Fahasi Aur Behayai

Fahasi Aur Behayai

फ़हाशी और बेहयाई

इस आर्टिकल में हम फ़ह्हाशी और बे हयाई क्या है? इसकी तारीफ़ Fahasi Aur Behayai की मुज़म्मत में बाअज़ आयात मुक़द्दसा और अहादीस मुबारका, बेहया और बेशरम लोगों के लिए तैयार करदा अज़ाब से मुताल्लिक़ दीगर रवायात की तफ्सील से बात करेंगे।

फ़हाशी जिसको हम अपनी आम बोलचाल में बेशर्मी भी कहते है। Fahasi Aur Behayai का मअनी व मफ़हूम जिन्हें खुले अल्फ़ाज़ों में बयान करना बुरा समझा जाता हो उन्हें ऐलानीया तौर पर ज़िक्र करना मसलन जिमा की बातें करना, मर्द और औरत के आज़ा मख़सूसा का ज़िक्र करना, पेशाब पाख़ाना वग़ैरा की बातें करना।

अगर किसी बाहया और बा मुरव्वत लोगों को कभी किसी ज़रूरत की बिना पर इन बातो के हवाले से कलाम करना पड़ता है तो वो हत्तलइमकान इशारों, किनाइयों में इन बातो का ज़िक्र करते हैं।

बहरहाल बे-हयाई की बातें करना शरन ना पसंदीदा हैं, बे-हयाई-ओ-फ़ह्हाशी की बाअज़ बातें दीगर बाअज़ बातों के मुक़ाबले में ज़्यादा बुरी होती हैं और उनकी कराहत भी इसी तौर पर बढ़ती चली जाती है।

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फ़हाशी की मज़म्मत में कुछ करानी आयात

और बदकारी के पास ना जाओ बेशक वो बे-हयाई है और बहुत ही बुरी राह । (बनीइसराईल ۱۷ /۳۲)
और बे हयाइयों के पास ना जाओ जो उनमें खुली हैं और जो उन में छपी । (अलानाम ۶ /۱۵۱)
और(अल्लाह मना फ़रमाता है बे-हयाई और बुरी बात और सरकशी से और तुम्हें नसीहत फ़रमाता है कि ध्यान करो (अलनहल ۱۶ /۹۰)

फ़हाशी की मज़म्मत में कुछ अहादीस मुबारका

हज़रत अनस रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना बयान करते हैं :नबी पाक ने फ़रमाया बे-हयाई जिस शैय में होती है उसे बदनुमा कर देती है । और हया-ए-जिस शैय में होती है उसे मुज़य्यन कर देती है । (सुंन अलतरमज़ी , बृकम :१९७४ , ४ /३४९

हज़रत अब्दुल्लाह इबन उमर रज़ी अल्लाह-तआला अन्हा बयान करते हैं :नबी पाक  ﷺ ने फ़रमाया बेशक अल्लाह-तआला जब किसी बंदे को हलाक करने का इरादा करता है तो इस से हया-ए-को ले लेता है।

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बस जब वो बंदे से हया-ए-को ले लेता है तुम उसे इस हाल में पाओगे कि वो गुसैल होगा और अल्लाह-तआला के ग़ज़ब का मुस्तहिक़ होगा ,फिर इस से अमानत को ले लिया जाएगा।

बस जब इस से अमानत को ले लिया जाएगा तो तुम उसे ख़ियानत करने वाला ख़ियानत किए जाने वाला पाओगे । बस जब तुम उसे ख़ियानत करने वाला, ख़ियानत किए जाने वाला पाओगे, तो इस से रहमत को ले लिया जाएगा।

जब इस से रहमत को ले लिया जाएगा ,तो तुम उसे इस हाल में पाओगे वो अल्लाह की रहमत से दूर कर दिया जाएगा, इस पर लानत कर दी जाएगी , जब उस का ये हाल होगा तो इस से इस्लाम का पट्टा ले लिया जाएगा । (सुंन इबन माजा , रक़म :४०५४ , २ /१३४७

हज़रत सईद बिन मसीब रज़ी अल्लाह-तआला अनहा बयान करते हैं :नबी पाक ﷺ ने फ़रमाया: हया की कमी नाशुक्री है।

हज़रत अब्बास रज़ी अल्लाह-तआला अन्हुमा ने नबी पाक ﷺ से मर्फ़ू एक तवील हदीस पाक रिवायत की है , इस में अक़लमंद की एक ख़सलत हुज़ूरﷺ ने ये बयान फ़रमाई है अक़लमंद की एक सिफ़त ये है कि शर्म -ओ-हया-ए-इस से जुदा नहीं होती ।(मस्नद इलहा रस , रक़म ۸۴۷ ، ۲ /۸۱۵)

हज़रत जाबिर बिन समुरा रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना बयान करते हैं कि नबी पाकﷺ ने फ़रमाया बेशक फ़ुहश-ओ-बे-हयाई की बातें की , और फ़ुहश और बे-हयाई के काम की इस्लाम में कुछ हैसियत नहीं और इस्लाम के एतबार से लोगों में से बेहतरीन वो है जिसका अख़लाक़ सबसे अच्छा है । (अलिफ़ता अल-कबीर , हर्फ़ अलहमज़ा , बृकम ۳۱۸۵ ، ۱ /۲۹۳ )

