इस्लाम में हर रिश्ते के कुछ न कुछ हक़ और हुक़ूक़ होते है जिनको पूरा करने का हमे हुक्म दिया गया है और उनका अहतराम भू बताया गया है उनमे एक ये भी है Islam Me Damad Ke Hukuk Sasural Per.
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“रसूल सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम का इरशाद है”-
कोई बंदा उस वक्त उस वक्त तक सच्चा ईमान वाला नहीं हो सकता जब तक कि वह अपने भाई के लिए वही पसंद ना करें जो अपने लिए पसंद करता है
यकीनन आप पसंद करेंगे कि आपका ससुराल आपके साथ या आपके बेटे का ससुराल उसके साथ अच्छा सलूक करें और नीचे लिखी हुई बातें को पेश करें लेकिन क्या आप भी अपनेदामाद के साथ उसी तरह पेश आएंगे ?
सास और ससुर का मुंतखब बेटा
दमाद चूकी सिर्फ कराबतदर नहीं बल्कि सास और ससुर के लिए ऐसे बेटे की हैसियत रखता है जिसे उन्होंने बेटी का शरीके जिंदगी मुंतखाब किया।
दमाद की खूबियों को तस्लीम करना
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सास और ससुर को अपने दामाद के साथ सफ़कत और मोहब्बत का सुलूक करना चाहिए और उसकी खूबियों को मानना चाहिए क्योंकि यह उनकी बेटी की खुशियों का बेहतरीन तरीका है।
हमारे यहां अक्सर यह होता है कि जब बेटी को ससुराल से कोई शिकायत होती है तो अपने मां बाप को बताती है उसके मां बाप बेटी को समझाने के बजाय बेटी की हिमायत करते हैं और दामाद की मुखालफत करते हैं इस तरह मामला तूल पकड़ जाता है और ज्यादातर बार छोटी-छोटी शिकायतें घर को उजाड़ने का सबब बन जाती है, मां-बाप छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज करने या हिकमत से काम लेने के बजाय और भड़काने का काम कर देते है जबकि वह मामले को सुलझाने में अहम किरदार निभा सकते हैं।
दामाद से अपनी खिदमत करवाने से गुरेज करें क्योंकि उस पर यह हक उसके अपने हकीकी वालिदैन का है दामाद अपनी मर्जी से ऐसा कर सकता है और ऐसा करना भी चाहिए बशर्ते कि उसके अपने वालिदैन के हुकूक जाया ना हो रहे हो
दामाद के वालेदैन और रिश्तेदार का एहतराम करना चाहिए
दामाद को उसके अपने वालेदैन और रिश्तेदार के हुकूक अदा करने की याद दिलानी चाहिए।
बेटी को दामाद के हर जायज और नेक काम में मददगार और एतात पर उतरना चाहिए।
दमाद के अखलाक में ऐब तलाश करना बेटी को उसके खिलाफ भड़काना, उसके घरेलू मामलों या उससे मुतालिक हुक़ूक़ की अदायगी में बेजा दखलअंदाजी करना, दामाद को वालेदैन या करीबी रिश्तेदार से भड़काने वाली बात कहना बहुत ही बुरा काम है लिहाजा इससे बचना चाहिए
Very nice aap