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Qayamat Ki Nishaniyan: जब ये काम होने लगें तो समझ लो क़यामत करीब है

Qayamat Ki Nishaniyan in Hindi: क्या क़यामत करीब है? जानिए नबी करीम (ﷺ) ने वो कौनसी निशानियाँ बताई हैं जो आज हमारे सामने पूरी हो रही हैं। इल्म का उठ जाना, बेहायी का फैलना और बहुत कुछ।

Qayamat Ki Nishaniyan: जब ये काम होने लगें तो समझ लो क़यामत करीब है

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Qayamat Ki Nishaniyan: हर मुसलमान का यह ईमान है कि एक दिन यह दुनिया ख़त्म हो जाएगी और हम सबको अल्लाह के सामने अपने आमाल का हिसाब देना होगा। उस दिन को क़यामत (Qayamat) कहते हैं।

अक्सर हमारे मन में यह सवाल आता है कि क़यामत कब आएगी? (Qayamat Kab Aayegi)। इसका इल्म सिर्फ अल्लाह को है, लेकिन हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (ﷺ) ने हमें क़यामत की कुछ निशानियाँ बताई हैं, जिन्हें देखकर हम अंदाज़ा लगा सकते हैं कि वो वक़्त कितना करीब है।

आज के इस आर्टिकल में हम हदीस की रोशनी में उन निशानियों का ज़िक्र करेंगे जो आज के दौर में साफ़ नज़र आ रही हैं।

1. इल्म का उठ जाना और जहालत का फैलना

क़यामत की एक बड़ी निशानी यह है कि दीन का सही इल्म लोगों के पास से उठ जाएगा और जहालत आम हो जाएगी। लोग जाहिलों को अपना पेशवा (Sardar) बना लेंगे और वो बिना इल्म के फतवे देंगे।

हदीस: हज़रत अनस बिन मलिक (र.अ) फरमाते हैं कि मैंने रसूल अल्लाह (ﷺ) को फरमाते हुए सुना: “क़यामत की निशानियों में से यह है कि इल्म उठा लिया जाएगा, जहालत बढ़ जाएगी, ज़िना आम होगा, शराब पी जाएगी।” (सहीह बुखारी: 5231)

आज हम देखते हैं कि दुनियावी तालीम तो बहुत है, लेकिन दीन की समझ और अमल कम होता जा रहा है।

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2. अमानत में खयानत (Bharosa khatam ho jayega)

जब लोगों के अंदर से ईमानदारी ख़त्म हो जाए और अमानत में खयानत होने लगे, तो समझ लो क़यामत करीब है। आज कल भरोसा करना मुश्किल हो गया है।

हदीस: एक देहाती ने नबी करीम (ﷺ) से पूछा: “क़यामत कब आएगी?” आप (ﷺ) ने फरमाया: “जब अमानत (ईमानदारी) ज़ाया की जाने लगे तो क़यामत का इंतज़ार करना।” उसने पूछा: “अमानत कैसे ज़ाया होगी?” फरमाया: “जब काम ना-अहल (Jo kabil na ho) लोगों के सुपुर्द कर दिए जाएँ (यानी जिसे जिस काम का इल्म न हो उसे वो ज़िम्मेदारी दे दी जाए) तो क़यामत के मुंतज़ीर रहो।” (सहीह बुखारी: 6496)

3. माँ-बाप की नाफरमानी

आज के दौर की एक कड़वी सच्चाई यह है कि औलाद अपने माँ-बाप की इज़्ज़त नहीं करती। हदीस में इसे बहुत ही अजीब अंदाज़ में बयान किया गया है।

हदीस: हज़रत अबू हुरैरा (र.अ) से रिवायत है कि नबी (ﷺ) ने फरमाया: “क़यामत की निशानियों में से है कि लौंडी अपनी मालकिन को जन्मेगी।” (सहीह मुस्लिम: 97)

इसका मतलब: उलमा (Aalim) बताते हैं कि इसका मतलब यह है कि बेटी अपनी माँ के साथ ऐसा बर्ताव करेगी जैसे वो उसकी मालकिन हो। माँ अपनी ही बेटी से डरने लगेगी। आज कल घरों में यह मंज़र आम है।

