Surah Nisa in Hindi: सूरह निसा की फजीलत और पहली 10 आयतें
Surah Nisa in Hindi: जानिए सूरह निसा की फजीलत और पहली 10 आयतों का हिंदी तर्जुमा। यह सूरह औरतों के हुकूक, विरासत और निकाह के मसाइल पर रौशनी डालती है।

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सूरह निसा (Surah An-Nisa) कुरान मजीद की चौथी सूरह है। “निसा” का मतलब है “औरतें” (Women)। यह सूरह मदीना में नाज़िल हुई और इसमें 176 आयतें हैं।
इस सूरह का नाम “सूरह निसा” इसलिए है क्योंकि इसमें औरतों के हुकूक (अधिकार), निकाह, विरासत (inheritance) और उनसे जुड़े मसाइल पर तफसील से रौशनी डाली गई है। यह सूरह समाज में औरतों के मकाम को बुलंद करती है और उनके साथ इंसाफ का हुक्म देती है।
इस आर्टिकल में हम Surah Nisa in Hindi, इसकी अहमियत और पहली 10 आयतों का तर्जुमा जानेंगे।
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सूरह निसा की अहमियत (Importance of Surah An-Nisa)
- औरतों के हुकूक: यह सूरह औरतों को समाज में इज़्ज़त और बराबरी का दर्जा देती है। इसने उन ज़ाहिलाना रस्मों को खत्म किया जहाँ औरतों को विरासत से महरूम रखा जाता था।
- विरासत के कानून: इसमें विरासत की तकसीम के वाज़ेह (clear) कानून बताए गए हैं ताकि किसी का हक़ न मारा जाए।
- यतीमों का हक़: यह सूरह यतीमों के माल की हिफाज़त करने और उनके साथ अच्छा सुलूक करने का हुक्म देती है।
- पारिवारिक रिश्ते: यह शौहर-बीवी, माँ-बाप और दूसरे रिश्तेदारों के हुकूक को बयान करती है ताकि एक मज़बूत खानदान बन सके।
Surah Nisa Ayat 1-50 in Hindi
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
या अय्युहन-नासुत-तकू रब्बकुमुल-लज़ी ख़-ल-क़कुम मिन नफ्सिंय वाहि-दतिंव व ख़-ल-क़ मिन्हा जौ-जहा व बस्-स मिन्हुमा रिजालन कसीरंव व निसाआ, वत्तकुल्लाहल्लज़ी तसा-अलूना बिही वल-अरहाम, इन्नल्लाहा काना अलैकुम रक़ीबा।
(ऐ लोगो! अपने रब से डरो जिसने तुम्हें एक जान से पैदा किया और उसी से उसका जोड़ा बनाया और उन दोनों से बहुत से मर्द और औरतें फैला दीं; और उस अल्लाह से डरो जिसके नाम पर तुम एक दूसरे से मांगते हो और रिश्तों (को तोड़ने) से (डरो); बेशक अल्लाह तुम पर निगहबान है।)व आतुल-यतामा अमवा-लहुम वला त-त-बद्द-लुल-ख़बी-स बित्तय्यिब, वला ताअ्कुलू अमवा-लहुम इला अमवा-लिकुम, इन्नहू काना हूबन कबीरा।
(और यतीमों को उनके माल दे दो और पाक (माल) के बदले नापाक (माल) न लो, और उनके माल अपने मालों में मिलाकर न खाओ; बेशक यह बहुत बड़ा गुनाह है।)व इन ख़िफ़्तुम अल्ला तुक़सितू फिल-यतामा फनकिहू मा ता-ब लकुम मिनन-निसाइ मस्ना व सुला-स व रुबाअ, फ-इन ख़िफ़्तुम अल्ला तअ्दिलू फ-वाहि-दतन औ मा म-ल-कत ऐमानुकुम, ज़ालिका अदना अल्ला तऊलू।
(और अगर तुम्हें डर हो कि तुम यतीमों के साथ इंसाफ नहीं कर सकोगे तो (दूसरी) औरतों में से जो तुम्हें पसंद आएं, दो-दो, तीन-तीन, चार-चार से निकाह कर लो; फिर अगर तुम्हें डर हो कि तुम (उनके बीच) इंसाफ नहीं कर सकोगे तो सिर्फ एक से (निकाह करो) या जो तुम्हारी मिल्कियत में हैं (लौंडी); यह ज़्यादा करीब है कि तुम नाइंसाफी से बचो।)व आतुन-निसा-अ सदुकातिहिन्ना निह-लह, फ-इन तिब्ना लकुम अन शयइम मिन्हु नफ़्सन फ-कुलूहु हनीय-अम मरीआ।
(और औरतों को उनके मेहर खुशी से दो; फिर अगर वो अपनी खुशी से उसमें से कुछ तुम्हें छोड़ दें तो उसे शौक और मज़े से खाओ।)वला तुअ्तुस-सुफहा-अ अमवा-लकुमुल्लती ज-अ-लल्लाहु लकुम क़ियामंव वरज़ुकूहुम फीहा वक्सूहुम व कूलू लहुम क़ौलम-मअरूफ़ा।
