रोज़ा किन किन वजाहो से टूटता है ?

रोज़ा किन किन वजाहो से टूटता है ? 1

Roza kin kin wajaho se tutata hai

रोजे का सबसे अहम सवाल की रोज़ा किस वजह से टूट जाता है? यह एक ऐसा सवाल है जो कि हर किसी को जानना जरूरी है क्योंकि जब हमें यह पता होगा कि रोज़ा कैसे टूट जाता है तो हम उन चीज़ो से बचेंगे। आज के इस आर्टिकल में हम इसी चीज़ के बारे में जानेंगे की रोज़ा किन किन वजाहो से टूटता है ?

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रोज़ा कब और किस सूरत में टूटता है ?

  • अगर रोजे की हालत में कोई आदमी जानबूझकर कुछ खा या पी ले , तो इससे उसका रोजा टूट जाता है।
  • अगर कोई रोजेदार दांत में फसी चीज़ हुई खाने की चीज़ को जानबूझकर निगल जाता है या फिर खा जाता है तो इससे भी उसका रोजा टूट जाता है।
  • जानबूझ उल्टी करने से भी रोजा टूट जाता है।
  • इसी के साथ ही गैरजरूरी इंजेक्शन लगवाने से भी रोजा टूट जाता है।
  • किसी भी तरह की दवाई खाने-पीने से रोजा टूट जाता है।
  • हमबिस्तरी करने से भी रोज़ा टूट जाता है।

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ऊपर हमने बताया की रोज़ा कब और किस सूरत में टूटता है अब आगे जानेंगे की रोज़ा किन वजहों से नहीं टूटता है।

रोजा इन वजहों से नहीं टूटता है

  • भूलकर खाने, पीने या जिमा (सोहबत) करने से रोज़ा नहीं टूटता चाहे वह रोज़ा फ़र्ज़ हो या नफ़्ल रोज़ा ही हो।
  • अगर याद दिलाने पर भी अगर याद नहीं आया कि रोज़ादार है और रोज़ा तोड़ने वाला कोई काम किया तो अब रोज़ा टूट तो जायेगा मगर इस सूरत में कफ़्फ़ारा लाज़िम नहीं होता है।
  • मक्खी, धूल, धुआँ या ग़ुबार हलक़ में ख़ुद से चला जाये तो इससे रोज़ा नहीं टूटता है।
  • लेकिन जानबूझ कर धूल या धुआँ वगैरा मुँह या नाक से अंदर की तरफ़ खीचने से रोज़ा टूट जाता है, यहाँ तक कि अगरबत्ती वग़ैरा के धुएँ को नाक से खींचने पर भी रोज़ा टूट जाता है। इसी तरह से बीड़ी, सिग्रेट और हुक़्क़ा पीने से भी रोज़ा टूट जाता है और इन्हें पीने वाले पर कफ़्फ़ारा भी लाज़िम होता है।
  • बोसा लेने से रोज़ा नहीं टूटता अगर एह्तिलाम (मनी का निकलना) न हो तो।
  • अगर नहाने में या कुल्ली करने में कुछ तरी मुँह में बाक़ी रह गई जो थूक के साथ निगल ली तो उससे भी रोज़ा नहीं टूटता।
  • कान में पानी चला गया या तिनके से कान खुजाया और उस पर कान का मैल लग गया फिर वही मैल लगा हुआ तिनका कान में डाला और कई बार ऐसा किया तो इससे भी रोज़ा नहीं टूटता है।
  • अगर दाँत या मुँह में बिल्कुल थोड़ी सी कोई चीज़ रह गई और थूक के साथ हलक़ में उतर गई , या दाँतों से ख़ून निकलकर हलक़ तक पहुँचा मगर हलक़ से नीचे न उतरा तो इन सूरतों में भी रोज़ा नहीं टूटता है।
  • भूले से अगर खाना खा रहे थे याद आते ही फ़ौरन निवाला निकाल दिया या सुबह सादिक़ से पहले खा रहे थे और सुबह सादिक़ होते ही उगल दिया तो भी रोज़ा नहीं टूटा लेकिन अगर निगल लिया तो दोनों सूरतों में रोज़ा टूट जायेगा।
  • एहतिलाम (Night Fall) होने से रोज़ा नहीं टूटता है।
  • ग़ीबत जिसको की बहुत सख़्त कबीरा गुनाह बताया गया है। क़ुरआन मजीद में ग़ीबत करने वाले के बारे में फ़रमाया गया है की ग़ीबत करना ऐसा है जैसे अपने मुर्दा भाई का गोश्त खाना और हदीस में ग़ीबत को ज़िना से भी सख़्ततर बताया गया है और ग़ीबत करने की वजह से रोज़े की नूरानियत जाती है। लेकिन ग़ीबत करने से रोज़ा नहीं टूटता है।
  • तेल या सुर्मा लगाने से रोज़ा नहीं टूटता चाहे तेल या सुर्मे का मज़ा हलक़ में महसूस होता हो अगर थूक में सुर्मे का रंग भी दिखाई देता हो तब भी रोज़ा नहीं टूटता है।
  • अगर तिल या तिल के बराबर कोई चीज़ चबाई और थूक के साथ हलक़ में उतर गई तो रोज़ा नहीं टूटा, लेकिन अगर उसका मज़ा हलक़ में महसूस होता हो तो इससे रोज़ा टूट गया जायेगा।

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रसूलुल्लाह सल्लाहु अलैहि वस्सलाम फ़रमाते हैं-

  • रोज़ादार ने भूलकर खाया या पिया वह अपने रोज़े को पूरा करे कि उसे अल्लाह ने खिलाया और पिलाया।

यानी की इससे रोज़ा नहीं टूटता है।

(सही बुख़ारी मुस्लिम में अबू हुरैराک से मरवी)

  • जिस पर क़ै ने ग़लबा किया उस पर क़ज़ा नहीं और जिसने क़सदन क़ै की उस पर रोज़ा क़ज़ा है।

यानी अगर किसी को उलटी हो गयी तो इससे रोज़ा नहीं टूटता है लेकिन अगर किसी ने जानबूझ कर उलटी की तो उसका रोज़ा टूट जायेगा।

(अबू दाऊद व तिर्मिज़ी व इब्ने माजा व दारमी अबू हुरैरा ک से मरवी)

  • तीन चीज़ें रोज़ा नहीं तोड़तीं पछना(ख़ून निकलवाना) , क़ै और एहतिलाम।

यानी की तीन चीज़ो से रोज़ा नहीं टूटता खून निकलवाने से ,उलटी से ,और एह्तिलाम से।

(तिर्मिज़ी अबू सईदک से रिवायत)

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