· Iffat Zia · Religion  · 20 min read

Surah Yaseen in Hindi - सूरह यासीन तर्जुमा और फजीलत के साथ

Surah Yaseen in Hindi (सूरह यासीन): पढ़िए सूरह यासीन का आसान हिंदी तर्जुमा और इसकी बेशुमार फजीलतें। जानिए इसे कुरान का दिल क्यों कहा जाता है और इसे पढ़ने के क्या फायदे हैं।

Surah Yaseen in Hindi - सूरह यासीन तर्जुमा और फजीलत के साथ

Table of Contents

सूरह यासीन (Surah Yaseen) क़ुरआन-ए-पाक की सबसे अज़ीम सूरतों में से एक है, जिसे क़ुरआन का दिल भी कहा गया है। इसकी तिलावत करने की बेशुमार फजीलतें और बरकतें हैं।

हजरत अनस (रजि.) से रिवायत है कि हुज़ूर (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फ़रमाया – “बेशक हर चीज़ का एक दिल है और क़ुरआन का दिल सूरह यासीन है।”

इस सूरह में ईमान की बुनियादी बातों, अल्लाह की कुदरत, और आख़िरत की याद दिलाई गई है, जो इंसान के ईमान को ताज़ा कर देती है। इस आर्टिकल में हम Surah Yaseen in Hindi में तिलावत, इसके आसान हिंदी तर्जुमे, और इसकी फजीलतों को तफ़सील से जानेंगे।

अपने इलाके का नमाज़ टाइम टेबल देखने के लिए क्लिक करें Namaz Time

सूरह यासीन की फजीलत और पढ़ने के फायदे

हदीस शरीफ में सूरह यासीन की बहुत सी फजीलतें बयान की गई हैं। जो शख्स इसे अल्लाह की रज़ा के लिए पढ़ता है, उसे दुनिया और आख़िरत दोनों में कामयाबी मिलती है। यहाँ कुछ ख़ास फायदे दिए गए हैं:

  • 10 क़ुरान का सवाब: नबी-ए-करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने इरशाद फरमाया कि जो शख्स एक बार सूरह यासीन पढ़ता है, अल्लाह तआला उसके लिए दस बार क़ुरान पढ़ने का सवाब लिखता है।
  • गुनाहों की माफ़ी: जो शख्स रात के वक्त अल्लाह की रज़ा के लिए सूरह यासीन पढ़ता है, उसके पिछले गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं।
  • हाजतें पूरी होना: जो शख्स दिन के शुरू में इसे पढ़ता है, अल्लाह उसकी दिन भर की तमाम जरूरतों को पूरा फरमा देता है।
  • परेशानियों से नजात: मुसीबत या परेशानी के वक्त इसकी तिलावत करने से अल्लाह मुश्किलें आसान कर देता है।
  • मौत की सख्ती में आसानी: जिस मरने वाले के पास इसकी तिलावत की जाती है, उसकी रूह आसानी से कब्ज़ होती है और अल्लाह उस पर नरमी फरमाता है।
  • गुमशुदा चीज़ का मिलना: बुजुर्गों का तजुर्बा है कि अगर कोई चीज़ खो जाए, तो सूरह यासीन पढ़ने से मिल जाती है।
  • पैदाइश में आसानी: जिस औरत पर बच्चे की पैदाइश मुश्किल हो रही हो, उसके पास सूरह यासीन पढ़ने से आसानी होती है।
  • रिज़्क़ में बरकत: इसे रोज़ाना पढ़ने से रोजी-रोजगार में बरकत होती है और तंगी दूर होती है।
  • शहादत का दर्जा: जो शख्स हर रात इसे पढ़ने का मामूल बना ले और उसका इंतकाल हो जाए, तो उसे शहादत का दर्जा मिलता है।

ये भी पढ़ें: सूरह वाकिया के हैरत अंगेज फायदे

Surah Yaseen Recitation (Video)

Play

सूरह यासीन हिंदी तर्जुमा के साथ (Surah Yaseen with Hindi Translation)

यहाँ सूरह यासीन की हर आयत को हिंदी उच्चारण और आसान तर्जुमे के साथ दिया गया है ताकि आप इसे आसानी से समझ सकें।

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहिम

1. यासीन

तर्जुमा: यासीन।

2. वल कुर आनिल हकीम

तर्जुमा: हिकमत वाले क़ुरान की क़सम।

3. इन्नका लमिनल मुरसलीन

तर्जुमा: (ऐ नबी) बेशक आप पैग़म्बरों में से हैं।

4. अला सिरातिम मुस्तकीम

तर्जुमा: (और आप) सीधे रास्ते पर हैं।

5. तनजीलल अजीज़िर रहीम

तर्जुमा: यह (क़ुरान) ज़बरदस्त और रहम करने वाले (अल्लाह) की तरफ से नाज़िल किया गया है।

6. लितुन ज़िरा कौमम मा उनज़िरा आबाउहुम फहुम गाफिलून

तर्जुमा: ताकि आप उस क़ौम को डराएं जिनके बाप-दादा नहीं डराए गए, इसलिए वो ग़ाफ़िल (बेखबर) हैं।

