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Surah Fatiha in Hindi - सूरह फातिहा हिंदी तर्जुमा और फजीलत

Surah Fatiha in Hindi (सूरह फातिहा): पढ़िए सूरह फातिहा का हिंदी तर्जुमा, इंग्लिश ट्रांसलेशन और इसकी फजीलत। जानिए इसे उम्मुल क़ुरान क्यों कहा जाता है और नमाज़ में इसका क्या मक़ाम है।

Surah Fatiha in Hindi - सूरह फातिहा हिंदी तर्जुमा और फजीलत

Table of Contents

सूरह फातिहा (Surah Fatiha) कुरान मजीद की सबसे पहली और सबसे अहम सूरह है। इसे “उम्मुल कुरान” (कुरान की माँ) भी कहा जाता है। नमाज़ में इसके बिना कोई रकअत पूरी नहीं होती।

इस आर्टिकल में हम Surah Fatiha in Hindi, इसका हिंदी तर्जुमा, इंग्लिश ट्रांसलेशन और इसकी फजीलत के बारे में तफ़सील से जानेंगे।

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सूरह फातिहा का परिचय

सूरह फातिहा मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) है। इसमें 7 आयतें (Verses) हैं। यह एक दुआ है जो अल्लाह तआला ने अपने बंदों को सिखाई है। जब हम कुरान पढ़ना शुरू करते हैं, तो सबसे पहले इसी सूरह से शुरुआत होती है।

हदीस में आता है: “उस शख्स की नमाज़ नहीं होती जिसने सूरह फातिहा नहीं पढ़ी।” (सहीह बुखारी)

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Surah Fatiha Hindi Tarjuma (Translation)

यहाँ सूरह फातिहा का आसान हिंदी तर्जुमा दिया गया है ताकि आप नमाज़ में जो पढ़ रहे हैं, उसका मतलब भी समझ सकें।

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
(शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है)

  1. अल्हम्दु लिल्लाहि रब्बिल आलमीन
    (सब तारीफ़ें अल्लाह के लिए हैं, जो तमाम जहानों का पालने वाला है।)

  2. अर्रहमानिर्रहीम
    (जो बहुत मेहरबान और निहायत रहम करने वाला है।)

  3. मालिकि यौमिद्दीन
    (जो बदले के दिन (क़यामत) का मालिक है।)

  4. इय्याक नअबुदु व इय्याक नस्तई़न
    (हम तेरी ही इबादत करते हैं और तुझ ही से मदद मांगते हैं।)

  5. इहदिनस्सिरातल मुस्तकीम
    (हमें सीधा रास्ता दिखा।)

  6. सिरातल्लज़ीन अन्अम्त अलैहिम
    (उन लोगों का रास्ता जिन पर तूने इनाम किया।)

  7. गैरिल मग़जूबि अलैहिम् व लज्जॉल्लीन
    (न कि उनका रास्ता जिन पर तेरा ग़ज़ब (गुस्सा) हुआ और न ही गुमराहों का।)

(आमीन)

ये भी पढ़े – Surah Yasin in Hindi | सूरह यासीन तर्जुमा और फजीलत के साथ


Surah Fatiha in Hindi (Roman English)

जो लोग अरबी नहीं पढ़ सकते, उनके लिए यहाँ सूरह फातिहा का हिंदी उच्चारण (Transliteration) दिया गया है:

Bismillaahir Rahmaanir Raheem

  1. Alhamdu lillaahi Rabbil ‘aalameen
  2. Ar-Rahmaanir-Raheem
  3. Maaliki Yawmid-Deen
  4. Iyyaaka na’budu wa lyyaaka nasta’een
  5. Ihdinas-Siraatal-Mustaqeem
  6. Siraatal-lazeena an’amta ‘alaihim
  7. Ghayril-maghdoobi ‘alaihim wa lad-daaaalleen

(Ameen)


Surah Fatiha in English Translation

BismillaHir RahmaNir Raheem

  1. In the name of Allāh, the Entirely Merciful, the Especially Merciful.
  2. [All] praise is [due] to Allāh, Lord of the worlds –
  3. The Entirely Merciful, the Especially Merciful,
  4. Sovereign of the Day of Recompense.
  5. It is You we worship and You we ask for help.
  6. Guide us to the straight path –
  7. The path of those upon whom You have bestowed favor, not of those who have earned Your anger or of those who are astray.

सूरह फातिहा की फजीलत (Surah Fatiha Benefits)

सूरह फातिहा की बहुत सारी फजीलतें हदीस में बयान की गई हैं:

  1. सबसे अज़ीम सूरह: नबी करीम (सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम) ने फरमाया कि तौरात, इंजील और ज़बूर में इस जैसी कोई सूरह नहीं उतरी। यह कुरान की सबसे अज़ीम सूरह है।
  2. शिफ़ा: इसे “सूरह शिफा” भी कहा जाता है। हदीस में है कि सूरह फातिहा हर बीमारी की शिफा है। दम करके पढ़ने से बीमार को फायदा होता है।
  3. दुआ की क़बूलियत: यह सूरह एक बेहतरीन दुआ है। इसमें बंदा अल्लाह की तारीफ करता है और फिर सीधे रास्ते की मांग करता है, जिसे अल्लाह क़बूल फरमाता है।
  4. नमाज़ की शर्त: इसके बिना नमाज़ नहीं होती, चाहे फ़र्ज़ हो या नफ़िल।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह फातिहा को उम्मुल कुरान क्यों कहते हैं?
A.

क्योंकि यह कुरान की असल जड़ है। इसमें कुरान के सारे मज़ामीन (तौहीद, रिसालत, आख़िरत, दुआ) का निचोड़ मौजूद है।

Q. क्या सूरह फातिहा के बिना नमाज़ हो जाती है?
A.

नहीं, हदीस के मुताबिक सूरह फातिहा के बिना नमाज़ मुकम्मल नहीं होती।

Q. सूरह फातिहा मक्की है या मदनी?
A. सही कॉल के मुताबिक यह मक्की सूरह है, यानी यह मक्का में नाज़िल हुई।
Q. सूरह फातिहा पढ़ने के क्या फायदे हैं?
A.

इससे रूहानी और जिस्मानी बीमारियों से शिफा मिलती है और अल्लाह से जो दुआ मांगी जाए वो क़बूल होती है।

Q. क्या सूरह फातिहा के बाद 'आमीन' कहना चाहिए?
A.

जी हाँ, सूरह फातिहा ख़त्म होने के बाद ‘आमीन’ कहना सुन्नत है, जिसका मतलब है “ऐ अल्लाह! क़बूल फरमा”।


सूरह फातिहा (Surah Fatiha) सिर्फ एक सूरह नहीं, बल्कि अल्लाह से बात करने का एक बेहतरीन जरिया है। हमें चाहिए कि हम नमाज़ में इसे ध्यान और समझ कर पढ़ें। अल्लाह तआला हमें कुरान को समझ कर पढ़ने और उस पर अमल करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।

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