Surah Naziat in Hindi: सूरह नाज़िआत की फजीलत और तर्जुमा
Surah Naziat in Hindi: जानिए सूरह नाज़िआत का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। यह सूरह कयामत के खौफनाक मंज़र और हज़रत मूसा (अ.स.) व फिरौन के वाकये को बयान करती है।

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सूरह नाज़िआत (Surah An-Naziat) कुरान मजीद की 79वीं सूरह है। “अन-नाज़िआत” का मतलब है “खींचकर निकालने वाले” (Those Who Drag Forth), जो उन फरिश्तों की तरफ इशारा है जो रूहों को कब्ज़ करते हैं।
यह सूरह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 46 आयतें हैं। इसकी शुरुआत में अल्लाह ने रूह कब्ज़ करने वाले फरिश्तों की कसम खाकर कयामत के दिन की हकीकत को बयान किया है।
इस आर्टिकल में हम Surah Naziat in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
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सूरह नाज़िआत की अहमियत (Importance of Surah An-Naziat)
- कयामत का मंज़र: यह सूरह कयामत के दिन की हौलनाकी का नक्शा खींचती है, जब एक ज़लज़ला आएगा और दिल कांप उठेंगे।
- मूसा (अ.स.) और फिरौन का किस्सा: इसमें हज़रत मूसा (अ.स.) और फिरौन का वाकया है, जो बताता है कि सरकशी का अंजाम हमेशा बुरा होता है।
- अल्लाह की कुदरत: इसमें अल्लाह की कुदरत (आसमान, ज़मीन, पहाड़) का ज़िक्र है, जो साबित करता है कि जो रब यह सब बना सकता है, वो दोबारा ज़िंदा भी कर सकता है।
Surah Naziat in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
वन-नाज़िआति गर्क़ा।
(कसम है उन (फरिश्तों) की जो (काफिरों की रूह) सख्ती से खींचते हैं।)वन-नाशिताति नश्ता।
(और कसम है उनकी जो (मोमिनों की रूह) नरमी से निकालते हैं।)वस-साबिहाति सब्हा।
(और कसम है उनकी जो (आसमान में) तैरते फिरते हैं।)फस-साबिकाति सब्क़ा।
(फिर (हुक्म बजा लाने में) एक-दूसरे से आगे बढ़ते हैं।)फल-मुदब्बिराति अम्रा।
(फिर (दुनिया के) कामों का इंतज़ाम करते हैं।)यौमा तरजुफुर-राजिफह।
(जिस दिन कांपने वाली (ज़मीन) कांपेगी।)तत्ब-उहर-रादिफह।
(उसके पीछे एक और आने वाली (चीख) आएगी।)क़ुलूबुंय-यौम-इज़िंव-वाजिफह।
(उस दिन बहुत से दिल धड़क रहे होंगे।)अब्सारुहा ख़ाशिअह।
(उनकी निगाहें झुकी हुई होंगी।)यक़ूलूना अ-इन्ना ल-मरदूदूना फिल-हाफिरह।
(वो कहते हैं: क्या हम पहली हालत में लौटाए जाएंगे?)अ-इज़ा कुन्ना इज़ामन-नख़िरह।
(क्या जब हम गली-सड़ी हड्डियाँ हो जाएंगे?)क़ालू तिल्का इज़न कर्रतुन ख़ासिराह।
(कहते हैं: तब तो यह लौटना बड़े घाटे का होगा।)फ-इन्नमा हिया ज़जरतुंव-वाहिदह।
(वो तो बस एक ही डांट (चीख) होगी।)फ-इज़ा हुम बिस-साहिरह।
(तो वो अचानक एक मैदान में आ मौजूद होंगे।)हल अताका हदीसु मूसा।
(क्या तुम्हारे पास मूसा की खबर पहुँची है?)इज़ नादाहु रब्बुहू बिल-वादिल-मुक़द्दसि तुवा।
(जब उनके रब ने उन्हें पाक वादी ‘तुवा’ में पुकारा।)इज़्हब इला फिरऔना इन्नहू तगा।
(कि फिरौन के पास जाओ, वो सरकश हो गया है।)फ-क़ुल हल-लका इला अन तज़क्का।
(और कहो: क्या तू चाहता है कि पाक हो जाए?)व अह्दियका इला रब्बिका फ-तख्शा।
