·
Iffat Zia
· Quran · 4 min read

Surah Al-Ghashiyah in Hindi: सूरह गाशियह की फजीलत और तर्जुमा

Surah Al-Ghashiyah in Hindi: जानिए सूरह गाशियह की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। इस सूरह में कयामत के दिन, जन्नतियों और जहन्नमियों के हाल का बयान है।

Surah Al-Ghashiyah in Hindi: सूरह गाशियह की फजीलत और तर्जुमा

Table of Contents

सूरह अल-गाशियह (Surah Al-Ghashiyah) कुरान मजीद की 88वीं सूरह है। “गाशियह” का मतलब है “छा जाने वाली” (The Overwhelming), और यहाँ इससे मुराद कयामत (Qayamat) है जो अपनी दहशत से सबको घेर लेगी। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 26 आयतें हैं।

इस सूरह में अल्लाह तआला ने कयामत के दिन का नक्शा खींचा है। इसमें बताया गया है कि उस दिन लोगों के दो गिरोह होंगे - एक वो जो डरे हुए और मुसीबत में होंगे (जहन्नमी), और दूसरे वो जो खुश और सुकून में होंगे (जन्नती)। इसके बाद अल्लाह ने अपनी कुदरत की निशानियों (ऊँट, आसमान, पहाड़, ज़मीन) की तरफ ध्यान दिलाया है ताकि इंसान गौर करे।

इस आर्टिकल में हम Surah Al-Ghashiyah in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।

ये भी पढ़े: Surah Al-Fajr in Hindi | सूरह फज्र का तर्जुमा

सूरह गाशियह की फजीलत (Benefits of Surah Al-Ghashiyah)

  1. कयामत की याद: यह सूरह हमें याद दिलाती है कि एक दिन ऐसा आने वाला है जब सब कुछ बदल जाएगा और हर इंसान को अपने किए का हिसाब देना होगा।

  2. जन्नत और जहन्नम का फर्क: इसमें बहुत साफ लफ्ज़ों में बताया गया है कि बुरे लोगों का अंजाम क्या होगा और नेक लोगों को कैसे इनाम मिलेंगे।

  3. गौर-ओ-फिक्र की दावत: अल्लाह ने ऊँट, आसमान और पहाड़ों का ज़िक्र करके हमें सोचने पर मजबूर किया है कि इन चीज़ों को किसने बनाया? यह ईमान को मज़बूत करता है।

  4. नबी का काम: आखिर में बताया गया है कि नबी (स.अ.व.) का काम सिर्फ नसीहत करना है, किसी पर ज़बरदस्ती करना नहीं। हिसाब लेना अल्लाह का काम है।


Surah Al-Ghashiyah in Hindi (Transliteration & Translation)

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

  1. हल अताका हदीसुल-ग़ाशियह।
    (क्या तुम्हारे पास उस छा जाने वाली (मुसीबत यानी कयामत) की खबर आई है?)

  2. वुजूहुंय-यौमइज़िन ख़ाशि-अह।
    (उस दिन बहुत से चेहरे डरे हुए (ज़लील) होंगे।)

  3. आमिलातुन नासिबह।
    (मेहनत करने वाले, थक जाने वाले।)

  4. तस्ला नारन हामियह।
    (वो दहकती हुई आग में दाखिल होंगे।)

  5. तुस्क़ा मिन अइनिन आनियह।
    (उन्हें खौलते हुए चश्मे का पानी पिलाया जाएगा।)

  6. लैसा लहुम त-आमुन इल्ला मिन ज़रीअ्।
    (उनके लिए कांटेदार झाड़ियों के सिवा कोई खाना नहीं होगा।)

  7. ला युस्मिनु व ला युग़्नी मिन जूअ्।
    (जो न मोटा करेगा और न भूख मिटाएगा।)

  8. वुजूहुंय-यौमइज़िन ना-इमह।
    (और उस दिन बहुत से चेहरे तरो-ताज़ा (खुश) होंगे।)

  9. लि-सअ्-यिहा रा-ज़ियह।
    (अपनी कोशिश (नेक कमाई) पर खुश होंगे।)

  10. फी जन्नतिन आलियह।
    (ऊंचे आलीशान बाग़ (जन्नत) में होंगे।)

