Shadi Ki Pehli Raat in Islam | शादी की पहली रात का सुन्नत तरीका और दुआ
Shadi Ki Pehli Raat in Islam (शादी की पहली रात): जानिए इस्लाम में सुहागरात का सुन्नत तरीका, शौहर-बीवी की पहली मुलाकात की दुआ और सोहबत (Humbistari) के आदाब।

Table of Contents
Shadi Ki Pehli Raat In Islam: इस्लाम दीने फितरत है और इस्लाम में जिंदगी के हर हिस्से के बारे में हमारी रहनुमाई की गई है। फिर वह चाहे शादी हो या कोई और खुशी का मौका हमें सभी के बारे में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए अच्छे से बताया गया है। इसी में शादी की पहली रात भी दाखिल है।
दीन का इल्म हासिल करना फ़र्ज़
इस्लाम में दीन का इतना इल्म सीखना हर मुस्लमान पर फ़र्ज़ है की जिससे हराम और हलाल में फर्क समझ आ सके। निकाह करना आधा दीन मुकम्मल करना है तो इसके बारे में भी हर मुस्लमान जरूर सीखना चाहिए।
आप से गुजारिश
इस आर्टिकल को पढ़ने से पहले हम आप से गुजारिश करेंगे की आप पहले Table of Contents पढ़ ले जब आप मुतमइन हो जाये तो इस आर्टिकल को पूरा पढ़े। अगर आप अभी पूरा नहीं पढ़ सकते है तो जब आप के पास वक्त हो तब पढ़े।
क्युकी अगर आप पूरा नहीं पढ़ेंगे तो आप की जानकारी आधी अधूरी रह जाएगी जो की फायदे के बजाये और नुकसान हो जायेगा।
यह बात याद रहे कि निकाह करना आधा दीन है। और निकाह से पहले जो काम करना हराम था और बहोत बड़ा गुनाह था। अब बीवी और शौहर के लिए वो काम करना हलाल और बहोत बड़ी इबादत (सवाब का काम ) बन चूका है।
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शादी की पहली रात
यहां पर Shadi Ki Pehli Raat In Islam के बारे में बात करने का और लिखने का हमारा मकसद कोई बेहयाई फैलाना नहीं है।
एक जरूरी जानकारी जोकि एक मुसलमान को होनी चाहिए वह देना हमारा मकसद है। जिसकी शादी होनी है वह जानकारी तो कहीं ना कहीं से लेगा ही अगर सही जगह से नहीं मिली तो फिर गलत जगह से।
गलत जानकारी या फिर दूसरे लोगों से सुनी सुनाई जानकारी से अपना नुकसान कर बैठेंगे क्योंकि शरीयत में शादी जिंदगी का एक बहुत ही अहम मरहला है।
शादी भी शरीयत की नजर में एक इबादत है जैसे कि और दूसरी इबादत नमाज रोजा हज जकात है। हम दूसरी इबादत को अपने घर के बड़ों से पूछ कर या किताबों में पढ़ कर सीख लेते हैं।
लेकिन शादी में पेश आने वाले मरहले में हम शर्म की वजह से बात नहीं कर पाते और इसके बारे में हमें जानकारी नहीं हो पाती। इसलिए यहां पर दी गई जानकारी सिर्फ शरीयत की बातें आगे पहुंचाने के लिए है ना की बेहयाई और बेशर्मी फैलाने के लिए।
हम यहा शादी के बाद पहली रात की कुछ बात करेगे, लेकिन ये बात सिर्फ़ इस्लाम सीखने की नियत से पढ़िए, दिल में कुछ गंदगी ना रखीये ओर ना ही कोई ग़लत कॉमेंट करिए।
हमारा मकसद सिर्फ़ उन लोगो को इस्लाम का तरीका बताना है जिनको इस बारे में मालूमात कम है या है ही नही।
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निकाह एक सुन्नत
शादी करना सुन्नत है, और इस्लाम का एक ज़रूरी हिस्सा है। इसलिए हर इंसान को शादी करनी चाहिए। बगैर किसी जायज़ वजह के अगर कोई शादी नही कर रहा या देर से कर रहा है तो ये इस्लाम के खिलाफ है।
