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Jalzala: Allah Ki Azmaish Ya Azab? - जलजला क्यों आता है?
Jalzala (Earthquake) अल्लाह की तरफ से एक चेतावनी है। जानिए इस्लाम में जलजला आने की वजह, यह अज़ाब है या आजमाइश, और इससे बचने की दुआ।

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जलजला (Earthquake) अल्लाह की कुदरत की एक निशानी है। जब ज़मीन हिलती है और बड़ी-बड़ी इमारतें ताश के पत्तों की तरह बिखर जाती हैं, तो इंसान को अपनी बेबसी और अल्लाह की ताकत का एहसास होता है।
अक्सर सवाल उठता है कि Jalzala Allah Ki Azmaish Ya Azab (जलजला अल्लाह की आजमाइश है या अज़ाब)? इस्लाम इस बारे में क्या कहता है?
इस आर्टिकल में हम कुरान और हदीस की रौशनी में जानेंगे कि जलजला क्यों आता है और एक मुसलमान को ऐसे हालात में क्या करना चाहिए।
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जलजला क्यों आता है? (Why Earthquake Happens in Islam)
इस्लामी नज़रिया से देखें तो जलजला अल्लाह की तरफ से अपने बंदों के लिए एक चेतावनी (Warning) होता है। जब ज़मीन पर गुनाह बढ़ जाते हैं, बेहयाई आम हो जाती है, और लोग अल्लाह को भूल जाते हैं, तो अल्लाह ज़मीन को हुक्म देता है और वो हिलने लगती है ताकि लोग डरें और तौबा करें।
कुरान में अल्लाह फरमाता है: “और हम निशानियाँ (जैसे अज़ाब) सिर्फ डराने के लिए भेजते हैं।” (सूरह अल-इसरा: 59)
अज़ाब है या आजमाइश? (Punishment or Trial?)
यह समझना ज़रूरी है कि हर मुसीबत अज़ाब नहीं होती।
- अज़ाब (Punishment): अगर किसी कौम या बस्ती में गुनाह, ज़िना, शराब और सूद (Interest) आम हो जाए और वो तौबा न करें, तो उन पर आने वाली मुसीबत अज़ाब होती है। यह उन्हें हलाक करने या सजा देने के लिए आती है।
- आजमाइश (Trial): अगर नेक लोगों पर मुसीबत आए, तो वो आजमाइश है। अल्लाह अपने नेक बंदों को आज़माता है ताकि उनके दर्जात बुलंद करे। हदीस में है कि जो मोमिन किसी दीवार के नीचे दबकर या जलजले में मर जाए, उसे शहीद का दर्जा मिलता है।
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अल्लाह की नाराजगी की वजहें
हदीस में कयामत की निशानियों और जलजलों की कसरत की कुछ वजहें बताई गई हैं:
- बेहयाई का आम होना: जब औरतों में पर्दा खत्म हो जाए और ज़िना (Adultery) आम हो जाए।
- सूद (Interest): जब लोग हलाल-हराम की परवाह किए बिना सूद खाने लगें।
- नाप-तौल में कमी: जब दुकानदार धोखा देने लगें।
- माँ-बाप की नाफरमानी: जब औलाद माँ-बाप को बोझ समझने लगे।
जब ये काम होने लगते हैं, तो अल्लाह की रहमत रूठ जाती है और ज़मीन को हिलने का हुक्म होता है।
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कयामत की निशानियां (Signs of Qayamah)
हुज़ूर अकरम (ﷺ) ने फरमाया कि कयामत उस वक़्त तक नहीं आएगी जब तक इल्म उठा न लिया जाए और जलजलों (Earthquakes) की कसरत न हो जाए। (सहीह बुखारी)
आज हम देख रहे हैं कि दुनिया भर में जलजले कितनी जल्दी-जल्दी आ रहे हैं। यह कयामत की छोटी निशानियों में से है। यह वक़्त है कि हम गफलत की नींद से जागें।
जलजले के वक़्त क्या करें? (What to do during Earthquake)
- तौबा और इस्तिगफार: फौरन अल्लाह से अपने गुनाहों की माफ़ी मांगें। “अस्तगफिरुल्लाह” कसरत से पढ़ें।
- सदका: सदका अल्लाह के गुस्से को ठंडा करता है और बुरी मौत से बचाता है।
- दुआ: अपनी और दूसरों की हिफाज़त की दुआ करें।
- ज़िक्र: “ला इलाहा इल्लल्लाह” और “अल्लाहु अकबर” का विर्द करें।
जलजले से हिफाज़त की दुआ
वैसे तो जलजले की कोई खास मसनून दुआ हदीस में नहीं है, लेकिन मुसीबत के वक़्त यह दुआ पढ़नी चाहिए:
“ला इलाहा इल्ला अन्ता सुभानका इन्नी कुन्तु मिनज़-ज़ालिमीन” (तेरे सिवा कोई माबूद नहीं, तू पाक है, बेशक मैं ही कुसूरवार हूँ।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या जलजला साइंस की वजह से आता है या अल्लाह के हुक्म से?
साइंस कहती है कि टेक्टोनिक प्लेट्स (Tectonic Plates) के टकराने से जलजला आता है। इस्लाम इसका इनकार नहीं करता, लेकिन इस्लाम बताता है कि वो प्लेट्स अल्लाह के हुक्म से ही हरकत करती हैं। हर चीज़ का एक सबब (Cause) होता है, और जलजले का रूहानी सबब गुनाहों की कसरत है।
Q. क्या जलजले में मरने वाला शहीद है?
जी हाँ, हदीस के मुताबिक जो शख्स इमारत के मलबे (Debris) के नीचे दबकर मर जाए, उसे शहीद का दर्जा मिलता है (बशर्ते वो ईमान वाला हो)।
Q. अल्लाह अपने बंदों को अज़ाब क्यों देता है?
अल्लाह बहुत मेहरबान है, वो अज़ाब नहीं देना चाहता। लेकिन जब इंसान हद पार कर देता है और दूसरों पर ज़ुल्म करने लगता है, तो मज़लूमों की मदद और ज़ालिमों को रोकने के लिए अज़ाब आता है। कभी-कभी यह छोटी सजा होती है ताकि लोग बड़े अज़ाब (जहन्नम) से बचने के लिए सुधर जाएं।
नतीजा:
जलजला अल्लाह की एक निशानी है जो हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया फानी है। हमें चाहिए कि हम अल्लाह से डरें, गुनाहों से तौबा करें और अपनी ज़िंदगी इस्लाम के मुताबिक गुज़ारें।
अल्लाह हम सबकी आफत और बलाओं से हिफाज़त फरमाए। आमीन।
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