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Surah Mulk in Hindi: सूरह मुल्क की फजीलत, तर्जुमा और पढ़ने का तरीका

Surah Mulk in Hindi: क्या आप कब्र के अज़ाब से बचना चाहते हैं? जानिए सूरह मुल्क की फजीलत, इसे पढ़ने का सही वक़्त और हिंदी तर्जुमा।

Surah Mulk in Hindi: सूरह मुल्क की फजीलत, तर्जुमा और पढ़ने का तरीका

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सूरह मुल्क (Surah Mulk) कुरान मजीद के 29वें पारे की पहली सूरह है। इसे “तबारकल्लज़ी” (Tabarakallazi) भी कहा जाता है। यह मक्का में नाज़िल हुई और इसमें 30 आयतें हैं।

हमारे प्यारे नबी (ﷺ) ने इस सूरह की बहुत ज़्यादा फजीलत बताई है, खास तौर पर कब्र के अज़ाब से बचने के लिए।

इस आर्टिकल में हम Surah Mulk in Hindi, इसका तर्जुमा, फजीलत और पढ़ने का सही वक़्त जानेंगे।

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सूरह मुल्क की फजीलत (Benefits of Surah Mulk)

हदीस में सूरह मुल्क के बेशुमार फायदे बताए गए हैं:

1. कब्र के अज़ाब से हिफाज़त

नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “सूरह मुल्क कब्र के अज़ाब से रोकने वाली और नजात देने वाली है।” (तिर्मिज़ी)

जो शख्स रोज़ाना रात को इसे पढ़ता है, अल्लाह उसे कब्र की सख्ती और अज़ाब से महफूज़ रखता है।

2. बख्शिश का जरिया

एक हदीस में है: “कुरान में एक सूरह है जिसकी 30 आयतें हैं। इसने एक आदमी की सिफारिश की यहाँ तक कि उसे बख्श दिया गया। और वो सूरह ‘तबारकल्लज़ी बियदिहिल मुल्क’ है।” (अबू दाऊद)

3. कयामत के दिन सिफारिश

यह सूरह कयामत के दिन अपने पढ़ने वाले के लिए अल्लाह से झगड़ेगी (सिफारिश करेगी) जब तक कि उसे जन्नत में दाखिल न करवा दे।

सूरह मुल्क पढ़ने का सही वक़्त (Best Time to Read)

सूरह मुल्क पढ़ने का सबसे बेहतरीन वक़्त रात को सोने से पहले है। नबी करीम (ﷺ) का मामूल था कि आप (ﷺ) सूरह मुल्क और सूरह सजदा पढ़े बिना नहीं सोते थे।

आप इसे ईशा की नमाज़ के बाद या बिस्तर पर लेटने से पहले पढ़ सकते हैं।

Surah Mulk in Hindi with Translation

यहाँ सूरह मुल्क का मुकम्मल हिंदी उच्चारण (Transliteration) और तर्जुमा दिया गया है:

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम (शुरू अल्लाह के नाम से जो बड़ा मेहरबान, निहायत रहम वाला है)

  1. तबारकल्लज़ी बियदिहिल मुल्क, व हुवा अला कुल्लि शैइन क़दीर।
    (बड़ी बरकत वाला है वो (अल्लाह) जिसके हाथ में (कायनात की) बादशाही है, और वो हर चीज़ पर कादिर है।)

  2. अल्लज़ी ख़लक़ल मौता वल-हयाता लि-यब्लु-अकुम अय्युकुम अहसनु अमला, व हुवल अज़ीज़ुल गफूर।
    (जिसने मौत और ज़िन्दगी को पैदा किया ताकि तुम्हें आज़माए कि तुम में से कौन अमल में ज्यादा अच्छा है, और वो ज़बरदस्त है, बड़ा बख्शने वाला है।)

  3. अल्लज़ी ख़लक़ सब-अ समावातिन तिबाक़ा, मा तरा फी ख़ल्क़िर-रहमानि मिन तफावुत, फरजि-इल बसरा हल तरा मिन फुतूर।
    (जिसने सात आसमान ऊपर-तले बनाए, तू रहमान की बनावट में कोई कमी-बेशी नहीं देखेगा, फिर नज़र दौड़ा, क्या तुझे कोई दरार नज़र आती है?)

