इस्तन्जा के मसाइल

Istinja ke Masail

नजासत यानी की गन्दगी से पाकी हासिल किए बिना हम वज़ू या ग़ुस्ल मुकम्मल नहीं कर सकते और इसके लिए हमें Istinja ke Masail जानने की जरुरत पड़ती है।

Istinja Kya Hota Hai?

बाहर से जिस्म या कपड़े पर लगने वाली निजासत को पाक व साफ़ करने का इस्लामी तरीक़ा इस्तन्जा कहलाता है।

निजासतों से अपने जिस्म को पाक व साफ़ करने का तरीका जो पाख़ाना या पेशाब करने से जिस्म पर लगी रह जाती हैं, ऐसी निजासत (गंदगी) से अपने बदन को पाक व साफ़ करने को इस्तन्जा करना कहते हैं।

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Istinja Ka Tariqa

जब क़ज़ाए हाजत से फारिग हो जाये तो अच्छी तरह इत्मीनान कर ले की कोई कतरा वगैरह ना फसा रह गया हो उसके बाद इस्तन्जा करने के लिए बेहतर और सुन्नत तरीक़ा यह है कि पहले तीन या उससे ज़्यादा बार मिट्टी के ढेले लेकर निजासत को अच्छी तरह साफ़ करलें और फिर पानी से तीन बार धोलें।

आज के दौर में आपको मिट्टी के ढेले मिलने मुश्किल है। तो आप इसके लिए परेशान भी न हो सिर्फ़ पानी ही से धो लिया तो भी जाइज़ है।

ऑफिस वगैरह जहा गैर मुस्लिम Toilet होता है वहा अगर धोने का इंतजाम न हो तो टिशू पेपर से अच्छी तरह पोंछ ले और जब पानी मिल जाये तो पानी का इस्तेमाल कर ले।

इस्तन्जा करने की खास बाते

  • दाहिने हाथ से पानी बहायें और बायें हाथ से धोयें और पानी का बर्तन ऊँचा रखें कि छींटें न पड़ें, पहले पेशाब की जगह धोयें फिर पाख़ाने की जगह धोए और गदंगी साफ़ होने के बाद पाक करने के लिए तीन बार धोए।
  • काग़ज़ से इस्तिन्जा करना मना है चाहे उस पर कुछ लिखा हुआ हो या नहीं।
  • Toilet Paper पाकी हासिल करने का आसान ज़रिया है। इस ख़़ास काग़ज़ को लिखने पढ़ने के लिये नहीं बल्कि इस्तन्जे के लिये ही बनाया है, लिहाज़ा इसके इस्तेमाल में कोई हर्ज नहीं। 
  • दाहिने हाथ से इस्तिन्जा करना मकरुह है। किसी का बाँया हाथ बेकार हो या कोई और मसला हो तो उसके लिए जाइज़ है।
  • शर्मगाह को दाहिने हाथ से छूना या धोना मकरुह है।
  • जिस ढेले से एक बार इस्तिन्जा कर लिया तो उसी ढेले से दोबारा करना मकरुह है।
  • मर्द लुंजा हो या और कोई दिक्कत हो तो उसकी बीवी इस्तिनजा करा सकती है और औरत कोे उसका शौहर।
  • ज़मज़म शरीफ़़ से इस्तिन्जा करना नाजाइज़ है।
  • वुज़ू के बचे हुये पानी से इस्तिन्जा करना सही नहीं है। लेकिन इस्तिन्जे के बचे हुये पानी से वुज़ू कर सकते हैं। उस पानी का फेंकना फ़ुज़ूलख़र्ची है और फ़ुज़ूलख़र्ची जाएज़ नहीं है।

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इस्तन्जा में वशवशा

कुछ लोगो को इस्तन्जा करने में वशवशा हो जाता है। वो ये की जब वो इस्तन्जा कर के उठने लगते है तो पेशाब का कतरह आ गया और फिर दोबारा इस्तन्जा करते है। उठते वक्त फिर से वही मसला हो जाता है।

इसका हल ये है की जब क़ज़ाए हाजत से फारिग हो जाये तो अच्छी तरह इत्मीनान कर ले की कोई कतरा वगैरह ना फसा रह गया हो उसके बाद इस्तन्जा कर के उठ जाये। क्युकी वो कतरा नहीं वासवशा होता है उसको नजरअंदाज कर दे।

यहाँ एक बात याद रखे की अगर कपड़ा बहोत कसा हुआ है खास तौर पर जींस वगैरह तो उसके लिए ये नज़रन्दाज़ करने की बात लागु नहीं होगी। उसके लिए Toilet में दरवाज़ा बंद कर के कपडा उतार कर करना होगा।

