Taraweeh Ki Namaz Ka Tarika: रकात, नियत और दुआ
Taraweeh Ki Namaz Ka Tarika: तरावीह की नमाज़ कैसे पढ़ी जाती है? जानिए 20 रकात तरावीह का तरीका, नियत और हर 4 रकात के बाद की दुआ।

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तरावीह (Taraweeh) रमज़ान के महीने की एक खास नमाज़ है जो ईशा की नमाज़ के बाद पढ़ी जाती है। यह सुन्नत-ए-मुअक्कदा है, यानी इसे बिला उज़्र छोड़ना गुनाह है।
अक्सर लोग Taraweeh Ki Namaz Ka Tarika और इसकी दुआ के बारे में पूछते हैं। इस आर्टिकल में हम तरावीह पढ़ने का मुकम्मल तरीका जानेंगे।
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तरावीह की रकात (Rakats of Taraweeh)
तरावीह की कुल 20 रकात होती हैं। इसे 2-2 रकात करके पढ़ा जाता है। (कुछ लोग 8 रकात भी पढ़ते हैं, लेकिन हनफी मसलक और हरमैन शरीफैन (मक्का-मदीना) में 20 रकात का मामूल है)।
तरावीह की नियत (Niyat)
नियत दिल के इरादे का नाम है। आप यह नियत करें: “मैं नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ सुन्नत तरावीह की, वास्ते अल्लाह तआला के, (पीछे इस इमाम के), मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ।“
Taraweeh Padhne Ka Tarika
- सबसे पहले ईशा की 4 रकात फ़र्ज़ और 2 रकात सुन्नत पढ़ लें।
- फिर तरावीह की नियत करें और 2 रकात नमाज़ आम नमाज़ की तरह पढ़ें।
- हर 2 रकात पर सलाम फेरें।
- जब 4 रकात (2+2) पूरी हो जाएं, तो थोड़ी देर आराम करें (बैठें)। इस वक्फे को “तरवीहा” कहते हैं।
- इस दौरान आप तरावीह की दुआ पढ़ें, ज़िक्र करें या खामोश रहें।
- इसी तरह 20 रकात पूरी करें।
- आखिर में वित्र की नमाज़ पढ़ें।
तरावीह की दुआ (Taraweeh Ki Dua)
हर 4 रकात के बाद बैठने (तरवीहा) के दौरान कोई खास दुआ हदीस से साबित नहीं है। आप कोई भी ज़िक्र, तस्बीह या कुरान की तिलावत कर सकते हैं।
लेकिन हमारे मुल्क में आमतौर पर यह दुआ पढ़ी जाती है जो बुज़ुर्गों से नक़ल की गई है:
दुआ (अरबी): سُبْحَانَ ذِي الْمُلْكِ وَالْمَلَكُوتِ، سُبْحَانَ ذِي الْعِزَّةِ وَالْعَظَمَةِ وَالْهَيْبَةِ وَالْقُدْرَةِ وَالْكِبْرِيَاءِ وَالْجَبَرُوتِ سُبْحَانَ الْمَلِكِ الْحَيِّ الَّذِي لَا يَنَامُ وَلَا يَمُوتُ، سُبُّوحٌ قُدُّوسٌ رَبُّنَا وَرَبُّ الْمَلَائِكَةِ وَالرُّوحِ اللَّهُمَّ أَجِرْنَا مِنَ النَّارِ، يَا مُجِيرُ، يَا مُجِيرُ، يَا مُجِيرُ
हिंदी उच्चारण: “सुभान ज़िल मुल्कि वल मलकूत, सुभान ज़िल इज़्ज़ति वल अज़मति वल हैबति वल कुदरति वल किबरियाइ वल जबरूत। सुभानल मलिकिल हय्यिल लज़ी ला यनामु व ला यमूत, सुब्बुहुन कुद्दूसुन रब्बुना व रब्बुल मलाइ-कति वर-रूह। अल्लाहुम्मा अजिरना मिनन-नार, या मुजीरु, या मुजीरु, या मुजीर।”
नोट: यह दुआ पढ़ना ज़रूरी नहीं है। आप इसके बदले चौथा कलमा, दुरुद शरीफ, अस्तगफिरुल्लाह या कोई भी दुआ पढ़ सकते हैं। खामोश रहना भी जायज़ है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या तरावीह घर पर पढ़ सकते हैं?
जी हाँ, तरावीह की नमाज़ घर पर अकेले या जमात के साथ पढ़ी जा सकती है। लेकिन मस्जिद में जमात के साथ पढ़ना (खासकर मर्दों के लिए) ज़्यादा सवाब है।
Q. अगर तरावीह की दुआ याद न हो तो क्या करें?
यह दुआ पढ़ना मुस्तहब है, ज़रूरी नहीं। अगर याद न हो तो आप कोई भी ज़िक्र (जैसे सुभानअल्लाह, कलमा) पढ़ सकते हैं या खामोश रह सकते हैं।
Q. क्या औरतों के लिए तरावीह ज़रूरी है?
जी हाँ, औरतों के लिए भी तरावीह सुन्नत-ए-मुअक्कदा है। वो अपने घर में अकेले तरावीह पढ़ें।
नतीजा
तरावीह रमज़ान की रातों की रौनक है। इसे बोझ न समझें बल्कि अल्लाह से मगफिरत मांगने का जरिया बनाएं।
अल्लाह हमें रमज़ान की तमाम बरकतें नसीब फरमाए।





