Surah Baqarah Last 2 Ayat in Hindi: सूरह बकरा की आखिरी 2 आयतें
Surah Baqarah Last 2 Ayat: रात को सोने से पहले सूरह बकरा की आखिरी 2 आयतें पढ़ना काफी हो जाता है। जानिए इनका हिंदी तर्जुमा और फजीलत।

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सूरह बकरा (Surah Baqarah) कुरान की सबसे बड़ी सूरह है। इसकी आखिरी 2 आयतें (285 और 286) बहुत ही खास हैं। ये आयतें नबी करीम (ﷺ) को मेराज की रात तोहफे में मिली थीं।
हदीस में है: “जो शख्स रात को सूरह बकरा की आखिरी दो आयतें पढ़ ले, वो उसके लिए (हर बुराई से बचने के लिए) काफी हो जाएंगी।” (बुखारी)
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Surah Baqarah First 5 Ayat in Hindi
सूरह बकरा की शुरुआती 5 आयतें हिदायत और कामयाबी की कुंजी हैं।
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
अलिफ़-लाम-मीम।
(अलिफ़-लाम-मीम)ज़ालिकल-किताबु ला रैबा फीह, हुदल-लिल-मुत्तक़ीन।
(यह वो किताब है जिसमें कोई शक नहीं, परहेज़गारों (डरने वालों) के लिए हिदायत है।)अल्लज़ीना युअ्मिनूना बिल-गैबि व युक़ीमूनस-सलाता व मिम्मा रज़क़नाहुम युनफ़िक़ून।
(जो गैब (अनदेखी चीज़ों) पर ईमान लाते हैं और नमाज़ कायम करते हैं और जो कुछ हमने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते हैं।)वल्लज़ीना युअ्मिनूना बिमा उनज़िला इलौका व मा उनज़िला मिन क़ब्लिक, व बिल-आख़िरति हुम यूक़िनून।
(और जो ईमान लाते हैं उस पर जो आपकी तरफ नाज़िल किया गया और जो आपसे पहले नाज़िल किया गया, और वो आखिरत पर यकीन रखते हैं।)उलाइका अला हुदम-मिर-रब्बिहिम व उलाइका हुमुल-मुफ़लिहून।
(यही लोग अपने रब की तरफ से हिदायत पर हैं और यही लोग कामयाब होने वाले हैं।)
Surah Baqarah Last 2 Ayat in Hindi (Transliteration & Translation)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
आमनर-रसूलु बिमा उनज़िला इलैहि मिर-रब्बिही वल-मुअ्मिनून, कुल्लुन आमना बिल्लाहि व मला-इ-कतिही व कुतुबिही व रुसुलिह, ला नुफर्रिकु बैना अहदिम-मिर-रुसुलिह, व क़ालू समिअ्ना व अतअ्ना गुफरानका रब्बना व इलैकल-मसीर।
(रसूल उस पर ईमान लाए जो उनके रब की तरफ से उन पर नाज़िल किया गया और मोमिन भी, सब अल्लाह पर और उसके फरिश्तों पर और उसकी किताबों पर और उसके रसूलों पर ईमान लाए, (वो कहते हैं) हम उसके रसूलों में से किसी में फर्क नहीं करते, और उन्होंने कहा: हमने सुना और हमने माना, ऐ हमारे रब! हम तेरी बख्शिश (चाहते हैं) और तेरी ही तरफ लौटना है।)ला युकल्लिफुल्लाहु नफ्सन इल्ला वुस-अहा, लहा मा कसबत व अलैहा मक्तसबत, रब्बना ला तु-आख़िज़ना इन-नसीना औ अख़-तअ्ना, रब्बना व ला तहमिल अलैना इसरन कमा हमल्तहू अलल-लज़ीना मिन क़ब्लिना, रब्बना व ला तुहम्मिलना मा ला ताक़ता लना बिह, वअ्फु अन्ना, वगफिर लना, वरहमना, अनता मौलाना फनसुरना अलल-क़ौमिल-काफिरीन।
(अल्लाह किसी जान पर उसकी ताकत से ज्यादा बोझ नहीं डालता, उसने जो नेकी कमाई उसका फायदा उसी को है और जो बुराई कमाई उसका वबाल उसी पर है। ऐ हमारे रब! अगर हम भूल जाएं या चूक जाएं तो हमारी पकड़ न फरमा। ऐ हमारे रब! और हम पर भारी बोझ न डाल जैसा तूने हमसे पहले लोगों पर डाला था। ऐ हमारे रब! और हमसे वो बोझ न उठावा जिसकी हमें ताकत नहीं, और हमें माफ़ कर दे, और हमें बख्श दे, और हम पर रहम फरमा, तू ही हमारा मौला (मालिक) है, सो काफिर कौम के मुकाबले में हमारी मदद फरमा।)
फजीलत और फायदे
- हिफाज़त: रात को पढ़ने से शैतान और बलाओं से हिफाज़त रहती है।
- काफी होना: हदीस के मुताबिक यह रात भर की इबादत और हिफाज़त के लिए काफी है।
- दुआ: इसमें दुनिया और आखिरत की बेहतरीन दुआएं मांगी गई हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या इसे बिना वुज़ू पढ़ सकते हैं?
अगर ज़बानी याद है तो बिना वुज़ू पढ़ सकते हैं (बिस्तर पर लेटे हुए)। लेकिन कुरान को हाथ लगाने के लिए वुज़ू ज़रूरी है।
Q. क्या यह आयतें घर से शैतान को भगाती हैं?
जी हाँ, हदीस में है कि जिस घर में सूरह बकरा पढ़ी जाए, वहां से शैतान भाग जाता है।
नतीजा (Conclusion):
सूरह बकरा की ये आखिरी दो आयतें अल्लाह का बहुत बड़ा इनाम हैं। इन्हें याद कर लें और रोज़ाना रात को सोने से पहले पढ़ने का मामूल बनाएं।
अल्लाह हमें कुरान से जुड़ने की तौफीक दे। आमीन।