(और नासमझों को अपने वो माल न दो जिन्हें अल्लाह ने तुम्हारी गुज़र-बसर का ज़रिया बनाया है, और उन्हें उसी में से खिलाओ और पहनाओ और उनसे अच्छी बात कहो।)वब्तलुल-यतामा हत्ता इज़ा ब-ल-गुन-निकाह, फ-इन आनस्तुम मिन्हुम रुश्दन फदफऊ इलैहिम अमवा-लहुम, वला ताअ्कुलूहा इसराफंव व बिदारन अंय-यकबरू, व मन काना गनिय्यन फल-यस्तअ्फ़िफ, व मन काना फकीरन फल-याअ्कुल बिल-मअरूफ़, फ-इज़ा द-फअ्तुम इलैहिम अमवा-लहुम फ-अशहिदू अलैहिम, व कफा बिल्लाहि हसीबा।
(और यतीमों को आज़माते रहो यहाँ तक कि वो निकाह की उम्र को पहुँच जाएं; फिर अगर तुम उनमें समझदारी देखो तो उनके माल उनके हवाले कर दो; और उनके माल फ़ुज़ूलखर्ची और जल्दी में इस डर से न खाओ कि वो बड़े हो जाएंगे; और जो मालदार हो वो बचे, और जो गरीब हो वो दस्तूर के मुताबिक खाए; फिर जब तुम उनके माल उनके हवाले करो तो उन पर गवाह बना लो; और अल्लाह हिसाब लेने के लिए काफी है।)लिर्रिजालि नसीबुम मिम्मा त-र-कल-वालिदानि वल-अक़रबून, व लिन-निसाइ नसीबुम मिम्मा त-र-कल-वालिदानि वल-अक़रबूना मिम्मा कल्ला मिन्हु औ कसुर, नसीबम-मफ़रूज़ा।
(मर्दों के लिए उस (माल) में हिस्सा है जो माँ-बाप और रिश्तेदारों ने छोड़ा हो, और औरतों के लिए भी उस (माल) में हिस्सा है जो माँ-बाप और रिश्तेदारों ने छोड़ा हो, चाहे वो (माल) थोड़ा हो या ज़्यादा; (यह) मुकर्रर किया हुआ हिस्सा है।)व इज़ा ह-द-रल-क़िस्म-त उलुल-क़ुरबा वल-यतामा वल-मसाकीनु फरज़ुकूहुम मिन्हु व कूलू लहुम क़ौलम-मअरूफ़ा।
(और जब तक़सीम के वक़्त रिश्तेदार और यतीम और मिस्कीन आ जाएं तो उन्हें भी उसमें से कुछ दो और उनसे अच्छी बात कहो।)वल-यख्शल्लज़ीना लौ त-रकू मिन खल्फिहिम ज़ुर्रिय्यतन ज़ीआफन ख़ाफू अलैहिम, फल-यत्तकुल्लाहा वल-यकूलू क़ौलन सदीदा।
(और उन लोगों को डरना चाहिए जो अगर अपने पीछे कमज़ोर औलाद छोड़ जाते तो उन्हें उनका फ़िक्र होता; तो उन्हें चाहिए कि अल्लाह से डरें और सीधी बात कहें।)इन्नल्लज़ीना याअ्कुलूना अमवा-लल-यतामा ज़ुल्मन इन्नमा याअ्कुलूना फी बुतूनिहिम नारा, व स-यस्लौना सईरा।
(बेशक जो लोग यतीमों का माल ज़ुल्म से खाते हैं, वो अपने पेटों में बस आग ही भरते हैं; और वो जल्द ही भड़कती हुई आग में दाखिल होंगे।)यूसिकुमुल्लाहु फी औलादिकुम, लिज़्ज़करि मिस्लु हज़्ज़िल उनसयैन, फ-इन कुन्ना निसाअन फौक़स्नतैनि फ-लहुन्ना सुलुसा मा तरक, व इन कानत वाहिदतन फ-लहन निस्फ, व लि-अबवैहि लि-कुल्लि वाहिदिम मिन्हुमस सुदुसु मिम्मा तरक इन काना लहू वलद, फ-इल्लम् यकुल्लहू वलदुंव व वरिसहू अबवाहु फ-लि-उम्मिहिस सुलुस, फ-इन काना लहू इख्वतुन फ-लि-उम्मिहिस सुदुस, मिम बादि वसिय्यतिंय यूसी बिहा औ दैन, आबाउकुम व अबनाउकुम ला तदरूना अय्युहुम अक़रबु लकुम नफ़आ, फरीज़तम मिनल्लाह, इन्नल्लाहा काना अलीमन हकीमा।
(अल्लाह तुम्हें तुम्हारी औलाद के बारे में हुक्म देता है: बेटे का हिस्सा दो बेटियों के बराबर है; फिर अगर सिर्फ बेटियां हों (और) दो से ज़्यादा हों तो उनके लिए उस (माल) का दो-तिहाई है जो (मय्यित ने) छोड़ा; और अगर एक ही बेटी हो तो उसके लिए आधा है; और मय्यित के माँ-बाप के लिए, उन दोनों में से हर एक के लिए छोड़े हुए माल का छठा हिस्सा है अगर मय्यित की औलाद हो; और अगर उसकी औलाद न हो और उसके माँ-बाप ही वारिस हों तो उसकी माँ का तिहाई हिस्सा है; फिर अगर मय्यित के भाई-बहन हों तो उसकी माँ का छठा हिस्सा है; (ये सब हिस्से) उस वसीयत (को पूरा करने) के बाद (होंगे) जो उसने की हो या कर्ज़ (अदा करने) के बाद; तुम्हारे बाप और तुम्हारे बेटे, तुम्हें नहीं मालूम कि उनमें से कौन तुम्हें नफा पहुँचाने में ज़्यादा करीब है; (ये) हिस्से अल्लाह के मुकर्रर किए हुए हैं; बेशक अल्लाह खूब जानने वाला, हिकमत वाला है।)