हज़रत सहल बिन हनज़ीला रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना बयान करते हैं नबी पाकﷺ ने फ़रमाया बेशक अल्लाह-तआला फ़ुहश-ओ-बे-हयाई की बातों को , और फ़ुहश और बे-हयाई के कामों को पसंद नहीं करता । (अलिफ़ता अल-कबीर , हर्फ़ अलहमज़ा , बृकम ۴۳۳۵ ، ۱ /۴۰۱ )

हज़रत आईशा रज़ी अल्लाह-तआला अनहा बयान करती हैं नबी पाकﷺ ने फ़रमाया :अगर फ़ह्हाशी-ओ-बे-हयाई किसी मख़लूक़ की सूरत में ज़ाहिर होती , तो वो अल्लाह-तआला की बदतरीन मख़लूक़ होती । (अलिफ़ता अल-कबीर , हर्फ़ अललाम , बृकम ۱۰۰۵۹، ۳ /۴۲ )

हज़रत अनस रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना बयान करते हैं कि नबी पाकﷺ ने फ़रमाया :क़ियामत की अलामत में से है कि फ़ुहश-ओ-बे-हयाई की बातें , और फ़ुहश और बे-हयाई के काम होंगे , रिश्ते दारियां तोड़ी जाएँगी , अमानतदार को ख़ाइन क़रार दिया जाएगा , और ख़ाइन को अमीन क़रार दिया जाएगा । (अलिफ़ता अल-कबीर , हर्फ़ अलमीम , बृकम :११११६, ३ /१३०

हज़रत जै़द बिन असलम रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना बयान करते हैं कि नबी पाक ﷺ ने फ़रमाया बला-शुबा ग़ैरत ईमान में से है , और फ़ह्हाशी-ओ-बे-हयाई नफ़ाक़ में से है , और बे-हयाई और फ़ह्हाशी करने वाला देयूस है । (जामा मुअम्मर बिन राशिद , बाब अलग़ीर , बृकम ۱۱۱۶ ،۱۰ /۴۰۹)

हज़रत इबन उम्र रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना बयान करते हैं कि नबी पाकﷺ ने फ़रमाया बेहया-ए-शख़्स पर जन्नत का दाख़िला हराम है ।(बरीक महमोदी ۳ /۲۰۳)

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बेहया-ए-ओ- बेशरम लोगों का अज़ाब

हदीस पाक में है कि चार तरह के जहन्नमी खोलते पानी और आग के दरमयान भागते फिरते हुए हलाकत मांगते होंगे, उनमें एक वो होगा जिसके मुँह से ख़ून और पीप बहता होगा, जहन्नुमी उस के बारे में सवाल करेंगे रहमत- एलाही से महरूम उस शख़्स का क्या हाल है?

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ये हमारी इस तकलीफ़ में मज़ीद इज़ाफ़ा कर रहा है। पस कोई कहने वाला कहेगा रहमत एलाही से महरूम ये शख़्स बेहूदा और बे-हयाई की बातों को देखा करता था और उनसे यूं महज़ूज़ हुआ करता था जिस तरह जमाव से लज़्ज़त हासिल की जाती है।

तीन चीज़ें ईमान में से

हज़रत ऊन बिन अबदुल्लाह रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना बयान करते हैं तीन चीज़ें ईमान में से हैं।

१ हया

२ अफ़ाफ़ (यानी हराम उमूर से नीज़ लोगों से सवाल करने से रुकना

۳ ज़बान का तंग होना (यानी :कम कलाम करना , फ़ुज़ूल से बचना दिल का तंग होना , कोताह नज़र होना ईमान में से नहीं)

ये ऐसे उमूर हैं जो आख़िरत में इज़ाफ़ा करते हैं और दुनिया में कमी करते हैं और ये उमूर जितना दुनिया में कमी करते हैं इस से कहीं ज़्यादा ये आख़िरत में इज़ाफ़ा करते हैं।

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तीन चीज़ें जो आख़िरत में कमी करती हैं

और तीन चीज़ें ऐसी हैं जो आख़िरत में कमी करती हैं और दुनिया में इज़ाफ़ा करती हैं

१ फ़ह्हाशी

२ लालच

३ बे-हयाई की बातें करना।

और ये उमूर जितना आख़िरत में कमी करते हैं इस से कहीं ज़्यादा ये दुनिया में इज़ाफ़ा करते हैं।(जामा मुअम्मर बिन राशिद बृकम ۲۰۱۴۷ ،۱۱ /۱۴۲)
हज़रत शुऐब बिन अब्बू सईद रज़ी अल्लाह अन्ना बयान करते हैं: कि कहा जाता है जो बे-हयाई की बातों से लज़्ज़त उठाएगा , बरोज़ क़यामत उस के मुँह से पीप और ख़ून जारी होगा । (उल-जामे लाबन वह्ब , बाब अलाज़िल , बृकम ۴۱۴ ، स ۵۳۸)