7. लकद हक कल कौलु अला अकसरिहिम फहुम ला युअ’मिनून

तर्जुमा: उनमें से अक्सर लोगों पर (अज़ाब की) बात साबित हो चुकी है, तो वो ईमान नहीं लाएंगे।

8. इन्ना जअल्ना फी अअ’ना किहिम अगलालन फहिया इलल अजक़ानि फहुम मुक़महून

तर्जुमा: हमने उनकी गर्दनों में तौक़ (लोहे के पट्टे) डाल दिए हैं जो उनकी ठुड्डियों तक पहुँच गए हैं, जिससे उनके सर ऊपर को उठ गए हैं (और वो झुक नहीं सकते)।

9. व जअल्ना मिम बैनि ऐदी हिम सद्दव वमिन खलफिहिम सद्दन फअग शैनाहुम फहुम ला युबसिरून

तर्जुमा: और हमने एक दीवार उनके आगे बना दी है और एक दीवार उनके पीछे, फिर हमने उन्हें ढाँक दिया है, तो वो कुछ देख नहीं सकते।

10. वसवाउन अलैहिम अअनजर तहुम अम लम तुनजिरहुम ला युअ’मिनून

तर्जुमा: और (ऐ नबी) उनके लिए बराबर है, चाहे आप उन्हें डराएं या न डराएं, ये ईमान लाने वाले नहीं हैं।

11. इन्नमा तुन्ज़िरू मनित तब अज़ ज़िकरा व खशियर रहमान बिल्गैब फबश्शिर हु बिमग फिरतिव व अजरिन करीम

तर्जुमा: आप तो बस उसी को डरा सकते हैं जो नसीहत माने और बिना देखे रहमान (अल्लाह) से डरे। तो आप उसे बख्शिश (माफ़ी) और बा-इज़्ज़त अज्र (सवाब) की खु़शख़बरी दे दें।

12. इन्ना नहनु नुहयिल मौता वनकतुबु मा क़द्दमु व आसारहुम वकुल्ला शयइन अहसैनाहु फी इमामिम मुबीन

तर्जुमा: बेशक हम ही मुर्दों को ज़िंदा करते हैं और जो कुछ वो आगे भेज चुके और जो पीछे छोड़ गए, हम उसे लिखते जाते हैं। और हमने हर चीज़ को एक वाज़ेह किताब (लौह-ए-महफूज़) में जमा कर रखा है।

13. वज़ रिब लहुम मसलन असहाबल करयह इज़ जा अहल मुरसळून

तर्जुमा: और (ऐ नबी) आप इनके सामने उस गाँव वालों (अस्हाब-ए-क़र्या) की मिसाल बयान करें, जब उनके पास पैग़म्बर आए।

14. इज़ अरसलना इलयहिमुस नैनि फकज जबूहुमा फ अज़ ज़ज्ना बिसा लिसिन फकालू इन्ना इलैकुम मुरसळून

तर्जुमा: जब हमने उनके पास दो (पैग़म्बर) भेजे तो उन्होंने दोनों को झुठलाया, फिर हमने तीसरे से (उन दोनों की) मदद की, तो उन तीनों ने कहा कि हम तुम्हारी तरफ (अल्लाह के) भेजे हुए आए हैं।

15. कालू मा अन्तुम इल्ला बशरुम मिसळूना वमा अनजलर रहमानु मिन शय इन इन अन्तुम इल्ला तकज़िबुन

तर्जुमा: वो (गाँव वाले) बोले: तुम तो बस हमारे जैसे ही इंसान हो और रहमान ने कुछ भी नाज़िल नहीं किया है, तुम बस झूठ बोलते हो।

16. क़ालू रब्बुना यअ’लमु इन्ना इलैकुम लमुरसळून

तर्जुमा: उन्होंने (पैग़म्बरों ने) कहा: हमारा रब जानता है कि हम ज़रूर तुम्हारी तरफ भेजे गए हैं।

17. वमा अलैना इल्लल बलागुल मुबीन

तर्जुमा: और हमारे ज़िम्मे तो बस साफ़-साफ़ (अल्लाह का पैगाम) पहुँचा देना है।

18. कालू इन्ना ततैयरना बिकुम लइल लम तनतहू लनरजु मन्नकूम वला यमस सन्नकुम मिन्ना अज़ाबुन अलीम

तर्जुमा: वो (गाँव वाले) बोले: हम तो तुम्हें मनहूस समझते हैं। अगर तुम बाज़ न आए तो हम तुम्हें ज़रूर पत्थर मार-मार कर हलाक कर देंगे और तुम्हें हमारी तरफ से दर्दनाक अज़ाब पहुँचेगा।

19. कालू ताइरुकुम म अकुम अइन ज़ुक्किरतुम बल अन्तुम क़ौमूम मुस रिफून

तर्जुमा: उन्होंने (पैग़म्बरों ने) कहा: तुम्हारी नहूसत तो तुम्हारे अपने साथ है। क्या इसलिए (तुम बिगड़ रहे हो) कि तुम्हें नसीहत की गई? बल्कि तुम तो हद से गुज़र जाने वाले लोग हो।

