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Iffat Zia
· Quran · 3 min read

Surah Adiyat in Hindi: सूरह आदियात की फजीलत और तर्जुमा

Surah Adiyat in Hindi: जानिए सूरह आदियात की फजीलत और हिंदी तर्जुमा। यह सूरह इंसान की ना-शुक्री और दुनिया की मोहब्बत पर एक सख्त चेतावनी है।

Surah Adiyat in Hindi: सूरह आदियात की फजीलत और तर्जुमा

Table of Contents

सूरह आदियात (Surah Al-Adiyat) कुरान मजीद की 100वीं सूरह है। “आदियात” का मतलब है “तेज़ दौड़ने वाले घोड़े” (The Chargers)। यह मक्का में नाज़िल हुई (मक्की सूरह) और इसमें 11 आयतें हैं।

इस सूरह में अल्लाह तआला ने उन घोड़ों की कसम खाई है जो जंग के मैदान में पूरी ताकत से दौड़ते हैं, और इसके ज़रिए इंसान को उसकी ना-शुक्री (Ingratitude) और माल की लालच पर चेतावनी दी है।

इस आर्टिकल में हम Surah Adiyat in Hindi, इसका तर्जुमा और फजीलत जानेंगे।

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सूरह आदियात की फजीलत (Benefits of Surah Al-Adiyat)

  1. ना-शुक्री का इलाज: यह सूरह हमें याद दिलाती है कि अल्लाह ने हमें कितनी नेमतें दी हैं, फिर भी इंसान ना-शुक्रा है। इसे पढ़कर इंसान को अपनी कोताहियों का एहसास होता है।
  2. माल की मोहब्बत: यह सूरह बताती है कि माल की मोहब्बत इंसान को अंधा कर देती है, लेकिन असल कामयाबी आखिरत की है।
  3. कब्रों का हाल: यह सूरह हमें याद दिलाती है कि एक दिन कब्रों से सब कुछ निकाल लिया जाएगा और दिलों के भेद खोल दिए जाएंगे।

Surah Adiyat in Hindi (Transliteration & Translation)

बिस्मिल्लाहिर रहमानिर रहीम

  1. वल-आदियाति ज़ब्हा।
    (कसम है उन घोड़ों की जो हांपते हुए दौड़ते हैं।)

  2. फल-मूरियाति क़द-हा।
    (फिर (अपनी टापों से पत्थरों पर) चिंगारियां निकालते हैं।)

  3. फल-मुगीराति सुब्हा।
    (फिर सुबह के वक़्त (दुश्मन पर) हमला करते हैं।)

  4. फ-असरना बिही नक़-आ।
    (फिर उस वक़्त गुबार (धूल) उड़ाते हैं।)

  5. फ-व-सत्ना बिही जम-आ।
    (फिर उस वक़्त (दुश्मन की) फौज (जमात) में घुस जाते हैं।)

  6. इन्नल-इंसाना लि-रब्बिही ल-कनूद।
    (बेशक इंसान अपने रब का बड़ा ना-शुक्रा है।)

  7. व इन्नहू अला ज़ालिका ल-शहीद।
    (और वो खुद भी इस पर गवाह है (उसका अमल बताता है)।)

  8. व इन्नहू लि-हुब्बिल खैरि ल-शदीद।
    (और बेशक वो माल की मोहब्बत में बहुत सख्त है।)

  9. अ-फला यअ्लमु इज़ा बुअ्सिरा मा फिल-क़ुबूर।
    (तो क्या वो नहीं जानता जब वो (मुर्दे) उठाए जाएंगे जो कब्रों में हैं?)

  10. व हुस्सिला मा फिस-सुदूर।
    (और जो सीनों (दिलों) में है वो जाहिर कर दिया जाएगा (जांच लिया जाएगा)।)

  11. इन्ना रब्बहुम बिहिम यौम-इज़िल ल-ख़बीर।
    (बेशक उनका रब उस दिन उनकी पूरी खबर रखने वाला है।)


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. सूरह आदियात का मतलब क्या है?
A.

“आदियात” का मतलब है “तेज़ दौड़ने वाले घोड़े”। इस सूरह की शुरुआत में अल्लाह ने उन घोड़ों की कसम खाई है जो जिहाद में इस्तेमाल होते हैं।

Q. इस सूरह का मुख्य पैगाम क्या है?
A.

इस सूरह का मुख्य पैगाम यह है कि इंसान अपने रब की नेमतों का शुक्र अदा नहीं करता और दुनिया के माल के पीछे भागता है, जबकि उसे आखिरत और हिसाब-किताब की फिक्र करनी चाहिए।

Q. कनूद (Kanood) का क्या मतलब है?
A.

“कनूद” उस शख्स को कहते हैं जो मुसीबतों को याद रखता है और नेमतों को भूल जाता है, यानी ना-शुक्रा।


नतीजा (Conclusion)

सूरह आदियात हमें झिंझोड़ती है कि हम दुनिया की दौड़ में इतने मगन न हो जाएं कि अपने रब को भूल जाएं। जिस तरह घोड़ा अपने मालिक के लिए जान की बाज़ी लगा देता है, क्या हम अपने रब के लिए इतना भी नहीं कर सकते कि उसका शुक्र अदा करें?

अल्लाह हमें शुक्रगुज़ार बंदा बनाए और दुनिया की लालच से बचाए। आमीन।

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