  4. सुम्मर-जिइल बसरा कर्र-तैनि यनक़लिब इलैकल बसरु ख़ासि-अंव-व हुवा हसीर।
    (फिर दोबारा नज़र दौड़ा, नज़र तेरी तरफ थक कर वापस आ जाएगी और वो नाकाम होगी।)

  5. व लक़द ज़य्यन्नस-समा-अद-दुन्या बि-मसाबीहा व ज-अल्नाहा रुजूमल-लिश-शयातीनि व अ-अतदना लहुम अज़ाबस-सईर।
    (और बेशक हमने नज़दीकी आसमान को चिरागों (सितारों) से सजाया और उन्हें शैतानों को मारने का जरिया बना दिया, और हमने उनके लिए दहकती आग का अज़ाब तैयार कर रखा है।)

  6. व लिल्लज़ीना कफरू बि-रब्बिहिम अज़ाबु जहन्नम, व बिअ्सल मसीर।
    (और जिन लोगों ने अपने रब का इनकार किया, उनके लिए जहन्नम का अज़ाब है, और वो बहुत बुरा ठिकाना है।)

  7. इज़ा उल्क़ू फीहा समिऊ लहा शहीक़ंव-व हिया तफूर।
    (जब वो उसमें डाले जाएंगे तो उसकी डरावनी आवाज़ सुनेंगे और वो जोश मार रही होगी।)

  8. तकादु तमय्यज़ु मिनल गैज़, कुल्लमा उल्क़िया फीहा फौजुिन स-अ-लहुम खज़-न-तुहा अलम यअ्-तिकुम नज़ीर।
    (करीब है कि वो गुस्से से फट पड़े, जब भी उसमें कोई गिरोह डाला जाएगा तो उसके दारोगा उनसे पूछेंगे: क्या तुम्हारे पास कोई डराने वाला नहीं आया था?)

  9. क़ालू बला क़द जा-अना नज़ीरुन फ-कज़्ज़बना व कुलना मा नज़्ज़लल्लाहु मिन शैइन इन अन्तुम इल्ला फी ज़लालिन कबीर।
    (वो कहेंगे: क्यों नहीं! बेशक हमारे पास डराने वाला आया था, मगर हमने उसे झुठला दिया और कहा कि अल्लाह ने कुछ भी नाज़िल नहीं किया, तुम तो बड़ी गुमराही में पड़े हो।)

  10. व क़ालू लौ कुन्ना नस्मउ औ नअ्क़िलु मा कुन्ना फी अस्हाबिस-सईर।
    (और वो कहेंगे: अगर हम सुनते या समझते तो (आज) जहन्नम वालों में शामिल न होते।)

  11. फअ्-तरफू बि-ज़म्बिकिम फ-सुहक़ल-लि-अस्हाबिस-सईर।
    (बस वो अपने गुनाह का इकरार कर लेंगे, तो जहन्नम वालों के लिए (रहमत से) दूरी है।)

  12. इन्नल्लज़ीना यख-शौना रब्बहुम बिल-गैबि लहुम मगफिरतुंव-व अजरुन कबीर।
    (बेशक जो लोग अपने रब से बिन देखे डरते हैं, उनके लिए बख्शिश और बड़ा अज्र है।)

  13. व असिर्रू क़ौलकुम अविज-हरू बिह, इन्नहू अलीमुम-बि-ज़ातिस-सुदूर।
    (और तुम अपनी बात छुपाओ या ज़ाहिर करो, वो तो सीनों (दिलों) के भेद भी खूब जानता है।)

