Namaz Ka Tarika in Hindi - नमाज़ पढ़ने का सही तरीका और रकात
Namaz Ka Tarika (नमाज़ का तरीका): जानिए नमाज़ पढ़ने का सही तरीका, नमाज़ की शर्तें, फ़र्ज़, और हर नमाज़ (फज्र, ज़ुहर, असर, मगरिब, ईशा) की रकात की जानकारी।

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नमाज़ (Salah) इस्लाम का दूसरा सबसे अहम रुकन (स्तंभ) है। हर बालिग मुसलमान मर्द और औरत पर दिन में 5 वक़्त की नमाज़ फ़र्ज़ है। नमाज़ अल्लाह के करीब होने और गुनाहों से बचने का बेहतरीन जरिया है।
अक्सर लोग Namaz Ka Tarika सही से नहीं जानते या उन्हें नमाज़ की रकातों और दुआओं में उलझन होती है। इस आर्टिकल में हम आसान हिंदी में नमाज़ पढ़ने का मुकम्मल तरीका (Step-by-Step) जानेंगे।
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नमाज़ की 7 शर्तें (Sharayit-e-Namaz)
नमाज़ शुरू करने से पहले 7 शर्तों का पूरा होना ज़रूरी है, वरना नमाज़ नहीं होगी:
1. बदन का पाक होना (Body Cleanliness)
नमाज़ पढ़ने वाले का शरीर हर तरह की गंदगी (नजासत) से पाक होना चाहिए।
- अगर वुज़ू नहीं है, तो वुज़ू (Wazu) करना फ़र्ज़ है।
- अगर ग़ुस्ल की ज़रूरत है (जैसे एहतलाम या हमबिस्तरी के बाद), तो ग़ुस्ल (Ghusl) करना फ़र्ज़ है।
2. कपड़ों का पाक होना (Clean Clothes)
जिस कपड़े में नमाज़ पढ़ रहे हैं, उसका पाक होना ज़रूरी है। अगर कपड़े पर पेशाब, खून, शराब या कोई और नजासत लगी हो, तो उसे धोकर पाक करें। ये भी पढ़े: Paak Karne Ka Tareeqa | कपड़े पाक करने का तरीका
3. जगह का पाक होना (Clean Place)
जिस जगह नमाज़ पढ़ी जा रही है (जहाँ पैर और माथा रखा जाएगा), वह जगह पाक होनी चाहिए। अगर ज़मीन पर गंदगी है, तो उस पर पाक जानमाज़ या कपड़ा बिछाकर नमाज़ पढ़ सकते हैं।
4. सतर का छुपाना (Covering the Body)
नमाज़ के लिए शरीर के कुछ हिस्सों का ढकना फ़र्ज़ है:
- मर्दों के लिए: नाभि (Navel) से लेकर घुटनों के नीचे तक।
- औरतों के लिए: चेहरा, हथेलियां और पंजों के अलावा पूरा शरीर (बाल और गर्दन समेत) ढकना ज़रूरी है।
5. नमाज़ का वक़्त होना (Time)
हर नमाज़ अपने मुकर्रर वक़्त पर ही फ़र्ज़ है। वक़्त से पहले पढ़ी गई नमाज़ नहीं होगी और वक़्त गुज़रने के बाद पढ़ी गई नमाज़ “कज़ा” कहलाएगी।
6. किबला रुख होना (Facing Qibla)
नमाज़ के लिए काबा शरीफ (Makkah) की तरफ मुँह करना ज़रूरी है।
7. नियत करना (Intention)
नियत दिल के इरादे का नाम है। नमाज़ शुरू करने से पहले दिल में पक्का इरादा करें कि “मैं फलां नमाज़ (जैसे फज्र), अल्लाह के वास्ते पढ़ रहा हूँ”।
- ज़बान से कहना बेहतर है, लेकिन ज़रूरी नहीं। दिल का इरादा काफी है।
नमाज़ के 6 फ़र्ज़ (Arkan-e-Namaz)
नमाज़ के अंदर 6 चीज़ें फ़र्ज़ हैं (इन्हें अरकान भी कहते हैं)। अगर इनमें से एक भी जानबूझकर या भूल से छूट जाए, तो नमाज़ नहीं होगी और दोबारा पढ़नी पड़ेगी:
- तकबीर-ए-तहरीमा (Takbeer-e-Tahrima): नमाज़ शुरू करते वक़्त ‘अल्लाहु अकबर’ कहना। यह नमाज़ का दरवाज़ा है।
