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Rasool Allah Ki Nasihat: 5 कीमती नसीहतें जो ज़िन्दगी बदल दें
Rasool Allah Ki Nasihat: नबी करीम (ﷺ) की वो 5 नसीहतें जो दुनिया और आखिरत की कामयाबी की चाबी हैं। हराम से बचना, रज़ा बिल कज़ा और पड़ोसियों के हुकूक।

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कामयाबी के लिए Rasool Allah Ki Nasihat (रसूल अल्लाह की नसीहत) हमारी ज़िन्दगी की रहनुमाई के लिए बहुत ज़रूरी है।
हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) से रिवायत है कि एक बार रसूल अल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: “कौन है जो मुझसे चंद नसीहतें सीखे ताकि खुद उन पर अमल करे और दूसरों तक भी पहुंचाए?” हज़रत अबू हुरैरा (रज़ि.) ने कहा: “या रसूल अल्लाह! मैं तैयार हूँ।”
फिर आप (ﷺ) ने उनका हाथ पकड़ा और ये 5 कीमती नसीहतें गिनवाईं:
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1. हराम से बचो (Avoid Haram)
नसीहत: “शरीयत की हराम की हुई चीज़ों से खुद को बचाओ, तो तुम सबसे ज़्यादा इबादत गुज़ार बंदे बन जाओगे।”
मतलब: सिर्फ नमाज़-रोज़ा काफी नहीं है। अगर आप हराम कमाई, झूठ, गीबत और बद-नज़री से बचते हैं, तो यह अल्लाह के नज़दीक बहुत बड़ी इबादत है। गुनाह छोड़ना नेकी करने से ज़्यादा मुश्किल और अहम है।
2. अल्लाह की तकसीम पर राज़ी रहो (Be Content)
नसीहत: “अल्लाह की तकसीम (किस्मत) पर दिल-ओ-जान से राज़ी हो जाओ, तो सबसे ज़्यादा गनी (मालदार) हो जाओगे।”
मतलब: जो मिला है उस पर शुक्र करो और दूसरों से हसद (Jealousy) न करो। असली अमीरी दिल का सुकून है, न कि बैंक बैलेंस।
3. पड़ोसियों के साथ अच्छा सुलूक (Good to Neighbors)
नसीहत: “अपने हमसायों (पड़ोसियों) के साथ अच्छे बर्ताव का मामला करो, तो कामिल मोमिन बन जाओगे।”
मतलब: इस्लाम में पड़ोसी का बहुत बड़ा हक़ है। चाहे वो अमीर हो या गरीब, मुस्लिम हो या गैर-मुस्लिम, उसे तकलीफ न दें और उसकी मदद करें।
4. दूसरों के लिए वही चाहो जो अपने लिए चाहते हो
नसीहत: “दूसरों के लिए वही चीज़ पसंद करो जो अपने लिए करते हो, तो (पक्के) मुसलमान बन जाओगे।”
मतलब: अगर आप चाहते हैं कि लोग आपकी इज़्ज़त करें, तो आप भी उनकी इज़्ज़त करें। अगर आप चाहते हैं कि आपको धोखा न मिले, तो आप भी किसी को धोखा न दें।
5. ज़्यादा हँसने से बचो (Avoid Excessive Laughter)
नसीहत: “ज़्यादा (फिज़ूल बातों पर) खिलखिला कर हँसने से बचो, क्योंकि ज़्यादा हँसना दिल को मुर्दा कर देता है।”
मतलब: मुस्कुराना सुन्नत है, लेकिन हर वक़्त ठहाके लगाना और बेफिक्र रहना इंसान को आखिरत से गाफिल कर देता है। संजीदगी मोमिन की शान है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या हँसना मना है?
नहीं, मुस्कुराना तो नबी (ﷺ) की सुन्नत है। मना उस हँसी से किया गया है जो गफलत, मज़ाक उड़ाने या बेहयाई की वजह से हो और जिसमें इंसान अल्लाह को भूल जाए।
Q. सबसे बड़ा इबादत गुज़ार कौन है?
हदीस के मुताबिक, जो शख्स हराम कामों (गुनाहों) से बचता है, वह सबसे बड़ा इबादत गुज़ार है। क्योंकि नेकी करना आसान है, लेकिन गुनाह छोड़ने के लिए नफ़्स से लड़ना पड़ता है।
नतीजा (Conclusion)
ये 5 नसीहतें (Rasool Allah Ki Nasihat) देखने में छोटी हैं लेकिन इनमें पूरी ज़िन्दगी का निचोड़ है। अगर हम सिर्फ इन पर अमल कर लें, तो हमारी दुनिया और आखिरत दोनों संवर जाएगी।
अल्लाह हमें इन नसीहतों पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।





