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Iffat Zia
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Surah Al-A'la in Hindi: सूरह आला की फजीलत और तर्जुमा

Surah Al-A''la in Hindi: जानिए सूरह आला की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। यह सूरह अल्लाह की बड़ाई बयान करती है और कामयाबी का रास्ता बताती है।

Surah Al-A'la in Hindi: सूरह आला की फजीलत और तर्जुमा

Table of Contents

सूरह अल-आला (Surah Al-A’la) कुरान मजीद की 87वीं सूरह है। “अल-आला” का मतलब है “सबसे बुलंद” (The Most High)। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 19 आयतें हैं।

यह सूरह हमारे प्यारे नबी (स.अ.व.) को बहुत महबूब थी। आप अक्सर जुमे और ईद की नमाज़ में और वित्र की नमाज़ में इस सूरह की तिलावत फरमाया करते थे। इस सूरह में अल्लाह की तस्बीह (पाकीज़गी) बयान की गई है और बताया गया है कि असली कामयाबी उसी को मिलती है जो अपने दिल को पाक साफ रखता है।

इस आर्टिकल में हम Surah Al-A’la in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत आसान लफ्ज़ों में जानेंगे।

ये भी पढ़े: Surah Al-Ghashiyah in Hindi | सूरह गाशियह का तर्जुमा

सूरह आला की फजीलत (Benefits of Surah Al-A’la)

  1. नबी (स.अ.व.) की पसंदीदा: हदीस में आता है कि रसूलुल्लाह (स.अ.व.) इस सूरह से बहुत मोहब्बत करते थे। यह अल्लाह की बड़ाई बयान करने वाली बेहतरीन सूरह है।

  2. कुरान याद करने में आसानी: इस सूरह में अल्लाह ने अपने नबी से वादा किया कि “हम आपको पढ़ा देंगे फिर आप नहीं भूलेंगे”। यह अल्लाह की तरफ से मदद का वादा है।

  3. कामयाबी का नुस्खा: इसमें साफ बताया गया है कि कामयाबी दौलत जमा करने में नहीं, बल्कि “तज़किया” (Tazkiyah) यानी अपने नफ़्स और दिल को गुनाहों से पाक करने में है।

  4. दुनिया और आखिरत: यह सूरह हमें याद दिलाती है कि हम दुनिया की चमक-धमक में खो गए हैं, जबकि आखिरत (Hereafter) इससे कहीं बेहतर और हमेशा रहने वाली है।


Surah Al-A’la in Hindi (Transliteration & Translation)

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

  1. सब्बिहिस्मा रब्बिकल-आ्ला।
    (अपने रब के नाम की पाकीज़गी बयान करो जो सबसे बुलंद (ऊंचा) है।)

  2. अल्लज़ी ख़लक़ फ़-सव्वा।
    (जिसने पैदा किया और (उसकी बनावट) ठीक-ठाक बनाई।)

  3. वल्लज़ी क़द्दरा फ़-हदा।
    (और जिसने (हर चीज़ का) एक अंदाज़ा मुकर्रर किया, फिर रास्ता दिखाया।)

  4. वल्लज़ी अख़्रजल-मर-आ।
    (और जिसने चारा (हरियाली) उगाया।)

  5. फ़-ज-अ-लहू गुसा-अन अहवा।
    (फिर उसे काला कूड़ा-करकट कर दिया (सूखने के बाद)।)

  6. सनुक़्रि-उका फ़ला तन्सा।
    (हम आपको (कुरान) पढ़ा देंगे, फिर आप नहीं भूलेंगे।)

  7. इल्ला मा शा-अल्लाह; इन्नहू यअ्लमुल-जह्रा व मा यख़्फ़ा।
    (सिवाय उसके जो अल्लाह चाहे; बेशक वह ज़ाहिर और छुपी हुई सब बातों को जानता है।)

  8. व नुयस्सिरुका लिल-युस्रा।
    (और हम आपके लिए आसान तरीका (शरीयत) मुहैया कर देंगे।)