- क़याम (Qayam): फ़र्ज़ और वाजिब नमाज़ में सीधा खड़ा होना। (अगर बीमारी या मजबूरी हो तो बैठकर पढ़ सकते हैं)।
- क़िरात (Qirat): कुरान की कम से कम एक छोटी सूरह या तीन छोटी आयतें पढ़ना।
- रुकू (Ruku): घुटनों पर हाथ रखकर झुकना, इतना कि पीठ सीधी हो जाए।
- सज्दा (Sajda): ज़मीन पर माथा और नाक टेकना। हर रकात में दो सज्दे फ़र्ज़ हैं।
- क़ादा-ए-अखीरा (Qaada-e-Akhira): नमाज़ के आखिर में तशह्हुद (अत्तहियात) पढ़ने की मिकदार बैठना।
नमाज़ के वाजिबात (Wajibat-e-Namaz)
नमाज़ में फ़र्ज़ के बाद दूसरा दर्जा वाजिब का है। अगर भूल से कोई वाजिब छूट जाए, तो सज्दा-ए-सहू करने से नमाज़ हो जाती है। लेकिन अगर जानबूझकर छोड़ा जाए, तो नमाज़ दोबारा पढ़नी पड़ती है।
नमाज़ के 14 अहम वाजिबात:
- सूरह फातिहा पढ़ना: फ़र्ज़ की पहली दो रकातों में और बाकी नमाज़ों की हर रकात में।
- सूरह मिलाना: सूरह फातिहा के बाद कोई सूरह या 3 छोटी आयतें पढ़ना।
- तरतीब: नमाज़ के अरकान को तरतीब से अदा करना।
- क़ौमा: रुकू से उठकर सीधा खड़ा होना।
- जलसा: दो सज्दों के बीच सीधा बैठना।
- तादील-ए-अरकान: रुकू, सज्दा, क़ौमा और जलसा में इत्मीनान करना।
- क़ादा-ए-उला: 3 या 4 रकात वाली नमाज़ में 2 रकात के बाद बैठना।
- तशह्हुद (अत्तहियात): दोनों क़ादों में पढ़ना।
- सलाम: लफ्ज़ ‘सलाम’ से नमाज़ खत्म करना।
- दुआ-ए-क़ुनूत: वित्र की नमाज़ में पढ़ना।
- तकबीर-ए-क़ुनूत: वित्र में दुआ-ए-क़ुनूत के लिए तकबीर कहना।
- ईद की तकबीरें: दोनों ईदों में 6 ज़ायद तकबीरें।
- जहरी और सिर्री: इमाम का आवाज़ से या आहिस्ता किरात करना (जहाँ जैसा हुक्म हो)।
- इमाम की पैरवी: मुक्तदी का इमाम के पीछे नमाज़ पढ़ना।
नमाज़ की सुन्नतें (Sunnahs of Namaz)
सुन्नत वो अमल है जो नबी (ﷺ) ने किया और पसंद फरमाया। जानबूझकर छोड़ने से सवाब कम होता है, लेकिन नमाज़ नहीं टूटती। यहाँ नमाज़ की सुन्नतों की तफसील दी गई है:
1. कयाम (Qayam) की सुन्नतें
- तकबीर-ए-तहरीमा (शुरुआत) के वक़्त सीधे खड़े होना (सर न झुकाना)।
- मर्दों का दोनों पैरों के बीच लगभग 4 उंगलियों का फासला रखना।
- तकबीर के लिए मर्दों का हाथ कानों तक और औरतों का कंधों तक उठाना।
- हाथ उठाते वक़्त हथेलियां किबला रुख रखना और उंगलियां अपनी हालत पर रखना (न ज्यादा खुली, न बंद)।
- इमाम के ‘अल्लाहु अकबर’ कहने के फौरन बाद मुक्तदी का तकबीर कहना।
- हाथ बांधना: मर्दों का नाभि के नीचे (दाहिना हाथ बाएं हाथ के ऊपर) और औरतों का सीने पर हाथ रखना।
- सना (Sana) पढ़ना।
- तअव्वुज़ (अऊज़ु बिल्लाह…) पढ़ना।
- तस्मिया (बिस्मिल्लाह…) पढ़ना।
- सूरह फातिहा के बाद आहिस्ता से ‘आमीन’ कहना।
2. रुकू (Ruku) की सुन्नतें
- रुकू में जाते और उठते वक़्त ‘अल्लाहु अकबर’ कहना।
- रुकू में दोनों हाथों से घुटनों को मजबूती से पकड़ना (मर्द उंगलियां खुली रखें, औरतें मिलाकर रखें)।
