Surah Muzzammil in Hindi: सूरह मुज़्ज़म्मिल की फजीलत और तर्जुमा
Surah Muzzammil in Hindi: जानिए सूरह मुज़्ज़म्मिल का हिंदी तर्जुमा और फजीलत। यह सूरह तहज्जुद की नमाज़, कुरान पढ़ने के अदब और सब्र के बारे में है।

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सूरह मुज़्ज़म्मिल (Surah Al-Muzzammil) कुरान मजीद की 73वीं सूरह है। “अल-मुज़्ज़म्मिल” का मतलब है “चादर में लिपटे हुए” (The Enshrouded One)। यह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 20 आयतें हैं।
इस सूरह की शुरुआत में अल्लाह तआला ने अपने प्यारे नबी (ﷺ) को “या अय्युहल मुज़्ज़म्मिल” कहकर पुकारा है। यह उस वक़्त की तरफ इशारा है जब नबी (ﷺ) पर पहली वही नाज़िल होने के बाद आप घबराहट में घर आए और हज़रत खदीजा (र.अ.) से कहा, “मुझे चादर ओढ़ा दो।”
इस आर्टिकल में हम Surah Muzzammil in Hindi, इसका तर्जुमा और अहमियत जानेंगे।
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सूरह मुज़्ज़म्मिल की अहमियत (Importance of Surah Al-Muzzammil)
- तहज्जुद का हुक्म: इस सूरह में रात को उठकर तहज्जुद की नमाज़ पढ़ने का हुक्म दिया गया है, जो अल्लाह का कुर्ब (निकटता) हासिल करने का बेहतरीन ज़रिया है।
- कुरान पढ़ने का तरीका: इसमें कुरान को ठहर-ठहर कर, साफ और खूबसूरत अंदाज़ में (तरतील के साथ) पढ़ने की हिदायत दी गई है।
- सब्र की तालीम: यह सूरह सिखाती है कि दीन की राह में आने वाली मुश्किलों और लोगों की बातों पर सब्र करना चाहिए।
Surah Muzzammil in Hindi (Hindi Mein)
बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम
या अय्युहल-मुज़्ज़म्मिल।
(ऐ चादर में लिपटे हुए (नबी)!)क़ुमिल-लैला इल्ला क़लीला।
(रात को (नमाज़ में) खड़े रहा करो, मगर थोड़ी देर।)निस्फहू अविनक़ुस मिन्हु क़लीला।
(आधी रात, या उसमें से कुछ कम कर दो।)अव ज़िद अलैहि व रत्तिलिल-क़ुरआना तरतीला।
(या उस पर कुछ बढ़ा दो, और कुरान को ठहर-ठहर कर पढ़ा करो।)इन्ना सनुल्क़ी अलैका क़वलन सक़ीला।
(बेशक हम तुम पर एक भारी कलाम (कुरान) नाज़िल करने वाले हैं।)इन्ना नाशि-अतल-लैलि हिया अशद्दु वत-अंव-व अक़्वमु क़ीला।
(बेशक रात का उठना (नफ़्स को कुचलने के लिए) बहुत सख्त है और बात को दुरुस्त करने वाला है।)इन्ना लका फिन-नहारि सब्हन तवीला।
(बेशक दिन में तुम्हारे लिए बहुत काम होते हैं।)वज़कुरिस्-म रब्बिका व तबत्तल इलैहि तब्तीला।
(और अपने रब का नाम याद करो और सबसे कटकर उसी के हो जाओ।)रब्बुल-मश्रिक़ि वल-मग्रिबि ला इलाहा इल्ला हुवा फत्तख़िज्हु वकीला।
(वो मशरिक (पूरब) और मगरिब (पश्चिम) का रब है, उसके सिवा कोई माबूद नहीं, तो उसी को अपना कारसाज़ (काम बनाने वाला) बना लो।)वसबिर अला मा यक़ूलूना वहजुरहुम हजरन जमीला।
(और जो कुछ वो (काफिर) कहते हैं, उस पर सब्र करो और खूबसूरती के साथ उनसे अलग हो जाओ।)व ज़रनी वल-मुकज़्ज़िबीना उलिन-नअ्मति व मह्हिलहुम क़लीला।
(और मुझे और झुठलाने वाले दौलतमंदों को छोड़ दो और उन्हें थोड़ी मोहलत दो।)इन्ना लदैना अन्कालंव-व जहीमा।
(बेशक हमारे पास (उनके लिए) भारी बेड़ियाँ और भड़कती हुई आग है।)व तआमन ज़ा गुस्सतिंव-व अज़ाबन अलीमा।
(और गले में अटकने वाला खाना और दर्दनाक अज़ाब है।)यौमा तरजुफुल-अर्जु वल-जिबालु व कानतिल-जिबालु कसीबम-महीला।