  11. ला तस्म-उ फीहा लाग़ियह।
    (वहां वो कोई बेकार बात नहीं सुनेंगे।)

  12. फीहा अइनुन जारियह।
    (उसमें बहते हुए चश्मे होंगे।)

  13. फीहा सुरुरुम-मरफू-अह।
    (उसमें ऊंचे तख्त (सिंहासन) होंगे।)

  14. व अक्वाबुम-मौज़ू-अह।
    (और (पानी के) कटोरे रखे हुए होंगे।)

  15. व नमारिकु मस्फ़ूफ़ह।
    (और गाओ-तकिये (Cushions) कतार से लगे होंगे।)

  16. व ज़राबिय्यु मब्सूसह।
    (और मखमली कालीन बिछे हुए होंगे।)

  17. अफ़ला यन्ज़ुरूना इलल-इबिलि कैफ़ा खुलिक़त।
    (क्या ये लोग ऊँट को नहीं देखते कि वह कैसे (अजीब तरह से) पैदा किया गया?)

  18. व इलस-समा-इ कैफ़ा रुफ़ि-अत।
    (और आसमान को कि कैसे ऊंचा किया गया?)

  19. व इलल-जिबालि कैफ़ा नुसिबत।
    (और पहाड़ों को कि कैसे गाड़े (खड़े किए) गए?)

  20. व इलल-अर्ज़ि कैफ़ा सुतिहत।
    (और ज़मीन को कि कैसे बिछाई गई?)

  21. फ़-ज़क्किर इन्नमा अन्ता मुज़क्किर।
    (तो (ऐ नबी!) आप नसीहत करते रहिए, आप तो सिर्फ नसीहत करने वाले हैं।)

  22. लस्ता अलैहिम बि-मुसयतिर।
    (आप उन पर दारोगा (ज़बरदस्ती करने वाले) नहीं हैं।)

  23. इल्ला मन तवल्ला व कफ़र।
    (मगर जिसने मुंह फेरा और इनकार किया।)

  24. फ़-यु-अज़्ज़िबुहुल-लाहुल-अज़ाबल-अक्बर।
    (तो अल्लाह उसे सबसे बड़ा अज़ाब देगा।)

  25. इन्ना इलैना इयाबहुम।
    (बेशक उन्हें हमारी ही तरफ लौटना है।)

  26. सुम्मा इन्ना अलैना हिसाबहुम।
    (फिर बेशक उनका हिसाब लेना हमारे ही जिम्मे है।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह गाशियह का मतलब क्या है?
A.

“गाशियह” का मतलब है “छा जाने वाली”। यह कयामत के नामों में से एक नाम है, क्योंकि उस दिन की मुसीबत और दहशत पूरी दुनिया को अपनी लपेट में ले लेगी।

Q. इस सूरह में ऊँट (Camel) का ज़िक्र क्यों आया है?
A.

अरब के लोगों के लिए ऊँट सबसे अहम जानवर था। अल्लाह ने उन्हें गौर करने की दावत दी है कि देखो ऊँट को रेगिस्तान के सख्त माहौल के लिए कैसे बेहतरीन तरीके से बनाया गया है। यह अल्लाह की कारीगरी का एक नमूना है।

Q. इस सूरह का मुख्य संदेश क्या है?
A.

इस सूरह का मुख्य संदेश यह है कि दुनिया की ज़िंदगी आरज़ी (Temporary) है। एक दिन सबको अल्लाह के पास लौटना है। जो लोग ईमान लाए और नेक काम किए वो जन्नत में ऐश करेंगे, और जिन्होंने इनकार किया वो जहन्नम की आग में जलेंगे।


नतीजा (Conclusion)

सूरह गाशियह हमें नींद से जगाने वाली सूरह है। यह हमें बताती है कि कयामत का दिन कितना सख्त होगा।

अल्लाह ने हमें सोचने के लिए अक़्ल दी है और देखने के लिए कायनात की निशानियां (आसमान, पहाड़, ज़मीन)। हमें चाहिए कि हम इन निशानियों को देखकर अपने रब को पहचानें और उसकी नाफरमानी से बचें।

अल्लाह हमें कयामत की रुसवाई से बचाए और हमारा हिसाब आसान फरमाए। आमीन।

    Share:
    Back to Blog