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Iffat Zia
· Dua · 4 min read

Namaz Ke Baad Ki Dua in Hindi - नमाज़ के बाद पढ़ने वाली मसनून दुआएं

Namaz Ke Baad Ki Dua in Hindi (नमाज़ के बाद की दुआ): फ़र्ज़ नमाज़ के बाद पढ़ने वाली मसनून दुआएं, अज़कार और तस्बीह। सही तरीका यहाँ पढ़ें।

Namaz Ke Baad Ki Dua in Hindi - नमाज़ के बाद पढ़ने वाली मसनून दुआएं

Table of Contents

नमाज़ के बाद की दुआ (Namaz Ke Baad Ki Dua) और अज़कार का इस्लाम में बहुत बड़ा मक़ाम है। फ़र्ज़ नमाज़ के फ़ौरन बाद दुआ की क़बूलियत का वक़्त होता है।

अक्सर लोग नमाज़ पढ़कर फ़ौरन उठ जाते हैं, जबकि हदीस में नमाज़ के बाद कुछ ख़ास अज़कार (Tasbeeh) और दुआएं पढ़ने की बहुत फजीलत बताई गई है। इससे दिल को सुकून मिलता है और गुनाह माफ़ होते हैं।

इस आर्टिकल में हम Namaz Ke Baad Ki Dua in Hindi, तस्बीह-ए-फातिमी, कामयाबी की दुआ और मिट्टी देने की दुआ तफसील से जानेंगे।

ये भी पढ़े: Namaz Ka Tarika in Hindi | नमाज़ पढ़ने का सही तरीका

Namaz Ke Baad Ki Dua (Masnoon Azkar)

फ़र्ज़ नमाज़ का सलाम फेरने के बाद ये दुआएं पढ़ना सुन्नत है:

1. अस्तगफार (Astaghfar)

सलाम फेरने के बाद 3 बार पढ़ें:

अस्तगफिरुल्लाह, अस्तगफिरुल्लाह, अस्तगफिरुल्लाह (मैं अल्लाह से बख्शिश मांगता हूँ)

2. सलामती की दुआ

फिर यह दुआ पढ़ें:

अल्लाहुम्मा अन्तस-सलाम व मिनकस-सलाम, तबारकता या ज़ल-जलालि वल-इकराम

(तर्जुमा: ऐ अल्लाह! तू ही सलामती वाला है और तेरी ही तरफ से सलामती है। तू बरकत वाला है, ऐ जलाल और इज्ज़त वाले।)

3. मदद की दुआ

हज़रत मुआज़ बिन जबल (र.अ.) को नबी (ﷺ) ने यह दुआ सिखाई और फरमाया कि हर नमाज़ के बाद इसे कभी न छोड़ना:

अल्लाहुम्मा अ-इन्नी अला ज़िक्रिका व शुक्रिका व हुस्नि इबादतिक

(तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मेरी मदद कर तेरे ज़िक्र, तेरे शुक्र और तेरी अच्छी इबादत पर।)

4. तस्बीह-ए-फातिमी (Tasbeeh-e-Fatimi)

हर नमाज़ के बाद इसे पढ़ने वाले के गुनाह माफ़ कर दिए जाते हैं, चाहे वो समुद्र के झाग के बराबर हों:

  • 33 बार: सुब्हानअल्लाह (SubhanAllah)
  • 33 बार: अल्हम्दुलिल्लाह (Alhamdulillah)
  • 34 बार: अल्लाहु अकबर (Allahu Akbar) (या 33 बार अल्लाहु अकबर और आखिर में एक बार ला इलाहा इल्लल्लाहु… पढ़कर 100 पूरे करें)

5. आयतुल कुर्सी (Ayatul Kursi)

हदीस में है कि जो शख्स हर फ़र्ज़ नमाज़ के बाद आयतुल कुर्सी पढ़ता है, उसे जन्नत में जाने से मौत के सिवा कोई चीज़ नहीं रोक सकती।

6. तौहीद की गवाही और दुआ

यह दुआ भी हर नमाज़ के बाद पढ़ना सुन्नत है:

ला इलाहा इल्लल्लाहु वह्-दहू ला शरी-क लहू, लहुल-मुल्कु व लहुल-हम्दु व हु-व अला कुल्लि शैइन क़दीर। अल्लाहुम्मा ला मानि-अ लिमा अअ-तै-त, वला मुअ-ति-य लिमा म-नअ-त, वला यन्-फउ ज़ल-जद्दि मिन्कल-जद्द।