- मर्दों का रुकू में पीठ बिल्कुल सीधी रखना (सर और पीठ एक सीध में)।
- रुकू में कम से कम 3 बार “सुबहान रब्बी-अल अज़ीम” कहना।
3. क़ौमा (Qawma - रुकू से उठना) की सुन्नतें
- रुकू से उठते वक़्त इमाम का “समिअल्लाहु लिमन हमिदह” कहना।
- खड़े होकर “रब्बना लकल हम्द” कहना।
- इत्मीनान से सीधा खड़ा होना।
4. सज्दा (Sajda) की सुन्नतें
- सज्दे में जाते वक़्त ‘अल्लाहु अकबर’ कहना।
- सज्दे में जाने की तरतीब: पहले घुटने, फिर हाथ, फिर नाक, फिर माथा ज़मीन पर रखना।
- सज्दे में चेहरा दोनों हथेलियों के बीच रखना।
- मर्दों का पेट रानों से और बाज़ू बगलों से जुदा रखना (औरतें सिमट कर सज्दा करें)।
- सज्दे में कम से कम 3 बार “सुबहान रब्बी-अल आला” कहना।
- सज्दे से उठते वक़्त पहले माथा, फिर नाक, फिर हाथ, फिर घुटने उठाना।
5. क़ादा (Qaada - बैठना) की सुन्नतें
- मर्दों का बायां पैर बिछाकर उस पर बैठना और दाहिना पैर खड़ा रखना (उंगलियां किबला रुख)।
- औरतों का दोनों पैर दाहिनी तरफ निकालकर ज़मीन पर बैठना।
- हाथों को रानों (Thighs) पर रखना।
- अत्तहियात में शहादत की उंगली से इशारा करना।
- आखिरी क़ादा में दरूद शरीफ पढ़ना।
- दरूद के बाद दुआ-ए-मासूरा पढ़ना।
6. सलाम (Salam) की सुन्नतें
- सलाम फेरते वक़्त पहले दाहिनी (Right) तरफ, फिर बाईं (Left) तरफ चेहरा घुमाना।
- सलाम में फरिश्तों, इमाम और नमाज़ियों की नियत करना।
Namaz Ka Tarika (Step-by-Step Guide)
यहाँ हम 2 रकात नमाज़ पढ़ने का तरीका बता रहे हैं। 3 या 4 रकात वाली नमाज़ का तरीका भी इसी बुनियाद पर है।
1. नियत और तकबीर
सबसे पहले किबला रुख खड़े हो जाएं। दिल में इरादा करें (जैसे: “मैं नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ फज्र की, वास्ते अल्लाह के…”)। फिर दोनों हाथ कानों तक उठाएं (औरतें कंधों तक) और ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर हाथ नाभि के नीचे बांध लें (औरतें सीने पर)।
2. सना (Sana)
हाथ बांधने के बाद सबसे पहले सना (Sana) पढ़ें: “सुबहानकल्लाहुम्मा व बि-हम्दिका, व तबारकस्मुका, व तआला जद्दुका, व ला इलाहा गैरुक।“
3. क़िरात (Surah Fatiha & Surah)
फिर “अऊज़ु बिल्लाहि मिनश शैतानिर रजीम” और “बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम” पढ़ें। इसके बाद सूरह फातिहा (अल्हम्दु शरीफ) पढ़ें और आखिर में आमीन कहें। फिर कुरान की कोई भी सूरह या कम से कम 3 छोटी आयतें पढ़ें (जैसे सूरह इखलास)।
4. रुकू (Ruku)
फिर ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए झुकें (रुकू में जाएं)। घुटनों को मजबूती से पकड़ें और कमर सीधी रखें। रुकू में कम से कम 3 बार कहें: “सुबहान रब्बी-अल अज़ीम” (पाक है मेरा रब जो अज़मत वाला है)।
5. क़ौमा (Qawma)
फिर “समिअल्लाहु लिमन हमिदह” कहते हुए सीधे खड़े हो जाएं। खड़े होकर कहें: “रब्बना लकल हम्द”।
6. सज्दा (Sajda)