व लकुम निस्फु मा तरक अज़वाजुकुम इल्लम् यकुल्लहुन्न वलद, फ-इन काना लहुन्न वलदुन फ-लकुमुर्-रुबुउ मिम्मा तरकन मिम बादि वसिय्यतिंय यूसीना बिहा औ दैन, व लहुन्नर्-रुबुउ मिम्मा तरकतुम इल्लम् यकुल्लकुम वलद, फ-इन काना लकुम वलदुन फ-लहुन्नस सुमुनु मिम्मा तरकतुम मिम बादि वसिय्यतिन तूसीना बिहा औ दैन, व इन काना रजुलुन यूरसु कलालतन अविम-र-अतुंव व लहू अखुन औ उख्तुन फ-लि-कुल्लि वाहिदिम मिन्हुमस सुदुस, फ-इन कानू अकसरा मिन ज़ालिका फ-हुम शुरकाउ फिस-सुलुसि मिम बादि वसिय्यतिंय यूसा बिहा औ दैनिन गैरा मुज़ार्र, वसिय्यतम मिनल्लाह, वल्लाहु अलीमुन हलीम।
(और तुम्हारे लिए आधा (माल) है जो तुम्हारी बीवियां छोड़ जाएं अगर उनकी औलाद न हो; फिर अगर उनकी औलाद हो तो तुम्हारे लिए उनके छोड़े हुए माल का चौथाई हिस्सा है, उस वसीयत के बाद जो वो कर जाएं या कर्ज़ (अदा करने) के बाद; और उन (बीवियों) के लिए तुम्हारे छोड़े हुए माल का चौथाई हिस्सा है अगर तुम्हारी औलाद न हो; फिर अगर तुम्हारी औलाद हो तो उनके लिए तुम्हारे छोड़े हुए माल का आठवां हिस्सा है, उस वसीयत के बाद जो तुम कर जाओ या कर्ज़ (अदा करने) के बाद; और अगर कोई ऐसा मर्द या औरत हो जिसकी विरासत ‘कलाला’ (जिसके माँ-बाप और औलाद न हों) के तौर पर बंटनी हो और उसका एक भाई या एक बहन हो तो उन दोनों में से हर एक के लिए छठा हिस्सा है; फिर अगर वो (भाई-बहन) इससे ज़्यादा हों तो वो सब एक-तिहाई में शरीक होंगे, उस वसीयत के बाद जो की गई हो या कर्ज़ (अदा करने) के बाद, जबकि (वसीयत या कर्ज़ से) किसी को नुकसान न पहुँचाया गया हो; ये अल्लाह की तरफ से ताकीद है; और अल्लाह खूब जानने वाला, बुर्दबार है।)तिल्का हुदूदुल्लाह, व मय्युतिइल्लाहा व रसूलहू युदखिलहु जन्नातिन तजरी मिन तहतिहल अनहारु खालिदीना फीहा, व ज़ालिकल फौज़ुल अज़ीम।
(ये अल्लाह की (मुकर्रर की हुई) हदें हैं; और जो अल्लाह और उसके रसूल की तात करेगा, अल्लाह उसे जन्नतों में दाखिल करेगा जिनके नीचे नहरें बहती हैं, वो उनमें हमेशा रहेंगे; और यही बड़ी कामयाबी है।)व मय्यअ्सिल्लाहा व रसूलहू व यतअद्द हुदूदहू युदखिलहु नारन खालिदन फीहा व लहू अज़ाबुम मुहीन।
(और जो अल्लाह और उसके रसूल की नाफरमानी करेगा और उसकी हदों से आगे बढ़ेगा, अल्लाह उसे आग में दाखिल करेगा जिसमें वो हमेशा रहेगा और उसके लिए रुसवा करने वाला अज़ाब है।)वल्लाती यातीनल फाहिशता मिन निसाइकुम फस्तशहिदू अलैहिन्न अर-ब-अतम मिंकुम, फ-इन शहिदू फ-अम्सिकूहुन्न फिल बुयूति हत्ता यतवफ्फाहुन्नल मौतु औ यज-अ-लल्लाहु लहुन्न सबीला।
(और तुम्हारी औरतों में से जो बदकारी करें उन पर अपनों में से चार गवाह तलब करो; फिर अगर वो गवाही दे दें तो उन औरतों को घरों में बंद रखो यहाँ तक कि उन्हें मौत आ जाए या अल्लाह उनके लिए कोई (और) रास्ता निकाल दे।)वल्लज़ानि याति-यानिहा मिंकुम फ-आज़ूहुमा, फ-इन ताबा व अस्लहा फ-अअरिसू अन्हुमा, इन्नल्लाहा काना तव्वाबर रहीमा।
(और तुममें से जो दो मर्द (या मर्द-औरत) बदकारी करें तो उन्हें सज़ा दो; फिर अगर वो तौबा कर लें और (अपनी) इस्लाह कर लें तो उनसे दरगुज़र करो; बेशक अल्लाह तौबा कबूल करने वाला, निहायत रहम वाला है।)इन्नमत तौबतु अलल्लाहि लिल्लज़ीना यअमलूनस सू-अ बि-जहालतिन सुम्मा यतवल्ला फरीकुम मिन्हुम व हुम मुरिज़ून।
