Shohar Biwi Ki Nasihat: नमाज़ की अहमियत पर एक सबक-आमोज़ वाकया
Shohar Biwi Ki Nasihat: पढ़िए शौहर और बीवी के बीच हुई एक ऐसी बातचीत जिसने शौहर की ज़िंदगी बदल दी। नमाज़ की अहमियत और आखिरत के हिसाब पर एक बेहतरीन वाकया।

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अक्सर हम शौहर-बीवी के झगड़ों के बारे में सुनते हैं, लेकिन आज हम आपको शौहर और बीवी (Husband and Wife) के बीच हुई एक ऐसी बातचीत बताने जा रहे हैं जो झगड़ा नहीं, बल्कि एक नसीहत (Advice) थी। इस वाकये ने शौहर की ज़िंदगी बदल दी।
यह कहानी हमें नमाज़ (Salah) की अहमियत और आखिरत (Hereafter) के हिसाब-किताब की याद दिलाती है।
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शौहर और बीवी की अनोखी बातचीत
एक रात शौहर और बीवी सोने की तैयारी कर रहे थे। कमरा काफी देर से शांत था।
अचानक बीवी ने खामोशी तोड़ी और अपने शौहर से पूछा: “क्या मैं आपको फजर की नमाज़ के लिए जगा सकती हूं?”
शौहर ने चिढ़कर जवाब दिया: “तुम जानती हो कि मैं पूरे दिन काम करता हूं और बहुत थका हुआ हूं। मेहेरबानी करके मुझे परेशान न करो, मुझे सोने दो।”
बीवी ने फिर प्यार से कहा: “लेकिन सुनिए! यह मशवरा देना मेरे लिए ज़रूरी है। आप पांचों वक्त की नमाज़ में से कोई भी नमाज़ नहीं पढ़ते, सिर्फ जुम्मा या ईद के समय मस्जिद जाते हैं। यह ठीक नहीं है।”
शौहर ने गुस्से से कहा: “क्या बकवास कर रही हो? क्या तुम अब चुप रहोगी? मुझे पता है कि क्या ज़रूरी है और क्या नहीं। मुझे मत सिखाओ।”
कमरे में फिर से खामोशी छा गई। कुछ देर बाद बीवी ने फिर से बात शुरू की।
बीवी: “सुनिए…” शौहर: “अब क्या हुआ? क्या दिक्कत है?” बीवी: “अब मैं नमाज़ के बारे में बात नहीं कर रही हूँ।” शौहर: “तो और क्या बात है?”
बीवी: “यह पैसे के बारे में है। आपने जो पैसे मुझे घर खर्च के लिए दिए थे, वो मैंने सारे खर्च कर दिए हैं। मुझे और पैसों की ज़रूरत है।”
शौहर यह सुनकर हैरान रह गया और गुस्से में बोला: “क्या…? तुमने सारे पैसे कहाँ खर्च कर दिए? अभी तो महीना आधा भी नहीं गुज़रा (सिर्फ 15 दिन हुए हैं) और तुमने पूरे पैसे उड़ा दिए? अगली तनख्वाह मिलने में अभी 15 दिन बाकी हैं। तुमने ऐसा कैसे किया?”
बीवी: “माफ़ करना, लेकिन मुझे कल और पैसे चाहिए। मुझे कुछ ज़रूरी काम है।” शौहर: “पहले मुझे बताओ कि तुमने पैसे कहाँ खर्च किए? मुझे एक-एक पाई का हिसाब दो।” बीवी: “माफ़ करना, मैं तुम्हें हिसाब नहीं दूंगी।”
शौहर का गुस्सा सातवें आसमान पर पहुँच गया: “क्यों नहीं दोगी? तुमने 15 दिन पहले ही सारे पैसे खत्म कर दिए और अब हिसाब देने से भी मना कर रही हो? और ऊपर से और पैसे मांग रही हो? दिमाग तो ठीक है तुम्हारा?”
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बीवी की नसीहत (The Lesson)
अब बीवी ने संजीदगी से और शांत होकर जवाब दिया:
“देखो! मैंने आपको सिर्फ दुनिया के चंद रुपयों का हिसाब देने से मना किया और आप गुस्से से लाल-पीले हो गए। ज़रा सोचिए, जब अल्लाह (Allah) कयामत के दिन आपसे आपकी ज़िंदगी और नमाज़ों का हिसाब मांगेगा, तो आप क्या करेंगे?”
बीवी ने आगे कहा: “यौमे हिसाब (Day of Judgment) के दिन, जब दुनिया के बड़े-बड़े बादशाह भी अल्लाह के डर से कांप रहे होंगे, तब आप अपने पैदा करने वाले को क्या जवाब देंगे जब वो आपसे आपकी नमाज़ों के बारे में पूछेगा?”
शौहर का बदलाव
बीवी की यह बात शौहर के दिल पर तीर की तरह लगी। वह डर गया और कयामत के मंज़र को सोचकर उसके हाथ-पैर कांपने लगे। उसका सारा गुस्सा शांत हो गया और आँखों में आंसू आ गए।
उसने अपनी बीवी से कहा: “बेगम! मुझे माफ़ कर दो। तुमने मेरी आँखें खोल दीं। मुझे फजर की नमाज़ के लिए ज़रूर जगा देना।“
नतीजा (Conclusion)
यह वाकया हमें सिखाता है कि हमें अपनी दुनियावी चीज़ों के हिसाब-किताब की तो बहुत फिक्र होती है, लेकिन हम अपनी आखिरत के हिसाब को भूल जाते हैं। नमाज़ इस्लाम का सबसे अहम सुतून है और कयामत के दिन सबसे पहले नमाज़ ही का सवाल होगा।
अल्लाह हम सबको पक्का नमाज़ी बनाए और आखिरत की फिक्र करने वाला बनाए। आमीन।





