Ramzan Ki Rukhsat: रमज़ान की विदाई और चाँद रात की इबादत
Ramzan Ki Rukhsat: रमज़ान का मुबारक महीना हमसे जुदा हो रहा है। जानिए रमज़ान की रुखसत पर क्या करें, चाँद रात की इबादत और तौबा का तरीका।

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रमज़ान (Ramzan) का मुबारक महीना, जो रहमतों और बरकतों का खज़ाना लेकर आया था, अब हमसे रुखसत हो रहा है। यह घड़ी हर मोमिन के लिए गमगीन होती है। दिल में एक कसक होती है कि काश! हमने इस महीने की और कद्र की होती।
Ramzan Ki Rukhsat का यह वक़्त सिर्फ अफ़सोस करने का नहीं, बल्कि जो कुछ बचा है उसे समेटने और अल्लाह का शुक्र अदा करने का है।
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रमज़ान की गवाही (Hadith)
हज़रत अब्दुल्लाह बिन अम्र (रज़ि.) से रिवायत है कि नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “कयामत के दिन रोज़ा और कुरान बंदे की सिफारिश (Shifa’at) करेंगे। रोज़ा कहेगा: ‘ऐ अल्लाह! मैंने इसे दिन में खाने-पीने और ख्वाहिशों से रोका, तू मेरी सिफारिश कुबूल फरमा।’ और कुरान कहेगा: ‘मैंने इसे रात में सोने से रोका, तू मेरी सिफारिश कुबूल फरमा।’ चुनांचे दोनों की सिफारिश कुबूल की जाएगी।” (मिश्कात शरीफ)
रमज़ान की विदाई पर क्या करें?
जब रमज़ान जाने वाला हो, तो हमें तीन काम ज़रूर करने चाहिए:
1. अल्लाह का शुक्र (Gratitude)
अल्लाह का शुक्र अदा करें कि उसने हमें यह रमज़ान नसीब किया, रोज़े रखने और तरावीह पढ़ने की तौफीक दी। कुरान में है: “ताकि तुम गिनती पूरी करो और अल्लाह की बड़ाई बयान करो इस पर कि उसने तुम्हें हिदायत दी, और ताकि तुम शुक्रगुज़ार बनो।” (सूरह बकरा: 185)
2. इस्तिग्फार (Istighfar)
हम इंसान हैं, इबादत में कमी रह ही जाती है। इसलिए रमज़ान के आखिरी दिनों में कसरत से तौबा और इस्तिग्फार करें। दुआ: “अस्तगफिरुल्लाह रब्बी मिन कुल्ली ज़म्बिन व अतूबु इलैह”
3. कबूलियत की दुआ
अल्लाह से रो-रो कर दुआ मांगें कि “ऐ अल्लाह! हमारी टूटी-फूटी इबादतों को कुबूल फरमा और इसे हमारे लिए निजात का जरिया बना। हमें अगला रमज़ान भी नसीब फरमा।”
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चाँद रात: इनाम की रात (Laylatul Jaiza)
अक्सर लोग चाँद रात (Chand Raat) को बाज़ारों में शॉपिंग और घूमने-फिरने में गुज़ार देते हैं। जबकि हदीस में इसे “लैलतुल जायज़ा” (इनाम की रात) कहा गया है।
मज़दूर को मजदूरी काम ख़त्म होने पर मिलती है। रमज़ान के रोज़ेदारों का इनाम ईद की रात (चाँद रात) को मिलता है। हदीस में है: “जो शख्स ईदैन (ईदुल फित्र और ईदुल अज़हा) की रातों में (इबादत के लिए) जागेगा, उसका दिल उस दिन नहीं मरेगा जिस दिन लोगों के दिल मर जाएंगे (यानी कयामत के दिन)।” (इब्ने माजा)
सलाह: शॉपिंग और तैयारी पहले कर लें। चाँद रात को कम से कम ईशा और फज्र की नमाज़ जमात से पढ़ें और कुछ देर अल्लाह का ज़िक्र करें।
सदका-ए-फित्र (Sadqa Fitr)
रमज़ान की रुखसत के साथ एक ज़रूरी काम सदका-ए-फित्र अदा करना है। यह ईद की नमाज़ से पहले हर हाल में अदा कर देना चाहिए ताकि गरीब भी ईद की खुशियों में शामिल हो सकें।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या अलविदा जुम्मा की कोई खास नमाज़ होती है?
नहीं, अलविदा जुम्मा (रमज़ान का आखिरी जुम्मा) की कोई अलग से खास नमाज़ हदीस से साबित नहीं है। यह आम जुम्मा की तरह ही है, बस इसकी फजीलत रमज़ान की वजह से बढ़ जाती है।
Q. अगर रमज़ान के कुछ रोज़े छूट गए हों तो क्या करें?
अगर बीमारी या सफर की वजह से रोज़े छूटे हैं, तो ईद के बाद किसी भी दिन उनकी कज़ा (Qaza) रख लें।
Q. शव्वाल के 6 रोज़ों की क्या फजीलत है?
हदीस में है कि जिसने रमज़ान के रोज़े रखे और फिर उसके बाद शव्वाल के 6 रोज़े रखे, तो यह ऐसा है जैसे उसने पूरे साल (या पूरी उम्र) रोज़े रखे। (मुस्लिम)
नतीजा (Conclusion)
रमज़ान जा रहा है, लेकिन रब-ए-रमज़ान तो हमेशा मौजूद है। जिस तरह रमज़ान में गुनाहों से बचते थे, कोशिश करें कि रमज़ान के बाद भी वो परहेज़गारी बाकी रहे।
अल्लाह हम सबकी मगफिरत फरमाए और हमें बार-बार रमज़ान नसीब करे। आमीन।





