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Fajar Namaz Ki Rakat aur Tarika - फज्र की नमाज़ की रकात और सुन्नतें
Fajar Namaz Ki Rakat (फज्र की नमाज़): जानिए फज्र की नमाज़ में कितनी रकात होती हैं? सुन्नत और फ़र्ज़ का तरीका, और अगर जमात खड़ी हो जाए तो सुन्नत पढ़ें या नहीं?

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फज्र की नमाज़ (Fajr Namaz) दिन की सबसे पहली नमाज़ है। यह नमाज़ सुस्ती को दूर करती है और दिन की शुरुआत अल्लाह के ज़िक्र से कराती है।
अक्सर लोग Fajar Namaz Ki Rakat और इसके मसायल (Rules) के बारे में जानना चाहते हैं, खासकर फज्र की सुन्नतों के बारे में।
इस आर्टिकल में हम फज्र की रकात, तरीका और सुन्नतों से जुड़े अहम मसायल जानेंगे।
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Fajar Namaz Ki Rakat (फज्र की रकात)
फज्र की नमाज़ में कुल 4 रकात होती हैं:
- 2 रकात सुन्नत-ए-मुअक्कदा (पहले पढ़ी जाती हैं)
- 2 रकात फ़र्ज़ (जमात के साथ या अकेले)
तरतीब: पहले 2 रकात सुन्नत पढ़ी जाती है, उसके बाद 2 रकात फ़र्ज़।
फज्र की सुन्नतों की फजीलत
फज्र की 2 रकात सुन्नत की बहुत बड़ी फजीलत है। इसे सुन्नत-ए-मुअक्कदा कहा जाता है, यानी नबी करीम (ﷺ) ने इसे कभी नहीं छोड़ा।
हदीस में आता है:
“फज्र की दो रकात (सुन्नतें) दुनिया और दुनिया में जो कुछ है, उन सबसे बेहतर है।” (सहीह मुस्लिम)
एक और हदीस में है:
“फज्र की दो रकात सुन्नत न छोड़ो, चाहे घोड़े तुम्हें रौंद डालें (यानी चाहे कैसे भी हालात हों)।” (अबू दाऊद)
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अगर जमात खड़ी हो जाए तो सुन्नत पढ़ें या नहीं?
यह एक बहुत अहम मसला है। अक्सर लोग मस्जिद पहुँचते हैं और जमात खड़ी हो चुकी होती है। ऐसे में क्या करें?
हनफी मसलक के मुताबिक: अगर आपको उम्मीद है कि आप सुन्नतें पढ़कर इमाम साहब के साथ दूसरी रकात के रुकू या तशह्हुद (अत्तहियात) तक शामिल हो जाएंगे, तो आपको चाहिए कि मस्जिद के किसी कोने में (सफ से दूर) जल्दी से सुन्नतें पढ़ लें और फिर जमात में शामिल हो जाएं।
लेकिन अगर डर हो कि सुन्नत पढ़ने में फ़र्ज़ नमाज़ पूरी निकल जाएगी, तो सुन्नत छोड़ दें और जमात में शामिल हो जाएं।
नोट: अगर फ़र्ज़ नमाज़ शुरू हो चुकी हो, तो सुन्नतें सफ (Line) के बीच में न पढ़ें, बल्कि किसी खम्भे के पीछे या बरामदे में पढ़ें।
छूटी हुई सुन्नत कब पढ़ें? (Qaza of Sunnah)
अगर किसी वजह से फज्र की सुन्नतें छूट जाएं और आपने सिर्फ फ़र्ज़ पढ़ी हो, तो:
- सूरज निकलने से पहले: फज्र की फ़र्ज़ नमाज़ के बाद सूरज निकलने तक कोई नफिल या सुन्नत पढ़ना मना है। इसलिए फौरन बाद न पढ़ें।
- सूरज निकलने के बाद: सूरज निकलने के 15-20 मिनट बाद (इशराक के वक़्त) आप छूटी हुई सुन्नत की कज़ा पढ़ सकते हैं।
Fajar Ki Namaz Ka Tarika
फज्र की नमाज़ का तरीका बाकी नमाज़ों जैसा ही है।
- नियत: “मैं नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ (सुन्नत/फ़र्ज़) फज्र की, वास्ते अल्लाह के…”
- तकबीर: ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर हाथ बांधें।
- सना, सूरह फातिहा और सूरह: पहली और दूसरी रकात में सूरह फातिहा के बाद कोई सूरह मिलाएं।
- रुकू और सज्दा: आम नमाज़ की तरह रुकू और दो सज्दे करें।
- कादा और सलाम: दूसरी रकात के बाद अत्तहियात, दरूद शरीफ और दुआ पढ़कर सलाम फेर दें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. फज्र की नमाज़ का वक़्त कब तक रहता है?
फज्र का वक़्त सुबह सादिक (Subah Sadiq) से लेकर सूरज निकलने (Sunrise) तक रहता है। सूरज निकलने के बाद नमाज़ कज़ा हो जाती है।
Q. क्या फज्र की सुन्नत छोड़ सकते हैं?
फज्र की सुन्नत ‘सुन्नत-ए-मुअक्कदा’ है, इसे बिना किसी सख्त मजबूरी के छोड़ना गुनाह है।
Q. फज्र की नमाज़ में कौन सी सूरह पढ़नी चाहिए?
फज्र में लंबी सूरह पढ़ना सुन्नत है, लेकिन अगर वक़्त कम हो तो छोटी सूरह (जैसे सूरह इखलास, फलक, नास) भी पढ़ सकते हैं।
अल्लाह हमें फज्र की नमाज़ पाबंदी से पढ़ने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।
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