(अल्लाह के ज़िम्मे तौबा (कबूल करना) सिर्फ उन लोगों के लिए है जो नादानी से बुराई कर बैठते हैं फिर जल्दी ही तौबा कर लेते हैं; तो अल्लाह ऐसे लोगों की तौबा कबूल फरमाता है; और अल्लाह खूब जानने वाला, हिकमत वाला है।)व लैसतित तौबतु लिल्लज़ीना यअमलूनस सय्यि-आति हत्ता इज़ा हज़रा अहदहुमुल मौतु काला इन्नी तुब्तुल आना व लल्लज़ीना यमूतूना व हुम कुफ्फार, उलाइका अअतदना लहुम अज़ाबन अलीमा।
(और तौबा उन लोगों के लिए नहीं है जो बुरे काम करते रहते हैं यहाँ तक कि जब उनमें से किसी की मौत आ खड़ी होती है तो कहता है: अब मैंने तौबा की, और न (तौबा) उन लोगों के लिए है जो कुफ्र की हालत में मरते हैं; यही वो लोग हैं जिनके लिए हमने दर्दनाक अज़ाब तैयार कर रखा है।)या अय्युहल लज़ीना आमनू ला यहिल्लु लकुम अन तरिसुन निसा-अ करहा, वला तअज़ुलूहुन्न लि-तज़हबू बि-बाज़ि मा आतैतुमूहुन्न इल्ला अंय-यातीना बि-फाहिशतिम मुबय्यिनह, व आशिरूहुन्न बिल मअरूफ़, फ-इन करिहतुमूहून्न फ-असा अन तकरहू शय-अंव व यज-अ-लल्लाहु फीहि खैरन कसीरा।
(ऐ ईमान वालो! तुम्हारे लिए हलाल नहीं कि तुम ज़बरदस्ती औरतों के वारिस बन जाओ, और उन्हें इस गर्ज़ से न रोको कि जो (माल) तुमने उन्हें दिया है उसका कुछ हिस्सा (वापस) ले लो, मगर ये कि वो खुली बदकारी की मुर्तकिब हों; और उनके साथ भले तरीके से गुज़र-बसर करो; फिर अगर तुम उन्हें नापसंद करो तो मुमकिन है कि तुम किसी चीज़ को नापसंद करो और अल्लाह उसमें बहुत सी भलाई रख दे।)व इन अरत्तुमुस तिबदाला ज़ौजिन मकान ज़ौजिंव व आतैतुम इहदाहुन्न किनतारन फला ताखुज़ू मिन्हु शैया, अ-ताखुज़ूनहू बुहतानंव व इस्मन मुबीना।
(और अगर तुम एक बीवी की जगह दूसरी बीवी बदलना चाहो और तुम उनमें से एक को ढेर सारा माल दे चुके हो तो उसमें से कुछ भी वापस न लो; क्या तुम उसे तोहमत लगाकर और खुले गुनाह के ज़रिए लोगे?)व कैफा ताखुज़ूनहू व कद अफज़ा बाज़ुकुम इला बाज़िंव व अखज़ना मिंकुम मीसाकन गलीज़ा।
(और तुम उसे कैसे लोगे जबकि तुम एक-दूसरे से मिल चुके हो और वो तुमसे पक्का अहद ले चुकी हैं?)वला तनकिहू मा नकहा आबाउकुम मिनन निसाइ इल्ला मा कद सलफ, इन्नहू काना फाहिशतंव व मक्तन, व सा-अ सबीला।
(और उन औरतों से निकाह न करो जिनसे तुम्हारे बाप-दादा निकाह कर चुके हों, मगर जो गुज़र चुका (सो गुज़र चुका); बेशक ये बेहयाई और नफरत का काम है, और बुरा रास्ता है।)हुर्रिमत अलैकुम उम्महातुकुम व बनातुकुम व अखवातुकुम व अम्मातुकुम व खालातुकुम व बनातुल अखि व बनातुल उख्ति व उम्महातुकुमुल लाती अरज़अ-नकुम व अखवातुकुम मिनर रज़ाअति व उम्महातु निसाइकुम व रबाइबुकुमुल लाती फी हुजूरिकुम मिन निसाइकुमुल लाती दखल्तुम बिहिन्न फ-इल्लम् तकूनू दखल्तुम बिहिन्न फला जुनाहा अलैकुम व हलाइलु अबनाइकुमुल लज़ीना मिन अस्लाबिकुम व अन तज-मऊ बैनल उख्तैनि इल्ला मा कद सलफ, इन्नल्लाहा काना गफूरर रहीमा।
