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Kabira Gunah Kya Hai: 70 बड़े गुनाह और तौबा का सही तरीका
Kabira Gunah List in Hindi: जानिए इस्लाम में कबीरा (बड़े) और सगीरा (छोटे) गुनाह क्या हैं? 70 बड़े गुनाहों की लिस्ट और अल्लाह से माफ़ी (तौबा) मांगने का तरीका।

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इस्लाम में हर वो काम जिससे अल्लाह और उसके रसूल (ﷺ) ने मना किया है, गुनाह कहलाता है। लेकिन क्या हर गुनाह एक जैसा होता है? नहीं। गुनाहों को उनकी गंभीरता के आधार पर दो हिस्सों में बांटा गया है: सगीरा गुनाह (छोटे गुनाह) और कबीरा गुनाह (बड़े गुनाह)।
एक मुसलमान के लिए इन दोनों के बीच का फर्क जानना बहुत ज़रूरी है ताकि वह बड़े गुनाहों से बच सके और छोटे गुनाहों की माफ़ी मांगता रहे। आइए इसे आसान भाषा में समझते हैं।
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सगीरा गुनाह क्या हैं? (Sageera Gunah / Minor Sins)
सगीरा गुनाह वो छोटे गुनाह हैं जिनके लिए कुरान या हदीस में कोई खास सज़ा या लानत का ज़िक्र नहीं किया गया है। ये गुनाह अक्सर हमारे नेक आमाल (जैसे नमाज़, वुज़ू, रोज़ा) करने से माफ़ हो जाते हैं।
उदाहरण: किसी को बुरी नज़र से देखना, मामूली झूठ बोलना, किसी की पीठ पीछे ऐसी बात करना जो उसे बुरी लगे (ग़ीबत), किसी पर थोड़ा गुस्सा करना आदि।
हदीस: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “पांचों नमाज़ें, एक जुमा से दूसरा जुमा और एक रमज़ान से दूसरा रमज़ान, इनके बीच होने वाले (छोटे) गुनाहों को मिटा देते हैं, जब तक कि कबीरा गुनाहों से बचा जाए।” (सहीह मुस्लिम)
हालांकि, किसी भी छोटे गुनाह को मामूली समझकर बार-बार करते रहना उसे बड़े गुनाह के करीब ले जाता है।
कबीरा गुनाह क्या हैं? (Kabira Gunah / Major Sins)
कबीरा गुनाह वो बड़े और संगीन गुनाह हैं जिनके करने पर कुरान या हदीस में दुनिया या आखिरत में सज़ा, अल्लाह की लानत, गज़ब (नाराज़गी) या जहन्नम की धमकी दी गई है।
इन गुनाहों की माफ़ी सिर्फ नेक आमाल से नहीं होती, बल्कि इनके लिए सच्चे दिल से तौबा (अल्लाह से माफ़ी) करना फ़र्ज़ है।
7 हलाक करने वाले कबीरा गुनाह
नबी करीम (ﷺ) ने सात गुनाहों को “हलाक करने वाले” यानी इंसान को दुनिया और आखिरत में बर्बाद कर देने वाले गुनाह बताया है। (सहीह अल-बुखारी)
- अल्लाह के साथ शिर्क करना। (देखें: शिर्क किसे कहते हैं?)
- जादू करना।
- नाहक किसी को कत्ल करना। (देखें: मोमिन के कत्ल की सज़ा)
- सूद (ब्याज) खाना।
- यतीम का माल खाना।
- मैदान-ए-जंग से भागना।
- पाक-दामन औरत पर तोहमत लगाना। (देखें: तोहमत लगाने का गुनाह)
इमाम ज़हबी के मुताबिक 70 कबीरा गुनाह (List of 70 Major Sins)
मशहूर इस्लामिक विद्वान इमाम शम्सुद्दीन अज़-ज़हबी ने अपनी किताब “किताब अल-कबाइर” में 70 कबीरा गुनाहों का ज़िक्र किया है। यहाँ उनकी मुख्तसर लिस्ट दी जा रही है:
- शिर्क करना: अल्लाह के साथ किसी को शरीक ठहराना।
- कत्ल करना: किसी इंसान को नाहक मार डालना।
- जादू करना: काला जादू या सिफ़ली अमल करना।
- नमाज़ छोड़ना: जानबूझकर नमाज़ न पढ़ना।
- ज़कात न देना: माल होने के बावजूद ज़कात अदा न करना।
- रमज़ान का रोज़ा छोड़ना: बिना किसी शरई उज़्र के।
- हज न करना: ताकत होने के बावजूद हज न करना।
