· Iffat Zia · Ramzan  · 3 min read

ऐसे रोज़ेदार जिनको कोई सवाब नहीं मिलेगा

क्या आपको पता है रमज़ान में कुछ रोजेदारों को रोजा रखने का सवाब ही नहीं मिलता लेकिन वह कौन से रोजेदार है कहीं उन रोजेदारों में हमारा नाम तो नहीं आता। दोस्तों आर्टिकल को आखिर तक पढ़ें क्योंकि अगर आप रोजे रख रहे हो तो कहीं आपका रोजा भी वेस्ट ना चला जाए । लेकिन इस आर्टिकल को देखने के बाद इंशा अल्लाह आप के रोजे कुबूल भी होगे और आपको इसका पूरा-पूरा सवाब भी मिलेगा।

ऐसे रोज़ेदार जिनको कोई सवाब नहीं मिलेगा

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क्या आपको पता है रमज़ान में कुछ रोजेदारों को रोजा रखने का सवाब ही नहीं मिलता लेकिन वह कौन से रोजेदार है कहीं उन रोजेदारों में हमारा नाम तो नहीं आता। दोस्तों आर्टिकल को आखिर तक पढ़ें क्योंकि अगर आप रोजे रख रहे हो तो कहीं आपका रोजा भी वेस्ट ना चला जाए । लेकिन इस आर्टिकल को देखने के बाद इंशा अल्लाह आप के रोजे कुबूल भी होगे और आपको इसका पूरा-पूरा सवाब भी मिलेगा।

नबी करीम सल्लल्लाहो अलैही वसल्लम ने फरमाया की रोजे का सवाब बहुत बड़ा है जो हमें आखिरत में मिलेगा और ।अल्लाह पाक का इरशाद है कि रोजे के बदले में मैं खुद बंदे को मिल जाऊंगा। मरने के बाद हमें नेकिया मिले अल्लाह हमसे राजी हो जाए बस यही हर मुसलमान चाहता है।

मरने के बाद जब नेकियों का पिटारा खुलता है तब हर रोजेदार सोचता है कि मैंने हर साल रोजा रखा मुझे नेकिया मिलेगी लेकिन कुछ रोजेदारों को उनके हिस्से की नेकिया नहीं मिलती।

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दोस्तों आगे बहुत ही जरूरी बातें हैं इसलिए आर्टिकल के एंड तक बने रहे।

हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि कुछ रोजेदार ऐसे हैं जो सिर्फ रमजान के महीने में भूखे प्यासे रहते हैं दीन पर नही चलते।

यानी कि रोजा रखने के बाद भी गाना सुनना मूवी देखना नहीं छोड़ते। चुगली करना झूठ बोलना नहीं छोड़ते। हराम रिश्ते नाजायज ताल्लुक नहीं छोड़ते। लोग सूद खा रहे हैं। हराम का काम कर रहे हैं चोरी कर रहे हैं और रोजा भी रख रहे हैं। लेकिन ऐसे रोजेदारों का रोजा कुबूल नहीं किया जाता और ना ही इसका सवाब मिलता है।

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दोस्तों मेहनत पसंद आई तो आर्टिकल को लाइक जरुर करे।

दोस्तों रोजे का मतलब ईमान लाना है नेकिया करना है और गुनाह हमारी नेकियों को खा जाता है इसलिए अगर आप रोजा रखते हैं तो इन सभी बातों का खास ख्याल रखें ताकि आपका रोजा खाली नहीं जाए और आपको रोजे का पूरा सवाब मिले।

उम्मीद है आप इस आर्टिकल को अपने खास लोगों तक शेयर करेगे जिससे हम सभी इस रमजान में इन सभी बातों का खास ख्याल रखेंगे और अपने रोजे का पूरा पूरा सवाब अपनी नेकियों के पिटारे में जमा करेंगे।

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दोस्तों रमजान में हमें एक कुराने पाक को मुकम्मल करने में बहुत मुश्किल आती है क्योंकि 1 दिन में एक पाराह पढ़ना पड़ता है लेकिन आप एक साथ बिना एक पारहे को मुकम्मल किए एक से दो कुरान एक रमजान में मुकम्मल कर सकते हैं।

यह जानने के लिए ये आर्टिकल अभी पढ़ें और शेयर करे।

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