(जिस दिन ज़मीन और पहाड़ कांप उठेंगे और पहाड़ रेत के टीले की तरह भुरभुरे हो जाएंगे।)इन्ना अर्सल्ना इलैकुम रसूलन शाहिदन अलैकुम कमा अर्सल्ना इला फिरऔना रसूला।
(बेशक हमने तुम्हारी तरफ एक रसूल भेजा है जो तुम पर गवाह है, जैसा कि हमने फिरौन की तरफ एक रसूल भेजा था।)फ-असा फिरऔनुर-रसूला फ-अख़ज़्नाहु अख़्ज़ंव-वबीला।
(तो फिरौन ने उस रसूल की नाफरमानी की, तो हमने उसे बड़ी सख्ती से पकड़ लिया।)फ-कैफा तत्तक़ूना इन कफरतुम यौमन यज्अलुल-विल्दाना शीबा।
(तो अगर तुम कुफ्र करोगे तो उस दिन (के अज़ाब) से कैसे बचोगे जो बच्चों को बूढ़ा कर देगा?)अस्समा-उ मुन्फतिरुम-बिह, काना वअ्दुहू मफ़ऊला।
(जिस (की सख्ती) से आसमान फट जाएगा, उसका वादा पूरा होकर रहेगा।)इन्ना हाज़िही तज़्किरह, फ-मन शा-अत्तख़-ज़ा इला रब्बिही सबीला।
(बेशक यह एक नसीहत है, तो जो चाहे अपने रब की तरफ रास्ता पकड़ ले।)इन्ना रब्ब-क यअ्लमु अन्न-क तक़ूमु अदना मिन सुलु-सयिल-लैलि व निस्-फहू व सुलु-सहू व ताइ-फतुम-मिनल-लज़ी-न म-अक, वल्लाहु युक़द्दिरुल-लै-ल वन-नहार, अलि-म अल्लन तुह्सूहू फ-ता-ब अलैकुम, फक़्-रऊ मा त-यस्स-र मिनल-क़ुरआन, अलि-म अन स-यकूनु मिन्कुम-मरज़ा व आखरू-न यज़्रिबू-न फिल-अर्ज़ि यब्तगू-न मिन फज़्लिल्लाहि व आखरू-न युक़ातिलू-न फी सबीलिल्लाह, फक़्-रऊ मा त-यस्स-र मिन्हु व अक़ीमुस-सला-त व आतुज़-ज़का-त व अक़्रिज़ुल्ला-ह क़र्ज़न ह-स-ना, वमा तुक़द्दिमू लि-अन्फुसिकुम-मिन खैरिन तजिदूहु इन्दल्लाहि हु-व खैरंव-व अअ्-ज़-म अज्रा, वस्तग्फिरुल्लाह, इन्नल्ला-ह गफूरुर-रहीम।
(बेशक तुम्हारा रब जानता है कि तुम (कभी) दो-तिहाई रात के करीब, (कभी) आधी रात और (कभी) एक-तिहाई रात (नमाज़ में) खड़े रहते हो, और तुम्हारे साथ वालों में से एक जमात भी। और अल्लाह ही रात और दिन का सही अंदाज़ा रखता है। उसे मालूम है कि तुम सब इसे नहीं निभा सकोगे, तो उसने तुम पर मेहरबानी की। तो अब कुरान में से जितना आसान हो, पढ़ लिया करो। वो जानता है कि तुममें से कुछ बीमार होंगे, कुछ और लोग अल्लाह का फज़्ल (रोज़ी) तलाश करने के लिए ज़मीन में सफर करेंगे, और कुछ दूसरे अल्लाह की राह में लड़ेंगे। तो जितना आसान हो, उसमें से पढ़ लिया करो, और नमाज़ कायम करो, ज़कात दो और अल्लाह को अच्छी तरह क़र्ज़ दो। और जो भलाई तुम अपने लिए आगे भेजोगे, उसे अल्लाह के पास बेहतर और बड़े अज्र वाला पाओगे। और अल्लाह से बख्शिश मांगते रहो, बेशक अल्लाह बख्शने वाला, मेहरबान है।)
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. मुज़्ज़म्मिल (Muzzammil) का क्या मतलब है?
“मुज़्ज़म्मिल” का मतलब है “चादर में लिपटने वाला”। यह अल्लाह ने प्यार से अपने नबी (ﷺ) को पुकारा है।
Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
इस सूरह का असल पैगाम यह है कि दीन की बड़ी ज़िम्मेदारी को उठाने के लिए रात की इबादत (तहज्जुद) के ज़रिए रूहानी ताकत हासिल की जाए और मुश्किलों पर सब्र किया जाए।
नतीजा (Conclusion)
सूरह मुज़्ज़म्मिल हमें अल्लाह से गहरा ताल्लुक बनाने का तरीका सिखाती है। रात की तन्हाई में जब हम अल्लाह के सामने खड़े होते हैं, तो हमें वो ताकत और सुकून मिलता है जिससे हम दिन भर की मुश्किलों का सामना कर सकते हैं।
अल्लाह हमें तहज्जुद पढ़ने, कुरान को समझने और सब्र करने की तौफीक दे। आमीन।





