बकरा ईद का महत्व और इससे जुड़ें रोचक तथ्य

बकरा ईद का महत्व और इससे जुड़ें रोचक तथ्य

bakra eid ka mahatva ईद-उल-अज़हा यानी बकरा ईद मुस्लिम धर्म के समाज का दूसरा सबसे बड़ा त्योहार माना जाता है। बकरीईद आपसी भाईचारे और बलिदान का त्योहार माना जाता है। इस दिन सुबह सवेरे नमाज पढ़ कर त्योहार की शुरुआत की जाती है।

निजासत और उसकी क़िस्में

निजासत और उसकी क़िस्में

इस्लाम एक पाकीज़ा मज़हब है और पाक साफ़ रहने का हुक्म देता है। कोई भी इबादत हम बिना पाक साफ़ हुए नहीं कर सकते। पाक साफ़ रहने के लिए हमे ये भी पता होना चाहिए की गन्दगी यानि Nijasat Aur Uski Kisme क्या है।

मिस्वाक के फायदे और मसाइल

मिस्वाक के फायदे और मसाइल

मिस्वाक से सफ़ाई के अलावा बहुत सी बीमारियाँ भी दूर होती हैं। इस आर्टिकल में हम आपको दीनी और दुनयावी एतबार से Miswak Ke Fayde के बारे में कुछ अहम बाते बतायेगे।

क़यामत की निशानियाँ – क़ुरानों सुन्नत की रोशनी में

क़यामत की निशानियाँ – क़ुरानों सुन्नत की रोशनी में

Qayamat ki Nishanian क़ुरानों सुन्नत की रोशनी में नबी करीम (स०अ०) ने हमें क़यामत की निशानियाँ बता दी हैं। बेशक कयामत की निशानीयो मे से ये भी निशानी है, इल्म का उठ जाना, जहालत का फैल जाना।

नबी सo की सुन्नत पर अमल करे

नबी सo की सुन्नत पर अमल करे

आज हम लोग अपने को नबी सल्लाहु अलैहि वसल्लम से मुहब्बत करने का दावा तो करते है लेकिन सही मायने में Nabi Ki Sunnat क्या है? या तो हमें मालूम नहीं या फिर मालूम है भी तो अमल नहीं करते।

Qurbani Ka Tarika (2022)

Qurbani Ka Tarika (2022)

Eid-ul-Adha यानी कि बकराईद के मैके पर हम लोग अल्लाह तबारको ताला के हुक्म पर क़ुरबानी तो करवाते है लेकिन साल में एक बार क़ुरबानी करने से हम Qurbani Ka Tarika और दुआ भूल जाते है। इस वजह से हम परेशानी में पड़ जाते है।

इल्म की अहमियत

इल्म की अहमियत

क़ुरान व हदीस की रौशनी Ilm Ki Ahmiyat रसूल-अल्लाह सलअल्लाहू अलैही वसल्लम ने फरमाया कि उस मुसलमान के लिए जन्नत का रास्ता आसान होगा जो इल्म ताल्लुक से यू तो अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त ने क़ुरआन में कई आयतें नाज़िल की है. कुछ का तज़किरा हम इस पोस्ट में करते हैं

क़ुरआन-ए-करीम की हिफाज़त

क़ुरआन-ए-करीम की हिफाज़त

क़ुरआन क़ुरआन-ए-करीम अल्लाह सुब्हानहु व ताअला का वो अज़ीमुश्शान कलाम है जो इन्सानों की हिदायत के लिए ख़ालिक़ कायनात ने अपने आख़िरी रसूल सल्लाहु अलैहि वसल्लम पर नाज़िल फ़रमाया और Quran Kareem Ki Hifazat का ज़िम्मा खुद लिया।

Fahasi Aur Behayai

Fahasi Aur Behayai

फ़हाशी जिसको हम अपनी आम बोलचाल में बेशर्मी भी कहते है। Fahasi Aur Behayai का मअनी व मफ़हूम जिन्हें खुले अल्फ़ाज़ों में बयान करना बुरा समझा जाता हो उन्हें ऐलानीया तौर पर ज़िक्र करना मसलन जिमा की बातें करना, मर्द और औरत के आज़ा मख़सूसा का ज़िक्र करना, पेशाब पाख़ाना वग़ैरा की बातें करना।

इस्तन्जा के मसाइल

इस्तन्जा के मसाइल

नजासत यानी की गन्दगी से पाकी हासिल किए बिना हम वज़ू या ग़ुस्ल मुकम्मल नहीं कर सकते और इसके लिए हमें Istinja ke Masail जानने की जरुरत पड़ती है। बाहर से जिस्म या कपड़े पर लगने वाली निजासत को पाक व साफ़ करने का इस्लामी तरीक़ा इस्तन्जा कहलाता है।