ये भी देखे: Surah Falaq in Hindi

20. व जा अमिन अक्सल मदीनति रजुलुय यसआ काला या कौमित त्तबिउल मुरसलीन

तर्जुमा: और शहर के दूसरे किनारे से एक शख्स (हबीब नज्जार) दौड़ता हुआ आया और कहने लगा: ऐ मेरी क़ौम! इन पैग़म्बरों की पैरवी करो।

21. इत्तबिऊ मल्ला यस-अलुकुम अजरंव व हुम मुहतदून

तर्जुमा: उनकी पैरवी करो जो तुमसे कोई बदला (उजरत) नहीं मांगते और वो हिदायत पर हैं।

22. व मा लिय ला अअबुदुल लज़ी फतरनी व इलैहि तुरजऊन

तर्जुमा: और मुझे क्या है कि मैं उसकी इबादत न करूँ जिसने मुझे पैदा किया, और तुम सब उसी की तरफ लौटाए जाओगे।

23. अ-अत्तखिज़ु मिन दूनिही आलिहतन इंय्युरिदनिर रहमानु बिदुर्रिल्ला तुगनि अन्नी शफाअतुहुम शैअंव वला युनकिज़ून

तर्जुमा: क्या मैं उसे छोड़कर दूसरों को माबूद बना लूँ? अगर रहमान मुझे कोई तकलीफ़ पहुँचाना चाहे तो उनकी सिफारिश मेरे कुछ काम न आएगी और न वो मुझे छुड़ा सकेंगे।

24. इन्नी इज़ल्लफी दलालिम मुबीन

तर्जुमा: बेशक तब तो मैं खुली गुमराही में हूँगा।

25. इन्नी आमन्तु बिरब्बिकुम फस्मऊन

तर्जुमा: बेशक मैं तुम्हारे रब पर ईमान लाया, तो मेरी बात सुनो।

26. कीलद खुलिल जन्नह, काला या लैता कौमी यअलमून

तर्जुमा: (उससे) कहा गया: जन्नत में दाखिल हो जा। उसने कहा: काश! मेरी क़ौम जानती।

27. बिमा गफ़रा ली रब्बी व जअलनी मिनल मुकरमीन

तर्जुमा: कि मेरे रब ने मुझे बख्श दिया और मुझे इज़्ज़त वालों में शामिल कर दिया।

28. व मा अनज़लना अला कौमिही मिम बअदिही मिन जुन्दिम मिनस समाइ व मा कुन्ना मुनज़िलीन

तर्जुमा: और हमने उसके बाद उसकी क़ौम पर आसमान से कोई लश्कर नहीं उतारा और न ही हमें उतारने की ज़रूरत थी।

29. इन कानत इल्ला सयहतंव वाहिदतन फइज़ा हुम खामिदून

तर्जुमा: वो तो बस एक ज़ोरदार चीख़ थी, तो वो सब बुझ कर रह गए (मर गए)।

30. या हसरतन अलल इबाद, मा यअतीहिम मिर रसूलिन इल्ला कानू बिही यस्तहज़िऊन

तर्जुमा: हाय अफ़सोस बंदों पर! उनके पास कोई रसूल नहीं आता मगर वो उसका मज़ाक उड़ाते हैं।

31. अलम यरौ कम अहलकना कब्लहुम मिनल कुरूनि अन्नहुम इलैहिम ला यरजिऊन

तर्जुमा: क्या उन्होंने नहीं देखा कि उनसे पहले हमने कितनी ही क़ौमों को हलाक कर दिया कि वो उनकी तरफ लौट कर नहीं आएंगे?

32. व इन कुल्लुल लम्मा जमीउल लदैना मुहज़रून

तर्जुमा: और उन सबको हमारे सामने हाज़िर किया जाएगा।

33. व आयतुल लहुमुल अरज़ुल मैततु, अहययनाहा व अखरजना मिन्हा हब्बन फमिन्हु यअकुलून

तर्जुमा: और उनके लिए एक निशानी मुर्दा ज़मीन है, हमने उसे ज़िंदा किया और उससे अनाज निकाला, तो वो उसमें से खाते हैं।

34. व जअलना फीहा जन्नातिम मिन नखीलिवं व अअनाबिवं व फज्जरना फीहा मिनल उयून

तर्जुमा: और हमने उसमें खजूरों और अंगूरों के बाग़ बनाए और उसमें चश्मे जारी कर दिए।

35. लि यअकुलू मिन समरिही व मा अमिलत-हु ऐदीहिम, अफला यशकुरून

तर्जुमा: ताकि वो उसके फल खाएं, और इसे उनके हाथों ने नहीं बनाया। तो क्या वो शुक्र अदा नहीं करते?

