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Aqiqah Ki Dua Aur Tarika: अक़ीक़ा करने का सही तरीका, दुआ और नियम

Aqiqah Ki Dua Aur Tarika: अक़ीक़ा (Aqiqah) करना सुन्नत है। जानिए अक़ीक़ा कब करना चाहिए, लड़के और लड़की के अक़ीक़े की दुआ, और गोश्त बांटने का सही तरीका।

Aqiqah Ki Dua Aur Tarika: अक़ीक़ा करने का सही तरीका, दुआ और नियम

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अक़ीक़ा (Aqiqah) इस्लाम में एक बहुत अहम सुन्नत है। जब अल्लाह किसी को औलाद (बेटा या बेटी) से नवाज़ता है, तो उसकी खुशी में और अल्लाह का शुक्र अदा करने के लिए जानवर कुर्बान करना अक़ीक़ा कहलाता है।

नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “हर बच्चा अपने अक़ीक़े के बदले गिरवी होता है। सातवें दिन उसकी तरफ से जानवर ज़िबह किया जाए, उसका नाम रखा जाए और सर मुंडाया जाए।” (तिर्मिज़ी)

इस आर्टिकल में हम Aqiqah Ki Dua, अक़ीक़ा करने का सही तरीका, वक्त और इसके मसाइल आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।

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अक़ीक़ा कब करना चाहिए? (Best Time for Aqiqah)

हदीस के मुताबिक अक़ीक़ा करने का सबसे बेहतरीन वक़्त बच्चे की पैदाइश का 7वां दिन है। अगर 7वें दिन न हो सके, तो 14वें दिन या 21वें दिन करें। अगर तब भी न हो सके, तो ज़िंदगी में कभी भी कर सकते हैं।

7वां दिन कैसे गिनें? अगर बच्चा जुमा (Friday) को पैदा हुआ है, तो अगला जुमेरात (Thursday) 7वां दिन होगा।

अक़ीक़ा करने का तरीका (Method of Aqiqah)

  1. जानवर: लड़के के लिए 2 बकरे/भेड़ और लड़की के लिए 1 बकरा/भेड़ अफ़ज़ल है। अगर गुंजाइश न हो तो लड़के के लिए भी 1 बकरा कर सकते हैं।
  2. बाल मुंडवाना: 7वें दिन बच्चे के सर के बाल मुंडवाएं।
  3. सदका: बालों के वज़न के बराबर चांदी (Silver) या उसकी कीमत सदका करें।
  4. कुर्बानी: बाल मुंडवाने के बाद जानवर ज़िबह करें और दुआ पढ़ें।

अक़ीक़ा की दुआ (Aqiqah Dua)

जानवर ज़िबह करते वक़्त यह दुआ पढ़ें:

1. अक़ीक़ा की मसनून दुआ (Common Dua)

“بِسْمِ اللَّهِ وَاللَّهُ أَكْبَرُ، اللَّهُمَّ لَكَ وَإِلَيْكَ، هَذِهِ عَقِيقَةُ فُلَانٍ”

“बिस्मिल्लाहि वल्लाहु अकबर, अल्लाहुम्मा लका व-इलैका, हाज़िही अक़ीक़तु (बच्चे का नाम)”

(अल्लाह के नाम से, और अल्लाह सबसे बड़ा है। ऐ अल्लाह! यह तेरे लिए है और तेरी ही तरफ से है, यह (बच्चे का नाम) का अक़ीक़ा है।)

2. लड़के के अक़ीक़े की दुआ (Dua for Boy)

अगर आप तफसीली दुआ पढ़ना चाहें:

“اللَّهُمَّ هَذِهِ عَقِيقَةُ (बच्चे का नाम) دَمُهَا بِدَمِهِ، وَلَحْمُهَا بِلَحْمِهِ، وَعَظْمُهَا بِعَظْمِهِ، وَجِلْدُهَا بِجِلْدِهِ، وَشَعْرُهَا بِشَعْرِهِ”

“अल्लाहुम्मा हाज़िही अक़ीक़तु (नाम), दमुहा बि-दमिही, व लहमुहा बि-लहमिही, व अज़मुहा बि-अज़मिही, व जिल्दुहा बि-जिल्दिही, व शअरुहा बि-शअरिही”

(ऐ अल्लाह! यह (नाम) का अक़ीक़ा है। इसका खून उसके खून के बदले, इसका गोश्त उसके गोश्त के बदले, इसकी हड्डी उसकी हड्डी के बदले, इसकी खाल उसकी खाल के बदले और इसके बाल उसके बालों के बदले हैं।)

3. लड़की के अक़ीक़े की दुआ (Dua for Girl)

लड़की के लिए ज़मीर (Pronouns) बदल जाएंगे:

“اللَّهُمَّ هَذِهِ عَقِيقَةُ (बच्चे का नाम) دَمُهَا بِدَمِهَا، وَلَحْمُهَا بِلَحْمِهَا…”

“अल्लाहुम्मा हाज़िही अक़ीक़तु (नाम), दमुहा बि-दमिहा, व लहमुहा बि-लहमिहा…”

(तर्जुमा वही रहेगा, बस ‘उसका’ की जगह ‘उसकी’ हो जाएगा)

अक़ीक़े के गोश्त का हुक्म (Meat Distribution)

अक़ीक़े के गोश्त के 3 हिस्से करना मुस्तहब (बेहतर) है:

  1. एक हिस्सा गरीबों के लिए।
  2. एक हिस्सा रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए।
  3. एक हिस्सा अपने घर वालों के लिए।

आप चाहें तो पूरा गोश्त पकाकर दावत भी कर सकते हैं या कच्चा भी बांट सकते हैं। माँ-बाप और दादा-दादी भी यह गोश्त खा सकते हैं।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या बड़े होने पर अपना अक़ीक़ा खुद कर सकते हैं?
A.

जी हाँ, अगर बचपन में वालिदैन ने अक़ीक़ा नहीं किया था, तो बड़े होकर आप अपना अक़ीक़ा खुद कर सकते हैं। यह जायज़ है।

Q. क्या अक़ीक़े के लिए बकरा ही ज़रूरी है?
A.

नहीं, आप बड़े जानवर (गाय, भैंस, ऊंट) में भी हिस्सा ले सकते हैं। लड़के के लिए 2 हिस्से और लड़की के लिए 1 हिस्सा लें। लेकिन सुन्नत बकरा/भेड़ ज़िबह करना है।

Q. क्या अक़ीक़ा करना फ़र्ज़ है?
A.

अक़ीक़ा करना सुन्नत-ए-मुअक्कदा है, फ़र्ज़ नहीं। अगर किसी के पास पैसे नहीं हैं, तो उस पर कोई गुनाह नहीं। लेकिन अगर गुंजाइश हो तो ज़रूर करना चाहिए, इससे बच्चे से बलाएं दूर होती हैं।


नतीजा (Conclusion)

अक़ीक़ा अल्लाह का शुक्र अदा करने का एक बेहतरीन जरिया है। इससे बच्चे की जान और सेहत की हिफाज़त होती है। कोशिश करें कि सुन्नत तरीके से 7वें दिन अक़ीक़ा करें।

अल्लाह हमारी औलाद को नेक और सालेह बनाए। आमीन।

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