इस्लाम में औरत का मकाम

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“अस्सलाम अलैकुम दोस्तों” हमारा इस्लाम बहुत ही प्यारा मजहब है और हमारे इस्लाम का मर्तबा बढ़ता है इस्लाम की शहजादीयो से। हमारे इस्लाम में औरतों को बहुत ही बड़ा दर्जा दिया गया है।

इस्लाम में औरतों के कदमों में जन्नत रखी गई है मां की दुआओं में इतनी ताकत रखी गई है कि वह अल्लाह को अपने बच्चों के लिए किसी भी चीज के लिए राजी करवा सकती है इससे आप ये समझ सकते है की इस्लाम में औरत का मकाम कितना बुलंद है ।

हम सभी लोगों के पास कुछ ना कुछ खास मनपसंद तोहफे होते हैं जिन्हें हम बहुत ही संभाल कर रखते हैं ना तो उन्हें कभी गंदा होने देते हैं और ना ही उसे खुला छोड़ते है ताकि किसी पर उसकी नजर ना जाए। लोग अपने पसंदीदे तोहफे को बहुत संभाल के रखते है।

तो जरा सोचिए की अल्लाह का दिया हुआ सबसे खूबसूरत तोहफा बेटियां है अगर उनपे कोई जुल्म करता है तो अल्लाह को कितना बुरा लगता होगा।

उसी तरह इस्लाम में औरतों को भी तोहफे की तरह संभाल कर रखा जाता है उनकी इज्जत की जाती है उन्हें ढक कर रखा जाता है। आइए हम आपको बताते हैं कि हमारे islam me aurat ka makam क्या है ,और क्या था।

इस्लाम के शुरुआत में औरत का मर्तबा –

पहले औरतों की कोई इज्जत नही थी पैदा होते ही लड़कियों को जिंदा दफना कर दिया जाता था उन्हे अपनी मर्जी से किसी भी चीज को करने की इजाजत नही थी।

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उन्हें बस अपनी जरुरत के हिसाब से इस्तेमाल किया जाता था उनपे कई तरह के जुल्मों सितम किए जाते थे। औरतें किसी चीज की मालिक नही होती थी वो बस मर्दों की गुलाम होती थी उन्हें जिस समय जो काम दिया जाता था वो उन्हे करना पड़ता था।

पहले अगर किसी लड़की के वालिद गुजर जाते थे तो उस लड़की को मर्द अपनी कनीज बना लेते थे और फिर उसके मां बहन भाई किसी से कोई रिश्ता रखने नहीं देते थे।

औरतें दिन रात मर्दों की खिदमत किया करती थी फिर भी उनपे जुल्मो सितम किए जाते थे। उनकी किसी भी तकलीफ की कोई सुनवाई नहीं थी उनके हक में बोलने वाला भी कोई नही था।

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इस्लाम मेंऔरतों को मिलने वाले मकाम –

अल्लाह पाक ने औरतो और मर्दों को बराबर माना तभी उन्होंने उन्हें दुनिया में भेजा लेकिन यह चीज़ें मर्द समझ नहीं पा रहे थे। और अल्लाह को भी शायद यह चीज बिल्कुल बर्दाश्त नहीं हो रही थी कि औरतों पर इतना जुल्म क्यों किया जा रहा है।

इसलिए उन्होंने औरतों की तकलीफों को देखने के बाद हमारे हुजूर “सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम” को दुनिया में भेजा। जब इस दुनिया का जुल्मों सितम औरतों पर बढ़ता जा रहा था तब अल्लाह ताला ने उन्हें औरतों की मदद करने के लिए भेजा।

इस्लाम में औरतों को इज्जत दी गई जिसकी वो हकदार थी उन पर हो रहे जुल्मों सितम को हमारे हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के फरमान से रोक दिया गया। इस्लाम में औरतों को वो हुकुम मुकर्रर किया गया जो इस्लाम से पहले किसी मजहब में नहीं था।

हमारे हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की 4 बेटियां थी और उन्होंने अपनी चारों बेटियों को शहजादी की तरह रखा जिसकी वजह से धीरे-धीरे लोग अपनी बेटियों की इज्जत करने लगे। उन्होंने बेटियों को पैदा होते ही दफन करने वाले रिवाज को बंद करवाया।

इस्लाम मे औरतों को मिलने वाले हक –

निकाह का हक –

जहां औरतों को सांस लेने के लिए भी इजाजत लेनी पड़ती थी वहां औरतों को अपनी मर्जी से निकाह करने का हक हमारे हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने दिया।