  14. अला यअ्लमु मन ख़लक़, व हुवल-लतीफुल खबीर।
    (भला जिसने पैदा किया वो नहीं जानेगा? हालांकि वो बारीक बीन (हर बारीकी जानने वाला) और बाखबर है।)

  15. हुवल-लज़ी ज-अ-ल लकुमुल अर्ज़ा ज़लूलन फमशू फी मनाकिबिहा व कुलू मिर-रिज़्क़िह, व इलैहिन-नुशूर।
    (वही है जिसने तुम्हारे लिए ज़मीन को ताबे (नरम) कर दिया, तो तुम उसके रास्तों में चलो और उसका रिज़्क़ खाओ, और उसी की तरफ (मरने के बाद) उठना है।)

  16. अ-अमिन्तुम मन फिस-समा-इ अंय-यखसिफा बिकुमुल अर्ज़ा फ-इज़ा हिया तमूर।
    (क्या तुम उससे बेखौफ हो गए हो जो आसमान में है कि वो तुम्हें ज़मीन में धंसा दे, फिर वो अचानक हिलने (कांपने) लगे?)

  17. अम अमिन्तुम मन फिस-समा-इ अंय-युरसिला अलैकुम हासिबा, फ-स-तअ्लमूना कैफा नज़ीर।
    (या तुम उससे बेखौफ हो गए हो जो आसमान में है कि वो तुम पर पथराव करने वाली हवा भेज दे? फिर तुम जान लोगे कि मेरा डराना कैसा था।)

  18. व लक़द कज़्ज़बल-लज़ीना मिन क़बलिहिम फ-कैफा काना नकीर।
    (और बेशक उनसे पहले लोगों ने भी झुठलाया था, तो (देखो) मेरा अज़ाब कैसा (सख्त) था।)

  19. अ-व-लम यरौ इलत-तय्रि फौक़हुम साफ-फातिंव-व यक़बिज़न, मा युम्सिकुहुन्ना इल्लर-रहमान, इन्नहू बि-कुल्लि शैइम-बसीर।
    (क्या उन्होंने अपने ऊपर परिंदों को नहीं देखा जो पर फैलाए हुए होते हैं और (कभी) समेट लेते हैं? उन्हें रहमान के सिवा कोई नहीं थामता, बेशक वो हर चीज़ को देखने वाला है।)

  20. अम्मन हाज़ल-लज़ी हुवा जुन्दुल-लकुम यन्सुरुकुम मिन दूनिर-रहमान, इनिल काफिरूना इल्ला फी गुरूर।
    (भला वो कौन सा लश्कर है जो रहमान के मुकाबले में तुम्हारी मदद कर सके? काफिर तो बस धोखे में पड़े हैं।)

  21. अम्मन हाज़ल-लज़ी यरज़ुक़ुकुम इन अमसका रिज़्क़ह, बल-लज्जू फी अतुव्विंव-व नुफूर।
    (या वो कौन है जो तुम्हें रिज़्क़ दे अगर अल्लाह अपना रिज़्क़ रोक ले? बल्कि वो तो सरकशी और (हक़ से) भागने पर अड़े हुए हैं।)

  22. अ-फ-मय्यमशी मुकिब्बन अला वजहिही अह्दा अम्मन यमशी सविय्यन अला सिरातिम-मुस्तक़ीम।
    (तो क्या वो शख्स जो अपने मुँह के बल औंधा चलता है ज्यादा हिदायत वाला है या वो जो सीधे रास्ते पर सीधा चलता है?)

