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Zina Kya Hai Aur Iski Saza - इस्लाम में ज़िना की हकीकत और अज़ाब
Zina Kya Hai: इस्लाम में ज़िना (Adultery) एक कबीरा गुनाह है। जानिए ज़िना की परिभाषा, इसकी दुनिया और आख़िरत में सज़ा, और इससे बचने के तरीके।

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ज़िना (Zina) इस्लाम में सबसे बड़े गुनाहों (गुनाह-ए-कबीरा) में से एक है। आज के दौर में बेहयाई और फहाशी इतनी आम हो गई है कि लोग इसे मामूली समझने लगे हैं, जबकि अल्लाह ने इसे “बहुत बुरा रास्ता” कहा है।
अक्सर नौजवान Zina Kya Hai और इसकी सख्ती से वाकिफ नहीं होते और अनजाने में इस दलदल में फंस जाते हैं।
इस आर्टिकल में हम कुरान और हदीस की रौशनी में जानेंगे कि ज़िना क्या है, इसकी सज़ा क्या है और इससे कैसे बचा जा सकता है।
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ज़िना क्या है? (What is Zina?)
इस्लाम में, निकाह (शादी) के बगैर किसी मर्द और औरत का जिस्मानी ताल्लुक (Sexual Intercourse) कायम करना ज़िना कहलाता है।
लेकिन ज़िना सिर्फ हमबिस्तरी तक सीमित नहीं है। हदीस में आँखों, कानों और जुबान के ज़िना का भी ज़िक्र है जो असल ज़िना की तरफ ले जाते हैं।
नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया:
“आँखों का ज़िना (गैर-महरम को) देखना है, कानों का ज़िना (गंदी बातें) सुनना है, जुबान का ज़िना (गंदी बातें) करना है, हाथ का ज़िना पकड़ना है, पैर का ज़िना चलकर जाना है, और शर्मगाह इसकी तस्दीक या झुठलाती है।” (सहीह मुस्लिम)
कुरान में ज़िना की मज़म्मत
अल्लाह तआला कुरान में फरमाता है:
“और ज़िना के करीब भी न जाओ, बेशक वह बेहयाई है और बहुत बुरा रास्ता है।” (सूरह इसरा: 32)
अल्लाह ने यह नहीं कहा कि ज़िना मत करो, बल्कि कहा कि “करीब भी न जाओ”। इसका मतलब है कि वो तमाम रास्ते जो ज़िना की तरफ ले जाते हैं (जैसे गंदी फिल्में, फ्री-मिक्सिंग, तन्हाई में मिलना) उनसे भी बचना ज़रूरी है।
ज़िना की सज़ा (Punishment of Zina)
इस्लाम में ज़िना की सज़ा बहुत सख्त है ताकि समाज पाक-साफ़ रहे।
दुनिया में सज़ा:
- गैर-शादीशुदा (Unmarried): अगर कोई कुंवारा ज़िना करे, तो उसकी सज़ा 100 कोड़े हैं। (सूरह नूर: 2)
- शादीशुदा (Married): अगर शादीशुदा होने के बावजूद ज़िना करे, तो इस्लामी कानून में उसकी सज़ा रजम (पत्थर मारकर हलाक करना) है। (सहीह बुखारी)
आख़िरत का अज़ाब:
- नबी (ﷺ) ने मेराज की रात देखा कि कुछ लोग (मर्द और औरतें) आग के तंदूर में जल रहे हैं और चीख रहे हैं। जिब्रईल (अ.स) ने बताया कि ये वो लोग हैं जो ज़िना करते थे। (सहीह बुखारी)
- एक हदीस में है कि ज़िना करने वालों के चेहरों से कयामत के दिन आग भड़केगी।
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ज़िना के नुकसान
- ईमान का निकल जाना: हदीस में है कि जब कोई ज़िना करता है, तो ईमान उसके दिल से निकलकर सर पर साये की तरह हो जाता है। (तिर्मिज़ी)
- चेहरे का नूर खत्म: ज़िना करने वाले के चेहरे से रौनक और नूर खत्म हो जाता है।
- गरीबी और मोहताजी: यह गुनाह घर में नहूसत और गरीबी लाता है।
- दुआ कबूल न होना: ऐसे शख्स की दुआएं रद्द कर दी जाती हैं।
ज़िना से कैसे बचें?
- नज़रों की हिफाज़त: अपनी नज़रें नीची रखें। गैर-महरम को घूरना शैतान का तीर है।
- जल्द निकाह: अगर मुमकिन हो तो जल्द शादी करें। यह पाक-दामनी का बेहतरीन जरिया है।
- तन्हाई से बचें: किसी गैर-महरम के साथ अकेले में न मिलें। हदीस में है कि “जब कोई मर्द और औरत अकेले होते हैं, तो तीसरा शैतान होता है।”
- बुरी सोहबत छोड़ें: ऐसे दोस्तों से दूर रहें जो गंदी बातें करते हों या गुनाह की तरफ बुलाते हों।
- नमाज़ की पाबंदी: “बेशक नमाज़ बेहयाई और बुरे कामों से रोकती है।” (सूरह अनकबूत: 45)
क्या ज़िना की तौबा कबूल होती है?
हाँ, अल्लाह बहुत माफ़ करने वाला है। अगर किसी से यह गुनाह हो गया हो, तो उसे मायूस नहीं होना चाहिए। सच्ची तौबा (Tawbah) की शर्तें ये हैं:
- गुनाह पर शर्मिंदा हो।
- फौरन गुनाह छोड़ दे।
- आइंदा न करने का पक्का इरादा करे।
- अल्लाह से रो-रो कर माफ़ी मांगे।
“अल्लाह अपने बंदों की तौबा कबूल करता है और बुराइयों को माफ़ करता है।” (सूरह शूरा: 25)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या ज़िना करने वाले की शादी हो सकती है?
हाँ, अगर उसने सच्ची तौबा कर ली है तो वह शादी कर सकता है। लेकिन तौबा के बगैर ज़िनाकार का निकाह पाक-दामन से करना मना है (कुछ उलमा के नज़दीक)।
Q. क्या हाथ से गंदा काम करना (Masturbation) ज़िना है?
यह भी बेहयाई और गुनाह है, और ज़िना की एक किस्म (हाथ का ज़िना) मानी जाती है। इससे बचना ज़रूरी है।
Q. अगर ज़िना जबरदस्ती (Rape) हुआ हो तो?
अगर किसी के साथ ज़बरदस्ती हुई है, तो उस पर कोई गुनाह नहीं है। गुनाह सिर्फ ज़बरदस्ती करने वाले पर है। मजलूम को अल्लाह सबर का अज्र देगा।
अल्लाह हम सबको और हमारी आने वाली नस्लों को ज़िना और बेहयाई की लानत से महफूज़ रखे। आमीन।
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