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जिन्नात से बचने का तरीका और हिफाज़त की दुआ (10 उपाय)

जिन्नात से बचने का तरीका और हिफाज़त की दुआ जानना चाहते हैं? कुरान से साबित 10 आसान उपाय जो आपको और आपके घर को जिन्नात के शर से बचाएंगे।

जिन्नात से बचने का तरीका और हिफाज़त की दुआ (10 उपाय)

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जिन्नात (Jinnat) अल्लाह की एक मखलूक हैं जिन्हें आग से पैदा किया गया है। वे हमारी ही दुनिया में रहते हैं, लेकिन हम उन्हें देख नहीं सकते। कुरान और हदीस से यह बात साबित है कि जिन्नात मौजूद हैं और वे इंसानों की ज़िन्दगी पर असर डाल सकते हैं।

कुछ जिन्नात नेक और मुसलमान होते हैं, जबकि कुछ बुरे और शैतान होते हैं जो इंसानों को परेशान करते हैं। इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि जिन्नात से बचने का तरीका क्या है और हम अपनी हिफाज़त कैसे कर सकते हैं।

जिन्नात क्यों और कैसे परेशान करते हैं?

बुरे जिन्नात कई वजहों से इंसानों को तंग करते हैं:

  • अनजाने में तकलीफ देना: जब कोई इंसान बिना ‘बिस्मिल्लाह’ पढ़े गर्म पानी फेंकता है या किसी सुराख़ में पेशाब करता है, तो हो सकता है कि वहां मौजूद जिन्नात को तकलीफ पहुंचे और वे बदला लेने की कोशिश करें।
  • गंदगी और नापाकी: जिन्नात और शैतान गंदी जगहों पर रहना पसंद करते हैं। जो लोग पाकी और सफाई का ख्याल नहीं रखते, वे आसानी से उनके असर में आ सकते हैं।
  • अल्लाह की याद से दूरी: जिस घर में नमाज़ और कुरान की तिलावत नहीं होती, वह घर शैतान के लिए आसान ठिकाना बन जाता है।
  • खुशबू या खूबसूरती: कभी-कभी जिन्नात किसी इंसान की खूबसूरती या खुशबू पर आशिक हो जाते हैं और उसे परेशान करने लगते हैं। इसीलिए औरतों को बिना ज़रूरत के तेज़ खुशबू लगाकर बाहर निकलने और बालों की नुमाइश करने से मना किया गया है।

Jinnat se Bachne ka Tarika: 10 आसान उपाय

कुरान और सुन्नत में हमें जिन्नात के शर से बचने के कई तरीके बताए गए हैं। यहाँ 10 सबसे आसान और असरदार तरीके दिए गए हैं:

  1. ‘बिस्मिल्लाह’ कहना: हर काम शुरू करने से पहले “बिस्मिल्लाह” पढ़ें। खाना खाने, पानी पीने, कपड़े पहनने या घर में दाखिल होने से पहले बिस्मिल्लाह कहने से शैतान उस काम में शामिल नहीं हो पाता।

  2. आयतल कुर्सी पढ़ना: यह कुरान की सबसे अज़ीम आयत है। जो शख्स हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद इसे पढ़ता है, वह अगली नमाज़ तक अल्लाह की हिफाज़त में रहता है। रात को सोने से पहले पढ़ने से अल्लाह एक फरिश्ता मुकर्रर कर देता है जो सुबह तक उसकी हिफाज़त करता है।

  3. सूरह बकरा की आखिरी दो आयतें: हदीस में आता है कि जो शख्स रात में सूरह बकरा की आखिरी दो आयतें (आमन-रसूलू…) पढ़ ले, तो वे उसके लिए काफी हो जाती हैं, यानी हर आफत और शर से उसकी हिफाज़त करती हैं।

  4. चार कुल: सूरह काफिरून, सूरह इखलास, सूरह फलक और सूरह नास (चारों कुल) बेहतरीन हिफाज़ती दुआएं हैं। सुबह और शाम 3-3 बार सूरह इखलास, फलक और नास पढ़ना हर तरह के जादू, नज़र-ए-बद और जिन्नात से बचाता है।

  5. घर में दाखिल होने की दुआ: घर में दाखिल होते वक़्त “बिस्मिल्लाह” कहें और घर वालों को सलाम करें। इससे शैतान घर में दाखिल नहीं हो पाता।

  6. बैतुल खला (Toilet) की दुआ: टॉयलेट जिन्नात के रहने की जगहों में से है। अंदर जाने से पहले यह दुआ पढ़ें: “अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ुबिका मिनल खुबुसि वल खबाइस”

