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Iffat Zia
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Surah An-Naba in Hindi: सूरह नबा की फजीलत और तर्जुमा

Surah An-Naba in Hindi: जानिए सूरह नबा की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। इस सूरह में कयामत के दिन की बड़ी खबर और जन्नत-जहन्नम का ज़िक्र है।

Surah An-Naba in Hindi: सूरह नबा की फजीलत और तर्जुमा

Table of Contents

सूरह अन-नबा (Surah An-Naba) कुरान मजीद की 78वीं सूरह है और 30वें पारे (Juz Amma) की शुरुआत इसी सूरह से होती है। “अन-नबा” का मतलब है “बड़ी खबर” (The Great News)। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 40 आयतें हैं।

इस सूरह की शुरुआत एक सवाल से होती है: “वो किस चीज़ के बारे में पूछ रहे हैं?” यह सवाल उन लोगों के बारे में है जो कयामत के दिन का मज़ाक उड़ाते थे। अल्लाह ने इसमें कयामत के दिन की हकीकत, जहन्नम की सख्ती और जन्नत की नेमतों का नक्शा खींचा है।

इस आर्टिकल में हम Surah An-Naba in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।

ये भी पढ़े: Surah An-Naziat in Hindi | सूरह नाज़ियात का तर्जुमा

सूरह नबा की फजीलत (Benefits of Surah An-Naba)

  1. कयामत का यकीन: यह सूरह हमें बताती है कि कयामत का आना एक “बड़ी खबर” और अटल सच्चाई है। जिस तरह अल्लाह ने ज़मीन, पहाड़ और आसमान बनाए, वैसे ही वह हमें दोबारा ज़िंदा करेगा।

  2. अल्लाह की निशानियां: इसमें अल्लाह ने अपनी कुदरत की निशानियों (जैसे नींद, रात, दिन, बारिश, अनाज) का ज़िक्र किया है ताकि इंसान गौर करे और अपने रब को पहचाने।

  3. जहन्नम और जन्नत: इसमें बताया गया है कि सरकश (बागी) लोगों के लिए जहन्नम घात में है, जबकि परहेज़गारों (Muttaqeen) के लिए कामयाबी और बागात हैं।

  4. हिसाब का दिन: आखिर में बताया गया है कि उस दिन कोई किसी की सिफारिश नहीं कर सकेगा सिवाय जिसे अल्लाह इजाज़त दे। काफिर उस दिन तमन्ना करेगा कि काश वह मिट्टी होता।


Surah An-Naba in Hindi (Transliteration & Translation)

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

  1. अम्मा यतसा-अ-लून।
    (वो किस चीज़ के बारे में एक-दूसरे से पूछ रहे हैं?)

  2. अनिन-नबइल-अज़ीम।
    (उस बड़ी खबर के बारे में।)

  3. अल्लज़ी हुम फीहि मुख्तलिफ़ून।
    (जिसमें वो इख्तिलाफ (मतभेद) कर रहे हैं।)

  4. कल्ला स-यअ्लमून।
    (हरगिज़ नहीं! वो जल्द जान लेंगे।)

  5. सुम्मा कल्ला स-यअ्लमून।
    (फिर हरगिज़ नहीं! वो जल्द जान लेंगे।)

  6. अलम नज-अलिल-अर्ज़ा मिहादा।
    (क्या हमने ज़मीन को बिछौना नहीं बनाया?)

  7. वल-जिबाला औतादा।
    (और पहाड़ों को मेखें (खूंटे) नहीं बनाया?)

  8. व ख़लक़नाकुम अज़्वाजा।
    (और हमने तुम्हें जोड़े-जोड़े पैदा किया।)

  9. व ज-अल्ना नौमकुम सुबाता।
    (और हमने तुम्हारी नींद को आराम का जरिया बनाया।)

  10. व ज-अल्नल-लैला लिबासा।
    (और हमने रात को पर्दा (लिबास) बनाया।)

  11. व ज-अल्नन-नहारा मआशा।
    (और हमने दिन को रोज़ी (कमाने) का वक़्त बनाया।)

  12. व बनैना फौक़कुम सब-अन शिदादा।
    (और हमने तुम्हारे ऊपर सात मज़बूत (आसमान) बनाए।)

  13. व ज-अल्ना सिरा जंव-वह-हाजा।
    (और हमने एक चमकता हुआ चिराग (सूरज) बनाया।)

  14. व अन्ज़ल्ना मिनल-मुअ्सिराति मा-अन सज्जाजा।
    (और हमने बादलों से मूसलाधार पानी बरसाया।)

  15. लि-नुख्रिजा बिही हब्बंव-व नबाता।
    (ताकि हम उससे अनाज और सब्ज़ी उगाएं।)

  16. व जन्नातिन अल्फ़ाफ़ा।
    (और घने बाग़।)

  17. इन्ना यौमल-फस्लि काना मीक़ाता।
    (बेशक फैसले का दिन एक मुकर्रर वक़्त है।)

  18. यौमा युन्फखु फिस-सूरि फ-तअ्तूना अफ्वाजा।
    (जिस दिन सूर में फूँक मारी जाएगी तो तुम गिरोह-दर-गिरोह चले आओगे।)

  19. व फुति-हतिस-समा-उ फ-कानत अब्वाबा।
    (और आसमान खोल दिया जाएगा तो उसमें दरवाज़े ही दरवाज़े हो जाएंगे।)