- माँ-बाप की नाफरमानी: उन्हें सताना या उनकी बात न मानना।
- रिश्तेदारी तोड़ना: अपने रिश्तेदारों से ताल्लुक खत्म करना।
- ज़िना (Adultery): शादी के बाहर जिस्मानी ताल्लुक।
- लवातत (Sodomy): हम-जिंस परस्ती (Homosexuality)।
- सूद (ब्याज) खाना: ब्याज़ लेना या देना।
- यतीम का माल खाना: यतीमों के हक़ पर डाका डालना।
- अल्लाह और रसूल पर झूठ बोलना: हदीस गढ़ना या गलत बात मनसूब करना।
- मैदान-ए-जंग से भागना: जिहाद के मौके पर पीठ दिखाना।
- हाकिम का धोखा देना: अपनी रिआया (जनता) पर जुल्म करना।
- तकब्बुर (घमंड): खुद को दूसरों से बड़ा समझना।
- झूठी गवाही देना: किसी के खिलाफ झूठी गवाही देना।
- शराब पीना: नशा करने वाली चीज़ों का इस्तेमाल।
- जुआ खेलना: जुआ या सट्टा लगाना।
- पाक-दामन औरत पर तोहमत लगाना: किसी शरीफ औरत पर बदकारी का इल्ज़ाम लगाना।
- माल-ए-गनीमत में खयानत: अमानत या सरकारी माल में चोरी।
- चोरी करना: दूसरों का माल चुराना।
- डाका डालना: रास्ते में लूटपाट करना।
- झूठी कसम खाना: अल्लाह की झूठी कसम खाना।
- जुल्म करना: लोगों पर ज्यादती करना।
- टेक्स (Tax) चोरी या हराम टैक्स: नाहक लोगों से पैसा वसूलना।
- हराम माल खाना: रिश्वत या चोरी का माल खाना।
- खुदकुशी करना: अपनी जान लेना।
- झूट बोलना: कसरत से झूठ बोलना।
- गलत फैसला करना: काज़ी या जज का नाइंसाफी करना।
- रिश्वत लेना और देना।
- औरत का मर्दों की और मर्द का औरतों की नक़ल करना।
- दय्यूस होना: अपने घर की औरतों की बे-पर्दगी पर खामोश रहना।
- हलाला करने वाला और जिसके लिए किया जाए: (साजिश के तहत)।
- पेशाब से न बचना: पाकीज़गी का ख्याल न रखना।
- रियाकारी (दिखावा): नेकी सिर्फ लोगों को दिखाने के लिए करना।
- इल्म छिपाना: दीनी इल्म को दुनिया कमाने के लिए सीखना या छिपाना।
- खयानत करना: अमानत में खयानत।
- एहसान जताना: नेकी करके लोगों को ताना देना।
- तकदीर को झुठलाना: अल्लाह के फैसले पर यकीन न रखना।
- लोगों की बातें छुपकर सुनना: जासूसी करना।
- चुगली करना: इधर की बात उधर करना।
- लानत भेजना: किसी को लानत करना।
- धोखा देना: वादा खिलाफी करना।
- काहिन (ज्योतिषी) की बात मानना: गैब की बातों पर यकीन करना।
- शौहर की नाफरमानी: औरत का अपने शौहर की बात न मानना।
- तस्वीर बनाना: जानदार की मूरत बनाना।
- मातम करना: मुसीबत के वक्त चीखना-चिल्लाना और कपड़े फाड़ना।
- बगावत करना: नाहक लड़ाई-झगड़ा करना।
- कमज़ोरों पर जुल्म: नौकरों या गुलामों को सताना।
- पड़ोसी को तकलीफ देना।
- मुसलमानों को तकलीफ देना: गाली देना या मारना।
- कपड़ा टखनों से नीचे लटकाना: (मर्दों के लिए, तकब्बुर से)।
- अल्लाह के वलियों से दुश्मनी रखना।
- रेशम और सोना पहनना: (मर्दों के लिए)।
- गुलाम का भाग जाना: (अपने मालिक से)।
- गैर-उल्लाह के नाम पर जानवर ज़िबह करना।
- अपने बाप के अलावा किसी और को बाप कहना।
- झगड़ालू होना: बात-बात पर बहस करना।
- ज़रूरत से ज़्यादा पानी रोकना: लोगों को पानी से महरूम करना।
- नाप-तोल में कमी करना: डंडी मारना।
- अल्लाह की पकड़ से बेखौफ होना।
- अल्लाह की रहमत से मायूस होना।
- बिला उज़्र जमात छोड़ना: नमाज़ की जमात छोड़ना।
- लगातार गुनाह करना: छोटे गुनाहों पर अड़े रहना।
- वसीयत में नुकसान पहुँचाना: वारिसों का हक़ मारना।
- मकर और फरेब: चालबाज़ी करना।
- मुसलमानों की जासूसी करना।
