· Iffat Zia · Namaz · 4 min read
Eid Ki Namaz Ka Tarika: ईद की नमाज़ पढ़ने का सही तरीका और नियत
Eid Ki Namaz Ka Tarika: क्या आप ईद की नमाज़ का तरीका भूल गए हैं? जानिए ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अज़हा की नमाज़ की नियत, 6 ज़ायद तकबीरें और सुन्नतें आसान हिंदी में।

Table of Contents
ईद (Eid) मुसलमानों के लिए खुशी और अल्लाह का शुक्र अदा करने का दिन है। साल में दो ईदे होती हैं: ईद-उल-फित्र (Eid-ul-Fitr) और ईद-उल-अज़हा (Eid-ul-Adha)।
चूंकि ईद की नमाज़ साल में सिर्फ दो बार पढ़ी जाती है, इसलिए अक्सर लोग Eid Ki Namaz Ka Tarika भूल जाते हैं या उन्हें 6 ज़ायद तकबीरों में उलझन होती है।
इस आर्टिकल में हम ईद की नमाज़ पढ़ने का मुकम्मल तरीका, नियत और सुन्नतें आसान हिंदी में जानेंगे।
ये भी पढ़े: Namaz Ka Tarika | नमाज़ पढ़ने का सही तरीका
ईद की नमाज़ और आम नमाज़ में फर्क
ईद की नमाज़ बाकी नमाज़ों से थोड़ी अलग होती है:
- इसमें अज़ान और इकामत नहीं होती।
- इसमें 6 ज़ायद तकबीरें (Extra Takbeers) होती हैं (3 पहली रकात में और 3 दूसरी रकात में)।
- ईद का खुतबा नमाज़ के बाद होता है (जुम्मा में पहले होता है)।
ईद की नमाज़ की नियत (Eid Namaz Niyat)
नियत दिल के इरादे का नाम है। आप दिल में यह सोचें: “मैं नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ ईद-उल-फित्र (या ईद-उल-अज़हा) की, वाजिब, 6 ज़ायद तकबीरों के साथ, वास्ते अल्लाह तआला के, पीछे इस इमाम के, मुँह मेरा काबा शरीफ की तरफ।“
Eid Ki Namaz Ka Tarika (Step-by-Step)
यहाँ हनफी तरीके (Hanafi Method) के मुताबिक ईद की नमाज़ का तरीका बताया गया है:
पहली रकात (First Rakat)
- तकबीर-ए-तहरीमा: इमाम ‘अल्लाहु अकबर’ कहेंगे, आप भी हाथ कानों तक उठाकर बांध लें।
- सना: फिर सना (Sana) (सुभानकल्लाहुम्मा…) पढ़ें।
- ज़ायद तकबीरें: अब इमाम 3 बार ‘अल्लाहु अकबर’ कहेंगे।
- पहली तकबीर: हाथ कानों तक उठाएं और छोड़ दें।
- दूसरी तकबीर: हाथ कानों तक उठाएं और छोड़ दें।
- तीसरी तकबीर: हाथ कानों तक उठाएं और बांध लें।
- किरात: अब इमाम सूरह फातिहा और कोई सूरह पढ़ेंगे, आप खामोशी से सुनें।
- रुकू और सज्दा: फिर आम नमाज़ की तरह रुकू और दो सज्दे करें।
दूसरी रकात (Second Rakat)
- किरात: इमाम खड़े होकर पहले सूरह फातिहा और सूरह पढ़ेंगे (आप सुनें)।
- ज़ायद तकबीरें: सूरह खत्म होने के बाद, रुकू में जाने से पहले इमाम 3 बार ‘अल्लाहु अकबर’ कहेंगे।
- पहली तकबीर: हाथ कानों तक उठाएं और छोड़ दें।
- दूसरी तकबीर: हाथ कानों तक उठाएं और छोड़ दें।
- तीसरी तकबीर: हाथ कानों तक उठाएं और छोड़ दें।
