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Iffat Zia
· Ramzan · 4 min read

Ramzan Me Roza Na Rakhne Ki Uzr: किन 9 लोगों को रोज़े की माफ़ी है?

Roza Na Rakhne Ki Mafi: इस्लाम में सख्ती नहीं है। जानिए वो 9 लोग कौन हैं जिन्हें रमज़ान में रोज़ा न रखने या छोड़ने की इजाज़त (रुख़सत) दी गई है।

Ramzan Me Roza Na Rakhne Ki Uzr: किन 9 लोगों को रोज़े की माफ़ी है?

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रमज़ान (Ramzan) के रोज़े हर बालिग और अक्लमंद मुसलमान पर फ़र्ज़ हैं। लेकिन इस्लाम एक फितरी दीन है और इसमें सख्ती नहीं है। अल्लाह तआला कुरान में फरमाता है: “अल्लाह तुम्हारे साथ आसानी चाहता है, तंगी नहीं चाहता।” (सूरह बकरा: 185)

शरीयत ने कुछ खास मजबूरियों (उज़्र) की वजह से 9 तरह के लोगों को रोज़ा न रखने या छोड़ने की इजाज़त दी है। आइए जानते हैं वो कौन लोग हैं और उनके लिए क्या हुक्म है।

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1. बीमार (The Sick)

अगर कोई शख्स इतना बीमार है कि रोज़ा रखने से उसकी बीमारी बढ़ जाएगी, या ठीक होने में देर लगेगी, या जान का खतरा हो, तो वह रोज़ा छोड़ सकता है। हुक्म: जब ठीक हो जाए, तो छूटे हुए रोज़ों की कज़ा (Qaza) रखे।

2. मुसाफिर (Traveler)

अगर कोई शख्स ‘शरई सफर’ (लगभग 78 किलोमीटर या उससे ज़्यादा) पर हो, तो उसे रोज़ा न रखने की छूट है। कुरान में है: “और जो बीमार हो या सफर में हो, तो वो दूसरे दिनों में गिनती पूरी करे।” (सूरह बकरा: 185) हुक्म: सफर खत्म होने के बाद कज़ा रखे। (अगर सफर में आसानी हो तो रोज़ा रखना बेहतर है)।

3. बुज़ुर्ग और कमज़ोर (The Elderly)

ऐसे बूढ़े लोग (Sheikh-e-Fani) जो इतने कमज़ोर हो चुके हैं कि अब रोज़ा रखने की ताकत नहीं रही और न ही भविष्य में ताकत आने की उम्मीद है। दलील: हज़रत इब्ने अब्बास (रज़ि.) फरमाते हैं कि “यह हुक्म उस बूढ़े मर्द और औरत के लिए है जो रोज़ा रखने की ताकत नहीं रखते, वो हर दिन के बदले एक मिस्कीन को खाना खिलाएं।” (बुखारी) हुक्म: इन्हें रोज़ा न रखने की माफ़ी है। ये हर रोज़े के बदले एक गरीब को दो वक़्त का खाना खिलाएं या फिद्या (Fidyah) दें।

4. हामेला औरत (Pregnant Woman)

अगर गर्भवती महिला को डर हो कि रोज़ा रखने से उसकी या उसके बच्चे की जान को खतरा है या सेहत को सख्त नुकसान पहुँचेगा। दलील: नबी करीम (ﷺ) ने फरमाया: “अल्लाह ने मुसाफिर से आधा नमाज़ और रोज़ा माफ़ कर दिया है, और हामेला (गर्भवती) और दूध पिलाने वाली औरत से भी रोज़ा (उस वक़्त के लिए) माफ़ कर दिया है।” (तिरमिज़ी, नसाई) हुक्म: वह रोज़ा छोड़ सकती है, लेकिन बाद में कज़ा रखनी होगी।

5. दूध पिलाने वाली माँ (Breastfeeding Mother)

अगर दूध पिलाने वाली औरत को डर हो कि रोज़ा रखने से दूध सूख जाएगा और बच्चे को तकलीफ होगी। हुक्म: वह भी रोज़ा छोड़ सकती है और बाद में कज़ा रखेगी।

6. हैज़ और निफ़ास वाली औरतें (Menstruation & Postpartum)

औरतों को माहवारी (Periods) या बच्चे की पैदाइश के बाद वाले खून (Nifas) की हालत में रोज़ा रखना हराम है। हुक्म: इन दिनों के रोज़े छोड़ दें और पाक होने के बाद उनकी कज़ा रखें। हज़रत आयशा (रज़ि.) फरमाती हैं: “हमें (हैज़ के बाद) रोज़े की कज़ा का हुक्म दिया जाता था, नमाज़ की कज़ा का नहीं।” (मुस्लिम)

7. पागल या मजनू (Insane)

जिस शख्स का दिमागी तवाज़ुन ठीक न हो (पागलपन हो), उस पर रोज़ा फ़र्ज़ ही नहीं है। दलील: हदीस में है: “तीन लोगों से कलम उठा लिया गया है (यानी उन पर गुनाह नहीं): सोने वाला जब तक जाग न जाए, बच्चा जब तक बालिग न हो जाए, और पागल जब तक ठीक न हो जाए।” (अबू दाऊद) हुक्म: अगर पागलपन हमेशा के लिए है, तो कोई कज़ा या फिद्या नहीं। अगर कभी-कभी दौरा पड़ता है, तो ठीक होने पर कज़ा रखे।

8. नाबालिग बच्चे (Minors)

नाबालिग बच्चों पर रोज़ा फ़र्ज़ नहीं है। हुक्म: जब तक बालिग न हो जाएं, उन पर कोई गुनाह नहीं। लेकिन आदत डालने के लिए (अगर बच्चा बर्दाश्त कर सके) रखवाना चाहिए।

9. जान का खतरा (Under Threat/Coercion)

अगर किसी को जान से मारने की धमकी दी जाए कि “रोज़ा तोड़ दो वरना मार डालेंगे”, तो वह अपनी जान बचाने के लिए रोज़ा तोड़ सकता है। हुक्म: बाद में उस रोज़े की कज़ा रखे।


अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

Q. क्या मामूली बीमारी में रोज़ा छोड़ सकते हैं?
A.

नहीं, मामूली सर्दी, खांसी या सर दर्द में रोज़ा छोड़ना जायज़ नहीं है। बीमारी ऐसी होनी चाहिए जिससे सख्त तकलीफ हो या बढ़ने का डर हो।

Q. फिद्या (Fidyah) कितना देना होता है?
A.

एक रोज़े का फिद्या उतना ही है जितना सदका-ए-फित्र (पौने दो किलो गेहूं या उसकी कीमत)। यह किसी गरीब को देना होता है।

Q. अगर कोई बुढ़ापे की वजह से रोज़ा न रख सके और फिद्या देने की भी ताकत न हो?
A.

तो वह अल्लाह से माफ़ी मांगे और अस्तगफिरुल्लाह पढ़े। अल्लाह माफ़ करने वाला है।


नतीजा (Conclusion)

अल्लाह ने अपने बंदों पर उनकी ताकत से ज़्यादा बोझ नहीं डाला। अगर आप इन 9 लोगों में शामिल हैं, तो आप इस छूट (Rukhsat) का फायदा उठा सकते हैं। लेकिन बिला वजह रोज़ा छोड़ना बहुत बड़ा गुनाह है।

अल्लाह हमें दीन की सही समझ अता फरमाए।

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