  23. कुल हुवल-लज़ी अनश-अकुम व ज-अ-ल लकुमुस-सम-अ वल-अबसारा वल-अफ्इदह, क़लीलम-मा तश्कुरून।
    (कह दीजिये: वही है जिसने तुम्हें पैदा किया और तुम्हारे लिए कान और आँखें और दिल बनाए, तुम बहुत कम शुक्र करते हो।)

  24. कुल हुवल-लज़ी ज़-र-अकुम फिल अर्ज़ि व इलैहि तुहशरून।
    (कह दीजिये: वही है जिसने तुम्हें ज़मीन में फैलाया और उसी की तरफ तुम जमा किए जाओगे।)

  25. व यक़ूलूना मता हाज़ल वअ्दु इन कुन्तुम सादिक़ीन।
    (और वो कहते हैं: ये वादा (कयामत) कब पूरा होगा अगर तुम सच्चे हो?)

  26. कुल इन्नमल इल्मु इन्दल्लाहि व इन्नमा अना नज़ीरुम-मुबीन।
    (कह दीजिये: इसका इल्म तो सिर्फ अल्लाह के पास है, और मैं तो बस साफ़-साफ़ डराने वाला हूँ।)

  27. फ-लम्मा र-अव्हु जुल्फतन सी-अत वुजूहुल-लज़ीना कफरू व कीला हाज़ल-लज़ी कुन्तुम बिही तद्दऊन।
    (फिर जब वो उसे करीब देखेंगे तो काफिरों के चेहरे बिगड़ जाएंगे और कहा जाएगा: यही है वो जिसे तुम मांगते थे।)

  28. कुल अ-र-अय्तुम इन अहलक-नियल्लाहु व मम-म-इया औ रहि-मना फ-मय्युजी-रुल काफिरीना मिन अज़ाबिन अलीम।
    (कह दीजिये: भला देखो तो, अगर अल्लाह मुझे और मेरे साथियों को हलाक कर दे या हम पर रहम फरमाए, तो काफिरों को दर्दनाक अज़ाब से कौन बचाएगा?)

  29. कुल हुवर-रहमानु आमन्ना बिही व अलैहि तवक्कलना, फ-स-तअ्लमूना मन हुवा फी ज़लालिन मुबीन।
    (कह दीजिये: वही रहमान है, हम उस पर ईमान लाए और उसी पर हमने भरोसा किया, तो अनकरीब तुम जान लोगे कि कौन खुली गुमराही में है।)

  30. कुल अ-र-अय्तुम इन अस्बहा मा-उकुम गौरन फ-मय्यअ्तीकुम बि-मा-इम-मईन।
    (कह दीजिये: भला देखो तो, अगर तुम्हारा पानी गहरा (ज़मीन में) उतर जाए, तो कौन है जो तुम्हारे लिए साफ़ पानी (का चश्मा) ले आएगा?)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या सूरह मुल्क दिन में पढ़ सकते हैं?
A.

जी हाँ, दिन में भी पढ़ सकते हैं और सवाब मिलेगा। लेकिन हदीस में खास फजीलत रात को सोने से पहले पढ़ने की आई है।

Q. क्या औरतों को हैज़ (Periods) में सूरह मुल्क पढ़नी चाहिए?
A.

हैज़ की हालत में कुरान को हाथ लगाना या जुबानी तिलावत करना मना है। लेकिन अगर यह सूरह ‘दुआ’ या ‘वज़ीफ़े’ की नियत से याद है, तो दिल में पढ़ सकती हैं या सुन सकती हैं। (बेहतर है कि सिर्फ सुनें)।

Q. अगर अरबी नहीं आती तो क्या हिंदी में पढ़ सकते हैं?
A.

कोशिश करें कि अरबी में ही सीखें क्योंकि हिंदी में उच्चारण (Pronunciation) पूरी तरह सही नहीं हो पाता। जब तक अरबी न सीख लें, तब तक हिंदी सहारे के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं, लेकिन सीखना ज़रूरी है।


नतीजा:

सूरह मुल्क एक बहुत ही पावरफुल सूरह है। अपनी रात की रूटीन में इसे शामिल करें। यह सिर्फ 5-7 मिनट लेती है लेकिन इसका फायदा (कब्र के अज़ाब से नजात) हमेशा के लिए है।

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