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Tahajjud Namaz Ka Tarika: वक़्त, रकात और फ़ज़ीलत
Tahajjud Namaz Ka Tarika: तहज्जुद की नमाज़ अल्लाह के करीब होने का सबसे बेहतरीन जरिया है। जानिए इसका सही वक़्त, रकात और पढ़ने का तरीका।

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तहज्जुद (Tahajjud) नफ़िल नमाज़ों में सबसे अफ़ज़ल नमाज़ है। इसे “मोमिन का शर्फ” कहा गया है। जब दुनिया सो रही होती है, उस वक़्त उठकर अल्लाह के सामने खड़ा होना अल्लाह को बहुत पसंद है।
इस आर्टिकल में हम Tahajjud Namaz Ka Tarika, इसका सही वक़्त और रकात के बारे में जानेंगे।
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तहज्जुद का वक़्त (Time of Tahajjud)
तहज्जुद का वक़्त ईशा की नमाज़ के बाद से शुरू होकर फज्र की अज़ान (सुब्ह सादिक) तक रहता है। लेकिन सबसे अफ़ज़ल (बेहतर) वक़्त रात का आखिरी हिस्सा (Last Third of Night) है।
- शर्त यह है कि ईशा की नमाज़ के बाद सो जाएं और फिर रात में उठें। सोने के बाद उठकर जो नमाज़ पढ़ी जाती है उसे ही तहज्जुद कहते हैं।
तहज्जुद की रकात (Rakat)
तहज्जुद की नमाज़ में कम से कम 2 रकात और ज़्यादा से ज़्यादा 12 रकात पढ़ी जा सकती हैं। नबी करीम (ﷺ) अक्सर 8 रकात तहज्जुद और 3 रकात वित्र पढ़ते थे। आप अपनी सहूलत के हिसाब से 2, 4, 6 या 8 रकात पढ़ सकते हैं।
Tahajjud Namaz Ka Tarika
तहज्जुद पढ़ने का तरीका बिल्कुल आम नफ़िल नमाज़ जैसा है:
- नियत: दिल में इरादा करें: “मैं नियत करता हूँ 2 रकात नमाज़ तहज्जुद की, वास्ते अल्लाह के…”
- तकबीर: ‘अल्लाहु अकबर’ कहकर हाथ बांध लें।
- सना और क़िरात: सना, सूरह फातिहा और कोई भी सूरह पढ़ें। (बेहतर है कि लंबी सूरहें पढ़ें, लेकिन छोटी भी पढ़ सकते हैं)।
- रुकू और सज्दा: आम नमाज़ की तरह रुकू और सज्दे करें।
- सलाम: हर 2 रकात के बाद सलाम फेरें।
तहज्जुद की फ़ज़ीलत (Benefits)
- दुआ की कुबूलियत: रात के आखिरी पहर अल्लाह तआला पहले आसमान पर तशरीफ़ लाते हैं और फरमाते हैं: “है कोई मुझसे मांगने वाला जिसे मैं अता करूँ? है कोई बख्शिश मांगने वाला जिसे मैं माफ़ करूँ?”
- चेहरे का नूर: जो रात को तहज्जुद पढ़ते हैं, दिन में उनके चेहरे पर एक अलग ही चमक (नूर) होती है।
- जन्नत का रास्ता: यह नमाज़ जन्नत में ले जाने वाली और जहन्नम से बचाने वाली है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या तहज्जुद के लिए सोना ज़रूरी है?
जी हाँ, ‘तहज्जुद’ का मतलब ही है ‘नींद तोड़कर उठना’। अगर आप बिना सोए पूरी रात नमाज़ पढ़ें तो वो ‘क़याम-उल-लैल’ (रात का क़याम) कहलाएगा, तहज्जुद नहीं। लेकिन अगर आँख न खुलने का डर हो, तो सोने से पहले भी पढ़ सकते हैं, मगर सवाब कम होगा।
Q. अगर तहज्जुद में आँख न खुले तो क्या करें?
अगर पक्का इरादा था लेकिन आँख नहीं खुली, तो हदीस में है कि अल्लाह उसे नमाज़ का सवाब देता है और उसका सोना अल्लाह की तरफ से सदका होता है।
Q. तहज्जुद में कौन सी सूरह पढ़नी चाहिए?
कोई भी सूरह पढ़ सकते हैं। नबी (ﷺ) कभी लंबी और कभी छोटी सूरहें पढ़ते थे। अगर ज़्यादा कुरान याद नहीं, तो ‘कुल हुवल्लाहु अहद’ (सूरह इखलास) पढ़ लें।
नतीजा:
कोशिश करें कि हफ्ते में कम से कम एक बार या जब भी मौका मिले, तहज्जुद ज़रूर पढ़ें। यह अल्लाह से दोस्ती करने का सबसे खास वक़्त है।
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