Surah Rahman in Hindi - सूरह रहमान: हिंदी तर्जुमा, फजीलत और फायदे
Surah Rahman in Hindi (सूरह रहमान): पढ़िए सूरह रहमान का हिंदी तर्जुमा, इंग्लिश ट्रांसलेशन और इसकी फजीलत। जानिए इसे 'कुरान की जीनत' क्यों कहा जाता है और इसके पढ़ने के क्या फायदे हैं।

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सूरह रहमान (Surah Rahman) कुरान मजीद की 55वीं सूरह है और इसे ‘कुरान की जीनत’ भी कहा जाता है। यह सूरह मक्की है, हालांकि कुछ लोग इसे मदनी भी मानते हैं, और इसमें कुल 78 आयतें हैं। इस सूरह का नाम अल्लाह के नामों में से एक, अर-रहमान (जो बेहद मेहरबान और रहमत वाला है) पर रखा गया है।
इस सूरह की सबसे खास बात यह है कि इसमें एक आयत “फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़ ज़िबान” (तो तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?) बार-बार दोहराई गई है। यह इंसानों और जिन्नों को अल्लाह द्वारा दी गई अनगिनत नेमतों की याद दिलाती है।
इस लेख में, हम सूरह रहमान हिंदी में (Surah Rahman in Hindi), इसके हिंदी तर्जुमे, और इसकी फजीलत और फायदों के बारे में तफ़सील से जानेंगे।
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सूरह रहमान पढ़ने के फायदे और फजीलत
सूरह रहमान की तिलावत करने के कई रूहानी और दुनियावी फायदे हैं। इसे पढ़ने से दिल को सुकून मिलता है और अल्लाह की नेमतों का एहसास होता है। इसकी कुछ खास फजीलतें नीचे दी गई हैं:
- दिल की सफाई: हदीस में आता है कि हर चीज़ के लिए एक जीनत होती है, और कुरान की जीनत सूरह रहमान है। इसे पढ़ने से दिल से निफाक (मुनाफिक़त) दूर होता है।
- बीमारियों से शिफा: सूरह रहमान को पानी पर दम करके पीने से कई बीमारियों में शिफा मिलती है, खासकर दिल के मरीज़ों के लिए यह बहुत फायदेमंद है।
- मुश्किलों का हल: अगर कोई मुश्किल या परेशानी हो, तो इस सूरह की तिलावत करने से अल्लाह उस मुश्किल को आसान कर देता है।
- कयामत के दिन शिफारिश: जो शख्स सूरह रहमान की तिलावत कसरत से करता है, कयामत के दिन यह सूरह उसके लिए अल्लाह से शिफारिश करेगी।
- रिज़्क़ में बरकत: इसे मामूल में रखने से घर में खैर-ओ-बरकत और रिज़्क़ में इज़ाफ़ा होता है।
- जादू और नज़र से हिफाज़त: अगर किसी पर जादू या बुरी नज़र का असर हो, तो सूरह रहमान की तिलावत से अल्लाह हिफाज़त फरमाता है।
- नींद न आने का इलाज: अगर किसी को नींद न आने की बीमारी हो, तो ईशा की नमाज़ के बाद सूरह रहमान पढ़कर सोने से सुकून मिलता है।
दुआ कबूल होने का खास अमल (Wazifa)
अगर आपकी कोई जायज़ मुराद है जो पूरी नहीं हो रही, तो यह अमल करें:
- किसी भी नमाज़ के बाद 1 बार दरूद-ए-इब्राहिम पढ़ें।
- फिर पूरी सूरह रहमान पढ़ें।
- आखिर में फिर 1 बार दरूद-ए-इब्राहिम पढ़ें।
- इसके बाद अल्लाह से रो-गिड़गिड़ा कर दुआ मांगें। इंशाअल्लाह दुआ ज़रूर कबूल होगी।
सूरह रहमान का वीडियो (Surah Rahman Video)
नीचे दिए गए वीडियो में आप सूरह रहमान की तिलावत सुन सकते हैं। वीडियो देखकर और सुनकर सूरह को याद करना और सही तलफ्फुज़ (pronunciation) के साथ पढ़ना आसान हो जाता है।
सूरह रहमान हिंदी तर्जुमा (Surah Rahman Hindi Tarjuma)