जिन लोगो की शादी होने वाली होती है। या जिनके किसी करीबी की शादी होने वाली है। तो उनमे से बहुत से लोगो के दिमाग़ में कुछ सवाल होते हैं की इस्लाम के हिसाब से शादी के बाद की पहली रात को क्या करना चाहिए या क्या नहीं करना चहिए। या इसका सही तरीका क्या है।
शौहर बीवी की पहली मुलाकात
शादी के बाद जब लड़का कमरे में जाए तो सबसे पहले बीवी को सलाम करे, खैरियत मालूम करे अपनी हैसियत के मुताबिक अच्छा तोहफा दे।
और कुछ खिलाएं और पिलाएं और थोड़ी बात करने के बाद लड़की की पेशानी (फोर्हेड) के बाल दाहिने हाथ से आहिस्ता से पकड़े और नीचे लिखी दी गई दुआ पढ़े।
हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलयही वस्सलम: ने इरशाद फरमाया, जब कोई शख्स निकाह करे और पहली रात (First Night ) को अपनी बीवी के पास जाए तो नर्मी के साथ उसकी पेशानी के थोड़े से बाल अपने दाहिने हाथ मे ले कर नीचे दी गई ये दुवा पढ़े।
हम आपको शौहर बीवी की पहली मुलाकात की दुआ हिंदी, उर्दू, इंग्लिश और अरबी सभी में इमेज के साथ दे रहे है उसके बाद आगे की बात जारी रहेगी।
शौहर बीवी की पहली मुलाकात की दुआ
हिंदी में दुआ: “अल्लाहुम्मा इनी असअलुका खैराहा वा खैरा मा जबलताहा अलैही, वा ए’उधु बीका मिन शररिहा वा शर्री मा जबलता अलैही” 
First Wedding Night Dua In Islam In Hindi Tarjuma
तर्जुमा: ए अल्लाह मै तुझसे इसकी (अपनी बीवी की) भलाई और ख़ैरो बरकत माँगता हू और उसकी फितरी आदतो की भलाई, और तेरी पनाह चाहता हू इसकी बुराई और फितरी आदतो की बुराई से।

Dua For First Night Of Marriage in Arabic
Arabic: اللَّهُمَّ إِنِّي أَسْأَلُكَ خَيْرَهَا وَخَيْرَ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ وَأَعُوذُ بِكَ مِنْ شَرِّهَا وَشَرِّ مَا جَبَلْتَهَا عَلَيْهِ

Dua For First Meeting With Wife in Arabic (Dua Source : Sunan Ibn Majah)
Dua For First Meeting With Wife
Transliteration: Allahumma Inni As’Aluka Khairaha Wa Khaira Ma Jabaltaha Alaihi, Wa A’Udhu Bika Min Sharriha Wa Sharri Ma Jabaltaha Alaihi

Dua For Bride & Groom After Nikah English Translation
English Translation: O Allah, I ask You for the goodness within her and the goodness that You have made her inclined towards, and I seek refuge with You from the evil within her and the evil that You have made her inclined towards.
नोट : ये दुआ सिर्फ एक बार यानि की शादी के बाद जब पहली बार मिले तभी पढ़ना है।
पेशानी के बाल पकड़ कर दुआ करने से पहले अपनी बीवी को ये बात बता दे की ये हमारे नबी हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलयही वस्सलम की सुन्नत है, वरना जिस लड़की को नही मालूम हो वो कुछ ग़लत ना सोचने लगे।
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Shadi Ki Pehli Raat Ka Sunnat Tarika
इसके बाद वजू कर लीजिए और 2 रकत नफिल नमाज़ पढ़ सकते है, ये नमाज़ कोई सुन्नत/फ़र्ज़/वाजिब नही है। ये अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए नफल नमाज़ है।