(तुम पर हराम की गईं तुम्हारी माएं, तुम्हारी बेटियां, तुम्हारी बहनें, तुम्हारी फूफ़ियां, तुम्हारी ख़ालाएं, भतीजियां, भांजियां, तुम्हारी वो माएं जिन्होंने तुम्हें दूध पिलाया हो, तुम्हारी दूध शरीक बहनें, तुम्हारी बीवियों की माएं (सास), और तुम्हारी वो परवरिश-कर्दा लड़कियां जो तुम्हारी गोद में हैं तुम्हारी उन बीवियों से (पैदा शुदा) जिनसे तुम सोहबत कर चुके हो, हाँ अगर तुमने उनसे सोहबत न की हो तो तुम पर (उन लड़कियों से निकाह में) कोई गुनाह नहीं, और तुम्हारे उन बेटों की बीवियां जो तुम्हारी पुश्त से हैं, और ये कि तुम दो बहनों को इकट्ठा करो मगर जो गुज़र चुका; बेशक अल्लाह बख्शने वाला, निहायत रहम वाला है।)वल मुहसनातु मिनन निसाइ इल्ला मा मलकत् ऐमानुकुम, किताबल्लाहि अलैकुम, व उहिल्ला लकुम मा वरा-अ ज़ालिकुम अन तब्तगू बि-अमवालिकुम मुहसिनीना गैरा मुसाफिहीन, फमस्तम्तातुम बिही मिन्हुन्न फ-आतूहुन्न उजूरहुन्न फरीज़ह, वला जुनाहा अलैकुम फीमा तराज़ैतुम बिही मिम बादिल फरीज़ह, इन्नल्लाहा काना अलीमन हकीमा।
(और (हराम की गईं) शोहर वाली औरतें मगर वो जो तुम्हारी मिल्कियत में आ जाएं (लौंडियां); ये तुम पर अल्लाह का लिखा हुआ (हुक्म) है; और इनके सिवा (बाकी औरतें) तुम्हारे लिए हलाल की गईं कि तुम अपने माल के ज़रिए (उन्हें) तलब करो, निकाह में लाने वाले बनो न कि बदकारी करने वाले; फिर जिन औरतों से तुम नफा उठाओ (निकाह के बाद) तो उन्हें उनके मेहर बतौर फ़र्ज़ अदा करो; और मेहर मुकर्रर होने के बाद जिस पर तुम आपस में राज़ी हो जाओ उसमें तुम पर कोई गुनाह नहीं; बेशक अल्लाह खूब जानने वाला, हिकमत वाला है।)व मल्लम् यस्ततिअ मिंकुम तौलन अंय यनकिहल मुहसनातिल मुमिनाति फ-मिम्मा मलकत् ऐमानुकुम मिन फतयातिकुमुल मुमिनात, वल्लाहु अअलमु बि-ईमानिकुम, बाज़ुकुम मिम बाज़, फनकिहूहुन्न बि-इज़्नि अलिहिन्न व आतूहुन्न उजूरहुन्न बिल मअरूफ़ि मुहसनातिन गैरा मुसाफिहातिंव वला मुत्तखिज़ाति अखदान, फ-इज़ा उहसिन्ना फ-इन अतैना बि-फाहिशतिन फ-अलैहिन्न निस्फु मा अलल मुहसनाति मिनल अज़ाब, ज़ालिका लिमन खशियल अनता मिंकुम, व अन तसबिरू खैरुल लकुम, वल्लाहु गफूरुर रहीम।
(और तुममें से जो कोई आज़ाद मोमिन औरतों से निकाह करने की गुंजाइश न रखता हो तो वो तुम्हारी उन मोमिन लौंडियों से (निकाह कर ले) जो तुम्हारे कब्ज़े में हैं; और अल्लाह तुम्हारे ईमान को खूब जानता है; तुम आपस में एक ही हो; तो उनके मालिकों की इजाज़त से उनसे निकाह कर लो और उन्हें उनके मेहर भले तरीके से अदा करो, इस हाल में कि वो निकाह में आने वाली हों न कि बदकारी करने वाली और न चोरी-छिपे यार बनाने वाली; फिर जब वो निकाह में आ जाएं तो अगर वो बदकारी करें तो उन पर उस सज़ा की आधी (सज़ा) है जो आज़ाद औरतों पर है; ये (लौंडी से निकाह) उसके लिए है जिसे तुममें से गुनाह में पड़ने का डर हो; और ये कि तुम सब्र करो तुम्हारे लिए बेहतर है; और अल्लाह बख्शने वाला, निहायत रहम वाला है।)युरीदुल्लाहु लि-युबय्यिना लकुम व यहदियकुम सुननल लज़ीना मिन कबलिकुम व यतूबा अलैकुम, वल्लाहु अलीमुन हकीम।
(अल्लाह चाहता है कि तुम्हारे लिए (हलाल व हराम) वाज़ेह कर दे और तुम्हें तुमसे पहले लोगों के तरीके दिखाए और तुम पर अपनी रहमत मुतवज्जेह करे; और अल्लाह खूब जानने वाला, हिकमत वाला है।)वल्लाहु युरीदु अंय यतूबा अलैकुम, व युरीदुल लज़ीना यत्तबिऊनश शहवाति अन तमीलू मैलन अज़ीमा।
(और अल्लाह चाहता है कि तुम पर अपनी रहमत मुतवज्जेह करे, और जो लोग ख्वाहिशों के पीछे चलते हैं वो चाहते हैं कि तुम (राहे रास्त से) बहुत दूर हट जाओ।)युरीदुल्लाहु अंय युखफ्फिफा अंकुम, व खुलिकल इंसानु ज़ईफा।
(अल्लाह चाहता है कि तुम पर से बोझ हल्का करे; और इंसान कमज़ोर पैदा किया गया है।)या अय्युहल लज़ीना आमनू ला ताकुलू अमवालकुम बैनकुम बिल बातिलि इल्ला अन तकूना तिजारतन अन तराज़िम मिंकुम, वला तक्तुलू अनफुसकुम, इन्नल्लाहा काना बिकुम रहीमा।
