·
Iffat Zia
· Quran · 3 min read

Surah Ikhlas in Hindi: तर्जुमा, फजीलत और वज़ीफ़ा

Surah Ikhlas in Hindi: सूरह इखलास का हिंदी तर्जुमा और मतलब। जानिए इसे पढ़ने के 5 बड़े फायदे, शान-ए-नुज़ूल और वो वज़ीफ़ा जिससे घर में बरकत होती है।

Surah Ikhlas in Hindi: तर्जुमा, फजीलत और वज़ीफ़ा

Table of Contents

सूरह इखलास (Surah Ikhlas) कुरान मजीद की 112वीं सूरह है। यह बहुत छोटी लेकिन बहुत अहम सूरह है। इसमें अल्लाह की तौहीद (एकेश्वरवाद) को बहुत खूबसूरती से बयान किया गया है।

नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया है कि “सूरह इखलास एक तिहाई (1/3) कुरान के बराबर है।”

इस आर्टिकल में हम Surah Ikhlas in Hindi, इसका हिंदी तर्जुमा, इंग्लिश ट्रांसलेशन और इसकी फजीलत जानेंगे।

ये भी पढ़े: Surah Fatiha in Hindi | सूरह फातिहा हिंदी तर्जुमा

Surah Ikhlas Hindi Tarjuma (Translation)

यहाँ सूरह इखलास का हिंदी उच्चारण (Transliteration) और आसान तर्जुमा दिया गया है।

बिस्मिल्ला-हिर्रहमा-निर्रहीम
(शुरू अल्लाह के नाम से जो बहुत बड़ा मेहरबान व निहायत रहम वाला है)

1. कुल हुवल लाहू अहद
(आप कह दीजिये कि अल्लाह एक है।)

2. अल्लाहुस समद
(अल्लाह बे-नियाज़ है (उसे किसी की ज़रूरत नहीं, सबको उसकी ज़रूरत है)।)

3. लम यलिद वलम यूलद
(न उसने किसी को जना (न वो किसी का बाप है) और न वो जना गया (न वो किसी का बेटा है)।)

4. वलम यकूल लहू कुफुवन अहद
(और न कोई उसके बराबर का है।)

Play

Surah Ikhlas in Hindi (Roman English)

जो लोग अरबी नहीं पढ़ सकते, उनके लिए यहाँ सूरह इखलास का हिंदी उच्चारण (Transliteration) दिया गया है:

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

  1. Qul Huwal-Laahu Ahad
  2. Allahus-Samad
  3. Lam yalid wa lam yoolad
  4. Wa lam yakul-lahu kufuwan ahad

ये भी पढ़े: Ayatul Kursi Hindi mein | आयतुल कुर्सी हिंदी में


Surah Ikhlas in English Translation

BismillaHir RahmaNir Raheem

  1. Say, “He is Allah, [who is] One,
  2. Allah, the Eternal Refuge.
  3. He neither begets nor is born,
  4. Nor is there to Him any equivalent.”

Surah Ikhlas in Arabic

بِسْمِ ٱللَّهِ ٱلرَّحْمَـٰنِ ٱلرَّحِيمِ

1. قُلْ هُوَ ٱللَّهُ أَحَدٌ

2. ٱللَّهُ ٱلصَّمَدُ

3. لَمْ يَلِدْ وَلَمْ يُولَدْ

4. وَلَمْ يَكُن لَّهُۥ كُفُوًا أَحَدٌ


शान-ए-नुज़ूल (Revelation Context)

यह सूरह मक्का में नाज़िल हुई। जब मुशरिकों (मक्का के काफिरों) ने नबी (ﷺ) से पूछा कि ‘अपने रब का नसब (वंश) बयान करो’, तो अल्लाह ने यह सूरह नाज़िल की और बताया कि वह अकेला है, न उसका कोई बाप है न बेटा।

सूरह इखलास के फायदे और वज़ीफ़ा (Benefits & Wazifa)

सूरह इखलास पढ़ने के बेशुमार फायदे हैं, जिनमें से कुछ ये हैं:

  1. एक तिहाई कुरान: हदीस में है कि “कुल हुवल लाहू अहद” (सूरह इखलास) एक तिहाई (1/3) कुरान के बराबर है। (बुखारी)
  2. जन्नत में महल: हदीस में है कि जो शख्स 10 बार सूरह इखलास पढ़ता है, अल्लाह उसके लिए जन्नत में एक महल बनाता है।
  3. गरीबी दूर करने के लिए: घर में दाखिल होते वक़्त सलाम करें और एक बार सूरह इखलास पढ़ें। इससे घर से फकीरी दूर होती है और रिज़्क़ में बरकत होती है।
  4. जादू और नज़र से हिफाज़त: सुबह-शाम 3-3 बार सूरह इखलास, फलक और नास पढ़ने से जादू, टोना और बुरी नज़र से हिफाज़त रहती है।
  5. सोते वक़्त: सोने से पहले इसे पढ़कर अपने हाथों पर दम करें और पूरे जिस्म पर फेर लें (सुन्नत तरीका)।
  6. अल्लाह की मोहब्बत: एक सहाबी हर नमाज़ में सूरह इखलास पढ़ते थे क्योंकि उन्हें इससे मोहब्बत थी। नबी (ﷺ) ने उन्हें खुशखबरी दी कि “तुम्हारी इससे मोहब्बत तुम्हें जन्नत में दाखिल करेगी।“

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. इखलास का मतलब क्या है?
A.

इखलास का मतलब है ‘खालिस’ (Pure)। यह सूरह अल्लाह की तौहीद को खालिस करती है और शिर्क से पाक करती है।

Q. सूरह इखलास कब नाज़िल हुई?
A.

ज्यादातर रिवायतों के मुताबिक यह मक्की सूरह है, जब मुशरिकों ने अल्लाह के नसब (वंश) के बारे में पूछा था।

Q. समद (Samad) का क्या मतलब है?
A.

समद का मतलब है ‘बे-नियाज़’। यानी वो ज़ात जिसे किसी की ज़रूरत नहीं, लेकिन पूरी कायनात अपनी ज़रूरतों के लिए उसकी मोहताज है।


अगर आपको यह आर्टिकल पसंद आया हो, तो इसे अपने दोस्तों और रिश्तेदारों के साथ शेयर करें। दीन की बात फैलाना सदका-ए-जारिया है।

    Share:
    Back to Blog