- सहाबा (रज़ि.) को बुरा कहना: नबी (ﷺ) के साथियों की शान में गुस्ताखी।
गुनाहों की माफ़ी का तरीका
सगीरा गुनाह: जैसा कि ऊपर बताया गया, ये नेक कामों से माफ़ हो जाते हैं।
कबीरा गुनाह: इनकी माफ़ी के लिए सच्ची तौबा ज़रूरी है। तौबा की 3 शर्तें हैं:
- उस गुनाह को फौरन छोड़ देना।
- अपने किए पर शर्मिंदा होना।
- आइंदा उस गुनाह को कभी न करने का पक्का इरादा करना।
अगर गुनाह का ताल्लुक किसी इंसान के हक़ से हो (जैसे किसी का माल चुराया या किसी पर झूठा इल्ज़ाम लगाया), तो एक चौथी शर्त भी है: उस इंसान का हक़ अदा करना या उससे माफ़ी मांगना। अगर आप माफ़ी नहीं मांग सकते या वो इंसान दुनिया में नहीं रहा, तो उसके लिए अल्लाह से मगफिरत की दुआ करें।
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गुनाहों के दुनियावी नुक़सान
गुनाहों की सज़ा सिर्फ आखिरत में ही नहीं, बल्कि दुनिया में भी मिलती है, जैसे:
- रिज़्क़ (कमाई) में बे-बरकती और तंगी।
- दिल का बेचैन रहना।
- इबादत में दिल न लगना।
- चेहरे से नूर खत्म हो जाना।
- अचानक आने वाली मुसीबतें और बीमारियाँ।
गुनाहों से बचने के फायदे
गुनाहों से बचने वाला इंसान अल्लाह का पसंदीदा बन जाता है और उसे दुनिया और आखिरत दोनों में फायदे मिलते हैं:
- दिल को सुकून मिलता है।
- अल्लाह से करीबी महसूस होती है।
- रिज़्क़ में बरकत होती है।
- दुआएं क़ुबूल होती हैं।
- लोगों के दिलों में इज़्ज़त बढ़ती है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. कबीरा गुनाह और सगीरा गुनाह में क्या फर्क है?
कबीरा गुनाह वो हैं जिनकी कुरान या हदीस में सख्त सज़ा या लानत आई है, और इनकी माफ़ी के लिए सच्ची तौबा ज़रूरी है। सगीरा गुनाह छोटे गुनाह हैं जो अक्सर नेक कामों से माफ़ हो जाते हैं।
Q. क्या कबीरा गुनाह माफ़ हो सकता है?
हाँ, शिर्क के अलावा हर कबीरा गुनाह सच्ची तौबा करने से माफ़ हो सकता है। अल्लाह कुरान में फरमाता है: “ऐ मेरे बंदो! जिन्होंने अपनी जानों पर ज़्यादती की है, अल्लाह की रहमत से मायूस न हो। बेशक अल्लाह सारे गुनाह माफ़ कर देता है।” (सूरह अज़-ज़ुमर: 53)
Q. सबसे बड़ा कबीरा गुनाह कौनसा है?
सबसे बड़ा कबीरा गुनाह शिर्क है, यानी अल्लाह की ज़ात या सिफ़ात में किसी और को शरीक करना।
Q. बार-बार छोटे गुनाह करने का क्या हुक्म है?
किसी छोटे गुनाह को मामूली समझकर बार-बार करना बहुत खतरनाक है। उलमा कहते हैं कि छोटे गुनाह पर अड़े रहना उसे कबीरा गुनाह बना देता है।
Q. कैसे पता चलेगा कि मेरी तौबा क़ुबूल हुई?
अगर तौबा के बाद आपको उस गुनाह से नफरत हो जाए, आपकी ज़िंदगी में बेहतरी आए और आप नेक कामों की तरफ झुकने लगें, तो यह इस बात की अच्छी निशानी है कि इंशाअल्लाह आपकी तौबा क़ुबूल हो गई है।
नतीजा (Conclusion)
एक मोमिन को चाहिए कि वह हर छोटे और बड़े गुनाह से बचने की पूरी कोशिश करे। किसी भी गुनाह को छोटा समझकर नज़रअंदाज़ नहीं करना चाहिए, क्योंकि छोटी-छोटी चिंगारियां ही बड़ी आग लगाती हैं।
अगर कोई गुनाह हो जाए, तो कभी भी अल्लाह की रहमत से मायूस न हों। फौरन अल्लाह की तरफ लौटें और सच्ची तौबा करें, क्योंकि अल्लाह तौबा करने वालों को पसंद करता है और माफ़ करने के लिए हमेशा तैयार है।
अल्लाह हम सबको हर तरह के गुनाहों से बचने और सच्ची तौबा करने की तौफीक अता फरमाए। आमीन।