(तर्जुमा: अल्लाह के सिवा कोई माबूद नहीं, वो अकेला है, उसका कोई शरीक नहीं। उसी के लिए बादशाहत है और उसी के लिए तमाम तारीफें हैं और वो हर चीज़ पर क़ुदरत रखने वाला है। ऐ अल्लाह! जो तू दे उसे कोई रोक नहीं सकता, और जो तू रोके उसे कोई दे नहीं सकता, और किसी बुज़ुर्ग की बुज़ुर्गी तेरे सामने काम नहीं आ सकती।)

7. तीन कुल (Three Quls)

हर नमाज़ के बाद एक-एक बार सूरह इखलास, सूरह फलक और सूरह नास पढ़ना चाहिए। फज्र और मगरिब की नमाज़ के बाद तीन-तीन बार पढ़ना सुन्नत है।

8. सुबह की ख़ास दुआ (फज्र के बाद)

फज्र की नमाज़ के बाद यह दुआ पढ़ें:

अल्लाहुम्मा इन्नी अस-अलुक इल्मन नाफि-अन, व रिज़्कन तय्यि-बन, व अमलन मु-तक़ब्बला।

(तर्जुमा: ऐ अल्लाह! मैं तुझसे नफा देने वाले इल्म, पाकीज़ा रिज़्क़ और क़बूल होने वाले अमल का सवाल करता हूँ।)


Kamyabi Ki Dua (कामयाबी की दुआ)

ज़िन्दगी के किसी भी मक़सद, इम्तिहान या काम में कामयाबी के लिए यह कुरानी दुआ (सूरह बनी इसराइल, आयत 80) बहुत मुअस्सर है:

रब्बी अद-खिलनी मुद-खला सिदकिंव-व-अखरिजनी मुख-रजा सिदकिंव-वज-अल्ली मिल-लदुनका सुल्तानन नसीरा

(तर्जुमा: ऐ मेरे रब! मुझे (जहाँ ले जा) सच्चाई के साथ दाखिल कर और (जहाँ से निकाल) सच्चाई के साथ निकाल, और मुझे अपनी तरफ से मददगार कुwwत (ताकत) अता फरमा।)


Mitti Dene Ki Dua (मिट्टी देने की दुआ)

जब किसी मय्यत को दफनाते हैं, तो कब्र पर मिट्टी डालते वक़्त यह पढ़ना चाहिए:

  1. पहली मुट्ठी पर: मिन्हा खलकनाकुम (इसी से हमने तुम्हें पैदा किया)
  2. दूसरी मुट्ठी पर: व फीहा नुईदुकुम (और इसी में हम तुम्हें लौटाएंगे)
  3. तीसरी मुट्ठी पर: व मिन्हा नुख्रिजुकुम तारतन उखरा (और इसी से हम तुम्हें दोबारा निकालेंगे)

Chand Dekhne Ki Dua (चाँद देखने की दुआ)

जब नया चाँद देखें तो यह दुआ पढ़ें:

अल्लाहुम्मा अहिल-लहू अलैना बिल-युम्नि वल-ईमानि, वस्सलामति वल-इस्लाम, रब्बी व रब्बुकल्लाह

(तर्जुमा: ऐ अल्लाह! इस चाँद को हम पर बरकत, ईमान, सलामती और इस्लाम के साथ निकाल। (ऐ चाँद) मेरा और तेरा रब अल्लाह है।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या नमाज़ के बाद दुआ मांगना ज़रूरी है?
A.

नमाज़ के बाद दुआ मांगना सुन्नत है और यह क़बूलियत का वक़्त होता है, लेकिन यह फ़र्ज़ नहीं है।

Q. तस्बीह-ए-फातिमी क्या है?
A.

33 बार सुब्हानअल्लाह, 33 बार अल्हम्दुलिल्लाह और 34 बार अल्लाहु अकबर पढ़ने को तस्बीह-ए-फातिमी कहते हैं।

Q. कामयाबी के लिए कौन सी दुआ पढ़ें?
A.

कामयाबी के लिए “रब्बी अद-खिलनी…” (ऊपर दी गई दुआ) या “रब्बना आतिना…” पढ़ना बहुत बेहतर है।


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