36. सुभानल लज़ी खलकल अज़वाजा कुल्लहा मिम्मा तुम्बितुल अरज़ु व मिन अनफुसिहिम व मिम्मा ला यअलमून

तर्जुमा: पाक है वो ज़ात जिसने सब चीज़ों के जोड़े पैदा किए, चाहे वो ज़मीन से उगते हों, या खुद उनकी अपनी जात से हों, या उन चीज़ों से जिन्हें वो नहीं जानते।

37. व आयतुल लहुमुल लैलु नसलखु मिन्हुन नहारा फइज़ा हुम मुज़लिमून

तर्जुमा: और उनके लिए एक निशानी रात है, हम उससे दिन को खींच लेते हैं तो वो अंधेरे में रह जाते हैं।

38. वश शम्सु तजरी लिमुस्तकर्रिल लहा, ज़ालिका तकदीरुल अज़ीज़िल अलीम

तर्जुमा: और सूरज अपने ठिकाने की तरफ चलता रहता है, यह ज़बरदस्त इल्म वाले (अल्लाह) का मुक़र्रर किया हुआ अंदाज़ा है।

39. वल कमरा कद्दरनाहु मनाज़िला हत्ता आदा कल उरजूनिल कदीम

तर्जुमा: और चाँद के लिए हमने मंज़िलें मुक़र्रर की हैं, यहाँ तक कि वो (घटते-घटते) पुरानी खजूर की टहनी जैसा हो जाता है।

40. लश शम्सु यम्बगी लहा अन तुदरिकल कमरा व लल लैलु साबिकुन नहार, व कुल्लुन फी फलकिय यस्बहून

तर्जुमा: न सूरज की मजाल है कि वो चाँद को पकड़ ले और न रात दिन से आगे बढ़ सकती है, और सब एक-एक दायरे में तैर रहे हैं।

41. व आयतुल लहुम अन्ना हमलना जुर्रिय्य तहुम फिल फुलकिल मशहून

तर्जुमा: और उनके लिए एक निशानी ये है कि हमने उनकी औलाद को भरी हुई कश्ती में सवार किया।

42. व खलकना लहुम मिम मिसलिही मा यरकबून

तर्जुमा: और हमने उनके लिए वैसी ही और चीज़ें पैदा कीं जिन पर वो सवार होते हैं।

43. व इन नशअ नुगरिकहुम फला सरीखा लहुम वला हुम युन कज़ून

तर्जुमा: और अगर हम चाहें तो उन्हें डुबो दें, फिर न कोई उनकी फ़रियाद सुनने वाला हो और न वो बचाए जा सकें।

44. इल्ला रहमतम मिन्ना व मताअन इलल हीन

तर्जुमा: मगर हमारी तरफ से रहमत के तौर पर और एक वक्त तक फायदा उठाने के लिए (उन्हें छोड़ दिया जाता है)।

45. व इज़ा कीला लहुमुत्तकू मा बैना ऐदीकुम व मा खलफकुम लअल्लकुम तुरहमून

तर्जुमा: और जब उनसे कहा जाता है कि डरो उस चीज़ से जो तुम्हारे आगे है और जो तुम्हारे पीछे है, ताकि तुम पर रहम किया जाए।

46. व मा तातीहिम मिन आयतिम मिन आयाति रब्बिहिम इल्ला कानू अनहा मुअरिजिन

तर्जुमा: और उनके पास उनके रब की निशानियों में से कोई निशानी नहीं आती मगर वो उससे मुँह फेर लेते हैं।

47. व इज़ा कीला लहुम अनफिकू मिम्मा रज़क कुमुल्लाहु, कालल लज़ीना कफरू लिल्लज़ीना आमनू, अनुत इमु मल लौ यशाउल्लाहु अतअमह, इन अन्तुम इल्ला फी ज़लालिम मुबीन

तर्जुमा: और जब उनसे कहा जाता है कि अल्लाह ने जो तुम्हें दिया है उसमें से खर्च करो, तो काफिर ईमान वालों से कहते हैं: क्या हम उसे खिलाएं जिसे अगर अल्लाह चाहता तो खिला देता? तुम तो बस खुली गुमराही में हो।

48. व यकूलूना मता हाज़ल वअदु इन कुन्तुम सादिक़ीन

तर्जुमा: और वो कहते हैं: ये (क़यामत का) वादा कब पूरा होगा अगर तुम सच्चे हो?

49. मा यनज़ुरूना इल्ला सयहतंव वाहिदतन ताखुज़ुहुम व हुम यखिस्सिमून

तर्जुमा: वो बस एक चिंग्घाड़ (ज़ोर की आवाज़) का इंतज़ार कर रहे हैं जो उन्हें पकड़ लेगी जब वो आपस में झगड़ रहे होंगे।

50. फला यस्ततीऊना तौसियतंव वला इला अहलीहिम यरजिऊन

तर्जुमा: तो न वो कोई वसीयत कर सकेंगे और न अपने घर वालों की तरफ लौट सकेंगे।

51. व नुफिखा फिस सूरि फइज़ा हुम मिनल अजदासि इला रब्बिहिम यन्सिलून

तर्जुमा: और सूर फूँका जाएगा, तो वो अचानक अपनी क़ब्रों से अपने रब की तरफ दौड़ पड़ेंगे।

52. कालू या वैलना मम बअ सना मिम मरक़दिना, हाज़ा मा वअदर रहमानु व सदक़ल मुरसलून

तर्जुमा: वो कहेंगे: हाय हमारी बर्बादी! हमें हमारी ख़्वाबगाहों (क़ब्रों) से किसने उठा दिया? ये वही है जिसका रहमान ने वादा किया था और रसूलों ने सच कहा था।

53. इन कानत इल्ला सयहतंव वाहिदतन फइज़ा हुम जमीउल लदैना मुहज़रून

तर्जुमा: वो तो बस एक ज़ोर की आवाज़ होगी, फिर वो सब के सब हमारे सामने हाज़िर कर दिए जाएंगे।

