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Iffat Zia
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Shirk Kya Hai: शिर्क की हकीकत, किस्में और इससे बचने का तरीका

Shirk Kya Hai: शिर्क (Shirk) इस्लाम में सबसे बड़ा गुनाह है। जानिए शिर्क किसे कहते हैं, इसकी कितनी किस्में हैं और क्या शिर्क करने वाले की बख्शीश हो सकती है?

Shirk Kya Hai: शिर्क की हकीकत, किस्में और इससे बचने का तरीका

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शिर्क (Shirk) इस्लाम में सबसे बड़ा और संगीन गुनाह है। इसे “गुनाह-ए-कबीरा” में सबसे ऊपर रखा गया है। अल्लाह तआला कुरान में फरमाता है कि वह शिर्क के अलावा हर गुनाह जिसे चाहे माफ़ कर दे, लेकिन शिर्क को माफ़ नहीं करेगा (अगर तौबा के बगैर मौत आ गई)।

इस आर्टिकल में हम आसान लफ्ज़ों में जानेंगे कि Shirk Kise Kahte Hai, इसकी कितनी किस्में हैं और हम इससे कैसे बच सकते हैं।

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शिर्क क्या है? (What is Shirk?)

शिर्क का लफ्ज़ी मतलब है “साझा करना” या “हिस्सेदार बनाना” (Partnership)। शरीयत में शिर्क का मतलब है: अल्लाह की ज़ात (Being), सिफात (Attributes) या इबादत (Worship) में किसी और को शरीक (हिस्सेदार) ठहराना।

यानी जो मकाम और ताकत सिर्फ अल्लाह की है, वो किसी नबी, वली, फरिश्ते या मूर्ति को देना शिर्क है।

कुरान में अल्लाह फरमाता है: “إِنَّ الشِّرْكَ لَظُلْمٌ عَظِيمٌ” (बेशक शिर्क बहुत बड़ा जुल्म है।) (सूरह लुकमान: 13)

शिर्क की 3 बड़ी किस्में (Types of Shirk)

शिर्क को समझने के लिए इसे 3 हिस्सों में बांटा गया है:

1. शिर्क फी ज़ात (Shirk in Being)

अल्लाह की ज़ात में किसी को शरीक करना।

  • जैसे यह मानना कि अल्लाह का कोई बेटा, बेटी या बीवी है (जैसे ईसाई ईसा अ.स. को अल्लाह का बेटा मानते हैं)।
  • या यह मानना कि दुनिया को चलाने में अल्लाह के साथ कोई और भी मददगार है। अकीदा: अल्लाह “अहद” (एक) है और “समद” (बे-नियाज़) है। न उसने किसी को जना, न वो जना गया।

2. शिर्क फी सिफात (Shirk in Attributes)

अल्लाह की सिफात (खूबियों) में किसी और को शरीक करना।

  • इल्म-ए-गैब: यह मानना कि नबी या वली को अल्लाह की तरह हर जगह का इल्म है और वो “आलिम-उल-गैब” हैं। गैब का इल्म सिर्फ अल्लाह को है।
  • सुनना और देखना: यह मानना कि कोई बुजुर्ग दूर से हमारी पुकार सुन रहे हैं और देख रहे हैं (हाज़िर-ओ-नाज़िर हैं)। यह सिफत सिर्फ अल्लाह की है।
  • ताकत: यह मानना कि नफा-नुकसान, औलाद देना, या बारिश बरसाना किसी बाबा या पीर के हाथ में है।

3. शिर्क फी इबादत (Shirk in Worship)

इबादत के कामों में गैरुल्लाह (अल्लाह के सिवा किसी और) को शरीक करना।

  • किसी मज़ार या मूर्ति को सजदा करना।
  • अल्लाह के सिवा किसी और के नाम की मन्नत (Nazar) मानना या चढ़ावा चढ़ाना।
  • मुसीबत में अल्लाह के सिवा किसी और को पुकारना (दुआ करना)।

शिर्क-ए-असगर (Chota Shirk)

एक शिर्क ऐसा है जिसे “शिर्क-ए-असगर” (छोटा शिर्क) कहा जाता है, लेकिन यह भी बहुत खतरनाक है। रियाकारी (दिखावा): लोगों को दिखाने के लिए नमाज़ पढ़ना या सदका करना। हदीस में इसे “छुपा हुआ शिर्क” कहा गया है।

कुफ्र और शिर्क में फर्क

  • कुफ्र (Kufr): इस्लाम की किसी ज़रूरी बात का इनकार करना (जैसे नमाज़, रोज़े या अल्लाह को न मानना)।
  • शिर्क (Shirk): अल्लाह को मानना, लेकिन उसके साथ दूसरों को भी भगवान या माबूद मानना। हर मुशरिक (शिर्क करने वाला) काफिर होता है, लेकिन हर काफिर मुशरिक नहीं होता।

क्या शिर्क माफ़ हो सकता है?

अल्लाह कुरान में फरमाता है: “إِنَّ اللَّهَ لَا يَغْفِرُ أَن يُشْرَكَ بِهِ وَيَغْفِرُ مَا دُونَ ذَٰلِكَ لِمَن يَشَاءُ” (बेशक अल्लाह इस बात को माफ़ नहीं करता कि उसके साथ शिर्क किया जाए, और इसके अलावा जिसे चाहे माफ़ कर देता है।) (सूरह निसा: 48)

इसका मतलब: अगर कोई शिर्क करते हुए मर गया, तो उसकी बख्शीश नहीं होगी। लेकिन अगर उसने ज़िंदगी में सच्ची तौबा कर ली और शिर्क छोड़ दिया, तो अल्लाह उसे माफ़ कर देगा और उसके पिछले गुनाह भी नेकियों में बदल देगा।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या किसी से मदद मांगना शिर्क है?
A.

ज़िंदा इंसान से ऐसी मदद मांगना जो उसके बस में हो (जैसे “मुझे पानी दे दो” या “मेरा काम कर दो”), यह शिर्क नहीं है। लेकिन किसी मरे हुए इंसान से या ऐसी चीज़ मांगना जो सिर्फ अल्लाह दे सकता है (जैसे औलाद, शिफा), यह शिर्क है।

Q. क्या वसीला लगाना शिर्क है?
A.

अल्लाह तक पहुँचने के लिए नेक आमाल (Good Deeds) का वसीला लगाना जायज़ है। लेकिन यह अकीदा रखना कि “अल्लाह इनके बगैर नहीं सुनता” या “ये अल्लाह से ज़बरदस्ती मनवा लेंगे”, यह गलत है।

Q. अगर अनजाने में शिर्क हो जाए तो?
A.

अल्लाह दिलों का हाल जानता है। अगर अनजाने में हुआ, तो फौरन तौबा करें और कसरत से “ला इलाहा इल्लल्लाह” पढ़ें और ईमान ताज़ा करें।


नतीजा (Conclusion)

शिर्क एक ऐसी दीमक है जो ईमान को अंदर से खोखला कर देती है। हमें चाहिए कि हम हर तरह के शिर्क (चाहे वो ज़ाहिर हो या छुपा हुआ) से बचें। सिर्फ अल्लाह से मांगें, उसी के आगे झुकें और उसी पर भरोसा रखें।

अल्लाह हम सबको शिर्क से महफूज़ रखे और तौहीद पर खात्मा नसीब फरमाए। आमीन।

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