फिर ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए सज्दे में जाएं। पहले घुटने, फिर हाथ, फिर नाक और माथा ज़मीन पर रखें। सज्दे में कम से कम 3 बार कहें: “सुबहान रब्बी-अल आला” (पाक है मेरा रब जो सबसे बुलंद है)।
7. जलसा और दूसरा सज्दा
फिर ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर उठें और इत्मीनान से बैठ जाएं (जलसा)। फिर दोबारा ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर दूसरा सज्दा करें और वही तस्बीह (सुबहान रब्बी-अल आला) पढ़ें।
8. दूसरी रकात
दूसरे सज्दे के बाद ‘अल्लाहु अकबर’ कहते हुए सीधे खड़े हो जाएं। यह दूसरी रकात है। इसमें सना नहीं पढ़नी। सिर्फ बिस्मिल्लाह, सूरह फातिहा और कोई सूरह पढ़ें। फिर रुकू और दोनों सज्दे करें।
9. क़ादा (Qaada - Sitting)
दूसरी रकात के दोनों सज्दों के बाद बैठ जाएं। अब अत्तहियात (Tashahhud) पढ़ें: “अत्तहियातु लिल्लाहि वस्सलवातु वत्तय्यिबात…”
अगर 2 रकात वाली नमाज़ है, तो इसके बाद दरूद शरीफ और दुआ-ए-मासूरा पढ़ें। (अगर 3 या 4 रकात वाली नमाज़ है, तो अत्तहियात के बाद खड़े हो जाएं और बाकी रकातें पूरी करें)।
10. सलाम (Salam)
दुआ-ए-मासूरा पढ़ने के बाद, पहले दाहिनी (Right) तरफ चेहरा घुमाकर कहें: “अस्सलामु अलैकुम व रहमतुल्लाह”। फिर बाईं (Left) तरफ चेहरा घुमाकर यही कहें।
आपकी नमाज़ मुकम्मल हुई!
5 वक़्त की नमाज़ की रकातें (Rakat Chart)
| नमाज़ | सुन्नत (पहले) | फ़र्ज़ | सुन्नत (बाद में) | नफ़िल/वित्र | कुल रकात |
|---|---|---|---|---|---|
| फज्र (Fajr) | 2 | 2 | - | - | 4 |
| ज़ुहर (Zuhr) | 4 | 4 | 2 | 2 (नफ़िल) | 12 |
| असर (Asr) | 4 | 4 | - | - | 8 |
| मगरिब (Maghrib) | - | 3 | 2 | 2 (नफ़िल) | 7 |
| ईशा (Isha) | 4 | 4 | 2 | 2 (नफ़िल) + 3 (वित्र) + 2 (नफ़िल) | 17 |
नोट: फ़र्ज़ नमाज़ पढ़ना सबसे ज़रूरी है। सुन्नत-ए-मुअक्कदा (जो नबी ﷺ ने पाबंदी से पढ़ी) को भी नहीं छोड़ना चाहिए।
नमाज़ के बाद की तस्बीह
नमाज़ के बाद यह तस्बीह पढ़ना बहुत सवाब का काम है (तस्बीह-ए-फातिमा):
- 33 बार: सुभानअल्लाह (SubhanAllah)
- 33 बार: अल्हम्दुलिल्लाह (Alhamdulillah)
- 34 बार: अल्लाहु अकबर (Allahu Akbar)
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नमाज़ किन चीज़ों से टूट जाती है? (Mufsidat-e-Namaz)
नमाज़ के दौरान कुछ काम ऐसे हैं जिनसे नमाज़ टूट जाती है (फासिद हो जाती है) और उसे दोबारा पढ़ना ज़रूरी होता है:
- बात करना: जानबूझकर या भूलकर बात करना, चाहे थोड़ा हो या ज़्यादा।
- सलाम करना या जवाब देना: नमाज़ में किसी को सलाम करना या किसी के सलाम का जवाब देना।
- खाना-पीना: नमाज़ में कुछ भी खाना या पीना। (अगर दांतों में फंसी चीज़ चने के बराबर या उससे बड़ी हो और उसे निगल लिया, तो नमाज़ टूट जाएगी)।
- अमल-ए-कसीर (Amal-e-Kathir): कोई ऐसा काम करना जिससे देखने वाले को लगे कि आप नमाज़ नहीं पढ़ रहे (जैसे दोनों हाथों से कपड़े ठीक करना या खुजाना)।
- सीधा (Qibla) से फिरना: अगर सीना किबला (काबा) की तरफ से फिर जाए।