इसलिए इसका पढ़ना ज़रूरी नही लेकिन अल्लाह का शुक्र अदा करने की नियत से पढ़ ले तो अच्छा है।
नमाज़ की नियत
नियत की मैने 2 रकत नमाज़ नफ़िल शुकराने की वास्ते अल्लाह ता’आला के रुख़ मेरा काबा शरीफ की तरफ, अल्लाहो अकबर।
फिर हुमेशा जैसे नमाज़ पढ़ते हे वैसे ही नमाज़ पढ़े और दुआ करे
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नमाज़ इस तरह पढ़िए की लड़का आगे हो और लड़की उसके पीछे खड़े हो जाए। नमाज़ के बाद शादी खैरियत से होने के लिए अल्लाह का शुक्र अदा कीजिए और ये दुआ करिए की अल्लाह इस शादी को कामयाब बनाए। आगे भी हँसी-खुशी रखे और नेक औलाद अता करे।
और इस तरह भी दुवा कर सकते हैं “आए अल्लाह तेरा शुक्रा और एहसान है की तूने हमें ये दिन दिखाया और हमें ये खुशी वा नेमत से नवाज़ा और हमें अपने हबीब हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलयही वस्सलम की सुन्नत पर अमल करने की तौफ़ीक़ आता फरमाई।
ए अल्लाह हुमारी इस खुशी को हमेशा इसी तरह कायम रख। हमें मेल-मिलाप प्यार मुहब्बत के साथ ज़िंदगी गुजरने की तौफ़ीक़ आता फ़र्मा।
ए रबबे क़ादीर हमें नेक और फर्मा बरदार औलाद आता फ़र्मा। इसके अलावा जो भी आप शादी की कामयाबी के लिए दुआ करना चाहे कर सकते हैं। दुआ के पहले और आख़िर में दरूद शरीफ पढ़ लीजिए।
नमाज़ के बाद किसी भी काम में जल्द-बाज़ी ना करें, बल्कि लड़की से इस तरह बात करिए की उसकी थोड़ी झिझक दूर हो जाए। थोड़ा अपने बारे में बात करिए थोड़ा उसकी सुनिए।
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जब लड़की की थोड़ी झिझक दूर हो जाए तो और आप एक दूसरे के साथ Comfortable हो जाये उसके बाद आगे मरहला तय करे।
जब साथ में सोने का इरादा करें तो उससे पहले लड़की की इजाज़त ले ले और हैज़ (Period ) तो नहीं चल रहा है इसके बारे में मालूम कर ले।
यहाँ लड़की से इजाजत लेने का मतलब है की वो इस अमल के लिए तैयार है की नहीं, ऐसा हो हकता है की लड़की थकान या फिर भारी भड़कम कपड़ा पहनने की वजह से या किसी और वजह से परेशान हो।
इस सिचुएशन में आप लड़की से बात कर के उसको राज़ी करे या ये अमल न करे लड़की के साथ जबरदस्ती बिलकुल भी न करे।
शर्म की वजह से लड़की अगर खुल कर न बोले तो उसकी खामोसी से अंदाजा लगा सकते है।
जब शौहर बीवी के साथ सोने का इरादा करें तो उससे पहले ये दुआ पढ़े जिससे की शैतान से हिफाजत हो सके।
हम आपको सोहबत करने की दुआ हिंदी, उर्दू, इंग्लिश और अरबी सभी में इमेज के साथ दे रहे है उसके बाद आगे की बात जारी रहेगी।
सोहबत करने की दुआ
हिंदी में दुआ: “बिस्मिल्लाही अल्लाहुम्मा जन्निबनश-शैताना वा जन्नीबिश-शैताना मा रज़कतना”

तर्जुमा: अल्लाह के नाम से। ऐ अल्लाह दूर कर हमसे शैतान मरदुद को और दूर कर शैतान मरदूद को उस औलाद से जो तू हमे आता करेगा।

सोहबत की दुआ अरबी में
Arabic: بِاسْمِ اللَّهِ، اللَّهُمَّ جَنِّبْنِي الشَّيْطَانَ، وَجَنِّبِ الشَّيْطَانَ مَا رَزَقْتَنَا
(Dua Source: Sahih al-Bukhari)
میں اللہ کے نام سے شروع کرتا ہوں اے اللہ ! شیطان کو مجھ سے دور رکھ اور شیطان کو اس چیز سے بھی دور رکھ جو ( اولاد ) ہمیں تو عطا کرے
Sohbat ki Dua in English