यहाँ पर सूरह रहमान की हर आयत को अरबी के हिंदी उच्चारण (Transliteration) और उसके हिंदी अनुवाद के साथ दिया गया है ताकि हर कोई इसे आसानी से पढ़ और समझ सके।
अ ऊजु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहिम
अल्लाह के नाम से शुरू करता हूँ जो बहुत मेहरबान, रहमत वाला है।
1. अर-रहमान
वही बेहद मेहरबान खुदा है।
2. अल्लमल कुरआन
जिसने कुरान की तालीम दी।
3. ख़लक़ल इन्सान
उसी ने इंसान को पैदा किया।
4. अल्लमहुल बयान
और उसको बोलना सिखाया।
5. अश-शम्सु वल-क़मरु बिहुस्बान
सूरज और चाँद एक ख़ास हिसाब के पाबन्द हैं।
6. वन-नज्मु वश-शजरू यस्जुदान
और तारे और दरख़्त (पेड़) सब सजदे में हैं।
7. वस-समा-अ रफ़-अहा व व-द-अल मीज़ान
उसी ने आसमान को बुलंद किया और तराज़ू क़ायम की।
8. अल्ला ततग़व फिल मीज़ान
ताकि तुम तौलने में कमी-बेशी न करो।
9. व अक़ीमुल-वज़्ना बिल-क़िस्ति वला तुख्सिरुल-मीज़ान
और इंसाफ़ के साथ ठीक-ठीक तौलो और तौल में कमी न करो।
10. वल-अरदा व-द-अहा लिल-अनाम
और ज़मीन को उसने मख्लूक़ के लिए बनाया है।
11. फ़ीहा फ़ाकिहतुंव-वन-नख्लु ज़ातुल-अक्माम
जिसमें मेवे और खजूर के दरख़्त हैं, जिनके खोशों पर गिलाफ़ चढ़े हुए हैं।
12. वल-हब्बु ज़ुल-अस्फ़ि वर-रैहान
और जिसमें भूसे वाला अनाज और ख़ुशबूदार फूल होता है।
13. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
14. ख़लक़ल-इन्साना मिन्-सल-सालिन्-कल-फ़ख्खार
उसने इंसान को ठीकरे जैसी खनखनाती हुई मिट्टी से पैदा किया।
15. व ख़लक़ल-जान्ना मिम्-मारिजिम्-मिन्-नार
और जिन्नात को आग के शोले से पैदा फ़रमाया है।
16. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
17. रब्बुल-मश्रिक़ैनि व रब्बुल-मग़रिबैन
वही दोनों मशरिक़ों और दोनों मग़रिबों का भी रब है।
18. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
19. मरजल-बह-रैनि यल-तक़ियान
उसने दो ऐसे समंदर जारी किये, जो आपस में मिलते हैं।
20. बैनहुमा बर-ज़खुल्-ला यब-ग़ियान
लेकिन उन दोनों के दरमियान एक रुकावट है कि दोनों एक-दूसरे की तरफ़ बढ़ नहीं सकते।
21. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
22. यख-रुजु मिन्हुमल-लुअलु-उ वल-मरजान
उन दोनों से बड़े-बड़े और छोटे-छोटे मोती निकलते हैं।
23. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
24. वलहुल-जवारिल-मून्-शआतु फ़िल्-बहरि कल-अअलाम
और उसी के क़ब्ज़े में रवां-दवां वो जहाज़ हैं जो समंदर में पहाड़ों की तरह ऊंचे खड़े हैं।
25. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
26. कुल्लु मन अलैha फ़ान
जो कुछ भी ज़मीन पर है सब फ़ना होने (मिटने) वाला है।
27. व यब्क़ा वज्हु रब्बिका ज़ुल-जलालि वल्-इकराम
और सिर्फ़ आपके रब की ज़ात बाक़ी रहेगी जो बड़ी इज़्ज़त व करम वाली होगी।
28. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
29. यस्-अलुहू मन्-फ़िस्-समावाति वल्-अर्ज़, कुल्ल यौमिन् हु-व फ़ी शअन्
आसमानों और ज़मीन में जो लोग भी हैं, वो सब उसी से मांगते हैं, हर रोज़ उसकी एक नई शान है।
30. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
31. सनफ़-रुग़ु लकुम् अय्युहस्-सक़लान
ऐ इंसान और जिन्नात! अनक़रीब हम तुम्हारे हिसाब-किताब के लिए फ़ारिग़ हो जाएंगे।
32. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
