Ramzan Me Kya Kare Aur Kya Na Kare: रमज़ान के आदाब
Ramzan Me Kya Kare: रमज़ान का महीना नेकियों का मौसम है। जानिए इस महीने में कौन से काम ज़रूर करने चाहिए और किन कामों से बचना चाहिए।

Table of Contents
रमज़ान (Ramzan) बरकतों और रहमतों का महीना है। इस महीने में एक नेकी का सवाब 70 गुना बढ़ा दिया जाता है। इसलिए ज़रूरी है कि हम अपना वक़्त सही कामों में लगाएं।
इस आर्टिकल में हम जानेंगे कि Ramzan Me Kya Kare (क्या करना चाहिए) और किन गलतियों से बचना चाहिए।
ये भी पढ़े: Roza Kin Cheezon Se Toot Jata Hai | रोज़े के मसाइल
रमज़ान में ये काम ज़रूर करें (Do’s of Ramzan)
- पाबंदी से नमाज़: 5 वक़्त की नमाज़ जमात के साथ पढ़ने की कोशिश करें। नमाज़ दीन का सुतून है।
- कुरान की तिलावत: रमज़ान कुरान का महीना है। कोशिश करें कि कम से कम एक बार कुरान मुकम्मल (खत्म) करें।
- तरावीह: ईशा के बाद तरावीह की नमाज़ का एहतमाम करें। यह सुन्नत-ए-मुअक्कदा है।
- सदका और खैरात: गरीबों और ज़रूरतमंदों की मदद करें। अल्लाह के रसूल (ﷺ) रमज़ान में तेज़ हवा से भी ज़्यादा सखावत (दान) करते थे।
- सेहरी और इफ्तार: सेहरी खाना सुन्नत है और इसमें बरकत है। इफ्तार में जल्दी करना (वक़्त होते ही) सुन्नत है।
- दुआ और इस्तिगफार: रोज़ेदार की दुआ कुबूल होती है। कसरत से तौबा और दुआ करें।
- एतिकाफ: अगर मुमकिन हो तो आखिरी अशरे (10 दिन) का एतिकाफ करें।
- अच्छे अख़लाक़ (Good Character): रोज़ा सब्र और अच्छे अख़लाक़ की ट्रेनिंग है। लोगों से नरमी से पेश आएं।
- माफ़ करना सीखें (Learn to Forgive): यह रहमत का महीना है। अगर किसी से कोई रंजिश है, तो अल्लाह की रज़ा के लिए उसे माफ़ कर दें।
रमज़ान में इन कामों से बचें (Don’ts of Ramzan)
- झूठ और गीबत: रोज़े की हालत में झूठ बोलना, चुगली करना या किसी की बुराई करना रोज़े के सवाब को खत्म कर देता है।
- गुस्सा और लड़ाई-झगड़ा: रोज़ा रखकर चिड़चिड़ा होना या गुस्सा करना रोज़े की रूह के खिलाफ है। अगर कोई आपसे उलझे, तो कह दें “मैं रोज़े से हूँ”।
- वक़्त की बर्बादी: टीवी, फिल्में, या मोबाइल पर फालतू वक़्त बर्बाद न करें। यह इबादत का कीमती वक़्त है।
- दिन भर सोना: अक्सर लोग रोज़ा रखकर दिन भर सोते रहते हैं ताकि “वक़्त कट जाए”। याद रखें, सोने से वक़्त तो कट जाएगा लेकिन आप रमज़ान की अनमोल घड़ियों और सवाब से महरूम रह जाएंगे।
- रात भर जागना: कुछ लोग रात भर फालतू जागते हैं, बाज़ारों में घूमते हैं और फिर सेहरी खाकर सो जाते हैं जिससे फज्र या ज़ोहर की नमाज़ कज़ा हो जाती है।
- कारोबार में देरी: देर तक सोने की वजह से अपना कारोबार या दुकान देर से खोलना। हदीस में सुबह के वक़्त में बरकत बताई गई है, इसे नींद में न गंवाएं।
- इफ्तार में इसराफ: इफ्तार के वक़्त बहुत ज़्यादा खाने-पीने की चीज़ें जमा करना और फिर बर्बाद करना (Israf) गुनाह है।
- सिर्फ खाने-पीने पर फोकस: रमज़ान का मकसद इबादत है, न कि तरह-तरह के पकवानों का मेला। किचन में ज़रूरत से ज़्यादा वक़्त बिताने से बचें, खासकर ख्वातीन (महिलाएं), ताकि इबादत के लिए वक़्त मिल सके।
- सेहरी छोड़ना: नींद के आलस में सेहरी छोड़ना सही नहीं है। एक घूंट पानी पीकर ही सही, सेहरी ज़रूर करें।
ये भी जानें: वो कौन से काम हैं जिनसे रोज़े का सवाब कम हो जाता है?
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
Q. क्या रमज़ान में सिर्फ भूखा रहना काफी है?
नहीं, हदीस में है कि जो शख्स झूठ बोलना और बुरे काम नहीं छोड़ता, अल्लाह को उसके भूखे-प्यासे रहने की कोई ज़रूरत नहीं। रोज़ा पूरे जिस्म (आँख, कान, जुबान) का होता है।
Q. क्या बिना तरावीह के रोज़ा हो जाता है?
जी हाँ, रोज़ा और तरावीह अलग-अलग इबादतें हैं। तरावीह छोड़ने से रोज़ा नहीं टूटता, लेकिन आप एक बहुत बड़ी सुन्नत और सवाब से महरूम रह जाएंगे।
Q. कुरान खत्म करने का आसान तरीका क्या है?
अगर आप हर नमाज़ (5 वक़्त) के बाद 4 पेज कुरान पढ़ें, तो रोज़ाना 20 पेज (1 पारा) आसानी से पूरा हो जाएगा और महीने में कुरान खत्म हो जाएगा।
नतीजा (Conclusion)
रमज़ान साल में एक बार आता है। इसे गफलत में न गुज़ारें। अपने रब को राज़ी करने की पूरी कोशिश करें, क्योंकि पता नहीं अगला रमज़ान नसीब हो या न हो।
अल्लाह हमें रमज़ान की कद्र करने की तौफीक दे। आमीन।