Transliteration: Bismillah, Allahumma Jannibni-Sh-Shaitan Wa Jannib-Ish-Shaitan Ma Razaqtana
जो शाकस इस दुआ को सोहबत करने से पहले पढ़ेगा ( वही दुआ जो उपर लिखी है) तो अल्लाह उस पढ़ने वाले को अगर औलाद आता फरमाये तो उस औलाद को शैतान कभी भी नुकसान ना पहुँचा सकेगा।
नोट : ये याद रखिए की जो पेशानी के बाल पकड़ कर दुआ करनी है वो सिर्फ़ पहली रात में ही पढ़ना है और एक ही बार पढ़ना है।
और ये दुआ (जो ऊपर लिखी है) आपको हमेशा पढ़ना है, जब भी बीवी के साथ सोने का इरादा करे। तो उससे पहले इस दुआ को पढ़ना ज़रूरी है।
बहोत छोटी सी दुआ है, 4-5 बार पढ़ने से याद हो जाएगी, अगर इस दुआ को पढ़े बगैर आप बीवी के साथ सोते हैं। और उसके नतीजे में औलाद वजूद में आती है तो, हो सकता है की शैतान/जिन्न भी आपके साथ-साथ आपकी बीवी से सोहबत कर ले। इस दुआ को पढ़ने से अल्लाह हिफ़ाज़त फरमाता है।
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सोहबत करने का तरीका
मिया बीवी का साथ में सोने का सही तरीका ये है की दोनो एक दूसरे के बदन को बिला ज़रूरत ना देखे। उम्मुल मोमिनिन हज़रत आएशा सिद्दीक़ा (R.Z.) फरमाती है जिसका मफहूम है की हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलयही वस्सलम ने ना कभी उनके बदन को देखा ना उन्होने।
साथ में सोते वक्त बिला ज़रूरत बात ना करें, और सोते वक्त अपने उपर एक चादर डाल लें (यानी पूरा बदन खुला ना रहे)।
गलत किस्म की फिल्म को दिमाग़ से निकाल दें क्योंकि वो वेश्या (प्रॉस्टिट्यूट) होती हैं। और यहां पर ये आपकी बीवी है, इसलिए सिर्फ़ इस्लामी तरीके के हिसाब से ही साथ में सोएँ।
शोहबत एकदम से शुरू ना करें बल्कि पहले फोरप्ले (एक दूसरे के साथ खेलें) करें यानी कि थोड़ी देर बातचीत करें और एक दूसरे के साथ खेलें ऐसा करने से आप बीवी को मुत्मइन कर सकेगे।
फोरप्ले करने का एक फायदा यह भी है की लड़की की शर्मगाह सोबत के लिए तैयार हो जाती है और आप बा आसानी सोहबत कर सकेंगे जिससे लड़के और लड़की दोनों को सोहबत करने में तकलीफ नहीं होगी।
यह बात याद रहे की ये बाते शौहर के लिए है क्युकी बीवी अभी शर्म और हया की वजह से खुल कर आप के साथ शामिल नहीं हो पायेगी। और अगर बीवी आप का साथ दे रही हो तो उसको बेशर्मी भी न समझे बल्कि ये तो और अच्छी बात है। नेक और पाकीज़ा लड़की अपने शौहर के लिए हमेशा तैयार रहती है।
फोरप्ले करने के बाद भी अगर लड़की की शर्मगाह गीली नहीं हो रही है चाहे किसी भी वजह से तो आप इसके लिए अलग से किसी तेल वगैरह का इस्तेमाल कर सकते हैं(जैसे नारियल का तेल ) जिससे कि लड़की को दर्द नहीं होगा।
सौहर और बीवी एक दूसरे को जहां चाहे छू सकते हैं और चुम सकते हैं (शर्मगाह को चूम नहीं सकते) छू सकते हैं इसके अलावा जहां चाहे चूम सकते हैं।
तहकीक से पता चला है की लड़की के अंदर ज्यादा ख्वाहिश होती है लेकिन शर्म की वजह से वह इसको कह नहीं पाती तो आप इसका भी ध्यान रखें और बीवी को पूरी तरह मुत्मइन करने की पूरी कोशिश करें।
बहुत से लड़के को यह मसला हो सकता है कि वह जल्दी से फारिग हो जाते हैं तो इसमें घबराने की कोई बात नहीं है यह एक आम सी बीमारी है इसके लिए आप ज्यादा से ज्यादा फोरप्ले करें और अगर फारिग भी हो जाए तो अलग ना हट जाए बल्कि बीवी के साथ खेलें फॉरप्ले करें और उसको मुत्मइन करें।