(ऐ ईमान वालो! आपस में एक-दूसरे के माल नाहक न खाओ, मगर ये कि तुम्हारी आपस की रज़ामंदी से तिजारत हो; और अपनी जानों को कत्ल न करो; बेशक अल्लाह तुम पर निहायत मेहरबान है।)व मय्यफअल् ज़ालिका उद्-वानंव व ज़ुल्मन फ-सौफा नुस्लीहि नारा, व काना ज़ालिका अलल्लाहि यसीरा।
(और जो कोई ज़्यादती और ज़ुल्म से ऐसा करेगा तो हम जल्द ही उसे आग में दाखिल करेंगे; और ये अल्लाह पर आसान है।)इन तज्तनिबू कबाइरा मा तुन्हौना अन्हु नुकफ्फिर अंकुम सय्यि-आतिकुम व नुदखिलकुम मुदखलन करीमा।
(अगर तुम उन बड़े गुनाहों से बचते रहो जिनसे तुम्हें रोका जा रहा है तो हम तुम्हारी (छोटी) बुराइयां तुमसे दूर कर देंगे और तुम्हें बा-इज़्ज़त जगह दाखिल करेंगे।)वला ततमन्नौ मा फज़्ज़लल्लाहु बिही बाज़कुम अला बाज़, लिर्रिजालि नसीबुम मिम्मक तसबू, व लिन-निसाइ नसीबुम मिम्मक तसब्न, वस-अलुल्लाहा मिन फज़लिह, इन्नल्लाहा काना बि-कुल्लि शय-इन अलीमा।
(और उसकी तमन्ना न करो जिसके ज़रिए अल्लाह ने तुममें से बाज़ को बाज़ पर फज़ीलत दी है; मर्दों के लिए उसमें से हिस्सा है जो उन्होंने कमाया, और औरतों के लिए उसमें से हिस्सा है जो उन्होंने कमाया; और अल्लाह से उसका फज़ल मांगो; बेशक अल्लाह हर चीज़ को खूब जानने वाला है।)व लि-कुल्लिन जअल्ना मवालिया मिम्मा तरकल वालिदानि वल अकरबून, वल्लज़ीना अक-दत् ऐमानुकुम फ-आतूहुम नसीबहुम, इन्नल्लाहा काना अला कुल्लि शय-इन शहीदा।
(और हमने हर उस (माल) के वारिस मुकर्रर कर दिए हैं जो माँ-बाप और रिश्तेदार छोड़ जाएं; और जिनसे तुम्हारे अहद-ओ-पैमान हो चुके हों उन्हें उनका हिस्सा दो; बेशक अल्लाह हर चीज़ पर गवाह है।)अर्रिजालु कव्वामूना अलन् निसाइ बिमा फज़्ज़लल्लाहु बाज़हुम अला बाज़िंव व बिमा अनफकू मिन अमवालिहिम, फस्सालिहातु कानिततुन हाफिज़ातुल लिल गैबि बिमा हफिज़ल्लाह, वल्लाती तखाफूना नुशूज़हुन्न फइज़ूहुन्न वहजुरूहुन्न फिल मज़ाजिइ वज़रिबूहुन्न, फ-इन अताअ्-नकुम फला तब्गू अलैहिन्न सबीला, इन्नल्लाहा काना अलिय्यन कबीरा।
( मर्द औरतों पर हाकिम (निगहबान) हैं इस वजह से कि अल्लाह ने उनमें से एक को दूसरे पर फज़ीलत दी है और इस वजह से कि मर्दों ने अपने माल खर्च किए हैं; तो नेक औरतें फरमाबरदार होती हैं, पीठ पीछे हिफाज़त करने वाली होती हैं उस चीज़ की जिसकी हिफाज़त अल्लाह ने की है; और जिन औरतों की नाफरमानी का तुम्हें डर हो तो उन्हें नसीहत करो और (फिर) बिस्तरों में उनसे अलग हो जाओ और (फिर) उन्हें (हल्की) मार मारो; फिर अगर वो तुम्हारी तात करें तो उन पर (ज़्यादती का) कोई रास्ता न तलाश करो; बेशक अल्लाह सबसे बुलंद, सबसे बड़ा है।)व इन खिफ्तुम शिकाका बैनिहिमा फब्-असू हकमम मिन अलिही व हकमम मिन अलिहा, इंय युरीदा इस्लाहंय युवफ्फिकिल्लाहु बैनहुमा, इन्नल्लाहा काना अलीमन खबीरा।
(और अगर तुम्हें उन दोनों (मियां-बीवी) के दरमियान फूट पड़ने का डर हो तो एक हकम (फैसला करने वाला) मर्द के घर वालों में से और एक हकम औरत के घर वालों में से भेजो; अगर वो दोनों इस्लाह (सुलह-सफाई) चाहेंगे तो अल्लाह उन दोनों के दरमियान मुवाफिकत पैदा कर देगा; बेशक अल्लाह खूब जानने वाला, खबरदार है।)वअ्बुदुल्लाहा वला तुशरिकू बिही शय-अंव व बिल वालिदैनि एहसानंव व बिज़िल कुर्बा वल यतामा वल मसाकीनि वल जारि ज़िल कुर्बा वल जारिल जुनुबि वस्साहिबि बिल जम्बि वब्निस सबीलि व मा मलकत् ऐमानुकुम, इन्नल्लाहा ला युहिब्बु मन काना मुख्तालन् फखूरा।