4. ज़िना और बेहयाई का आम होना

आज कल बेहयाई, नंगापन और ज़िना (Bura kaam) इतना आम हो गया है कि इसे बुरा भी नहीं समझा जाता। टीवी, इंटरनेट और सोशल मीडिया के ज़रिए फहाशी हर घर में घुस चुकी है।

हदीस: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “मेरी उम्मत में कुछ ऐसे लोग पैदा होंगे जो ज़िनाकारी, रेशमी लिबास, शराब और गाने-बजाने को हलाल समझ लेंगे।” (सहीह बुखारी: 5590)

नोट: आज “Live-in relationship” और “Dating” के नाम पर ज़िना को मॉडर्न सोसाइटी का हिस्सा बना दिया गया है। यह क़यामत की बहुत बड़ी निशानी है।

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5. ऊँची-ऊँची इमारतें

अरब के वो लोग जो कभी बकरियां चराते थे और जिनके पास पहनने को कपड़े और पैरों में जूते नहीं होते थे, आज वो बड़ी-बड़ी बिल्डिंग्स बनाने में मुकाबला कर रहे हैं।

हदीस: हदीस-ए-जिब्रील में है कि नबी (ﷺ) ने क़यामत की निशानी बताते हुए फरमाया: “तुम देखोगे कि नंगे पाँव, नंगे बदन, कंगाल और बकरियों के चरवाहे बड़ी-बड़ी इमारतें बनाने में एक-दूसरे पर बाज़ी ले जाने की कोशिश करेंगे।” (सहीह मुस्लिम)

आज दुबई और अरब मुल्कों की गगनचुंबी इमारतें (Aasman ko chune wali imartein) इस हदीस की सच्चाई गवाही दे रही हैं।

6. झूठ और झूठी गवाही

अदालतों में झूठी गवाही देना और झूठ बोलना आज एक हुनर बन गया है। सच बोलने वाले को बेवकूफ और झूठ बोलने वाले को होशियार समझा जाता है।

हदीस: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “क़यामत से पहले झूठी गवाही दी जाएगी और सच्ची गवाही छुपाई जाएगी।” (मुसनद अहमद)

7. वक़्त का तेज़ी से गुज़रना

क्या आपको भी लगता है कि वक़्त बहुत तेज़ी से गुज़र रहा है? हफ्ता, महीने की तरह और महीना, साल की तरह गुज़र जाता है।

हदीस: रसूल अल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: “क़यामत उस वक़्त तक कायम नहीं होगी जब तक वक़्त सिकुड़ न जाए। साल एक महीने जैसा, महीना एक हफ्ते जैसा, हफ्ता एक दिन जैसा, दिन एक घंटे जैसा और घंटा ऐसा हो जाएगा जैसे आग का शोला भड़का और बुझ गया।” (जामिअ तिर्मिज़ी)

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8. जलजलों (Earthquakes) की कसरत

क़यामत के करीब दुनिया भर में जलजले (Earthquakes) बहुत ज्यादा आने लगेंगे। कहीं जमीन धंस जाएगी तो कहीं तबाही मचेगी।

हदीस: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “क़यामत उस वक़्त तक कायम नहीं होगी जब तक इल्म न उठा लिया जाए और जलजलों की कसरत न हो जाए।” (सहीह बुखारी: 1036)

9. कत्ल और खून-खराबा (Bloodshed)

आज कल मामूली बातों पर जान ले लेना आम हो गया है। न मारने वाले को पता है क्यों मारा, न मरने वाले को पता है क्यों मारा गया।

हदीस: रसूल अल्लाह (ﷺ) ने फरमाया: “उस ज़ात की कसम जिसके हाथ में मेरी जान है, दुनिया ख़त्म नहीं होगी यहाँ तक कि लोगों पर ऐसा दिन आएगा कि कातिल को पता नहीं होगा उसने क्यों कत्ल किया और मकतूल (मरने वाले) को पता नहीं होगा कि वो क्यों मारा गया।” (सहीह मुस्लिम: 2908)