सोहबत करने के आदाब
- हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलयही वस्सलम ने फरमाया: पाखाने की जगह (पीछे का मुकाम ) मे लड़की से सोहबत (सेक्स) करना हराम है। लेकिन पीछे से सही जगह यानि की मुक़ामे पैदाइस में करना जाएज़ है।
- हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलयही वस्सलम ने फरमाया: जिसने लड़की से उसके पीछे के मुकाम से सोहबत (सेक्स) की उसने यक़ीनन कुफ्र किया (अबू दाऊद शरीफ)
- हज़रत मुहम्मद सलल्लाहो अलयही वस्सलमने फरमाया: अल्लाह क़यामत के दिन ऐसे शकस की तरफ नज़रे रहमत नही फरमाएगा. जिसने अपनी बीवी के पीछे के रास्ते से सोहबत की (बुखारी शरीफ, तिर्मीज़ी शरीफ, इबने मज़ा)
- इसलिए बीवी के साथ जानवरो जेसा काम ना करें, बात मुख्तसर है की पॉर्न मूवीज जैसा कुछ ना करें।
- सिर्फ़ इस्लामी तरीके से साथ में सोए। और जिस तरीके से करना चाहो करो, लेकिन सोहबत लड़की के पीछे के रास्ते से ना हो।
- जब लड़की का महीना (हैज़/माहवारी) हो उस टाइम उसके साथ लेट बैठ सकते हैं, किस कर सकते हैं लेकिन सोहबत नही कर सकते, जब तक की वो गुसल करके पाक ना हो जाए।
- गलत किस्म की मूवीज़ में देख कर एक दूसरे की शर्मगाह को ना चूमे। ना चूमने पर मजबूर करे, ये एक गलत हरकत है। हा बाये हाथ से एक दूसरे की शर्मगाह हो छू सकते है इसमें कोई हर्ज़ नहीं है।
वलीमे के बारे में ग़लतफ़हमी
बहुत से लोगो को ये ग़लत फ़हमी होती है की अगर शादी के बाद पहली रात में मिया बीवी साथ नही सोए या सोहबत न करे तो दूसरे दिन वालिमा नही हो सकता, जबकि एसा कुछ भी नही है, बगैर साथ सोए भी वालिमा किया जा सकता है।
सोहबत और वलीमे का आपस में कोई ताल्लुक नहीं है। वलीमा निकाह की खुशी में की जाने वाली दावत है। वलीमा करना सुन्नत है और सभी को जरूर करना चाहिए।
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शोहबत की एक बड़ी ग़लतफहमी
कुछ लोगो का ख़याल हैं कि जब लड़की से पहली बार सोहबत की जाए तो उसकी शरम गाह से खून खारिज होना ज़रूरी है।
ये खून का आना उसके पाक दामन होने का सुबूत समझा जाता है अगर खून नही आया तो लड़की बदचलन और आवारा समझी जाती हैं। और लड़की की शराफ़त और बा अजमत होने मे शक किया जाता है लेकिन ये बात सही नहीं है आइए इस मसले की हकीकत तफसील से जान लेते हैं।
कुवारि लड़कियो की शर्मगाह मे तोड़ा अंदर एक पतली झिल्ली होती हे। जिसे परदा-ए-अजमत या परदा-ए-बकरत (हाइमेन) कहते हे। इस झिल्ली मे छोटा सा सुराख होता हे जिसके ज़रिए लड़की के बालिग होने पर हैज़ (माहवारी) का खून अपने वक़्त पर खारिज़ होता रहता है।
शादी के बाद जब लड़का पहली बार सोहबत करता है तो लड़के की शर्मगाह के उसके साथ टकराने की वजह से वो झिल्ली फट जाती हैं इस मौके पर लड़की को थोड़ी तकलीफ़ भी हो सकती हैं और थोड़ा सा खून खारिज होता है।
और फिर यह झिल्ली हमेशा के लिए ख़तम हो जाती हैं लेकिन ये झिल्ली पतली और नाज़ुक होती हैं तो कई मर्तबा किसी लड़की को ये किसी मामूली चोट या किसी हादसे की वजह से या कभी कभी खुद बा खुद फट जाती हैं।