- रुकू: चौथी बार इमाम ‘अल्लाहु अकबर’ कहेंगे, इसमें हाथ नहीं उठाने हैं, सीधे रुकू में जाना है।
- तशह्हुद और सलाम: फिर सज्दे करें, अत्तहियात (Attahiyat) पढ़ें और सलाम फेर दें।
ये भी पढ़े: Gusal Ka Tarika | ग़ुस्ल करने का सही तरीका
नमाज़ के बाद खुतबा
नमाज़ के बाद इमाम साहब दो खुतबे देंगे। खुतबा सुनना वाजिब है। इस दौरान बातचीत करना या नमाज़ पढ़ना मना है। खामोशी से इमाम की बात सुनें।
ईद के दिन की सुन्नतें (Sunnahs of Eid)
नबी करीम (ﷺ) ईद के दिन ये काम करते थे:
- सुबह जल्दी उठना और फज्र की नमाज़ मस्जिद में पढ़ना।
- ग़ुस्ल करना और मिस्वाक करना। पढ़े: मिस्वाक के फायदे
- अपने कपड़ों में से सबसे अच्छे या नए कपड़े पहनना।
- खुशबू (इत्र) लगाना (सिर्फ मर्द)।
- ईद-उल-फित्र: नमाज़ पर जाने से पहले कुछ मीठा (जैसे खजूर या सेवइयां) खाना।
- ईद-उल-अज़हा: नमाज़ के बाद अपनी कुर्बानी के गोश्त से खाना शुरू करना (मुस्तहब है)।
- ईदगाह जाने से पहले सदका-ए-फित्र अदा करना (ईद-उल-फित्र में)।
- एक रास्ते से जाना और दूसरे रास्ते से वापस आना।
- रास्ते में तकबीर पढ़ते हुए जाना: “अल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, ला इलाहा इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर, अल्लाहु अकबर, व लिल्लाहिल हम्द”
अगर ईद की नमाज़ छूट जाए तो क्या करें?
अगर किसी वजह से आपकी ईद की जमात छूट जाए, तो:
- ईद की नमाज़ की कोई कज़ा नहीं होती।
- आप अकेले ईद की नमाज़ नहीं पढ़ सकते (क्योंकि यह जमात के साथ वाजिब है)।
- आप चाहें तो 2 या 4 रकात चाश्त (Chasht) की नमाज़ पढ़ लें ताकि सवाब मिल जाए।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या औरतों पर ईद की नमाज़ वाजिब है?
नहीं, औरतों पर ईद की नमाज़ वाजिब नहीं है। लेकिन अगर ईदगाह या मस्जिद में औरतों के लिए अलग और परदे वाला इंतज़ाम हो, तो वो जा सकती हैं। नबी (ﷺ) के ज़माने में औरतें ईदगाह जाती थीं।
Q. अगर इमाम से ज़ायद तकबीरें भूल जाएं तो क्या करें?
अगर इमाम तकबीरें भूल जाए या गलती कर दे, तो आखिर में सज्दा-ए-सहू करने से नमाज़ हो जाएगी। मुक्तदी (पीछे पढ़ने वाले) को इमाम की पैरवी करनी चाहिए।
Q. ईद-उल-फित्र और ईद-उल-अज़हा की नमाज़ में क्या फर्क है?
तरीका बिल्कुल एक जैसा है। फर्क सिर्फ नियत का है (एक में ईद-उल-फित्र की नियत, दूसरे में ईद-उल-अज़हा की) और तकबीरें (रास्ते में पढ़ने वाली) ईद-उल-अज़हा में ज़ोर से पढ़ी जाती हैं।
नतीजा (Conclusion)
ईद की नमाज़ अल्लाह के शुक्र का इज़हार है। हमें चाहिए कि हम इसे पूरे आदाब और सुन्नत तरीके से अदा करें। 6 तकबीरों का ख्याल रखें और इमाम के साथ नमाज़ मुकम्मल करें। अल्लाह हमारी इबादतों को कबूल फरमाए। आमीन।
ईद मुबारक!