54. फल यौमा ला तुज़लमु नफसुन शैअंव वला तुजज़ौना इल्ला मा कुन्तुम तअमलून

तर्जुमा: तो आज किसी जान पर कुछ ज़ुल्म नहीं किया जाएगा और तुम्हें वही बदला दिया जाएगा जो तुम करते थे।

55. इन्ना असहाबल जन्नतिल यौमा फी शुगुलिन फाकिहून

तर्जुमा: बेशक जन्नत वाले आज अपने मशगलों (कामों) में खुश हैं।

56. हुम व अज़वाजुहुम फी ज़िलालिन अलल अराइकि मुत्तकिऊन

तर्जुमा: वो और उनकी बीवियां घने सायों में तख्तों पर तकिया लगाए बैठे होंगे।

57. लहुम फीहा फाकिहतुंव व लहुम मा यद्दऊन

तर्जुमा: उनके लिए वहां हर क़िस्म के फल होंगे और जो वो मांगेंगे वो उन्हें मिलेगा।

58. सलामून कौलम मिर रब्बिर रहीम

तर्जुमा: (उन पर) सलाम हो, मेहरबान रब की तरफ से फरमाया हुआ।

59. वम ताज़ुल यौमा अय्युहल मुजरिमून

तर्जुमा: और (कहा जाएगा): ऐ मुजरिमों! आज तुम अलग हो जाओ।

60. अलम अअहद इलैकूम या बनी आदमा अन ला तअ बुदुश शैतान, इन्नहू लकुम अदुव्वुम मुबीन

तर्जुमा: ऐ आदम की औलाद! क्या मैंने तुमसे वादा नहीं लिया था कि शैतान की इबादत न करना, बेशक वो तुम्हारा खुला दुश्मन है?

61. व अनिक बुदूनी, हाज़ा सिरातुम मुस्तक़ीम

तर्जुमा: और मेरी ही इबादत करो, यही सीधा रास्ता है।

62. व लकद अज़ल्ला मिनकुम जिबिल्लन कसीरा, अफलम तकूनू तअकिलून

तर्जुमा: और उसने तुम में से बहुत से लोगों को गुमराह कर दिया, क्या तुम अक़ल नहीं रखते थे?

63. हाज़िही जहन्नमुल लती कुन्तुम तूअदून

तर्जुमा: ये वही जहन्नम है जिसका तुमसे वादा किया जाता था।

64. इस्लौहल यौमा बिमा कुन्तुम तकफुरून

तर्जुमा: आज इसमें दाखिल हो जाओ उस कुफ़्र की वजह से जो तुम करते थे।

65. अल यौमा नख़तिमु अला अफवाहिहिम व तुकल्लिमुना ऐदीहिम व तशहदु अरजुलुहुम बिमा कानू यकसिबून

तर्जुमा: आज हम उनके मुँह पर मोहर लगा देंगे, और उनके हाथ हमसे बात करेंगे और उनके पैर गवाही देंगे जो वो कमाते थे।

66. व लौ नशाउ लतमस्ना अला अअयुनिहिम फस्तबकुस सिराता फअन्ना युबसिरून

तर्जुमा: और अगर हम चाहें तो उनकी आँखों को मिटा दें, फिर वो रास्ते की तरफ दौड़ें तो कहाँ से देख सकेंगे?

67. व लौ नशाउ लमसखनाहुम अला मकानतिहिम फमस्तताऊ मुदिय्यंव वला यरजिऊन

तर्जुमा: और अगर हम चाहें तो उनकी जगह पर ही उनकी शक्ल बिगाड़ दें, फिर न वो आगे जा सकें और न वापस आ सकें।

68. व मन नुअम्मिरहु नुनक्किसहु फिल खल्कि, अफला यअकिलून

तर्जुमा: और जिसे हम लम्बी उम्र देते हैं, उसकी बनावट को उलट देते हैं (कमज़ोर कर देते हैं), क्या वो अक़ल नहीं रखते?

69. व मा अल्लमनाहुश शिअरा व मा यम्बगी लह, इन हुवा इल्ला ज़िकरुंव व कुरआनुम मुबीन

तर्जुमा: और हमने उन्हें (नबी को) शायरी नहीं सिखाई और न ये उनके लायक है, ये तो बस नसीहत और साफ़ क़ुरान है।

70. लियुनज़िरा मन काना हय्यंव व यहिक्कल कौलु अलल काफिरीन

तर्जुमा: ताकि वो उसे डराए जो ज़िंदा है, और काफिरों पर बात साबित हो जाए।

71. अवलम यरौ अन्ना खलकना लहुम मिम्मा अमिलत ऐदीना अनआमन फहुम लहा मालिकून

तर्जुमा: क्या उन्होंने नहीं देखा कि हमने अपने हाथों से बनाई हुई चीज़ों में से उनके लिए मवेशी (जानवर) पैदा किए, तो वो उनके मालिक हैं?