हमारे हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने कहा कि – “लड़कियों का तब तक निकाह ना किया जाए जब तक उसकी रजामंदी हासिल ना कर ली जाए और उसका चुप रहना उसकी रजामंदी है”।

जब हमारे हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की बेटी फातिमा के लिए अली का रिश्ता आया था तब उन्होंने सबसे पहले फातिमा से पूछा था कि अली का रिश्ता आया है क्या मैं हां कर दूं।

• दीन मेहर का हक –

जब औरतें का निकाह होता है तो उस समय उन्हें मेहर का हक अदा किया गया है शौहर पर वाजिब है कि वह मेहर अदा करें। अल्लाह ताला ने यह कुरान ए करीम में फरमाया है कि औरतों को उनके मेहर खुशी से दें।

• बेवाह को निकाह का हुक्म –

इस्लाम में पहले जब किसी औरत का शौहर इंतकाल हो जाता था तो बेवाह औरतों की कोई इज्जत नहीं होती थी उन्हे बहुत ही गलत नजर से देखा जाता था और उन्हे दोबारा शादी करने की भी इजाजत नहीं थी।

लेकिन हमारे हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम ने एक बेवाह औरत से निकाह किया था और वह उनसे उम्र में भी बड़ी थी।

यह सब देखने के बाद मुस्लिम मर्दों ने बेवाह औरतों से निकाह करना शुरू किया और दुबारा से बेवाह औरतों का घर बसने लगा।

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जिन औरतों को अपनी मर्जी से निकाह करने का भी हक नहीं था उन्हे दुबारा से निकाह करने की इजाजत दी गई।

• बेटियों को रहमत समझने का हक –

हमारे हुजूर को अल्लाह पाक ने 4 बेटी नेमतों के तौर पर अता की थी और हमारे हुजूर बहुत खुश थे कि उनके घर में रेहमतें पैदा हुई है।

हमारे नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम की बेटियों के नाम-

1.हज़रत जैनब
2.रूकैया
3.उम्मे कुलसुम
4.सय्यिदा फातिमा

अल्लाह ने कुराने पाक में फरमाया कि – लोगों हमने तुम सबको एक मर्द और एक औरत से पैदा किया और तुम्हारे लिए अलग-अलग कॉम और खानदानों को बना दिया ताकि एक दूसरे को पहचान सको।

बेशक तुम में से परहेजगार अल्लाह के नजदीक बुलंद मकाम रखता हो बेशक अल्लाह ताला खूब जानने वाला है और खबरदार है।

इसका मतलब यह है कि अल्लाह ने सबको अलग-अलग औधा और रुतबा दिया है उन्हें किसी पर हावी होने का हक नहीं है।

कैसे मर्द इस्लाम में रहने के काबिल है –

इस्लाम मजहब में ताकतवर होना ,अच्छा दिखना, नमाज़ी परेजगार होना, दीन इस्लाम में चलने वाला होना, यह सब एक अच्छे मर्द की निशानी नहीं बताई गई है।

बल्कि ऐसे मर्दों को अच्छा बताया गया है जो औरतों की इज्जत करता हो अपने या दूसरों के घर की औरतों को कभी भी गुलाम ना समझता हो।

औरतों को अल्लाह की नेमत मानता हो और बेटी होने पर खुश होता हो ना कि अल्लाह से शिकायत करता हो की या अल्लाह मुझे बेटी क्यों अता की जबकि मुझे बेटे की चाहत थी।

अल्लाह पाक ने फरमाया है कि वो जिसे जो देते हैं उसके अच्छे के लिए ही देते हैं इसलिए अल्लाह की बख्शी हुई नेमतों पर कभी भी ना शुक्रिया नहीं करना चाहिए बल्कि खुश होना चाहिए कि अल्लाह पाक ने उन्हें उस लायक समझा कि उनके घर में बेटियों को भेजा है।

अल्लाह पाक ने यह भी फरमाया है कि अल्लाह उन्हीं घरों में बेटियों को भेजते हैं जो घर अल्लाह पाक को पसंद होता है।

वालिद के जायदाद में बराबरी का हक –

हमारे हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने लड़कियों को भी अपने वालिद के जायदाद में बराबर का हक दिलवाया। पहले बेटों को ही वालिद के इंतकाल के बाद उनके जायदाद का वारिस बनाया जाता था लेकिन अब लड़कियां भी बराबर की हिस्सेदार होती है।

