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Iffat Zia
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Pyare Nabi Ki Pyari Baatein: प्यारे नबी की 20+ प्यारी सुन्नतें और आदतें

Pyare Nabi Ki Pyari Baatein: जानिए हुज़ूर (ﷺ) की प्यारी आदतें, रोज़मर्रा की सुन्नतें, खाने-पीने, सोने और अख़लाक़ का सुन्नत तरीका।

Pyare Nabi Ki Pyari Baatein: प्यारे नबी की 20+ प्यारी सुन्नतें और आदतें

Table of Contents

प्यारे नबी की प्यारी बातें (Pyare Nabi Ki Pyari Baatein): इस्लाम दुनिया का सबसे खूबसूरत मज़हब है, और इसकी खूबसूरती हमारे प्यारे नबी हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम) की प्यारी आदतों और सुन्नतों से है।

अगर हम अपनी ज़िन्दगी नबी करीम (ﷺ) के बताए हुए तरीके (सुन्नत) के मुताबिक गुज़ारें, तो न सिर्फ हमें आखिरत में कामयाबी मिलेगी, बल्कि हमारी दुनियावी ज़िन्दगी भी सुकून और खुशहाली से भर जाएगी।

इस आर्टिकल में हम Pyare Nabi Ki Pyari Baatein, उनकी आदतें और रोज़मर्रा की सुन्नतें (खाने, पीने, सोने, पहनने वगैरह) जानेंगे।

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1. खाने की सुन्नतें (Eating Etiquettes)

हमारे नबी (ﷺ) ने खाने के भी आदाब सिखाए हैं। अगर हम इन पर अमल करें तो खाना भी इबादत बन जाता है:

  • दस्तरखान बिछाना: खाना हमेशा दस्तरखान बिछाकर खाएं।
  • हाथ धोना: खाने से पहले दोनों हाथ कलाई तक धोएं।
  • दुआ: खाना शुरू करने से पहले ‘बिस्मिल्लाह’ या ‘बिस्मिल्लाह व अला बरकतिल्लाह’ पढ़ें।
  • दाहिना हाथ: हमेशा सीधे (Right) हाथ से खाएं।
  • सामने से खाना: बर्तन में अपने सामने से खाएं, बीच में हाथ न डालें।
  • टेक न लगाना: टेक लगाकर खाना न खाएं।
  • बर्तन साफ़ करना: खाने के बाद बर्तन को उंगली से चाट कर साफ़ करें, इसमें बरकत है।
  • दुआ: खाने के बाद की दुआ पढ़ें: ‘अल्हम्दुलिल्लाहिल्लज़ी अत-अमना व सकाना व जा-अलना मिनल मुस्लिमीन’।

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2. पानी पीने की सुन्नतें (Drinking Water)

पानी पीने का सुन्नत तरीका यह है:

  • बैठकर पीना: पानी हमेशा बैठकर पिएं।
  • देखकर पीना: पानी पीने से पहले देख लें कि उसमें कुछ है तो नहीं।
  • सीधे हाथ से: गिलास को सीधे हाथ में पकड़ें।
  • तीन सांस में: पानी को तीन सांस में पिएं, एक सांस में गटकना मना है।
  • दुआ: पीने से पहले ‘बिस्मिल्लाह’ और पीने के बाद ‘अल्हम्दुलिल्लाह’ कहें।

3. सोने और जागने की सुन्नतें (Sleeping & Waking)

  • बिस्तर झाड़ना: सोने से पहले बिस्तर को तीन बार झाड़ लें।
  • वुज़ू करना: बा-वुज़ू होकर सोना सुन्नत है।
  • दाहिनी करवट: दाहिनी (Right) करवट पर लेटें और दाहिना हाथ गाल के नीचे रखें।
  • दुआ: सोने की दुआ पढ़ें: ‘अल्लाहुम्मा बिस्मिका अमूतु व अह्या’।
  • जागने पर: जब सोकर उठें तो चेहरे को हाथों से मलें और दुआ पढ़ें: ‘अल्हम्दुलिल्लाहिल्लज़ी अह्याना बादा मा अमातना व इलैहिन नुशूर’।
  • मिसवाक: उठने के बाद मिसवाक करना सुन्नत है।

4. कपड़े पहनने की सुन्नतें (Clothing)

  • सीधा हाथ: कपड़े पहनते वक़्त दाहिनी (Right) तरफ से शुरू करें (जैसे पहले दाहिनी आस्तीन पहनें)।
  • उतारना: कपड़े उतारते वक़्त बाईं (Left) तरफ से शुरू करें।
  • सादगी: हमारे नबी (ﷺ) सादे और साफ़ कपड़े पसंद करते थे। सफ़ेद रंग उन्हें बहुत पसंद था।
  • टखनों से ऊपर: मर्दों को पाजामा या लुंगी टखनों (Ankles) से ऊपर रखनी चाहिए।