72. व ज़ल्ललनाहा लहुम फमिन्हा रकुबुहुम व मिन्हा यअकुलून

तर्जुमा: और हमने उन्हें उनके बस में कर दिया, तो उनमें से कुछ उनकी सवारी हैं और कुछ को वो खाते हैं।

73. व लहुम फीहा मनाफिउ व मशारिबु, अफला यशकुरून

तर्जुमा: और उनके लिए उनमें बहुत से फायदे और पीने की चीज़ें हैं, तो क्या वो शुक्र नहीं करते?

74. वत्तखजू मिन दूनिल्लाहि आलिहतल लअल्लहुम युन्सरून

तर्जुमा: और उन्होंने अल्लाह के सिवा दूसरे माबूद बना लिए ताकि उनकी मदद की जाए।

75. ला यस्ततीऊना नस्रहुम व हुम लहुम जुन्दुम मुहज़रून

तर्जुमा: वो उनकी मदद नहीं कर सकते, बल्कि वो (खुद) उनके लिए लश्कर बन कर हाज़िर किए जाएंगे।

76. फला यहज़ुनका कौलुहुम, इन्ना नअलमु मा युसिररूना व मा युअलिनून

तर्जुमा: तो (ऐ नबी) उनकी बात आपको ग़मज़दा न करे, हम जानते हैं जो वो छुपाते हैं और जो वो ज़ाहिर करते हैं।

77. अवलम यरल इन्सानु अन्ना खलकनाहु मिन नुत्फतिन फइज़ा हुवा खसीमुम मुबीन

तर्जुमा: क्या इंसान ने नहीं देखा कि हमने उसे नुत्फे (बूँद) से पैदा किया, फिर वो खुला झगड़ालू बन गया?

78. व ज़रबा लना मसलंव व नसिया खल्कह, काला मंय युहयिल इज़ामा व हिया रमीम

तर्जुमा: और उसने हमारे लिए मिसाल बयान की और अपनी पैदाइश को भूल गया, कहने लगा: हड्डियों को कौन ज़िंदा करेगा जब वो गल-सड़ गई हों?

79. कुल युहयीहल लज़ी अनशअहा अव्वला मर्रह, व हुवा बिकुल्लि खल्किन अलीम

तर्जुमा: कह दीजिये: उन्हें वही ज़िंदा करेगा जिसने उन्हें पहली बार पैदा किया, और वो हर पैदाइश को खूब जानता है।

80. अल्लज़ी जअला लकुम मिनश शजरिल अखज़रि नारन फइज़ा अन्तुम मिन्हु तूकिदून

तर्जुमा: जिसने तुम्हारे लिए हरे भरे दरख्त से आग पैदा की, तो तुम उससे आग जलाते हो।

81. अवलइसल लज़ी खलकस समावाति वल अर्ज़ा बिकাদিরिन अला अंय यखलुका मिस्लहुम, बला व हुवल खल्लाकुल अलीम

तर्जुमा: क्या वो जिसने आसमानों और ज़मीन को पैदा किया, इस पर क़ादिर नहीं कि उन जैसे (दोबारा) पैदा करे? क्यों नहीं, और वही तो बड़ा पैदा करने वाला, सब कुछ जानने वाला है।

82. इन्नमा अमरुहू इज़ा अरादा शयअन अंय यकूला लहू कुन फयकून

तर्जुमा: उसका काम तो बस ये है कि जब वो किसी चीज़ का इरादा करता है तो उससे कहता है “हो जा”, तो वो हो जाती है।

83. फसुभानल लज़ी बियदिही मलकूतु कुल्लि शयइंव व इलैहि तुरजऊन

तर्जुमा: तो पाक है वो ज़ात जिसके हाथ में हर चीज़ की बादशाहत है, और उसी की तरफ तुम लौटाए जाओगे।

सूरह यासीन के अहम मौज़ू (Main Topics)

सूरह यासीन में इस्लाम की बुनियादी बातों पर ज़ोर दिया गया है:

  1. तौहीद: अल्लाह के एक होने और उसकी कुदरत की निशानियां (जैसे सूरज, चाँद, ज़मीन)।
  2. रिसालत: नबियों का ज़िक्र और उन पर ईमान लाना।
  3. आख़िरत: मरने के बाद दोबारा ज़िंदा होना और जन्नत-जहन्नम का फैसला।

Surah Yaseen in English (Roman Transliteration)