33. या मअ-शरल्-जिन्नि वल्-इन्सि इनिस्-त-तअतुम् अन्-तन्फुज़ू मिन अक़्तारिस्-समावाति वल्-अर्ज़ि फ़न्फुज़ू, ला तन्फुज़ू-न इल्ला बिसुल्तान
ऐ इंसानों और जिन्नातों की जमात! अगर तुम आसमान और ज़मीन की हदों से निकल भाग सकते हो तो निकल भागो, मगर तुम बग़ैर ज़बरदस्त कुव्वत के नहीं निकल सकते।
34. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
35. युर्सलु अलैकुमा शुवाज़ुम्-मिन्-नारिव्-व नुहासुन् फ़ला तन्तसिरान्
तुम पर आग के शोले और धुआं छोड़ा जाएगा, फिर तुम मुक़ाबला नहीं कर सकोगे।
36. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
37. फ़-इज़न्-शक़्क़तिस्-समा-उ फ़-कानत् वर-दतन्-कद्-दिहान
फिर जब आसमान फट पड़ेगा और तेल की तलछट की तरह गुलाबी हो जाएगा।
38. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
39. फ़-यौम-इज़िल्-ला युस्-अलु अन्-ज़म्बिही इन्सुंव-वला जान्
फिर उस दिन न किसी इंसान से उसके गुनाह के बारे में पूछा जाएगा न किसी जिन से।
40. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
41. युअ-रफुल्-मुजरिमू-न बिसी-माहुम् फ़-युअ-ख़ज़ु बिन्-नवासि वल्-अक़्दाम
उस दिन गुनाहगार अपने चेहरे से ही पहचान लिए जाएंगे, फिर वो पेशानी के बालों और पांव से पकड़ लिए जाएंगे।
42. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
43. हाज़िही जहन्नमुल-लती युकज़्ज़िबू बिहल्-मुजरिमून
यही वो जहन्नम है जिसको मुजरिम लोग झुठलाया करते थे।
44. यतूफ़ू-न बैनहा व बैन हमीमिन् आन्
वो दोज़ख़ और खौलते हुए पानी के दरमियान चक्कर लगाएंगे।
45. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
46. व लिमन् ख़ा-फ़ मक़ा-म रब्बिही जन-नतान्
और जो अपने रब के सामने खड़े होने से डरता था, उसके लिए दो जन्नतें हैं।
47. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकuमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
48. ज़वाता अफ़्नान्
दोनों बाग़ बहुत सी टहनियों वाले (घने) होंगे।
49. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
50. फ़ीहिमा ऐनानि तजरियान्
दोनों में दो चश्मे बह रहे होंगे।
51. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
52. फ़ीहिमा मिन्-कुल्लि फ़ाकिहतिन् ज़व्जान
उन बाग़ों में हर मेवे की दो-दो क़िस्में होंगी।
53. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
54. मुत्तकि-ई-न अला फ़ुरुशिम्-बता-इ नुहा मिन इस्तबरक़, व जनल्-जन्नतैनि दान्
(जन्नती लोग) ऐसे बिस्तरों पर आराम से तकिया लगाए होंगे जिनके अस्तर दबीज़ रेशम के होंगे और दोनों बाग़ों के फल (क़रीब ही) झुके हुए होंगे।
55. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
56. फ़ी-हिन्ना क़ासिरातुत्-तरफ़ि लम् यत्मिस-हुन्ना इन्सुन् क़ब्लहुम् वला जान्
उनमें नीची नज़र रखने वाली हूरें होंगी, जिनको उनसे पहले न किसी इंसान ने हाथ लगाया होगा न किसी जिन ने।
57. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
58. क-अन्न-हुन्नल्-याक़ूतु वल्-मरजान्
वो हूरें ऐसी होंगी जैसे वो याक़ूत और मोती हों।
59. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
60. हल् जज़ा-उल्-इहसानि इल्लल्-इहसान
भला अहसान (नेक अमल) का बदला अहसान (बेहतर अज्र) के सिवा कुछ और भी हो सकता है?
61. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
62. व मिन्-दूनिहिमा जन्नतान्
और उन दो बाग़ों के अलावा दो और बाग़ भी होंगे।
63. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
64. मुद-हाम्-मतान्
जो दोनों गहरे सब्ज़ रंग के होंगे।
65. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
66. फ़ीहिमा ऐनानि नज़्ज़ा-ख़तान्
उन दोनों बाग़ों में दो उबलते हुए चश्मे भी होंगे।
67. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
68. फ़ीहिमा फ़ाकिहतुंव-व नख्लुंव-व रुम्मान्
उनमें मेवे, खजूर, और अनार होंगे।
69. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
70. फ़ी-हिन्ना ख़ैरातुन् हिसान्
उनमें नेक सीरत, ख़ूबसूरत औरतें भी होंगी।
71. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
72. हूरुम्-मक्सूरातुन्-फ़िल्-ख़ियाम्
खेमों में महफूज़ गोरी रंगत वाली हूरें भी होंगी।
73. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
74. लम् यत्मिस-हुन्ना इन्सुन् क़ब्लहुम् वला जान्
उनसे पहले न किसी इंसान ने हाथ लगाया होगा न किसी जिन ने।
75. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
76. मुत्तकि-ई-न अला रफ़-रफ़िन् खुद-रिंव-व अ्ब-क़रिय्यिन् हिसान्
(जन्नती लोग) सब्ज़ तकियों और ख़ूबसूरत कालीनों पर टेक लगाए होंगे।
77. फ़बि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान
तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?
78. तबा-रकस्मु रब्बिका ज़िल्-जलालि वल्-इक्राम
आपके परवरदिगार, जो बड़े जलाल व अज़मत वाले हैं, उनका नाम बड़ा ही बा-बरकत है।
ये भी पढ़े – आयतुल कुर्सी हिंदी में
Surah Rahman in English (Roman Transliteration)
Bismillaahir Rahmaanir Raheem
1. Ar Rahmaan
2. ‘Allamal Quran
3. Khalaqal insaan
4. ‘Allamalhul bayaan
5. Ashshamsu walqamaru bihusbaan
6. Wannajmu washshajaru yasjudan
7. Wassamaaa’a rafa’ahaa wa wada’al Meezan
8. Allaa tatghaw fil meezaan
9. Wa aqeemul wazna bilqisti wa laa tukhsirul meezaan
10. Wal arda wada’ahaa lilanaame
11. Feehaa faakihatunw wan nakhlu zaatul akmaam
12. Walhabbu zul ‘asfi war Raihaanu
13. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan
14. Khalaqal insaana min salsaalin kalfakhkhaari
15. Wa khalaqal jaaan mim maarijim min naar
16. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan
17. Rabbul mashriqayni wa Rabbul maghribayni
18. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan
19. Marajal bahrayni yalta qiyaani
20. Bainahumaa barzakhul laa yabghiyaan
21. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan
22. Yakhruju minhumal lu ‘lu u wal marjaanu
23. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan
24. Wa lahul jawaaril mun sha’aatu fil bahri kal a’laam
25. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
26. Kullu man ‘alaihaa faan
27. Wa yabqaa wajhu rabbika zul jalaali wal ikraam
28. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
29. Yas’aluhoo man fissamaawaati walard; kulla ywmin huwa fee shaan
30. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
31. Sanafrughu lakum ayyuhas saqalaan
32. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
33. Yaa ma’sharal jinni wal insi inis tata’tum an tanfuzoo min aqtaaris samaawaati wal ardi fanfuzoo; laa tanfuzoona illaa bisultaan
34. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
35. Yursalu ‘alaikumaa shuwaazum min naarifiw-wa nuhaasun falaa tantasiraan
36. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
37. Fa-izan shaqqatis samaaa’u fakaanat wardatan kaddihaan
38. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
39. Fa-yawma’izil laa yus’alu ‘an zambiheee insunw wa laa jaann
40. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