अगर किसी घर में भाई बहन है और उनके वालिद का इंतकाल हो गया है तो ऐसे में उनकी जायदाद का आधा हिस्सा लड़के को और आधा हिस्सा लड़कियों को दिया जाता है।

इस्लाम ही एक वाहिद मजहब है जिसमें औरतों को इज्जत दी गई वरना उस जहिलियत जमाने में औरतों को जूते की नोक के बराबर रखा गया था।

पहले औरतों को सिर्फ जिस्मानी और नफ्सी कामों के लिए ही उनका इस्तेमाल किया जाता था लेकिन अब मुस्लिम औरतों को इस्लाम की शहजादी के नाम से जाना जाता है।

इसके अलावा औरतों को मनहूसियत की अलामत समझा जाता था और यह जायदाद ए मनकुला की तरह खरीदी और बेची जाती थी।

हमारे हुजूर अकरम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम के फ़रमान की बदौलत ही आज हमारे इस्लाम में औरतों को बहुत इज्जत दी जाती है और मां के कदमों के नीचे जन्नत मानी जाती है।

अल्लाह पाक ने मर्द या औरत में से किसी को भी ज्यादा या कम औधा नहीं दिया है बल्कि उन्होंने सभी को बराबर का मुकाम दिया है। अल्लाह पाक ने औरतों और मर्दों में कभी फर्क नही किया।

औरतों पे क्या है हराम –

हमारे हुजूर नबी करीम सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने औरतों को उनका हक तो दिलवा दिया लेकिन कुछ चीजें हैं जो औरतों पर ही नाजिल की गई है।

औरतों को पर्दे में रहने का हुक्म दिया गया है जो औरतें पर्दा नहीं करती अपने जिस्म की नुमाइश करती है ऐसी औरतों को अल्लाह पाक कभी माफ नहीं करते।

इस्लाम ने औरतों को उनका हक दिलाया है लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि उन्हें सभी चीजों की इजाजत दे दी गई है भले ही लड़कियां कितनी भी बड़ी क्यों ना हो जाए उन्हें अपने मां बाप की नाफरमानी नहीं करनी है।

औरतों को ऐसे कपड़े पहनने का हुक्म दिया गया है जिसमें उनके जिस्म की नुमाइश ना हो ताकि किसी भी गैर मेहरम की नजर उन पर ना पड़े।

इस्लाम एक बहुत ही खूबसूरत मजहब है और इसकी खूबसूरती बढ़ती है इस्लाम की औरतों से। इस्लाम की इज्जत औरतों के हाथ में सौंपी गई है क्योंकि औरतें जितनी इज्जतदार होगी हमारे इस्लाम का औधा उतना ही ऊंचा होगा।

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हमारे हुजूर ने औरतों को उनका हक तो दिलवाया लेकिन आज भी कई सारे मर्द ऐसे हैं जो पहले की तरह अभी भी औरतों को सिर्फ और सिर्फ अपनी जरूरत की चीज समझते हैं और उनकी बेइज्जती करते है।

यह बिल्कुल गलत है हमारा इस्लाम किसी भी मर्द को यह इजाजत नहीं देता कि वह किसी भी औरत की बेअदबी करें और उन्हें जलील करें।

आखिरी बात

अगर सही मायने में एक सच्चा मुसलमान कोई बनना चाहता है तो सबसे पहले औरतों की इज्जत करना सीखना चाहिए। क्योंकि हमारे इस्लाम में सबसे ऊंचा दर्जा ऐसे मर्दों को दिया गया है जो औरतों की इज्जत करते है और घर में बेटी पैदा होने पर खुश होते हो अल्लाह का शुक्रिया अदा करते हो।

This Post Has One Comment

  1. Iddris

    Jo khud ki tarif karta hai usse badi bewakuf is duniya mein nahi hai aur aurat ki ye ek fitrat hai wo mardo ko jalil karega lekin apni izzat zyada lega allah ne kabhi bhi quran mein ye nahi kaha gaya ki aurat ko specialy izzat do ya maine usko special izzat di hai haya sabko chupana hai ye sab jante hai lekin ye bolke kisiko chupaya nahi jata din islam hukum ahkam se majboot hua hai ladki se nahi ladka ho ya ladki dono ko allah ne nemat ke tour par diya ye nahi ki ladki diya to makam uccha ho gaya aur mardo ko kahi par bhi allah ne zikr nahi kiya ki na nabi saw ne ki ladki ko zyada izzat do bas ek bat ye hai ki islam mein aurat ko izzat diya kuch cheez pe lekin mardo ko beizzat kiya islam dharm mein.

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