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

  1. Yaseen
  2. Wal-Qur-aanil-Hakeem
  3. Innaka laminal mursaleen
  4. ‘Alaa Siraatim Mustaqeem
  5. Tanzeelal ‘Azeezir Raheem
  6. Litunzira qawmam maa unzira aabaaa’uhum fahum ghaafiloon
  7. Laqad haqqal qawlu ‘alaa aksarihim fahum laa yu’minoon
  8. Innaa ja’alnaa feee a’naaqihim aghlaalan fahiya ilal azqaani fahum muqmahoon
  9. Wa ja’alnaa mim baini aydeehim saddanw wa min khalfihim saddan fa aghshainaahum fahum laa yubsiroon
  10. Wa sawaaa’un ‘alaihim ‘a-anzartahum am lam tunzirhum laa yu’minoon
  11. Innamaa tunziru manittaba ‘az-Zikra wa khashiyar Rahmaana bilghaib, fabashshirhu bimaghfiratinw wa ajrin kareem
  12. Innaa Nahnu nuhyil mawtaa wa naktubu maa qaddamoo wa aasaarahum; wa kulla shai’in ahsainaahu feee Imaamim Mubeen
  13. Wadrib lahum masalan Ashaabal Qaryatih; iz jaaa’ahal mursaloon
  14. Iz arsalnaaa ilaihimusnaini fakazzaboohumaa fa’azzaznaa bisaalisin faqaalooo innaaa ilaikum mursaloon
  15. Qaaloo maaa antum illaa basharum mislunaa wa maaa anzalar Rahmaanu min shai’in in antum illaa takziboon
  16. Qaaloo Rabbunaa ya’lamu innaaa ilaikum lamursaloon
  17. Wa maa ‘alainaaa illal balaaghul mubeen
  18. Qaaloo innaa tatayyarnaa bikum la’il-lam tantahoo lanarjumannakum wa layamassannakum minnaa ‘azaabun aleem
  19. Qaaloo taaa’irukum ma’akum; a’in zukkirtum; bal antum qawmum musrifoon
  20. Wa jaaa’a min aqsal madeenati rajuluny yas’aa qaala yaa qawmit tabi’ul mursaleen
  21. Ittabi’oo mal-laa yas’alukum ajranw-wa hum muhtadoon
  22. Wa maa liya laa a’budul lazee fataranee wa ilaihi turja’oon
  23. ‘A-attakhizu min dooniheee aalihatan iny-yuridnir Rahmaanu bidurril-laa tughni ‘annee shafaa’atuhum shai ‘anw-wa laa yunqizoon
  24. Inneee izal-lafee dalaalim-mubeen
  25. Inneee aamantu bi Rabbikum fasma’oon
  26. Qeelad khulil Jannah; qaala yaa laita qawmee ya’lamoon
  27. Bimaa ghafara lee Rabbee wa ja’alanee minal mukrameen
  28. Wa maaa anzalnaa ‘alaa qawmihee mim ba’dihee min jundim minas samaaa’i wa maa kunnaa munzileen
  29. In kaanat illaa saihatanw waahidatan fa-izaa hum khaamidoon
  30. Yaa hasratan ‘alal ‘ibaad; maa yaateehim mir Rasoolin illaa kaanoo bihee yastahzi’oon
  31. Alam yaraw kam ahlaknaa qablahum minal qurooni annahum ilaihim laa yarji’oon
  32. Wa in kullul lammaa jamee’ul ladainaa muhdaroon
  33. Wa aayatul lahumul ardul maitatu ahyainaahaa wa akhrajnaa minhaa habban faminhu yaakuloon
  34. Wa ja’alnaa feehaa jannaatim min nakheelinw wa a’naabinw wa fajjarnaa feehaa minal ‘uyoon
  35. Liyaakuloo min samarihee wa maa ‘amilat-hu aideehim; afalaa yashkuroon
  36. Subhaanal lazee khalaqal azwaaja kullahaa mimmaa tumbitul ardu wa min anfusihim wa mimmaa laa ya’lamoon
  37. Wa aayatul lahumul lailu naslakhu minhun nahaara fa-izaa hum muzlimoon
  38. Wash-shamsu tajree limustaqarril lahaa; zaalika taqdeerul ‘Azeezil ‘Aleem
  39. Walqamara qaddarnaahu manaazila hattaa ‘aada kal’urjoonil qadeem
  40. Lash shamsu yambaghee lahaaa an tudrikal qamara wa lal lailu saabiqun nahaar; wa kullun fee falakin yasbahoon
  41. Wa aayatul lahum annaa hamalnaa zurriyyatahum fil fulkil mashhoon
  42. Wa khalaqnaa lahum mim-mislihee maa yarkaboon
  43. Wa in nashaa nughriqhum falaa sareekha lahum wa laa hum yunqazoon
  44. Illaa rahmatam minnaa wa mataa’an ilal heen
  45. Wa izaa qeela lahumuttaqoo maa baina aideekum wa maa khalfakum la’allakum turhamoon
  46. Wa maa taateehim min aayatim min aayaati Rabbihim illaa kaanoo ‘anhaa mu’rideen
  47. Wa izaa qeela lahum anfiqoo mimmaa razaqakumul laahu qaalal lazeena kafaroo lillazeena aamanooo anut’imu mal-law yashaaa’ul laahu at’amahooo in antum illaa fee dalaalim mubeen
  48. Wa yaqooloona mataa haazal wa’du in kuntum saadiqeen
  49. Maa yanzuroona illaa saihatanw waahidatan taakhuzuhum wa hum yakhissimoon
  50. Falaa yastatee’oona taw siyatanw-wa laaa ilaaa ahleehim yarji’oon
  51. Wa nufikha fis-soori fa-izaa hum minal ajdaasi ilaa Rabbihim yansiloon
  52. Qaaloo yaa wailanaa mam ba’asanaa mim marqadinaa; haaza maa wa’adar Rahmaanu wa sadaqal mursaloon
  53. In kaanat illaa saihatanw waahidatan fa-izaa hum jamee’ul ladainaa muhdaroon
  54. Fal-yawma laa tuzlamu nafsun shai’anw-wa laa tujzawna illaa maa kuntum ta’maloon
  55. Inna Ashaabal jannatil yawma fee shughulin faakihoon
  56. Hum wa azwaajuhum fee zilaalin ‘alal araaa’iki muttaki’oon
  57. Lahum feehaa faakihatunw wa lahum maa yadda’oon
  58. Salaamun qawlam mir Rabbir Raheem
  59. Wamtaazul yawma ayyuhal mujrimoon
  60. Alam a’had ilaikum yaa Baneee Aadama al-laa ta’budush Shaitaan; innahoo lakum ‘aduwwum mubeen
  61. Wa ani’budoonee; haazaa Siraatum Mustaqeem
  62. Wa laqad adalla minkum jibillan kaseeraa; afalam takoonoo ta’qiloon
  63. Haazihee Jahannamul latee kuntum too’adoon
  64. Islawhal yawma bimaa kuntum takfuroon
  65. Al-yawma nakhtimu ‘alaaa afwaahihim wa tukallimunaaa aideehim wa tashhadu arjuluhum bimaa kaanoo yaksiboon
  66. Wa law nashaaa’u latamasnaa ‘alaaa a’yunihim fastabaqus-siraata fa-annaa yubsiroon
  67. Wa law nashaaa’u lamasakhnaahum ‘alaa makaanatihim famas-tataa’oo mudiyyanw-wa laa yarji’oon
  68. Wa man nu ‘ammirhu nunakkishu fil-khalq; afalaa ya’qiloon
  69. Wa maa ‘allamnaahush shi’ra wa maa yambaghee lah; in huwa illaa zikrunw-wa Qur-aanum mubeen
  70. Liyunzira man kaana hayyanw-wa yahiqqal qawlu ‘alal-kaafireen
  71. Awalam yaraw annaa khalaqnaa lahum mimmaa ‘amilat aideenaaa an’aaman fahum lahaa maalikoon
  72. Wa zallalnaahaa lahum faminhaa rakoobuhum wa minhaa yaakuloon
  73. Wa lahum feehaa manaafi’u wa mashaarib; afalaa yashkuroon
  74. Wattakhazoo min doonil laahi aalihatal la’allahum yunsaroon
  75. Laa yastatee’oona nasrahum wa hum lahum jundum muhdaroon
  76. Falaa yahzunka qawluhum; innaa na’lamu maa yusirroona wa maa yu’linoon
  77. Awalam yaral insaanu annaa khalaqnaahu min nutfatin fa-izaa huwa khaseemum mubeen
  78. Wa daraba lanaa masalanw-wa nasiya khalqah; qaala mai-yuhyil’izaama wa hiya rameem
  79. Qul yuhyeehal lazee ansha-ahaaa awwala marrah; wa Huwa bikulli khalqin ‘Aleem
  80. Allazee ja’ala lakum minash shajaril akhdari naaran fa-izaa antum minhu tooqidoon
  81. Awalaisal lazee khalaqas samaawaati wal arda biqaadirin ‘alaaa any-yakhluqa mislahum; balaa wa Huwal Khallaaqul ‘Aleem
  82. Innamaa amruhooo izaaa araada shai’an any-yaqoola lahoo Kun fa-yakoon
  83. Fa Subhaanal lazee biyadihee malakootu kulli shai’inw-wa ilaihi turja’oon