10. क़यामत की 10 बड़ी निशानियाँ (Major Signs)

ऊपर बताई गई निशानियाँ “छोटी निशानियाँ” (Minor Signs) थीं जो धीरे-धीरे जाहिर हो रही हैं। लेकिन जब “बड़ी निशानियाँ” (Major Signs) शुरू होंगी, तो वो एक के बाद एक लगातार आएँगी, जैसे तस्बीह (माला) का धागा टूटने पर मोती गिरते हैं।

हदीस: हुज़ैफ़ा बिन असद (र.अ) कहते हैं कि हम बातें कर रहे थे कि नबी (ﷺ) तशरीफ़ लाए और पूछा: “क्या बातें कर रहे हो?” हमने कहा: “क़यामत का ज़िक्र कर रहे हैं।” आप (ﷺ) ने फरमाया: “क़यामत हरगिज़ कायम नहीं होगी जब तक तुम उससे पहले 10 निशानियाँ न देख लो:”

  1. धुआँ (Smoke): एक ऐसा धुआँ जो पूरी दुनिया को घेर लेगा।
  2. दज्जाल (Dajjal): काना दज्जाल जो खुदाई का दावा करेगा।
  3. दाब्-बतुल-अर्द (The Beast): एक अजीब जानवर जो जमीन से निकलेगा और लोगों से बात करेगा।
  4. सूरज का पश्चिम से निकलना: जिस दिन यह होगा, तौबा का दरवाज़ा बंद हो जाएगा।
  5. हज़रत ईसा (अ.स) का उतरना: वो दज्जाल को कत्ल करेंगे।
  6. याजूज और माजूज (Gog and Magog): एक फसादी कौम जो हर तरफ फैल जाएगी।
  7. तीन बड़े जलजले (Landslides): एक पूर्व (East) में।
  8. दूसरा पश्चिम (West) में।
  9. तीसरा अरब प्रायद्वीप (Arabian Peninsula) में।
  10. आग: जो यमन से निकलेगी और लोगों को हांकते हुए मैदान-ए-महशर की तरफ ले जाएगी। (सहीह मुस्लिम: 2901)

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Q. क़यामत कब आएगी?
A.

क़यामत के ठीक वक़्त का इल्म सिर्फ अल्लाह तआला को है। नबी करीम (ﷺ) को भी इसका ठीक वक़्त नहीं बताया गया, बस निशानियाँ बताई गई हैं।

Q. क़यामत की बड़ी निशानियाँ क्या हैं?
A.

क़यामत की बड़ी निशानियों में इमाम महदी का आना, दज्जाल का निकलना, हज़रत ईसा (अ.स) का आसमान से उतरना, याजूज-माजूज का निकलना और सूरज का पश्चिम से निकलना शामिल है।

Q. क्या क़यामत सिर्फ मुसलमानों पर आएगी?
A.

हदीस के मुताबिक़, क़यामत से पहले एक हवा चलेगी जिससे तमाम ईमान वाले वफ़ात पा जाएंगे। क़यामत का भयानक मंज़र सिर्फ बुरे लोगों (काफिरों) पर कायम होगा।

Q. हमें क़यामत के लिए क्या तैयारी करनी चाहिए?
A.

हमें चाहिए कि हम अल्लाह के हुक्मों पर चलें, नमाज़ की पाबंदी करें, गुनाहों से तौबा करें और हर वक़्त अपनी मौत और आख़िरत की तैयारी में रहें।


नतीजा:

दोस्तों! Qayamat Ki Nishaniyan जानने का मकसद सिर्फ़ जानकारी बढ़ाना नहीं है, बल्कि अपनी इस्लाह (सुधार) करना है। जो निशानियाँ पूरी हो चुकी हैं, वो हमें चेतावनी दे रही हैं कि वक़्त कम है।

अल्लाह हम सबको गुनाहों से बचने और नेक अमल करने की तौफ़ीक़ अता फरमाए। आमीन।

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