अपनी शहवत की तसकीन के लिए बेहूदा ,और बेशरमी की बातें करने वाले , फिल्मों , ड्रामों के शायक़ीन, फ़िल्मी गाने के शौक़ीन लोग इस बात से इबरत हासिल करें।

हज़रत-ए-इबराहीम बिन मे रहम अलिफ़ﷲताला अलैहि फ़रमाते हैं फ़ह्हाशी और बे-हयाई की बातें करने वाला और फ़ह्हाशी और बे-हयाई के काम करने वाले को बरोज़-ए-केअमत कुत्ते की शक्ल में लाया जाएगा।(अहया उलूम उद्दीन ,, ३ /१२२
मुफ़्ती अहमद यार ख़ान अलैहि अलरहम फ़रमाते हैं ख़्याल रहे कि तमाम इन्सान क़ब्रों से बशक्ल-ए-इन्सानी उट्ठेंगे फिर मह्शर में पहुंच कर बाअज़ की सूरतों मसख़ हो जाएँगी । (मराआ अलुमिना जया

अल्लाह-तआला से श्रम करो
बेशरम-ओ-बेहया-ए-लोग शायद मुअज़्ज़ज़ अफ़राद के सामने बे-हयाई की बातें करने से शरमाते हूँ , लेकिन मुक़ाम-ए-अफ़सोस है कि ये बे-हयाई की बातें करते वक् उन्हें ये एहसास नहीं रहता कि रब्बुल आलमीन जो कि वो सब कुछ सुन रहा है।

इस हवाले से हज़रत बशर हाफ़ी अलैहि अलरहमा ने फ़रमाया तुम देखो कि तुम अपने आमाल-नामे में क्या लिखवा रहे हो?

ये नामा-ए-आमाल तुम्हारे रब के सामने पढ़ा जाएगा। तो जो शख़्स बे-हयाई की बातें करता है इस पर अफ़सोस है कि अगर अपने दोस्त के नाम कुछ लिखता है तो इस में बुरे अलफ़ाज़ नहीं लिखता लेकिन तुम्हारा अपने रब के साथ कैसा बुरा मुआमला है।

इसी हवाले से हज़रत उबीद बिन अमीर रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना का ये क़ौल मुलाहिज़ा फ़रमाएं आप ﷺ ने फ़रमाया अल्लाह-तआला से शर्म -ओ-हया-ए-करने को लोगों से शर्म व हाया करने पर तर्जीह दो (हली अलावलया-ए- ۳ /۲۶۸)

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आँखों की हिफ़ाज़त करो

बहैसियत-ए-मुस्लमान हमारे लिए आँखों की हिफ़ाज़त करना जरुरी है। हराम इश्याय की तरफ़ नज़र करने से ख़ुद को बचाना बहुत ज़रूरी है , आँखों की शर्म -ओ-हया-ए-हमारे लिए किस क़दर ज़्यादा ज़रूरी है , इस का अंदाज़ा नबी पाकﷺ के इस फ़रमान से लगाऐं आँखें (भी जिना करती हैं)

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नीज़ साथ ही साथ मुलाहिज़ा फ़रमाएं कि हराम की तरफ़ नज़र करना ,ये सहाबा -ए-किराम के नज़दीक किस क़दर ज़ियादा बुरा और ना पसंदीदा अमल था।

हज़रत सलमान फ़ारसी रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना ने फ़रमाया मैं मरूँ फिर ज़िंदा हूँ, फिर मरूँ फिर ज़िंदा हूँ, फिर मरूँ फिर ज़िंदा हूँ तब भी मेरे नज़दीक ये इस से बेहतर है कि मैं किसी की शर्मगाह को देखूं या कोई मेरी शर्मगाह को देखे।(तंबीया इलग़ा फिलेन , बाब अलहया-ए-, स :४४७

फ़ासिक़ कौन

किसी दानिश्वर से सवाल किया गया फ़ासिक़ किसे कहते हैं? उन्होंने जवाबन फ़रमाया फ़ासिक़ वो है जो अपनी नज़रों को लोगों के दरवाज़ों और उनके पर्दे के मुक़ाम से न रोकता हो ।(तंबीया इलग़ा फिलेन , बाब अलहया-ए-, स :४४७

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अल्लाह-तआला की लानत होती है

हज़रत अली रज़ी अल्लाह-तआला अन्ना रिवायत करते हैं नबी पाकﷺ ने फ़रमाया अल्लाह की लानत हो देखने वाले पर (जो इस शैय को देखे जिसकी तरफ़ नज़र करना हराम है और इस पर जिसकी तरफ़ देखा जाये(और वो इस हराम अमल से राज़ी हो )।

इबलीस का तीर

नबी पाकﷺ ने फ़रमाया औरत के मुहासिन उस की हुस्न-ओ-जमाल के मुक़ाम की तरफ़ नज़र करना इबलीस के तीरों में से एक ज़हरीला तीर है जिसने ना महरम की तरफ़ देखने से अपनी आँख को फेर लिया अल्लाह-तआला उसे ऐसी इबादत की तौफ़ीक़ देगा जिसकी हलावत वो अपने दिल में पाएगा ।

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