(और मैं तुझे तेरे रब का रास्ता दिखाऊँ ताकि तू डरे।)फ-अराहुल्-आयतल्-कुबरा।
(तो उन्होंने उसे बड़ी निशानी दिखाई।)फ-कज़्ज़बा व असा।
(मगर उसने झुठलाया और नाफरमानी की।)सुम्मा अद-ब-र यस-आ।
(फिर पीठ फेरकर (तदबीरें करने) दौड़ा।)फ-ह-श-र फ-नादा।
(फिर (लोगों को) जमा किया और पुकारा।)फ-क़ाला अना रब्बुकुमुल-अअ्ला।
(तो कहने लगा: मैं तुम्हारा सबसे बड़ा रब हूँ।)फ-अ-ख़-ज़हुल्लाहु नकालल्-आखिरति वल-ऊला।
(तो अल्लाह ने उसे आखिरत और दुनिया के अज़ाब में पकड़ लिया।)इन्ना फी ज़ालिका ल-इबरतल-लि-मंय-यख्शा।
(बेशक इसमें उस शख्स के लिए इबरत (सबक) है जो डरे।)अ-अन्तुम अशद्दु ख़ल्क़न अमिस-समा-उ, बनाहा।
(क्या तुम्हें पैदा करना ज़्यादा मुश्किल है या आसमान को? जिसे उसने बनाया।)र-फ-अ सम्कहा फ-सव्वाहा।
(उसकी छत को बुलंद किया, फिर उसे दुरुस्त किया।)व अग्तशा लैलाहा व अख़रजा जुहाहा।
(और उसकी रात को अँधेरा किया और उसके दिन को निकाला।)वल-अर्ज़ा बअ्दा ज़ालिका दहाहा।
(और इसके बाद ज़मीन को फैलाया।)अख़रजा मिन्हा मा-अहा व मरआहा।
(उससे उसका पानी और उसका चारा निकाला।)वल-जिबाला अर्साहा।
(और पहाड़ों को जमा दिया।)मता-अल-लकुम व लि-अन्आमिकुम।
(तुम्हारे और तुम्हारे जानवरों के फायदे के लिए।)फ-इज़ा जा-अतित-ताम्म-तुल-कुबरा।
(तो जब वो बड़ी आफत (कयामत) आएगी।)यौमा य-त-ज़क्करुल-इंसानु मा स-आ।
(जिस दिन इंसान याद करेगा जो उसने कोशिश की थी।)व बुर्रि-ज़तिल-जहीमु लि-मंय-यरा।
(और जहन्नम हर देखने वाले के लिए ज़ाहिर कर दी जाएगी।)फ-अम्मा मन तगा।
(तो जिसने सरकशी की होगी।)व आ-सरल-हयातद-दुन्या।
(और दुनिया की ज़िन्दगी को तरजीह दी होगी।)फ-इन्नल-जहीमा हियल-मअ्वा।
(तो बेशक जहन्नम ही उसका ठिकाना है।)व अम्मा मन ख़ाफा मक़ामा रब्बिही व न-हन-नफ्-स अनिल-हवा।
(और जो अपने रब के सामने खड़े होने से डरा और नफ़्स को ख्वाहिश से रोका।)फ-इन्नल-जन्नता हियल-मअ्वा।
(तो बेशक जन्नत ही उसका ठिकाना है।)यस-अलू-नका अनिस-सा-अति अय्याना मुरसाहा।
(वो आपसे कयामत के बारे में पूछते हैं कि वो कब आएगी?)फीमा अन्ता मिन ज़िक्राहा।
(आपको उसके बयान से क्या वास्ता?)इला रब्बिका मुन्तहाहा।
(उसका इल्म तो आपके रब ही पर खत्म होता है।)इन्नमा अन्ता मुन्ज़िरु मंय-यख्शाहा।
(आप तो बस उसे डराने वाले हैं जो उससे डरे।)क-अन्नहुम यौमा यरौ-नहा लम यल्बसू इल्ला अशिय्यतन औ जुहाहा।
(जिस दिन वो उसे देखेंगे तो (उन्हें लगेगा कि) वो (दुनिया में) बस एक शाम या उसकी सुबह ही ठहरे थे।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. नाज़िआत (Naziat) का क्या मतलब है?
“नाज़िआत” का मतलब है “खींचकर निकालने वाले”। यह उन फरिश्तों की तरफ इशारा है जो काफिरों की रूहों को सख्ती से निकालते हैं।
Q. यह सूरह कुरान के किस पारे में है?
नतीजा (Conclusion)
सूरह नाज़िआत हमें याद दिलाती है कि कयामत हक़ है और हमें अपने हर अमल का हिसाब देना होगा। यह हमें फिरौन के अंजाम से सबक लेने और अल्लाह की कुदरत पर गौर करने की दावत देती है।
अल्लाह हमें आखिरत की तैयारी करने की तौफीक दे। आमीन।





