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Quran Surah

अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है- जब क़ुरान पढ़ा जाए तो उसे कान लगाकर सुनो और ख़ामोश रहो कि तुम पर रहम हो,सुलल्लाहो अलैहे व सल्लम ने फ़रमाया जो क़ुरान पाक पढ़ेगा और उसके मुताबिक़ अमल करेगा, क़यामत के दिन अल्लाह तआला उसके माँ-बाप को एक ताज पहनाएगा।

जिसकी रोशनी सूरज की रोशनी से बेहतर होगी (जब माँ-बाप को इतनी इज्ज़त मिलेगी तो पढ़ने वाले को कितनी इज्ज़त अल्लाह तआला अता फ़रमाएगा)। अल्लाह तआला उस शख्स को जहन्नम का अज़ाब न देगा, जिसने क़ुरान हिफ्ज़ किया और क़ुरान के हाफ़िज अल्लाह तआला के दोस्त हैं। कुरान हिफ्ज़ से (बग़ैर देखे) पढ़ना एक हज़ार दर्जा (सवाब) रखता है।

हमने Quran Surah को YouTube पर अपलोड किया है और आप की खिदमत में हाजिर है।

जैसा कि रमजान शुरू होने वाला है तो यह हमारे लिए एक बहुत ही अच्छा मौका है कुरान शरीफ की तिलावत सुने और अमल करें।

सूरह फातिहा

सूरह फातिहा को कुरान शरीफ में सब से पहले रखने का मकसद यह है कि अगर तुम सच में कुरान शरीफ का फायदा उठाना चाहते हो तो सबसे पहले खुदा से दुआ करो।

सूरह नास

सूरह नास मक्की सूरह है इस में 6 आयतें हैं। ये उस वक़्त नाज़िल हुई थी जब हुज़ूर सल्लल लाहु अलैहि वसल्लम पर यहूदियों  की तरफ से जादू किया गया था  और उसके कुछ असरात आप पर ज़ाहिर हुए थे इन सूरतों में इस का इलाज बताया गया है | हदीसो से मालूम होता है कि इन सूरतों की तिलावत और इन से दम करना जादू के असरात दूर करने के लिए बेहतरीन अमल है

सूरह इखलास

इस सूरह का नाम इखलास इसलिए है, कि इसमें खालिस तौहीद का बयान किया गया है। जो शख्स भी इसको समझ कर इसकी तालीम पर ईमान ले आएगा वह शिर्क से खलासी पा जाएगा।

सूरह यासीन

सूरह यासीन क़ुरआन-ए-पाक की अज़ीमुश्शान सूरह मुबारिका है। सूरह यासीन को क़ुरआन पाक का दिल भी कहते हैं। हजरत अनस रजि अल्लाह ताला अनहु से रिवायत है कि हुज़ूर सलाल्लाहो अलैहि वसल्लमने फ़रमाया : बेशक हर चीज़ का एक दिल है और क़ुरआन का दिल सूरह यासीन है। इसके पढ़ने से रज़ाए इलाही हासिल होती है और पढ़ने वाले की मगफिरत की जाती है।

सूरह रहमान

सूरह रहमान पहले ही लफ़्ज़ अर रहमान को इस सूरा का नाम क़रार दिया गया है। इस का मतलब ये है कि जो अलरहमान से शुरू होती है ताहम इस नाम को सूरत के मज़मून से भी गहिरी मुनासबत है, क्योंकि इस में शुरू से आख़िर तक अल्लाह ताला की सिफ़त को बताया गया है

सूरह फलक

सूरह फलक कुरआन पाक की 113 वीं आयत है सूरह फलक चारो मशहूर कुल में से एक है इसके बारे में और सही से जानने के लिए इस सूरह के जरिये अल्लाह तआला ने अपने बन्दों को हर तरह के वसवसों से पनाह मांगने का रास्ता बताया है सूरह फलक मदीना मुनवारा में नाजिल हुई इस सूरह में कुल 1 रुकू है और इसमें कुल पांच आयते है और कुल 23 कलिमे है और कुल 74 हरफ़ है।

पुरी प्लेलिस्ट

यहाँ पर आप पूरी प्लेलिस्ट इस्तेमाल कर सकते है।

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