5. बैतुल खला (Toilet) की सुन्नतें

  • सर ढकना: बैतुल खला जाने से पहले सर ढक लें और जूते/चप्पल पहन लें।
  • दुआ: दाखिल होने से पहले दुआ पढ़ें: ‘अल्लाहुम्मा इन्नी अऊज़ु बिका मिनल खुबुसि वल खबाइस’।
  • बायां पैर: अंदर जाते वक़्त पहले बायां (Left) पैर रखें।
  • बाहर आना: बाहर आते वक़्त पहले दाहिना (Right) पैर निकालें।
  • बाहर की दुआ: बाहर आकर कहें: ‘गुफ़रानक’ या दुआ पढ़ें: ‘अल्हम्दुलिल्लाहिल्लज़ी अज़हबा अन्निल अज़ा व आफानी’।

6. दूसरों के साथ बर्ताव (Social Manners)

हमारे नबी (ﷺ) के अखलाक (Manners) सबसे बेहतरीन थे। उनकी कुछ प्यारी बातें:

  • सलाम करना: मिलने पर पहले सलाम करें (अस्सलामु अलैकुम)।
  • मुस्कुराना: अपने भाई से मुस्कुरा कर मिलना भी सदका है।
  • नरमी: बात करते वक़्त नरमी बरतें, चीख-चिल्ला कर बात न करें।
  • बीमार की अयादत: अगर कोई बीमार हो तो उसे देखने जाएं।
  • पड़ोसी का हक़: पड़ोसियों के साथ अच्छा सुलूक करें, चाहे वो गैर-मुस्लिम ही क्यों न हों।
  • मेहमान नवाज़ी: मेहमान की इज़्ज़त करें।

7. औरतों के लिए पर्दा

हमारे नबी (ﷺ) ने हया और पर्दे को ईमान का हिस्सा बताया है। औरतों के लिए हुक्म है कि जब घर से निकलें तो चादर या बुर्के से खुद को ढांप कर निकलें। पर्दा औरत की इज़्ज़त और हिफाज़त का जरिया है।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. Pyare Nabi Ki Pyari Baatein क्या हैं और इन्हें अपनाना क्यों ज़रूरी है?
A.

प्यारे नबी (ﷺ) के रोज़मर्रा के आदाब—जैसे मुस्कुराकर बात करना, सीधे हाथ से खाना-पीना, सलाम में पहल करना और सच बोलना—ही सुन्नतें हैं। इन्हें अपनाने से दुनिया में सुकून और आख़िरत में नबी करीम (ﷺ) की शफ़ाअत हासिल होती है।

Q. सुन्नत और फ़र्ज़ में क्या फ़र्क़ होता है?
A.

फ़र्ज़ वो अहकाम हैं जिनका करना हर मुसलमान पर लाज़िम है (जैसे 5 वक़्त की नमाज़, रमज़ान के रोज़े), जबकि सुन्नत हुज़ूर (ﷺ) का पसंदीदा तरीका और अमल है। सुन्नत पर चलने से अल्लाह की ख़ास मोहब्बत और भारी सवाब मिलता है।

Q. रसूलुल्लाह (ﷺ) की सबसे पसंदीदा आदतें कौन सी थीं?
A.

आप (ﷺ) हमेशा सच बोलते, अमानतदारी बरतते, बच्चों से शफ़क़त करते, ग़रीबों की मदद करते, बात करते वक़्त मुस्कुराते और कभी किसी से बदला लेने की नीयत नहीं रखते थे।

Q. क्या रोज़मर्रा के कामों में सुन्नत की नीयत करने से सवाब मिलता है?
A.

हाँ, अगर आप खाना खाने, पानी पीने या सोने से पहले नबी (ﷺ) की सुन्नत की नीयत कर लें और मसनून दुआएं पढ़ लें, तो आपका वह रोज़मर्रा का दुनियावी काम भी बा-अज्र इबादत बन जाता है।

Q. नबी करीम (ﷺ) का पसंदीदा लिबास और रंग कौन सा था?
A.

नबी करीम (ﷺ) सादा और साफ़-सुथरा कुर्ता (क़मीस) पसंद फरमाते थे। रंगों में आपको सफ़ेद रंग सबसे ज़्यादा पसंद था और कभी-कभी आपने सब्ज़ (हरा) अमामा भी बांधा।


अगर हम इन छोटी-छोटी सुन्नतों को अपनी ज़िन्दगी में शामिल कर लें, तो हमारी दुनिया भी संवर जाएगी और आखिरत भी। अल्लाह हमें प्यारे नबी (ﷺ) की सुन्नतों पर चलने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

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