  20. व सुय्यि-रतिल-जिबालु फ-कानत सराबा।
    (और पहाड़ चलाए जाएंगे तो वो रेत (चमकता हुआ धोखा) हो जाएंगे।)

  21. इन्ना जहन्नमा कानत मिरसादा।
    (बेशक जहन्नम घात में है।)

  22. लित-तागीना मआबा।
    (सरकशों (बागियों) का ठिकाना।)

  23. लाबिसिना फीहा अह्क़ाबा।
    (जिसमें वो मुद्दतों पड़े रहेंगे।)

  24. ला यज़ूक़ूना फीहा बर्दन व ला शराबा।
    (न उसमें ठंडक चखेंगे और न कोई पीने की चीज़।)

  25. इल्ला हमीमंव-व गस्साक़ा।
    (सिवाय खौलते हुए पानी और पीप के।)

  26. जज़ा-अंव-विफ़ाक़ा।
    (पूरा-पूरा बदला।)

  27. इन्नहुम कानू ला यरजूना हिसाब।
    (बेशक वो हिसाब की उम्मीद नहीं रखते थे।)

  28. व कज़्ज़बू बि-आयातिना किज़्ज़ाबा।
    (और उन्होंने हमारी आयतों को पूरी तरह झुठलाया।)

  29. व कुल्ला शै-इन अह्सैनाहु किताब।
    (और हमने हर चीज़ को लिखकर गिन रखा है।)

  30. फ-ज़ूक़ू फ-लन-नज़ी-दकुम इल्ला अज़ाबा।
    (तो अब (अज़ाब) चखो, हम तुम्हारा अज़ाब ही बढ़ाते रहेंगे।)

  31. इन्ना लिल-मुत्तक़ीना मफ़ाज़ा।
    (बेशक परहेज़गारों के लिए कामयाबी है।)

  32. हदा-इक़ा व अअ्नाबा।
    (बाग़ और अंगूर।)

  33. व कवा-इबा अतराबा।
    (और नौजवान हम-उम्र औरतें।)

  34. व कअ्सन दिहाक़ा।
    (और छलकते हुए जाम।)

  35. ला यस्मऊना फीहा लग्वंव-व ला किज़्ज़ाबा।
    (न वहां कोई बेकार बात सुनेंगे और न कोई झूठ।)

  36. जज़ा-अम-मिर-रब्बिका अता-अन हिसाब।
    (तुम्हारे रब की तरफ से बदला, भरपूर इनाम।)

  37. रब्बिस-समावाति वल-अर्ज़ि व मा बैनहुमर-रहमानि ला यम्लिकूना मिन्हु ख़िताबा।
    (आसमानों और ज़मीन का और जो कुछ उनके बीच है, सबका रब, जो बड़ा मेहरबान है, किसी को उससे बात करने का हक़ नहीं होगा।)

  38. यौमा यक़ूमुर-रूहू वल-मला-इकतु सफ्फ़ा, ला य-त-कल्लमूना इल्ला मन अज़िना लहु-र्रहमानु व क़ाला सवाबा।
    (जिस दिन रूह (जिब्रील अ.स.) और फरिश्ते सफ बांधकर खड़े होंगे, कोई बात नहीं कर सकेगा सिवाय उसके जिसे रहमान इजाज़त दे और वो ठीक बात कहे।)

  39. ज़ालिकल-यौमुल-हक़्क़ु, फ-मन शा-अत्तख़ज़ा इला रब्बिही मआबा।
    (वो दिन हक़ है, तो जो चाहे अपने रब के पास ठिकाना बना ले।)

  40. इन्ना अन्ज़रनाकुम अज़ाबन क़रीबा, यौमा यन्ज़ुरुल-मरउ मा क़द्दमत यदाहु व यक़ूलुल-काफिरु या लैतनी कुन्तु तुराबा।
    (बेशक हमने तुम्हें एक करीब आने वाले अज़ाब से डरा दिया है, जिस दिन इंसान देखेगा जो उसके हाथों ने आगे भेजा है, और काफिर कहेगा: काश! मैं मिट्टी होता।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. नबा (Naba) का क्या मतलब है?
A.

“नबा” का मतलब है “बड़ी खबर”। यह कयामत के दिन की तरफ इशारा है, जिसे काफिर झुठलाते थे और एक-दूसरे से पूछते थे।

Q. यह सूरह कुरान के किस पारे में है?
A. यह सूरह 30वें पारे (अम्मा पारा) की पहली सूरह है।
Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
A.

इस सूरह का असल पैगाम यह है कि कयामत का दिन हक़ है और उस दिन हर इंसान को अपने किए का हिसाब देना होगा। दुनिया की ज़िंदगी एक इम्तिहान है और आखिरत ही असली ठिकाना है।


नतीजा (Conclusion)

सूरह नबा हमें याद दिलाती है कि यह दुनिया एक दिन खत्म हो जाएगी और हमें अपने हर अमल का हिसाब देना होगा। यह हमें अल्लाह की कुदरत पर गौर करने और आखिरत की तैयारी करने की दावत देती है।

जब काफिर उस दिन मिट्टी होने की तमन्ना करेगा, तो उससे पहले हमें चाहिए कि हम तौबा करें और नेक अमल करें।

अल्लाह हमें कयामत के दिन की रुसवाई से बचाए और हमारा हिसाब आसान फरमाए। आमीन।

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