Mozo Par Masah Karne Ka Tareeqa

Mozo Par Masah Karne Ka Tareeqa

जैसा की ठण्ड का मौसम आ रहा है तो बहुत से लोगो को वज़ू के दौरान पैर धोने में परेशानी होती है जैसे अगर कोई बुजुर्ग है या फिर किसी को कोई बीमारी है या फिर कुछ और परेशानी है तो इस्लाम में इसके लिए मसह का हुक्म दिया गया है। आज हम बताने जा रहे है Mozo Par Masah Karne Ka Tareeqa क्या है और इस्लाम में इसका क्या हुक्म है।

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इसमें कोई फ़र्क़ नहीं जैसे मोज़ों पर मसह औरतों के लिए भी जाइज़ है लेकिन जिस पर ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो चाहे औरत हो या मर्द वह मोज़ों पर मसह नहीं कर सकता है।

मसह करने के लिये कुछ शर्ते बताई गई हैं जो इस तरह हैं।

  • मसह करने के लिए मोज़े ऐसे होने चाहिए कि जिससे टख़ने छिप जायें इससे ज़्यादा होने की ज़रूरत नहीं और अगर थोड़ा कम हों तब भी मसह हो जायेगा है लेकिन एड़ी नहीं खुलनी चाहिये।
  • मोज़ा ऐसा होना चाहिए की वो पाँव से चिपका रहे ताकि उसको पहन कर आसानी से चला फिरा जा सके।
  • मसह के लिए मोज़ा चमड़े का होना चाहिये अगर सिर्फ़ तला चमड़े का हो और बाक़ी किसी और मोटी चीज़ का जैसे रैकसीन वग़ैरा तब भी मसह के लिए सही है।
  • आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले मोज़े सूती, ऊनी या नायलान के बने होते है , उनको उतार कर पाँव धोना फ़र्ज़ है क्युकी ऐसे मोज़ो पर मसह जायज़ नहीं है।
  • मोज़ा अगर वुज़ू कर के पहना हो तो ठीक है अगर बे वुज़ू पहना तो मसह जाइज़ नहीं होता है।
  • जिस पर ग़ुस्ल फ़र्ज़ हो और उसके लिये तयम्मुम किया और वुज़ू करके मोज़ा पहना तो मसह कर सकता है मगर जब जनाबत का तयम्मुम जाता रहा तो अब मसह जाइज़ नहीं।
  • मोज़ों पर मसह करने की मुद्दत (Duration) यानी मसह कब तक चलता है तो मुक़ीम (रहने वाला) के लिये एक दिन और एक रात और मुसाफि़र के लिये तीन दिन और तीन रातें रहती है।
  • मोज़ा पहनने के बाद पहली बार जो हदस (यानि वह अमल जिससे वुज़ू ज़रूरी हो जाता है) हुआ उस वक़्त से मुद्दत मानी जायेगी जैसे सुबह के वक़्त मोज़ा पहना और ज़ुहर के वक़्त पहली बार हदस हुआ तो मुक़ीम दूसरे दिन की ज़ुहर तक जब भी वुज़ू करे पाँव धोने के बजाये मोज़ों पर मसह कर सकता है और मुसाफि़र चौथे दिन की ज़ुहर तक।
  • अगर मोज़ा फटा हुआ है या सिलाई खुली हुई हो तो अगर वह पाँव की छोटी तीन उंगलियों के बराबर या उससे ज़्यादा फटा हो तो उस पर मसह जाइज़ नहीं।

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मोज़ों पर मसह करने का तरीक़ा क्या है ?

इस्लाम में हर चीज़ को आसान बनाया गया है इसमें हर परेशानी के लिए कोई न कोई आसान तरीक़ा बताया गया है जैसे वज़ू न कर पाने वाले के लिए तय्यामुम। इसी तरह अगर किसी को पैरो को धोने में कोई परेशानी है या फिर किसी बीमारी के चलते पैर नहीं धो सकता तो उसके लिए मसह है।

आइए जानते है की Mozo Par Masah Karne Ka Tareeqa क्या है और कैसे किया जाता है।

  • मसह करने के लिए सबसे पहले हाथ पानी से तर कर लें। इसके लिए उंगलियों का तर होना ज़रूरी है अब हाथ धोने के बाद जो तरी बाक़ी रह गई उससे मसह जाइज़ है लेकिन सिर का मसह करने के बाद हाथ में जो तरी मौजूद रह जाती है उस से मसह जाइज़ नहीं होता है।
  • इसके बाद अब दाहिने हाथ की तीन उंगलियाँ दाहिने पाँव के ऊपरी हिस्से पर रखकर उंगलियों की तरफ़ से पिंडली की तरफ़ कम से कम तीन उंगलियों के बराबर फेरें क्योकि पिंडली तक फेरना सुन्नत होता है।
  • अब इसके बाद बायें हाथ की तीन उंगलियाँ बायें पाँव के ऊपरी हिस्से पर रखकर उंगलियों की तरफ़ से पिंडली की तरफ़ कम से कम तीन उंगलियों के बराबर फेरें ।

मसह के दो फ़र्ज़ क्या हैं

  1. हर मोज़े का मसह हाथ की छोटी तीन उंगलियों के बराबर होना जरुरी होता है।
  2. मसह मोज़े की पीठ यानि पाँव के ऊपरी हिस्से पर होना जरुरी है।

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मसह किन चीज़ों से टूटता है

  • जिन चीज़ों से वुज़ू टूटता है उनसे मसह भी टूट जाता है।
  • मुद्दत पूरी हो जाने से मसह टूट या इसकी मुद्दत ख़त्म हो जाती है और लेकिन अगर इस हाल में वुज़ू है तो सिर्फ़ पाँव धो लेना ही काफ़ी होता है इसके लिए फिर से पूरा वुज़ू करने की ज़रूरत नहीं लेकिन अच्छा यही है कि पूरा वुज़ू कर लिया जाए।
  • अगर मोज़े उतार दिए तो मसह टूट जाता है चाहे एक ही मोज़ा क्यों न उतारा हो।
  • इसी तरह से अगर एक पाँव आधे से ज़्यादा मोज़े से बाहर हो जाये तो मसह टूट जाता है।
  • अगर मोज़ा ढीला है कि चलने में मोज़े से एड़ी निकल जाती है तो मसह नहीं जाता। लेकिन अगर उतारने की नीयत से बाहर की हो तो टूट जाता है।

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इस आर्टिकल में हमने Mozo Par Masah Karne Ka Tareeqa को बताया है जिससे लोगों को मसह के मसाइल और मसह में क्या फ़र्ज़ है या फिर मसह किन चीज़ो से टूटता है। अगर हमसे कही कोई गलती हुई हो या फिर कही कुछ छूट गया हो तो आप हमारी वेबसाइट पर कमेंट करके बता सकते है।

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जज़्ज़ाकल्लाहुखेर

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