लिहाज़ा अगर लड़की से सोहबत के दौरान खून ना निकले तो उसे आवारा या बदकीरदार समझना मुनासिब नहीं होगा जब तक कि मुकम्मल शराई सुबूत ना हो।
जिसका परदा-ए-अजमत कूदने, हैज़ आने, जख्म या किसी हादसे या उमर ज़्यादा होने की वजह से फट जाए तो वो लड़की हक़ीकत मे बा किरदार (कुवारि, पाक दामन) है।
लड़को की शर्मगाह के मुतालिक गलतफहमी
लड़को को अक्सर एक गलतफमी अपनी शर्मगाह के मुतालिक होती है है की वो छोटी है। और इस सिलसिले में वो बहोत परेशान हो जाते है की शादी के बाद क्या होगा। बीवी खुश रहेगी की नहीं इसके मुतालिक वो बहोत परेशान हो जाते है।
यह गलतफहमी बे बुनियाद है।
पहेली बात की शर्मगाह छोटी है की बड़ी ये बात तब तक नहीं पता चलेगी जब तक वो किसी और की शर्मगाह न देखे। और इस्लाम में किसी की भी शर्मगाह को देखना जायज़ नहीं है।
दूसरी बात ये है की तहक़ीक़ से ये बात पता चली है की औलाद पाने के लिए और बीवी को मुत्मइन करने के लिए तनाव की हालत में दो इंच की शर्मगाह काफी है।
तीसरी बात ये की ये अल्लाह सुब्हानहु व ताअला की बनाई हुई चीज़ है इसमें कोई कुछ नहीं कर सकता आप के लिए जो बेहतर था अल्लाह सुब्हानहु व ताअला को बेहतर पता है।
चौथी बात ये की आज कल कुछ कंपनिया पैसा कमाने की गरज़ से हमारे मन में ये फितूर डलवाती है ताकि उनका सामान दवा वगैरह बिक सके
आखिर में आप से यही गुजारिस है की आप इस गलतफहमी पर धयान बुल्कुल न दे इस बारे में न कुछ देखे न कुछ सुने क्युकी ये देख कर ही पता चलता है।
अगर आप ने पहले कभी गलत मूवीज़ देखी है तो अब अल्लाह सुब्हानहु व ताअला से सच्ची तौबा करे और दुबारा कभी ना देखने का वादा करे। इस गलतफमी से बचने के लिए अपनी बीवी से खूब मुहब्बत करे जिससे आप के दिमाग में कोई भी गलत ख्याल आएगा ही नहीं।
आपस की बात दुसरो को बताना
यह पर एक काबिले जिक्र और ज़रूरी बात ये हैं कि लड़का हो या लड़की कोई भी अपने दोस्त या सहेली को अपनी रात में क्या हुआ क्या नही इस बारे में पूछे जाने पर कुछ न बताये और पूछने वाले को मना करे की ये बाते पूछना गुनाह है।
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अक्सर देखने में आया है की सुबह लड़की को उसकी सहेली पकड़ लेती है और लड़के को उसके दोस्त, और वो उनसे रात की बात पूछते हैं, लेकिन इस्लाम में इस बात को बहुत सख्ती से माना किया गया है की कोई अपनी पर्सनल बात अपने दोस्तो/सहेली को बताए।
और ये एक गुनाह भी है, इस बात का एक नुकसान ये भी है की अगर कोई लड़का अपने दोस्त को रात की बात सुना देता है तो फिर बाद में उसकी भाभी जब भी उसके सामने आएगी उसको दोस्त की सुनाई हुए बात याद आ जाएगी
और हो सकता है कि उसके मन में गलत खयालात आने लगे इसलिए इस बुराई से बचिए। और अपनी बीवी को खुद बेइज़्ज़त ना करिए। लड़की को भी अपनी सहेलियो को कोई भी बात नही बतानी चाहिए।
गुसले जनाबत
लड़का और लड़की को इस बात की जानकारी होना चाहिए की जब दोनो एक साथ सो लेते हैं तो इस्लाम की नज़र से दोनो ना-पाक हो जाते हैं। यानी की गुसले जनाबत फर्ज हो जाता है।
ना-पाक होने के बाद दोनो ना नमाज़ पढ़ सकते हैं ना क़ुरान शरीफ को हाथ लगा सकते हैं, इसलिए साथ में सोने के बाद गुसल करना (नहाना) ज़रूरी है।