  7. पाकी और सफाई: हमेशा पाक-साफ रहें और अपने घर को भी साफ-सुथरा रखें।

  8. अकेलेपन से बचना: रात के वक़्त वीरान और सुनसान जगहों पर अकेले जाने से बचें।

  9. अल्लाह का ज़िक्र: सुबह-शाम अल्लाह का ज़िक्र और मसनून दुआओं का اہتمام करें।

  10. सूरह बकरा की तिलावत: हदीस में है कि जिस घर में सूरह बकरा पढ़ी जाती है, शैतान वहां से भाग जाता है।

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जिन्नात से हिफाज़त की ख़ास दुआएं

इन दुआओं को अपनी आदत बना लें:

أَعُوذُ بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّاتِ مِنْ شَرِّ مَا خَلَقَ तर्जुमा: मैं अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह मांगता हूँ, उसकी मखलूक के शर से।

जो शख्स सुबह और शाम 3 बार यह दुआ पढ़ेगा, उसे कोई चीज़ नुक़सान नहीं पहुंचाएगी।

रुक्या करने का तरीका (Ruqyah Shariah)

रुक्या (Ruqyah) का मतलब है कुरान की आयतों और हदीस में बताई गई दुआओं के ज़रिए अल्लाह से शिफा (Healing) मांगना। यह जादू, नज़र-ए-बद और जिन्नात के असर का सबसे बेहतरीन और सुन्नत इलाज है।

अहम नोट: रुक्या सिर्फ वही जायज़ है जो शरीयत के मुताबिक हो (Ruqyah Shariah)। इसमें कोई शिर्किया कलिमात या गैर-इस्लामी तरीका नहीं होना चाहिए।

खुद पर रुक्या करने का तरीका (Self-Ruqyah)

आप अपना इलाज खुद कर सकते हैं। यह सबसे बेहतर तरीका है:

  1. वुज़ू करें: सबसे पहले अच्छी तरह वुज़ू कर लें।
  2. दुआ की नियत: दिल में अल्लाह से शिफा की नियत करें।
  3. तिलावत: इन सूरतों को पढ़ें:
    • सूरह फातिहा (3 या 7 बार)
    • आयतुल कुर्सी (1 बार)
    • सूरह बकरा की आखिरी 2 आयतें (1 बार)
    • चारों कुल (सूरह काफिरून, इखलास, फलक, नास) (3-3 बार)
  4. दम करना (Blowing): तिलावत के बाद अपने दोनों हाथों पर फूँकें (दम करें) और फिर अपने सर से लेकर पाँव तक पूरे जिस्म पर फेर लें। जहाँ दर्द या तकलीफ हो, वहां खास तौर पर हाथ फेरें।
  5. पानी पर दम: आप इन आयतों को पानी पर पढ़कर दम कर सकते हैं और उस पानी को पी सकते हैं या घर में छिड़क सकते हैं (सिवाय टॉयलेट के)।

किसी और पर रुक्या करना

अगर कोई दूसरा शख्स बीमार है, तो आप उस पर भी इसी तरह रुक्या कर सकते हैं। तिलावत के बाद मरीज़ पर फूँक दें या अपने हाथ पर फूँक कर उसके जिस्म पर फेर दें।

इन बातों से बचें:

  • ढोंगी आमिलों और जादूगरों के पास जाने से बचें।
  • ऐसे तावीज़ इस्तेमाल न करें जिनमें कुरान के अलावा कुछ और लिखा हो।
  • इलाज सिर्फ अल्लाह से मांगें, किसी मज़ार या पीर से नहीं।

घर से जिन्नात भगाने का तरीका

अगर आपको लगता है कि आपके घर में जिन्नात का असर है या अजीब हरकतें महसूस होती हैं, तो घबराएं नहीं। हदीस में इसके लिए भी बेहतरीन उपाय बताए गए हैं:

  1. सूरह बकरा की तिलावत: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “अपने घरों को कब्रिस्तान न बनाओ, बेशक शैतान उस घर से भाग जाता है जिसमें सूरह बकरा पढ़ी जाती है।” (सहीह मुस्लिम) कोशिश करें कि हर 3 दिन में कम से कम एक बार घर में पूरी सूरह बकरा पढ़ी जाए या उसकी रिकॉर्डिंग चलाई जाए।

  2. अज़ान देना: हदीस में आता है कि जब अज़ान दी जाती है, तो शैतान हवा खारिज करता हुआ भागता है। अगर घर में डर महसूस हो, तो ऊँची आवाज़ में अज़ान दें।