(और अल्लाह की इबादत करो और उसके साथ किसी चीज़ को शरीक न ठहराओ और माँ-बाप के साथ अच्छा सुलूक करो और रिश्तेदारों और यतीमों और मिस्कीनों और करीबी पड़ोसी और अजनबी पड़ोसी और पहलू के साथी और मुसाफिर और जो (लौंडी-गुलाम) तुम्हारे कब्ज़े में हों (उन सबके साथ एहसान करो); बेशक अल्लाह उसे पसंद नहीं करता जो इतराने वाला, डींगें मारने वाला हो।)अल्लज़ीना यबखलूना व यामुरूनन नासा बिल बुख्लि व यक्तुमूना मा आताहुमुल्लाहु मिन फज़लिह, व अअतदना लिल काफिरीना अज़ाबम् मुहीना।
(जो (खुद) कंजूसी करते हैं और लोगों को कंजूसी का हुक्म देते हैं और उसे छुपाते हैं जो अल्लाह ने उन्हें अपने फज़ल से दिया है; और हमने काफिरों के लिए रुसवा करने वाला अज़ाब तैयार कर रखा है।)वल्लज़ीना युनफिकूना अमवालहुम रिआ-अन नासि वला युअमिनूना बिल्लाहि वला बिल यौमिल आखिर, व मंय यकुनिश शैतानु लहू करीनन फ-सा-अ करीना।
(और जो लोग अपने माल लोगों को दिखाने के लिए खर्च करते हैं और न अल्लाह पर ईमान रखते हैं और न आखिरत के दिन पर; और जिसका साथी शैतान हो जाए तो वो बहुत बुरा साथी है।)व माज़ा अलैहिम लौ आमनू बिल्लाहि वल यौमिल आखिरि व अनफकू मिम्मा रज़कहुमुल्लाह, व कानल्लाहु बिहिम अलीमा।
(और उनका क्या बिगड़ जाता अगर वो अल्लाह और आखिरत के दिन पर ईमान लाते और जो कुछ अल्लाह ने उन्हें दिया है उसमें से खर्च करते? और अल्लाह उन्हें खूब जानने वाला है।)इन्नल्लाहा ला यज़लिमु मिस्काला ज़र्रह, व इन तकु हसनतंय युज़ाइफहा व युअ्ति मिल लदुनहु अजरन अज़ीमा।
(बेशक अल्लाह ज़र्रा बराबर (भी) ज़ुल्म नहीं करता; और अगर कोई नेकी हो तो उसे दुगना कर देता है और अपने पास से बड़ा अज्र अता फरमाता है।)फ-कैफा इज़ा जिअना मिन कुल्लि उम्मतिम् बि-शहीदिंव व जिअना बिका अला हा-उलाइ शहीदा।
(तो (उस दिन) क्या हाल होगा जब हम हर उम्मत से एक गवाह लाएंगे और (ऐ नबी!) हम आपको इन लोगों पर गवाह बनाकर लाएंगे?)यौम-इज़िंय यवद्दुल लज़ीना कफरू व असवुर रसूला लौ तुसव्वा बिहिमुल अर्ज़, वला यक्तुमूनल्लाहा हदीसा।
(उस दिन वो लोग जिन्होंने कुफ्र किया और रसूल की नाफरमानी की, आरज़ू करेंगे कि काश ज़मीन उनके साथ बराबर कर दी जाए (धंस जाएं), और वो अल्लाह से कोई बात छुपा न सकेंगे।)या अय्युहल लज़ीना आमनू ला तकरबुस सलाता व अंतुम सुकारा हत्ता तअ्लमू मा तकूलूना वला जुनुबन इल्ला आबिरी सबीलिन हत्ता तग्तसिलू, व इन कुन्तुम मरज़ा औ अला सफरिन औ जा-अ अहदुम मिंकुम मिनल गाइति औ लामस्तुमुन निसा-अ फ-लम तजिदू मा-अन फ-तयम्मुमू सईदन तय्यिबन फम्सहू बि-वुजूहिकुम व ऐदीकुम, इन्नल्लाहा काना अफुव्वन गफूरा।
(ऐ ईमान वालो! नमाज़ के करीब न जाओ जब तुम नशे की हालत में हो यहाँ तक कि तुम समझने लगो जो तुम कहते हो, और न जनाबत की हालत में (मस्जिद में जाओ) मगर रास्ता पार करने के लिए, यहाँ तक कि तुम गुस्ल कर लो; और अगर तुम बीमार हो या सफर पर हो या तुममें से कोई कज़ा-ए-हाजत से आया हो या तुमने औरतों को छुआ हो और तुम्हें पानी न मिले तो पाक मिट्टी से तयम्मुम करो, फिर अपने चेहरों और अपने हाथों पर मसह करो; बेशक अल्लाह माफ करने वाला, बख्शने वाला है।)अलम तरा इलल लज़ीना ऊतू नसीबम मिनल किताबि यश्तरूनज़ ज़लालता व युरीदूना अन तज़िल्लुस सबील।
(क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा जिन्हें किताब का एक हिस्सा दिया गया, वो गुमराही खरीदते हैं और चाहते हैं कि तुम (भी) रास्ता भटक जाओ?)वल्लाहु अअलमु बि-अअदाइकुम, व कफा बिल्लाहि वलिय्यंव व कफा बिल्लाहि नसीरा।
