि हम सब को इन अहकाम पर अमल करने की तौफीक अता फरमाये और जिन कामों से बचने की ताकीद अल्लाह ने बताई है उनसे हमें बचने की हिदायत अता फरमाये।

अल्लाह रब्बुल इज्ज़त से दुआ है की इन सभी गुनाहों से हम सब की पूरी पूरी हिफाज़त फरमाए और ख़ुदा न खास्ता अगर गुनाह हो जाये तो तौबा की तौफीक अता फरमाए अमीन।

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