  9. फ़-ज़क्किर इन नफ़-अतिज़-ज़िक्रा।
    (तो आप नसीहत करते रहिए, अगर नसीहत फायदा दे।)

  10. स-यज़्ज़क्करु मंय-यख़्शा।
    (जल्द ही वह शख्स नसीहत कबूल करेगा जो (अल्लाह से) डरता है।)

  11. व यत-जन्नबुहल-अश्क़ा।
    (और उससे वह शख्स दूर भागेगा जो बड़ा बदबख़्त है।)

  12. अल्लज़ी यस्लन-नारल-कुब्रा।
    (जो बहुत बड़ी आग में दाखिल होगा।)

  13. सुम्मा ला यमूतु फीहा व ला यह्या।
    (फिर न वह उसमें मरेगा और न जिएगा।)

  14. क़द अफ़्लहा मन तज़क्का।
    (बेशक वह कामयाब हो गया जो (गुनाहों से) पाक हो गया।)

  15. व ज़करस्मा रब्बिही फ़-सल्ला।
    (और अपने रब का नाम याद किया, फिर नमाज़ पढ़ी।)

  16. बल तुअ्सिरूनल-हयातद-दुन्या।
    (बल्कि तुम लोग दुनिया की ज़िंदगी को तरजीह (पहल) देते हो।)

  17. वल-आख़िरतु ख़ैरुंव-व अबक़ा।
    (हालांकि आखिरत (दुनिया से) कहीं बेहतर और हमेशा रहने वाली है।)

  18. इन्ना हाज़ा लफ़िस-सुहुफ़िल-ऊला।
    (बेशक यह बात पहले के सहीफों (किताबों) में भी मौजूद है।)

  19. सुहुफ़ि इब्राहीमा व मूसा।
    (इब्राहिम और मूसा (अलैहिमुस्सलाम) के सहीफों में।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह आला का मतलब क्या है?
A.

“अल-आला” अल्लाह का एक सिफाती नाम है जिसका मतलब है “सबसे बुलंद” या “सबसे ऊंचा”। इस सूरह की शुरुआत में अल्लाह की पाकीज़गी बयान करने का हुक्म है।

Q. इस सूरह को कब पढ़ना चाहिए?
A.

नबी (स.अ.व.) इस सूरह को जुमे और ईद की नमाज़ों में और रात को वित्र की नमाज़ में पढ़ा करते थे। इसे याद करना और नमाज़ में पढ़ना बहुत सवाब का काम है।

Q. 'तज़किया' (Tazkiyah) का क्या मतलब है?
A.

तज़किया का मतलब है अपने दिल और नफ़्स को बुराइयों (जैसे झूठ, जलन, घमंड) से पाक साफ करना। इस सूरह में बताया गया है कि असली कामयाबी उसी को मिलती है जो अपना तज़किया करता है।

Q. इस सूरह का असल पैगाम क्या है?
A.

इस सूरह का असल पैगाम यह है कि दुनिया की ज़िंदगी बहुत छोटी और खत्म होने वाली है, जबकि आखिरत की ज़िंदगी हमेशा रहेगी और वह बहुत बेहतर है। इसलिए हमें दुनिया के पीछे भागने के बजाय आखिरत की तैयारी करनी चाहिए।


नतीजा (Conclusion)

सूरह आला हमें ज़िंदगी का सही मकसद समझाती है। हम अक्सर दुनिया की दौलत और शोहरत के पीछे भागते हैं, लेकिन अल्लाह फरमाता है कि यह सब खत्म हो जाएगा।

असली समझदार वह है जो अपने रब को याद रखे, नमाज़ कायम करे और अपने दिल को गुनाहों से साफ़ रखे। यही वह पैगाम है जो हज़रत इब्राहिम और हज़रत मूसा (अ.स.) की किताबों में भी आया था।

अल्लाह हमें दुनिया की मोहब्बत से बचाए और आखिरत की फिक्र करने वाला बनाए। आमीन।

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