  3. तस्वीरें और कुत्ते हटाना: जिस घर में जानदार की तस्वीरें (Photos/Statues) या कुत्ता होता है, वहां रहमत के फरिश्ते नहीं आते। और जहाँ फरिश्ते नहीं होते, वहां शैतान आसानी से आ जाते हैं।

  4. घर में दाखिल होते वक़्त सलाम: जब भी घर में दाखिल हों, तो सलाम करें और बिस्मिल्लाह पढ़ें। हदीस के मुताबिक, जिस घर में दाखिल होते वक़्त अल्लाह का नाम लिया जाता है, शैतान कहता है कि “यहाँ हमारे लिए रात गुज़ारने की जगह नहीं।”

  5. नमाज़ और कुरान: जिस घर में नमाज़ पढ़ी जाती है और कुरान की तिलावत होती है, वो घर जिन्नात और शैतानों से महफूज़ रहता है। अपने घर को इबादत से आबाद रखें।

बच्चों को जिन्नात से बचाने की दुआ

बच्चे मासूम होते हैं और उन पर बुरी नज़र और शैतानी असर जल्दी हो सकता है। नबी करीम (ﷺ) अपने नवासे हज़रत हसन और हुसैन (रज़ि.) को इन कलिमात के ज़रिए अल्लाह की पनाह में देते थे।

आप भी अपने बच्चों पर सुबह-शाम और सोने से पहले यह दुआ पढ़कर दम करें:

أُعِيذُكُمَا بِكَلِمَاتِ اللَّهِ التَّامَّةِ مِنْ كُلِّ شَيْطَانٍ وَهَامَّةٍ وَمِنْ كُلِّ عَيْنٍ لاَمَّةٍ तर्जुमा: मैं तुम दोनों को अल्लाह के कामिल कलिमात की पनाह में देता हूँ, हर शैतान से, हर ज़हरीले जानवर से और हर नुकसान पहुँचाने वाली (बुरी) नज़र से।

नोट:

  • अगर एक लड़का है तो “उईज़ुका” (أُعِيذُكَ) कहें।
  • अगर एक लड़की है तो “उईज़ुकि” (أُعِيذُكِ) कहें।
  • अगर दो बच्चे हैं तो “उईज़ुकुमा” (أُعِيذُكُمَا) कहें।
  • अगर दो से ज़्यादा बच्चे हैं तो “उईज़ुकुम” (أُعِيذُكُمْ) कहें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या जिन्नात हमें नज़र आ सकते हैं?
A.

आम तौर पर इंसान जिन्नात को उनकी असली शक्ल में नहीं देख सकते। हाँ, वे किसी इंसान या जानवर की शक्ल में नज़र आ सकते हैं।

Q. क्या सारे जिन्नात बुरे होते हैं?
A.

नहीं, इंसानों की तरह जिन्नात में भी अच्छे (मुसलमान) और बुरे (काफिर, शैतान) होते हैं। नेक जिन्नात किसी को बिना वजह परेशान नहीं करते।

Q. अगर किसी पर जिन्नात का असर हो तो क्या करें?
A.

अगर किसी पर जिन्नात का असर हो, तो किसी मुत्तकी और सही अकीदे वाले आलिम से रुक्या (कुरानी आयतों से इलाज) करवाना चाहिए। जादू-टोना करने वालों और ढोंगी आमिलों से बचना चाहिए।

Q. क्या जिन्नात इंसान को मार सकते हैं?
A.

अल्लाह की इजाज़त के बिना कोई किसी को नुकसान नहीं पहुँचा सकता, यहाँ तक कि मार भी नहीं सकता। हालांकि, बुरे जिन्नात तकलीफ पहुँचा सकते हैं, बीमार कर सकते हैं या डरा सकते हैं, लेकिन मौत और ज़िन्दगी सिर्फ अल्लाह के हाथ में है। जो इंसान अल्लाह की हिफाज़त में रहता है (नमाज़, कुरान और दुआओं के ज़रिए), उसे कोई मखलूक नुकसान नहीं पहुँचा सकती।


नतीजा (Conclusion)

जिन्नात का वजूद एक हकीकत है, लेकिन उनसे डरने या वहम में पड़ने की ज़रूरत नहीं है। अल्लाह ने हमें कुरान और सुन्नत में हिफाज़त के बेहतरीन तरीके बताए हैं।

जो इंसान नमाज़, कुरान और मसनून दुआओं का पाबंद होता है, अल्लाह उसे हर तरह के शर और शैतानी ताकतों से महफूज़ रखता है।

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