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Iffat Zia
· Akhlaq · 4 min read

Fahashi Aur Behayai in Islam - इस्लाम में बेहयाई और उसका अंजाम

Fahashi Aur Behayai: इस्लाम में फहाशी (बेशर्मी) और बेहयाई को बड़ा गुनाह बताया गया है। जानिए कुरान और हदीस की रौशनी में इसके नुकसान और बचने का तरीका।

Fahashi Aur Behayai in Islam - इस्लाम में बेहयाई और उसका अंजाम

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फहाशी (Fahashi) और बेहयाई (Behayai) आज के दौर की सबसे बड़ी बीमारी बन गई है। इस्लाम एक पाकीज़ा दीन है जो हमें शर्म और हया (Modesty) का पाठ पढ़ाता है।

अक्सर हम टीवी, मोबाइल और इंटरनेट पर ऐसी चीज़ें देखते हैं जो इस्लाम में सख्त मना हैं। Fahashi Aur Behayai सिर्फ कपड़ों तक सीमित नहीं है, बल्कि गंदी बातें करना, गंदा देखना और गंदा सोचना भी इसमें शामिल है।

इस आर्टिकल में हम कुरान और हदीस की रौशनी में जानेंगे कि बेहयाई का अंजाम क्या है और इससे कैसे बचा जाए।

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फहाशी और बेहयाई क्या है?

आम बोलचाल में फहाशी का मतलब है “बेशर्मी”। इस्लाम में हर वो काम या बात जिसे खुलेआम करना या बोलना बुरा समझा जाए, वो फहाशी है। जैसे:

  • गंदी बातें (Dirty Talks) करना।
  • शर्मगाह (Private Parts) का ज़िक्र करना।
  • ना-महरम (जिससे शादी जायज़ हो) को बुरी नज़र से देखना।
  • गंदे गाने सुनना या फ़िल्में देखना।

नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “हया (शर्म) ईमान का हिस्सा है।“

कुरान में बेहयाई की मज़म्मत

अल्लाह तआला कुरान में फरमाता है:

“और बदकारी (Zina) के करीब भी न जाओ, बेशक वह बेहयाई है और बहुत बुरा रास्ता है।” (सूरह इसरा: 32)

एक और जगह इरशाद है:

“बेशक जो लोग चाहते हैं कि ईमान वालों में बेहयाई फैले, उनके लिए दुनिया और आख़िरत में दर्दनाक अज़ाब है।” (सूरह नूर: 19)

“और (अल्लाह) मना फरमाता है बेहयाई, बुरी बात और सरकशी से, और तुम्हें नसीहत करता है ताकि तुम ध्यान रखो।” (सूरह नहल: 90)

हदीस की रौशनी में बेहयाई का अंजाम

  1. हया और ईमान: हज़रत अनस (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी (ﷺ) ने फरमाया: “बेशर्मी जिस चीज़ में होती है उसे ऐबदार (बुरा) कर देती है, और हया जिस चीज़ में होती है उसे खूबसूरत बना देती है।” (तिर्मिज़ी)
  2. अल्लाह का गज़ब: हदीस में है कि जब अल्लाह किसी बंदे को हलाक (बर्बाद) करना चाहता है, तो उससे हया छीन लेता है। जब हया निकल जाती है, तो वो अल्लाह की रहमत से दूर हो जाता है।
  3. सबसे बुरा इंसान: आप (ﷺ) ने फरमाया: “कयामत के दिन अल्लाह के नज़दीक सबसे बुरा वो शख्स होगा जिससे लोग उसकी बद-जुबानी (गंदी बातों) की वजह से मिलना छोड़ दें।”
  4. आँखों का ज़िना: नबी (ﷺ) ने फरमाया: “आँखें भी ज़िना करती हैं और उनका ज़िना (गैर-महरम को) देखना है।”

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बेहयाई के नुकसान

  1. ईमान की कमज़ोरी: जब इंसान बेहयाई के काम करता है, तो उसका ईमान कमज़ोर हो जाता है।
  2. बरकत का खात्मा: जिस घर में बेहयाई हो, वहां से अल्लाह की रहमत के फरिश्ते चले जाते हैं।
  3. समाज में बिगाड़: बेहयाई से ज़िना, रेप और पारिवारिक झगड़े बढ़ते हैं।
  4. आख़िरत का अज़ाब: हदीस में आता है कि जो लोग दुनिया में गंदी बातों और नज़रों से लज्ज़त (मज़ा) लेते हैं, कयामत के दिन उनके मुँह से पीप बहेगी।

बेहयाई से कैसे बचें?

  1. नज़रों की हिफाज़त: अपनी नज़रें नीची रखें। मोबाइल और इंटरनेट का सही इस्तेमाल करें।
  2. अच्छी सोहबत: नेक दोस्तों के साथ रहें जो आपको अल्लाह की याद दिलाएं।
  3. अल्लाह का डर: तन्हाई में भी यह सोचें कि अल्लाह देख रहा है।
  4. शादी: अगर मुमकिन हो तो जल्द शादी करें, यह नज़रों को झुकाने और शर्मगाह की हिफाज़त का बेहतरीन जरिया है।

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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या फ़िल्में और ड्रामे देखना फहाशी है?
A.

आजकल ज़्यादातर फिल्मों और ड्रामों में बे-पर्दगी, गाना-बजाना और गैर-इस्लामी कल्चर दिखाया जाता है, जो फहाशी को बढ़ावा देता है। इसलिए इनसे बचना चाहिए।

Q. अगर किसी से गलती हो जाए तो क्या करे?
A.

अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला है। अगर किसी से बेहयाई का गुनाह हो गया हो, तो उसे चाहिए कि सच्चे दिल से तौबा करे (Tawbah) और आइंदा न करने का पक्का इरादा करे।

Q. हया (Modesty) क्यों ज़रूरी है?
A.

हया इंसान को जानवरों से अलग करती है। हया ईमान की पहचान है और यह इंसान को गुनाहों से रोकती है।


अल्लाह हम सबको बेहयाई और फहाशी से बचाए और हया वाली ज़िन्दगी नसीब फरमाए। आमीन।

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