- सतर खुलना: अगर शरीर का वो हिस्सा खुल जाए जिसका ढकना फ़र्ज़ है और वो एक रुकन (जैसे 3 बार सुभानअल्लाह कहने की मिकदार) तक खुला रहे।
- हंसना: नमाज़ में आवाज़ के साथ हंसना (कहकहा)। इससे नमाज़ और वुज़ू दोनों टूट जाते हैं।
- वुज़ू टूटना: नमाज़ के दौरान हवा खारिज होने या किसी और वजह से वुज़ू टूट जाए।
- दर्द या मुसीबत पर आवाज़ निकालना: “आह”, “उह” करना या रोना (अगर जन्नत/दोज़ख की याद में रोए तो नहीं टूटती, लेकिन दर्द या दुनियावी गम में रोए तो टूट जाती है)।
नमाज़ की अन्य किस्में (Other Types of Namaz)
फ़र्ज़ नमाज़ों के अलावा भी कुछ नमाज़ें और हालात होते हैं जिनके बारे में जानना ज़रूरी है:
- Tahajjud Namaz Ka Tarika: रात की यह नमाज़ अल्लाह को बहुत पसंद है।
- Safar Me Namaz Ka Tarika: सफ़र में नमाज़ कैसे छोटी (क़स्र) की जाती है।
- Qaza Namaz Ka Tarika: अगर पुरानी नमाज़ें छूट गई हैं तो उन्हें कैसे अदा करें।
- Salat ut Tauba Ka Tarika: गुनाहों से माफ़ी मांगने के लिए पढ़ी जाने वाली नमाज़।
- Salat ul Tasbeeh Namaz Ka Tarika: गुनाहों की माफ़ी वाली विशेष नमाज़।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. अगर नमाज़ में कोई गलती हो जाए तो क्या करें?
अगर नमाज़ में कोई वाजिब छूट जाए या भूल से कोई गलती हो जाए, तो आखिर में सज्दा-ए-सहू (Sajda Sahw) करने से नमाज़ हो जाती है।
Q. क्या टोपी पहनना ज़रूरी है?
टोपी पहनना नमाज़ के लिए शर्त नहीं है, लेकिन यह अदब है और सुन्नत है। नंगे सर भी नमाज़ हो जाती है लेकिन मकरूह (नापसंद) हो सकती है अगर जानबूझकर आदत बना ली जाए।
Q. औरतों की नमाज़ में क्या फर्क है?
औरतों की नमाज़ का तरीका मर्दों जैसा ही है, बस कुछ फर्क हैं: औरतें तकबीर के वक़्त हाथ कंधों तक उठाती हैं, हाथ सीने पर बांधती हैं, और सज्दे में सिमट कर (जमीन से चिपक कर) रहती हैं।
Q. वित्र की नमाज़ कब पढ़ी जाती है?
वित्र की नमाज़ ईशा की नमाज़ के बाद पढ़ी जाती है। यह वाजिब है और इसमें दुआ-ए-क़ुनूत पढ़ी जाती है।
Q. क्या नियत ज़बान से कहना ज़रूरी है?
नहीं, नियत का ताल्लुक दिल से है। अगर दिल में इरादा है कि आप ज़ुहर की नमाज़ पढ़ रहे हैं, तो काफी है। ज़बान से कहना मुस्तहब (अच्छा) है ताकि ध्यान जमा रहे।
Q. क्या बारीक कपड़ों में नमाज़ हो जाती है?
अगर कपड़ा इतना बारीक है कि उससे शरीर का वो हिस्सा दिखाई दे रहा है जिसका ढकना फ़र्ज़ है (सतर), तो नमाज़ नहीं होगी।
Q. क्या फ़र्ज़ नमाज़ की तीसरी और चौथी रकात में सूरह मिलाना वाजिब है?
नहीं, फ़र्ज़ नमाज़ की तीसरी और चौथी रकात में सूरह मिलाना वाजिब नहीं है, सिर्फ सूरह फातिहा पढ़ना सुन्नत/मुस्तहब है।
Q. क्या सुन्नत-ए-मुअक्कदा छोड़ने से गुनाह होता है?
जी हाँ, सुन्नत-ए-मुअक्कदा (जैसे फज्र की 2 सुन्नत) को बिना किसी उज़्र (मजबूरी) के छोड़ना और इसकी आदत बना लेना गुनाह है।
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