बैतुलख़ला के आदाब

इस्तिन्जे के लिए बैतुलख़ला (Toilet) में जाने के लिए भी इस्लाम में आदाब बताए गए हैं जिसके बारे में आगे बात करेंगे जो इस तरह हैं।

जब बैतुलख़ला (Toilet) को जाये तो मुस्तह़ब है कि पहले बाहर यह दुआ पढ़ ले।

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Toilet में दाख़िल होने की दुआ

toilet jane ki dua
Toilet mein dakhil hone ki dua | Istinja kay Masail

اَللَّهُمَّ إِنِّي أَعُوذُ بِكَ مِنَ الْخُبْثِ وَالْخَبَائِث

तर्जुमा : ऐ अल्लाह मैं तेरी पनाह मांगता हूँ नापाकी और शैतानों से।

दुआ पढ़ने के बाद बायाँ पाँव पहले अंदर रखें और निकलते वक़्त पहले दाहिना पाँव बाहर निकाले और बाहर निकल कर नीचे लिखी दुआ पढ़े।

Toilet से निकलने के बाद की दुआ

toilet se nikalne ki dua
Toilet Se Bahar Aane Ke Baad ki Dua | Istinja kay Masail

اَلْحَمْدُ لِلَّهِ الَّذِي أَذْهَبَ عَنِّيِ الْأَذٰى وَعَافَانِيۡ

तर्जुमा : सब तारीफ़ें हैं अल्लाह के लिये जिसने वह चीज़ मुझसे दूर की जो तकलीफ़ देती और मुझे आराम दिया।

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बैतुलख़ला की खास बाते

जब बैतुलख़ला (Toilet) को जाएं तो इन बातों का ख़्याल रखना बहुत ज़रूरी है। यहाँ हम खुले और बंद दोनों के बारे में बता रहे है।

  • क़िबले की तरफ़ मुँह और पीठ करके न बैठें चाहे अन्दर हो या बाहर और अगर भूले से बैठ गये तो याद आते ही फ़ौरन रुख़ बदल दें। उम्मीद है कि फ़ौरन उसके लिये मग़फि़रत कर दी जाये।
  • बच्चे को पाख़ाना, पेशाब कराने वाला भी यह ख़्याल रखें कि बच्चे का मुँह क़िबले को न हो, नहीं तो कराने वाला गुनाहगार होगा।
  • खड़े होकर या लेटकर या बिल्कुल नंगे होकर पेशाब करना मकरुह है।
  • जब खुले में कर रहे हो तो सूरज व चाँद की तरफ़ मुँह करके न बैठें।
  • हवा के रुख़ पेशाब न करें और उसकी छीटों से बचें, यह अज़ाबे क़ब्र का बाइस हो सकता है।
  • कुँए, हौज़ या चश्में के किनारे और बहते हुए पानी नदी का घाट और फलदार या सायादार पेड़ के नीचे। खेत जिसमें फ़सल हो और मस्जिद या ईदगाह के क़रीब, क़ब्रिस्तान या रास्ते में और पालतू जानवरों के बंधने की जगह, इन सब जगहों में पेशाब पाख़ाना करना मकरुह है।

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  • जिस जगह वुज़ू या गु़स्ल किया जाता हो वहाँ पेशाब करना मकरुह है।
  • नंगे सिर बैतुलख़ला (Toilet) में जाना या अपने साथ कोई ऐसी चीज़ ले जाना जिस पर कोई दुआ या अल्लाह और रसूल का नाम लिखा हो मना है। बात करना भी मकरुह है।
  • जब खुले में हो तो जब तक बैठने के करीब न हो बदन से कपड़ा न हटाये और ज़रूरत से ज़्यादा बदन न खोलें।
  • किसी दीनी मसअले में ग़ौर न करें कि यह महरूमी का सबब है।
  • छींक या सलाम या अज़ान का जवाब ज़ुबान से न दे।
  • बिना ज़रूरत शर्मगाह की तरफ़ न देखे और न उस निजासत को देखे जो उसके बदन से निकली।
  • देर तक न बैठें कि इससे बवासीर की बीमारी होने का ख़तरा है।
  • पेशाब में न थूके, न नाक साफ़ करे, न बिना ज़रूरत खंकारे, न बार बार इधर उधर देखे, न बेकार बदन छुएं, न आसमान की तरफ़ देखे बल्कि शर्म के साथ सिर झुकाये रहे।
  • जब फ़ारिग़ हो जाये तो बायें हाथ से इस्तन्जा करें। इससे पहले तीन-तीन बार दोनों हाथ धो लें।

व अखिरू दावाना अलाह्म्दुलिल्लाही रब्बिल आलमीन

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One Comment

  1. बहुत उम्दा जानकारी के लिए शुक्रिया

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