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Surah Naas in Hindi - सूरह नास हिंदी तर्जुमा और फजीलत

Surah Naas in Hindi (सूरह नास): पढ़िए सूरह नास का हिंदी तर्जुमा, इंग्लिश ट्रांसलेशन और इसकी फजीलत। जानिए इसे जादू और वसवसों से बचने के लिए क्यों पढ़ा जाता है।

Surah Naas in Hindi - सूरह नास हिंदी तर्जुमा और फजीलत

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सूरह नास (Surah Naas) कुरान मजीद की 114वीं और आखिरी सूरह है। यह सूरह और सूरह फलक मिलकर “मुअव्विज़तैन” (Mu’awwidhatayn) कहलाती हैं, यानी पनाह मांगने वाली दो सूरतें।

जब मदीने में यहूदियों ने प्यारे नबी (ﷺ) पर जादू किया था, तब अल्लाह ने ये सूरतें नाज़िल फरमाई थीं ताकि उनके असर को खत्म किया जा सके। यह सूरह हर तरह के जादू, नज़र-ए-बद और शैतानी वसवसों से बचने के लिए बेहतरीन दुआ है।

इस आर्टिकल में हम Surah Naas in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत तफसील से जानेंगे।

ये भी पढ़े: Surah Falaq in Hindi | सूरह फलक हिंदी तर्जुमा

Surah Naas Hindi Tarjuma (Transliteration & Translation)

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
(शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है)

  1. कुल अऊज़ु बिरब्बिन नास
    (कह दीजिए! मैं पनाह मांगता हूँ सब लोगों के रब की।)

  2. मलिकिन नास
    (लोगों के बादशाह की।)

  3. इलाहिन नास
    (लोगों के माबूद (इलाह) की।)

  4. मिन शर्रिल वसवसिल खन्नास
    (वसवसा डालने वाले (शैतान) के शर से जो (अल्लाह का नाम सुनकर) पीछे हट जाता है।)

  5. अल्लज़ी युवस्विसु फी सुदूरिन नास
    (जो लोगों के सीनों में वसवसा डालता है।)

  6. मिनल जिन्नति वन्नास
    (चाहे वो जिन्नात में से हो या इंसानों में से।)


Surah Naas in English Translation

  1. Say, “I seek refuge in the Lord of mankind,
  2. The Sovereign of mankind.
  3. The God of mankind,
  4. From the evil of the retreating whisperer -
  5. Who whispers [evil] into the breasts of mankind -
  6. From among the jinn and mankind.”

सूरह नास की फजीलत (Benefits of Surah Naas)

  1. जादू और नज़र-ए-बद से हिफाज़त: हदीस में आता है कि नबी करीम (ﷺ) पर जब जादू किया गया, तो जिब्रील (अ.) ये सूरतें लेकर आए। इनके पढ़ने से जादू की गिरहें खुल गईं और आप (ﷺ) सेहतमंद हो गए।
  2. शैतानी वसवसों का इलाज: यह सूरह शैतान के वसवसों (बुरे ख्यालात) से बचने के लिए सबसे बेहतरीन दुआ है।
  3. सोने से पहले: नबी (ﷺ) हर रात सोने से पहले सूरह इखलास, सूरह फलक और सूरह नास पढ़कर अपने हाथों पर फूंकते और पूरे जिस्म पर फेरते थे। (सहीह बुखारी)
  4. अल्लाह की पनाह: इस सूरह में अल्लाह की तीन सिफात (रब, मलिक, इलाह) का वास्ता देकर पनाह मांगी गई है, जो इसे बहुत ताकतवर बनाती है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह नास कब नाज़िल हुई?
A.

ज़्यादातर रिवायतों के मुताबिक यह मदीना में नाज़िल हुई, जब नबी (ﷺ) पर जादू किया गया था।

Q. सूरह नास पढ़ने का सबसे अच्छा वक़्त क्या है?
A.

इसे हर नमाज़ के बाद, सुबह-शाम के अज़कार में और रात को सोने से पहले पढ़ना सुन्नत है।

Q. खन्नास (Khannas) का क्या मतलब है?
A.

खन्नास शैतान का लकब है, जिसका मतलब है “पीछे हट जाने वाला”। जब बंदा अल्लाह का ज़िक्र करता है तो शैतान पीछे हट जाता है, और जब गाफिल होता है तो वह वसवसा डालता है।


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अल्लाह हमें कुरान को समझ कर पढ़ने और शैतानी वसवसों से महफूज़ रहने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

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