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह यासीन को कुरान का दिल क्यों कहा जाता है?
A.

हदीस शरीफ में आता है कि हर चीज़ का एक दिल होता है और कुरान का दिल सूरह यासीन है। इसमें अल्लाह की तौहीद, रिसालत और आख़िरत का ज़िक्र बहुत असरदार तरीके से किया गया है।

Q. सूरह यासीन पढ़ने का सबसे अच्छा वक़्त कौन सा है?
A.

वैसे तो आप इसे कभी भी पढ़ सकते हैं, लेकिन फज्र की नमाज़ के बाद इसे पढ़ना बहुत अफज़ल माना जाता है। इससे दिन भर की हाजतें पूरी होती हैं।

Q. सूरह यासीन किस पारे में है?
A.

सूरह यासीन कुरान के 22वें पारे के आखिर से शुरू होती है और 23वें पारे में मुकम्मल होती है।

Q. सूरह यासीन में कितनी आयतें हैं?
A. सूरह यासीन में कुल 83 आयतें (Verses) हैं।
Q. क्या सूरह यासीन पढ़ने से मुरादें पूरी होती हैं?
A.

जी हाँ, बुजुर्गों का कहना है कि जिस जायज़ मकसद के लिए सूरह यासीन पढ़ी जाए, अल्लाह उसे पूरा फरमाता है।

इस आर्टिकल को लिखने में हमने पूरी सावधानी बरती है, लेकिन अगर आपको कोई गलती नज़र आए तो हमें Contact करके ज़रूर बताएं ताकि हम उसे सुधार सकें।

इस जानकारी को अपने दोस्तों और परिवार के साथ ज़रूर शेयर करें। कुरान के पैगाम को फैलाने में हमारी मदद करने के लिए आपका शुक्रिया।

सूरह यासीन (Surah Yaseen) कुरान का दिल है। इसकी तिलावत से दिल को सुकून और रूह को ताज़गी मिलती है। अल्लाह तआला हमें इसकी तिलावत करने और इसके पैगाम को समझने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

    Share:
    Back to Blog