(और अल्लाह तुम्हारे दुश्मनों को खूब जानता है; और अल्लाह काफी है हिमायती, और अल्लाह काफी है मददगार।)मिनल लज़ीना हादू युहर्रिफूनल कलिमा अम मवाज़िइही व यकूलूना समिअ्ना व असैना वस्मअ गैर मुस्मइंव व राइना लय्यम् बि-अल्सिनतिहिम व तअ्नन फिद दीन, व लौ अन्नहुम कालू समिअ्ना व अताअ्ना वस्मअ वन्ज़ुर्ना ल-काना खैरल् लहुम व अक्वामा व लाकिल लनहुमुल्लाहु बि-कुफ्रिहिम फला युअमिनूना इल्ला कलीला।
(यहूदियों में से कुछ लोग हैं जो कलिमात (अल्लाह के कलाम) को उनकी जगहों से बदल देते हैं और कहते हैं: हमने सुना और हमने नाफरमानी की, और (कहते हैं) सुन, तू न सुना जाए, और (कहते हैं) ‘राइना’ (हमारी रियायत कर), अपनी ज़बानों को मरोड़ते हुए और दीन में तानाज़नी करते हुए; और अगर वो कहते: हमने सुना और हमने माना, और सुनिए और हम पर नज़र फरमाइए, तो ये उनके लिए बेहतर और ज़्यादा दुरुस्त होता, लेकिन अल्लाह ने उनके कुफ्र की वजह से उन पर लानत की है, तो वो ईमान नहीं लाते मगर बहुत कम।)या अय्युहल लज़ीना ऊतुल किताबा आमिनू बिमा नज़्ज़ल्ना मुसद्दिकल् लिमा मअकुम मिन कब्लि अन नतमिसा वुजूहन फ-नरुद्दहा अला अदबारिहा औ नल्-अनहुम कमा लअन्ना अस्हाबस सब्त, व काना अमरुल्लाहि मफऊला।
(ऐ वो लोगो जिन्हें किताब दी गई! उस पर ईमान लाओ जो हमने नाज़िल किया (कुरान), जो तस्दीक करने वाला है उसका जो तुम्हारे पास है, इससे पहले कि हम चेहरों को मिटा दें फिर उन्हें उनकी पीठ की तरफ फेर दें या उन पर लानत करें जैसे हमने सब्त वालों (हफ्ता वालों) पर लानत की; और अल्लाह का हुक्म पूरा होकर रहता है।)इन्नल्लाहा ला यगफिरु अंय युशरका बिही व यगफिरु मा दूना ज़ालिका लिमंय यशा, व मंय युशरिक बिल्लाहि फकदिफ्तरा इस्मन अज़ीमा।
(बेशक अल्लाह इसे नहीं बख्शता कि उसके साथ शरीक ठहराया जाए और इसके अलावा जिसे चाहे बख्श देता है; और जो अल्लाह के साथ शरीक ठहराता है तो उसने बहुत बड़ा गुनाह घड़ा।)अलम तरा इलल लज़ीना युज़क्कूना अनफुसहुम, बलिल्लाहु युज़क्की मंय यशाउ वला युज़लमूना फतीला।
(क्या आपने उन लोगों को नहीं देखा जो अपनी जानों को पाक बताते हैं? बल्कि अल्लाह जिसे चाहता है पाक करता है और उन पर धागे बराबर (भी) ज़ुल्म नहीं किया जाएगा।)उन्ज़ुर कैफा यफ्तरूना अलल्लाहिल कज़िब, व कफा बिही इस्मन मुबीना।
(देखिए वो अल्लाह पर कैसे झूठ बांधते हैं! और ये (खुद) खुला गुनाह होने के लिए काफी है।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. सूरह निसा का मुख्य विषय क्या है?
इस सूरह का मुख्य विषय सामाजिक न्याय (Social Justice) है, जिसमें औरतों, यतीमों, और कमज़ोरों के हुकूक पर खास ज़ोर दिया गया है।
Q. क्या यह सूरह सिर्फ औरतों के बारे में है?
नहीं, इसका नाम “सूरह निसा” ज़रूर है, लेकिन इसमें पूरे समाज के लिए हिदायतें हैं, जैसे विरासत के कानून, निकाह, जिहाद, और मुनाफिकों की निशानियाँ।
Q. इस्लाम में एक से ज़्यादा शादी की इजाज़त क्यों है?
सूरह निसा (आयत 3) में एक से ज़्यादा शादी की इजाज़त कुछ शर्तों के साथ दी गई है, खास तौर पर यतीमों और बेवाओं की देखभाल के लिए। लेकिन साथ ही यह भी शर्त है कि अगर शौहर सब बीवियों के बीच इंसाफ नहीं कर सकता, तो उसे सिर्फ एक ही शादी करनी चाहिए।
नतीजा (Conclusion)
सूरह निसा इस्लाम के सामाजिक ढांचे की बुनियाद रखती है। यह हमें सिखाती है कि एक मज़बूत और इंसाफ पर आधारित समाज कैसे बनाया जाए, जहाँ हर किसी को, खासकर औरतों और यतीमों को, उनके पूरे हुकूक मिलें।
अल्लाह हमें इस सूरह से सबक हासिल करने और अपनी ज़िंदगी में इंसाफ कायम करने की तौफीक दे। आमीन।