41. Yu’raful mujrimoona biseemaahum fa’yu’khazu binna waasi wal aqdaam
42. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
43. Haazihee jahannamul latee yukazzibu bihal mujrimoon
44. Yatoofoona bainahaa wa baina hameemim aan
45. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
46. Wa liman khaafa maqaama rabbihee jannataan
47. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
48. Zawaataaa afnaan
49. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
50. Feehimaa ‘aynaani tajriyaan
51. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
52. Feehimaa min kulli faakihatin zawjaan
53. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
54. Muttaki’eena ‘alaa furushim bataaa’inuhaa min istabraq; wajanal jannataini daan
55. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
56. Feehinna qaasiratut tarfi lam yatmishunna insun qablahum wa laa jaaann
57. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
58. ka annahunnal yaaqootu wal marjaan
59. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
60. Hal jazaaa’ul ihsaani illal ihsaan
61. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
62. Wa min doonihimaa jannataan
63. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
64. Mudhaaammataan
65. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
66. Feehimaa ‘aynaani nad daakhataan
67. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
68. Feehimaa faakihatunw wa nakhlunw wa rummaan
69. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
70. Feehinna khairaatun hisaan
71. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
72. Hoorum maqsooraatun fil khiyaam
73. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
74. Lam yatmis hunna insun qablahum wa laa jaaann
75. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
76. Muttaki’eena ‘alaa rafrafin khudrinw wa ‘abqariyyin hisaan
77. Fabi ayyi aalaaa’i Rabbikumaa tukazzibaan.
78. Tabaarakasmu Rabbika Zil-Jalaali wal-Ikraam
सूरह रहमान के अहम मौज़ू (Main Topics)
इस सूरह के अहम मौज़ू अल्लाह की अपार रहमत और उसकी दी हुई नेमतें हैं। इसमें बताया गया है कि:
- अल्लाह की बनाने की क़ुदरत: उसने इंसान, जिन्नात और इस पूरी कायनात को बनाया।
- कुदरत में अल्लाह की निशानियाँ: सूरज, चाँद, सितारे, पेड़, समंदर, और फल-फूल सब उसकी निशानियाँ हैं।
- इंसाफ का पैगाम: अल्लाह ने इंसाफ का तराज़ू कायम किया और हुक्म दिया कि तौलने में बेइमानी न की जाए।
- हिसाब का दिन: एक दिन सब कुछ खत्म हो जाएगा और हर किसी को अपने आमाल का हिसाब देना होगा।
- जन्नत और जहन्नम: नेक लोगों के लिए खूबसूरत बाग़ (जन्नत) और गुनाहगारों के लिए खौलता हुआ जहन्नम है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
Q. सूरह रहमान किस पारे में है?
Q. सूरह रहमान को 'कुरान की जीनत' क्यों कहते हैं?
इसके खूबसूरत अंदाज़, लय और इसमें अल्लाह की नेमतों के शानदार बयान की वजह से इसे कुरान की जीनत कहा जाता है।
Q. क्या सूरह रहमान को किसी खास वक्त में पढ़ना चाहिए?
इसे किसी भी वक्त पढ़ा जा सकता है, लेकिन सुबह फज्र की नमाज़ के बाद या रात को सोने से पहले पढ़ने की खास फजीलत बयान की जाती है।
Q. सूरह रहमान में कितनी आयतें हैं?
Q. सूरह रहमान मक्की है या मदनी?
Q. 'फबि अय्यि आलाइ रब्बिकुमा तुकज़्ज़िबान' का मतलब क्या है?
इस आयत का तर्जुमा है: “तो (ऐ इंसान और जिन्नात!) तुम अपने रब की कौन-कौन सी नेमतों को झुठलाओगे?” यह आयत इस सूरह में 31 बार आई है।
Q. क्या सूरह रहमान पढ़ने से बीमारी दूर होती है?
जी हाँ, इसे पढ़ने से दिल को सुकून मिलता है और यह डिप्रेशन, बेचैनी और कई जिस्मानी बीमारियों के लिए शिफा का जरिया है।
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