गुसल जितनी जल्दी कर लो उतना ही ज्यादा अच्छा है। ग़ुस्ल का मुकम्मल तरीका यहाँ पढ़ सकते है Gusal Ka Tarika
निकाह का सवाब
(1) इस्लाम के हिसाब से, जब तक लड़का-लड़की की शादी ना हुए थी तब तक उनका एक दूसरे को प्यार से देखना, प्यार से बात करना ये सब गुनाह था।
लेकिन जब उनकी शादी हो गई तो अब इन दोनो का प्यार से बात करना, साथ में मोहोब्बत से रहना, एक दूसरे को प्यार करना सब सवाब बन जाता है।
(2) जब मिया बीवी एक दूसरे को प्यार की नज़र से मुस्कुरा कर देखते हैं तो अल्लाह दोनो को मुस्कुरा कर देखता है।
अल्लाह इंसान से हर पल का हिसाब लेगा, लेकिन कुछ वक्त ऐसा हैं जिसका हिसाब अल्लाह नही लेगा, उसमें से एक मिया-बीवी का साथ बिताया गया वक्त भी शामिल है।
(3) जैसे जिना करना एक बहोत बड़ा गुनाह है। उसी तरह अपनी बीवी से शोहबत करना बहोत बड़ा सवाब है।
(4) अगर किसी लड़की से उसका शौहर नाराज़ होकर सो गया तो उस लड़की पर फरिश्ते रात भर लानत करते हैं।
(5) शौहर को चाहिए की अपनी बीवी का हर तरह से ध्यान रखे, उसकी हर सही बात और ख्वाहिश को पूरी करने की कोशिश करे और उसको खुश रखने की हर मुमकिन कोशिश करे।
अल्लाह हम सबको सुन्नत तरीके से हर काम करने की तौफ़ीक आता करे, आमीन.
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. शादी की पहली रात क्या करना चाहिए?
शादी की पहली रात (सुहागरात) को शौहर को चाहिए कि बीवी को सलाम करे, तोहफा दे, पेशानी के बाल पकड़ कर दुआ पढ़े और 2 रकत नफिल नमाज़ शुकराने की पढ़े।
Q. बीवी से पहली मुलाकात की दुआ क्या है?
दुआ ये है: “अल्लाहुम्मा इनी असअलुका खैराहा वा खैरा मा जबलताहा अलैही…” (पूरी दुआ ऊपर आर्टिकल में देखें)।
Q. क्या सुहागरात को हमबिस्तरी करना ज़रूरी है?
नहीं, यह ज़रूरी नहीं है। यह दोनों की रज़ामंदी और आराम पर निर्भर करता है। अगर दोनों थक गए हैं तो आराम कर सकते हैं।
Q. क्या बीवी का दूध पीना जायज़ है?
इस्लाम में बीवी का दूध पीना हराम नहीं है, लेकिन जानबूझ कर ऐसा करना मुनासिब नहीं है क्योंकि दूध बच्चे की गिज़ा है।
Q. क्या हैज़ (Periods) की हालत में हमबिस्तरी कर सकते हैं?
जी नहीं, आप साथ बैठ सकते हैं, बातें कर सकते हैं, लेकिन हमबिस्तरी करना हराम है। जब तक बीवी पाक न हो जाए, सोहबत नहीं कर सकते।
Q. क्या पहली बार में खून आना ज़रूरी है?
नहीं, यह ज़रूरी नहीं है। पर्दा-ए-बकरत (Hymen) खेल-कूद या किसी और वजह से भी फट सकता है। खून न आने का मतलब यह नहीं कि लड़की पाक-दामन नहीं है।
Q. क्या हमबिस्तरी के बिना वलीमा हो सकता है?
जी हाँ, वलीमा निकाह की खुशी में दी जाने वाली दावत है। इसका हमबिस्तरी करने या न करने से कोई ताल्लुक नहीं है।
Q. क्या अपनी निजी बातें दोस्तों को बता सकते हैं?
बिल्कुल नहीं। इस्लाम में मियाँ-बीवी की निजी बातें और राज़ दूसरों को बताना सख्त मना है और यह बड़ा गुनाह है।
Q. क्या शर्मगाह को चूमना जायज़ है?
इस्लाम में हया का तकाज़ा यही है कि एक-दूसरे की शर्मगाह को न चूमा जाए। यह जानवरों जैसा अमल है और इससे बचना चाहिए।
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